राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना
हिमाचल प्राकृतिक रूप से उगाई फसलें अलग MSP पर ख़रीदता है — गेहूँ ₹80 प्रति किलो और मक्का ₹50 प्रति किलो (2026 दरें), आम बाज़ार भाव से कहीं ऊपर।
संचालक: कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार
- प्राकृतिक गेहूँ
- ₹80 / किलो (2026)
- प्राकृतिक मक्का
- ₹50 / किलो (2026)
- हल्दी · अदरक
- ₹150 · ₹30 / किलो
- अब तक भुगतान
- 7,382 किसानों को ₹6.40 करोड़
परिचय
ज़्यादातर प्राकृतिक खेती कार्यक्रम किसान से रसायन छोड़ने को कहते हैं और फिर उसे ऐसा ख़रीदार ढूँढने के लिए छोड़ देते हैं जो उसका ज़्यादा दाम दे। हिमाचल ने यह कड़ी बंद कर दी: राज्य खुद प्राकृतिक उपज एक अलग MSP पर ख़रीदता है, इसलिए प्रीमियम बाज़ार की उम्मीद नहीं, सरकारी ख़रीद की गारंटी है।
2026 की दरें प्राकृतिक फसलों के लिए देश में सबसे ऊँची हैं — गेहूँ ₹80 प्रति किलो (₹60 से बढ़ाकर), मक्का ₹50 (₹40 से), पांगी घाटी का जौ ₹80 (₹60 से), हल्दी ₹150 (₹90 से), और अदरक पहली बार ₹30 प्रति किलो पर शामिल। आम गेहूँ के MSP के मुक़ाबले, जो प्रति किलो कुछ दसियों रुपये होता है, यह अलग ही स्तर का भाव है। खेती वाले हिस्से में रासायनिक इनपुट की जगह देसी गोबर, गोमूत्र और स्थानीय वनस्पति से बने घोल को बढ़ावा है। अब तक ख़रीद: 7,382 किसानों से 11,329 क्विंटल, और ₹6.40 करोड़ सीधे उनके खातों में।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- प्राकृतिक गेहूँ ₹80 प्रति किलो और मक्का ₹50 प्रति किलो पर राज्य की गारंटीशुदा ख़रीद (2026 दरें)।
- पांगी घाटी का जौ ₹80 प्रति किलो, हल्दी ₹150 प्रति किलो और अदरक नया शामिल ₹30 प्रति किलो।
- प्रीमियम सरकारी ख़रीद से आता है, ख़ुद ख़रीदार ढूँढने से नहीं।
- इनपुट लागत तेज़ी से घटती है — तरीक़ा ख़रीदे रसायनों की जगह देसी गोबर, गोमूत्र और स्थानीय वनस्पति घोल पर चलता है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- हिमाचल प्रदेश में खेती करने वाला किसान
- योजना के तहत प्राकृतिक खेती — कोई रासायनिक खाद या कीटनाशक नहीं
- प्राकृतिक किसान के रूप में प्रमाणित, ख़रीद इसी तक सीमित है
- ख़रीद भुगतान के सीधे हस्तांतरण के लिए बैंक खाता
शामिल नहीं
- ऐसे खेतों की उपज जो प्राकृतिक के रूप में प्रमाणित नहीं — MSP सिर्फ़ प्रमाणित प्राकृतिक किसानों पर लागू
- अधिसूचित ख़रीद सूची से बाहर की फसलें
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- प्राकृतिक खेती प्रमाणन
- आधार कार्ड
- भूमि रिकॉर्ड (जमाबंदी)
- बैंक पासबुक
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
नामांकन करें और प्राकृतिक खेती अपनाएँ
योजना के तहत कृषि विभाग में पंजीकरण कराएँ और रासायनिक इनपुट के बिना, गोआधारित व स्थानीय वनस्पति घोल से खेती करें।
- 2
प्राकृतिक किसान के रूप में प्रमाणन लें
प्रमाणन ही आपकी उपज को पात्र बनाता है — MSP सिर्फ़ प्रमाणित प्राकृतिक किसानों तक सीमित है।
- 3
अधिसूचित MSP पर राज्य को बेचें
गेहूँ, मक्का, जौ, हल्दी और अदरक की ख़रीद अधिसूचित दरों पर होती है, और भुगतान सीधे आपके बैंक खाते में जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दर आम MSP से इतनी ऊँची क्यों है?
यह प्राकृतिक उपज के लिए अलग MSP है — गेहूँ पर ₹80 प्रति किलो, जबकि सामान्य गेहूँ MSP प्रति किलो कुछ दसियों रुपये होता है। राज्य सिर्फ़ अनाज का नहीं, तरीक़े का दाम दे रहा है।
क्या बिना प्रमाणन इस दर पर बेच सकता हूँ?
नहीं। ख़रीद प्रमाणित प्राकृतिक किसानों तक सीमित है, यही रोकता है कि आम रासायनिक उपज पर प्रीमियम का दावा हो जाए।
राज्य कौन-सी फसलें ख़रीदता है?
2026 दरों पर गेहूँ (₹80/किलो), मक्का (₹50/किलो), पांगी घाटी का जौ (₹80/किलो), हल्दी (₹150/किलो) और अदरक (₹30/किलो)। दरें संशोधित होती हैं, चालू अधिसूचना देख लें।
तथ्य 24 जुलाई 2026 को agriculture.hp.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
