घास-अंकुर रोग (गन्ना)
झुंड पतले, सफ़ेद-से-पीले, घासनुमा कल्लों के ढेर में बदलता जिनमें गन्ना नहीं — एक बीज-जनित फाइटोप्लाज़्मा जो साफ़ बीज व ताप-उपचार से रुकता।
- रोगजनक
- फाइटोप्लाज़्मा (घास-अंकुर)
- फैलाव
- संक्रमित बीज-सेट्स; कुछ कीट-वाहक
- अनुकूल
- संक्रमित सेट्स लगाना; रोगग्रस्त पेड़ी
- मुख्य जोखिम
- घासनुमा कल्ले, कम/कोई पेराई-गन्ना नहीं
परिचय
घास-अंकुर रोग (GSD) गन्ने का एक अहम फाइटोप्लाज़्मा रोग है। इसकी पहचान झुंड में नाटकीय बदलाव है: कुछ मोटे गन्नों के बजाय, ठूँठ पतले, कमज़ोर, अत्यधिक-कल्ले फूटते अंकुरों का ढेर उगाता, सँकरी, हरिमहीन (सफ़ेद से हल्के पीले या क्रीम) पत्तियों के साथ, जो घास-जैसा या झाड़ीदार रूप देता। ऐसे ठूँठ कम या कोई पेराई-योग्य गन्ना नहीं बनाते, इसलिए नुकसान सीधा व गंभीर है।
यह मुख्यतः संक्रमित बीज-सेट्स से फैलता (फाइटोप्लाज़्मा रोपण-सामग्री में चलता), और कुछ रस-चूसक कीट-वाहकों से भी संचारित हो सकता। चूँकि प्राथमिक फैलाव बीज-जनित है, नियंत्रण स्वस्थ, रोग-मुक्त बीज, सेट्स को फाइटोप्लाज़्मा से मुक्त करने को नम-गरम-हवा या गरम-पानी (MHAT/HWT) बीज-उपचार, प्रभावित झुंड रोगिंग, और रोगग्रस्त फसल की पेड़ी न लेने या बीज न लेने पर टिका है। प्रभावित ठूँठ के लिए कोई इलाज-छिड़काव नहीं।
कैसे पहचानें
- ठूँठ कुछ मोटे गन्नों के बजाय पतले, कमज़ोर, अत्यधिक-कल्ले फूटते अंकुरों का ढेर उगाता।
- सँकरी, हरिमहीन पत्तियाँ — सफ़ेद से हल्की पीली या क्रीम — घास-जैसा, झाड़ीदार रूप देतीं।
- प्रभावित ठूँठों से कम या कोई पेराई-योग्य गन्ना नहीं बनता।
- प्रभावित झुंड स्वस्थ गहरे-हरे गन्ने के बीच पीले, घासनुमा धब्बों के रूप में उभरते।
कारण व कब
- एक फाइटोप्लाज़्मा, मुख्यतः संक्रमित बीज-सेट्स (रोपण-सामग्री) में चलता और कुछ रस-चूसक कीट-वाहकों से भी संचारित।
- रोगग्रस्त फसल के सेट्स लगाना इसके नए रोपण में घुसने व फैलने का मुख्य रास्ता है।
- रोगग्रस्त फसल की पेड़ी लेना फाइटोप्लाज़्मा अगली फसल में आगे ले जाता।
- एक बार ठूँठ प्रभावित हो जाए, रोगग्रस्त रहता — उस झुंड का कोई सुधार नहीं।
सांस्कृतिक व जैविक नियंत्रण
- बीज-सेट्स केवल स्वस्थ, रोग-मुक्त फसल/बीज-नर्सरी से लें; घास-अंकुर खेत से कभी नहीं।
- प्रभावित झुंड दिखते ही निकालकर नष्ट करें, और रोगग्रस्त फसल की पेड़ी न लें।
- जहाँ उपलब्ध हो सहनशील किस्में उगाएँ और एक प्रमाणित स्वस्थ बीज-नर्सरी बनाए रखें।
- पैकेज के हिस्से के रूप में रस-चूसक कीट-वाहक सँभालें।
रासायनिक / बीज-उपचार
- बीज-सेट्स को अनुशंसित तापमान व समय पर नम-गरम-हवा उपचार (MHAT) या गरम-पानी उपचार (HWT) से उपचारित करें ताकि वे फाइटोप्लाज़्मा से मुक्त हों — मुख्य नियंत्रण।
- पहले से प्रभावित ठूँठ के लिए कोई इलाज-छिड़काव नहीं — नियंत्रण निवारक व बीज-आधारित है।
- जहाँ कीट-वाहक फैलाव में योगदान दें वहाँ अनुशंसित कीटनाशियों से उन्हें सँभालें।
- अपने क्षेत्र के लिए मौजूदा MHAT/HWT कार्यक्रम व किस्म-सिफ़ारिश स्थानीय KVK/गन्ना अनुसंधान केंद्र से पक्का करें।
दोबारा न हो, इसके लिए
- हर रोपण को साफ़ बीज-नर्सरी के स्वस्थ, ताप-उपचारित बीज पर आधारित करें।
- घास-अंकुर-प्रभावित खेत की पेड़ी या बीज न लें, और प्रभावित झुंड तुरंत निकालें।
- नए रोपण साफ़ रखने को तीन-स्तरीय स्वस्थ बीज कार्यक्रम बनाए रखें व वाहक सँभालें।
सबसे ज़्यादा जोखिम वाली फसलें
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरे कुछ गन्ना ठूँठ सब पतले सफ़ेद घासनुमा अंकुर हैं जिनमें गन्ना नहीं। यह क्या है?
पतले, कमज़ोर, अत्यधिक-कल्ले फूटते अंकुरों का वह ढेर सफ़ेद-से-पीली पत्तियों व बिना पेराई-गन्ने के, घास-अंकुर रोग है, जो एक फाइटोप्लाज़्मा से होता। यह मुख्यतः संक्रमित बीज-सेट्स से फैलता। प्रभावित ठूँठ का कोई इलाज नहीं, इसलिए उन्हें निकालकर नष्ट करें, उस खेत की पेड़ी या बीज न लें, और अगले सीज़न स्वस्थ बीज-नर्सरी से ताप-उपचारित (MHAT/HWT) बीज लगाएँ।
गरम-पानी / MHAT बीज-उपचार घास-अंकुर के विरुद्ध क्यों मदद करता है?
क्योंकि घास-अंकुर करता फाइटोप्लाज़्मा बीज-सेट्स के भीतर चलता है, और अनुशंसित तापमान व अवधि पर नम-गरम-हवा (MHAT) या गरम-पानी (HWT) उपचार रोपाई से पहले सेट्स को इससे मुक्त करता। चूँकि रोग मुख्यतः बीज से फैलता, सेट्स उपचारित करना — और पहले-पहल उन्हें स्वस्थ बीज-नर्सरी से लेना — सबसे प्रभावी नियंत्रण है, क्योंकि ठूँठ प्रभावित होने के बाद कोई इलाज नहीं।
क्या मैं उस खेत की पेड़ी ले सकता हूँ जिसमें कुछ घास-अंकुर है?
न लेना बेहतर है। रोगग्रस्त फसल की पेड़ी लेना फाइटोप्लाज़्मा आगे ले जाता, इसलिए अगली फसल पहले से संक्रमित शुरू होती व रोग बढ़ता है। इसके बजाय, प्रभावित झुंड निकालकर नष्ट करें, रोगग्रस्त खेत की पेड़ी से बचें, और स्वस्थ बीज-नर्सरी के ताप-उपचारित, रोग-मुक्त बीज से पुनःरोपें। स्थायी नियंत्रण को इसे कीट-वाहक सँभालने व सहनशील किस्में उगाने के साथ मिलाएँ।
लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल व क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.
