Paiyur 2
TNAU की तमिलनाडु के लगभग पूरे भाग के लिए वर्तमान मानक बारानी कुल्थी किस्म, पुरानी CO 1 किस्म के गामा-किरण उत्परिवर्तन से विकसित।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 100–105 दिन
- अपेक्षित उपज
- लगभग 870 किग्रा/हेक्टेयर (बारानी)
- उपयुक्त मिट्टी
- ख़राब, सीमांत, अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी
- जारी
- 1998 में जारी · तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय शोध स्टेशन, पैयूर · 8 जून 1999 को SO.425(E) के तहत अधिसूचित
इस किस्म के बारे में
पैयूर 2, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की पैयूर क्षेत्रीय शोध स्टेशन से 1998 की कुल्थी रिलीज़ है, 8 जून 1999 को SO.425(E) के तहत अधिसूचित, और विश्वविद्यालय की पुरानी CO 1 किस्म के गामा-विकिरण उत्परिवर्तन-प्रजनन से विकसित — रिलीज़-विवरण व मूल-वंश दोनों TNAU की अपनी फ़सल-उत्पादन गाइड व आधिकारिक संचयी किस्म-रजिस्टर से पुष्ट हैं। यह एक सघन पौधा है, 40-45 सेमी ऊँचा 2-3 शाखाओं सहित, पीला-भूरा बीज, लगभग 3.5 ग्राम का 100-बीज वज़न, व बुवाई के लगभग 45-50 दिन बाद 50% फूल। TNAU इसे नीलगिरि व कन्याकुमारी ज़िलों को छोड़कर लगभग पूरे तमिलनाडु में बारानी, नवंबर-बुवाई खेती को अनुशंसित करता, जहाँ इसने लगभग 870 किग्रा/हेक्टेयर बारानी उपज दर्ज की है — जो इसे राज्य की वर्तमान मानक कुल्थी किस्म व पुरानी CO 1 व पैयूर 1 किस्मों की सीधी उत्तराधिकारी बनाता है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयनवंबर (बारानी, तमिलनाडु में लौटते उत्तर-पूर्वी मानसून पर)
उपज व अवधि
पकने की अवधि
100–105 दिन
अपेक्षित उपज
लगभग 870 किग्रा/हेक्टेयर (बारानी)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- अलग दर्ज नहीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- तमिलनाडु के लगभग पूरे भाग (नीलगिरि व कन्याकुमारी छोड़कर) में बारानी खेती के लिए TNAU की वर्तमान अनुशंसित कुल्थी किस्म।
- एक सघन, 2-3-शाखा वाला पौध-स्वरूप व दर्ज 45-50 दिन पर 50% फूल इसे बारानी दलहन के लिए एक अनुमानित, ठीक-ठाक छोटा चक्र देते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- पैयूर 2 के लिए विशिष्ट रोग-प्रतिरोध रेटिंग उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली — मानक खेत-स्वच्छता व फ़सल की सामान्य पीला चितेरी विषाणु व फली छेदक सावधानियाँ लागू होतीं।
- दर्ज 870 किग्रा/हेक्टेयर उपज-आँकड़ा बारानी परीक्षण/सिफ़ारिश स्थितियों से है; किसी भी बारानी दलहन की तरह असली खेत-उपज बारिश व प्रबंधन अनुसार अलग-अलग होती है।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- तमिलनाडु
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पैयूर 2 पुरानी CO 1 किस्म से किस तरह अलग है?
पैयूर 2 को CO 1 के बीज को गामा-विकिरण के संपर्क में लाकर व उससे एक बेहतर उत्परिवर्ती किस्म चुनकर विकसित किया गया — कई अन्य भारतीय दलहनों में इस्तेमाल हुआ वही किस्म-सुधार तरीक़ा। तब से यह TNAU की मानक सिफ़ारिश बन चुकी है, तमिलनाडु की वर्तमान खेती-सलाह में मोटे तौर पर CO 1 व पैयूर 1 दोनों की जगह लेते हुए।
स्रोत: TNAU — Crop Production Guide, Horsegram, TNAU — Crop Varieties Released from TNAU (1921–2024). संपादकीय नीति.
