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रोगSclerotinia sclerotiorumसमीक्षा 20 अक्टूबर 2026

स्क्लेरोटिनिया तना सड़न

ठंडे मौसम की पानी भरी तना सड़न। बाहर सफ़ेद रुई जैसी फफूँद और खोखले तने के अंदर बड़े, कड़े, काले दाने (स्क्लेरोशिया) मिलते हैं।

रोगकारक
फफूँद (Sclerotinia sclerotiorum)
फैलाव
मिट्टी के स्क्लेरोशिया; हवा से बीजाणु
किसमें बढ़ता है
फूल के समय ठंडा, नम, गीला मौसम
मुख्य ख़तरा
तना घिरकर मर जाता है; पौधे गिर जाते हैं

परिचय

स्क्लेरोटिनिया तना सड़न (सफ़ेद फफूँद) फफूँद Sclerotinia sclerotiorum से होती है। यह सरसों और दूसरी तिलहनों, सूरजमुखी, गोभी वर्ग (पत्तागोभी, फूलगोभी) और कई सब्ज़ियों और दलहनों पर हमला करती है। तने, शाखा या डंठल पर नरम, पानी भरी, हल्के रंग की सड़न दिखती है। यह अक्सर वहाँ से शुरू होती है जहाँ फूलों की पंखुड़ियाँ या सूखे फूल पौधे से चिपके हों। सड़न तने को घेर लेती है, इसलिए उसके ऊपर का हिस्सा मुरझाता है, समय से पहले पकता है और मर जाता है।

पहचान के पक्के निशान ये हैं। प्रभावित तने पर और उसके अंदर सफ़ेद रुई जैसी फफूँद उगती है। तना चीरने पर खोखले गूदे के अंदर बड़े, कड़े, बेढंगे काले दाने (स्क्लेरोशिया) मिलते हैं, जो चूहे की मेंगनी जैसे दिखते हैं। ये दाने मिट्टी में गिरते हैं और कई साल बचे रहते हैं। ठंडे, नम मौसम में उगकर बीजाणु छोड़ते हैं, जो फसल को ख़ासकर फूल के समय संक्रमित करते हैं। मिट्टी में रोग-स्रोत बहुत टिकाऊ है। इसलिए प्रबंधन फसल-चक्र, गहरी जुताई, पेड़ों के बीच हवा खोलने और फूल के समय बचाव की फफूँदनाशी पर टिका है।

कैसे पहचानें

  • तने, शाखा या डंठल पर नरम, पानी भरी, हल्के रंग की सड़न। अक्सर वहाँ से शुरू, जहाँ पंखुड़ियाँ या सूखे फूल पौधे पर चिपके हों।
  • नम मौसम में प्रभावित तने पर और उसके अंदर सफ़ेद रुई जैसी फफूँद।
  • तना चीरने पर खोखले, सफ़ेद पड़े गूदे के अंदर बड़े, कड़े, बेढंगे काले दाने (चूहे की मेंगनी जैसे)।
  • तना घिर जाने से उसके ऊपर का हिस्सा मुरझाता है, समय से पहले पकता है, सफ़ेद पड़ता है और मर जाता है। पौधा गिर भी सकता है।

कारण और समय

  • फफूँद Sclerotinia sclerotiorum, जिसके काले स्क्लेरोशिया मिट्टी में कई साल बचे रहते हैं।
  • स्क्लेरोशिया ठंडे, नम, गीले मौसम में उगते हैं और हवा में बीजाणु छोड़ते हैं, जो फसल को ख़ासकर फूल के समय संक्रमित करते हैं।
  • घनी फसल, ठंडा-नम मौसम और झड़ी हुई पंखुड़ियाँ या फूल इसे बढ़ाते हैं, क्योंकि वे बीजाणुओं को खुराक देते हैं।
  • हरी-भरी फसल में फूल से फली बनने तक के समय, ठंडे और नम मौसम में सबसे बुरा।

खेती और जैविक तरीक़े

  • ऐसी फसलों के साथ फसल-चक्र अपनाएँ जिन्हें यह रोग नहीं लगता (जैसे अनाज), ताकि मिट्टी के लंबे समय टिकने वाले स्क्लेरोशिया घटें।
  • गहरी जुताई करें, ताकि स्क्लेरोशिया दब जाएँ। चौड़ी दूरी और संतुलित नाइट्रोजन से पेड़ों के बीच हवा खोलें, और निकासी अच्छी रखें।
  • प्रभावित पौधे स्क्लेरोशिया समेत उखाड़कर हटा दें, इससे पहले कि वे मिट्टी में गिरें।
  • जहाँ सिफ़ारिश हो, मिट्टी में जैव-एजेंट (जैसे Trichoderma/Coniothyrium) डालें, जो स्क्लेरोशिया पर हमला करते हैं।

रासायनिक नियंत्रण

  • असली छिड़काव बचाव का है और फूल आने के समय किया जाता है, जब फसल सबसे नाज़ुक होती है। तना सड़ने के बाद किया छिड़काव काम नहीं आता।
  • जहाँ रोग की आशंका हो, फूल शुरू होते ही CIB&RC में दर्ज फफूँदनाशी (जैसे कार्बेन्डाज़िम या दूसरी सिफ़ारिश की दवाएँ) छिड़कें।
  • सिर्फ़ ऊपर नहीं, तने और निचली पत्तियों को भी भिगोएँ। कटाई से पहले की इंतज़ार अवधि मानें।
  • अपनी फसल के लिए ताज़ा दवा, मात्रा और समय अपने KVK से पक्का कर लें।

दोबारा न हो, इसके लिए

  • रोग न लगने वाली फसलों के साथ फसल-चक्र रखें, गहरी जुताई करें, और दूरी और संतुलित नाइट्रोजन से पेड़ों के बीच हवा खोलें।
  • जिन खेतों में रोग पहले आ चुका हो, वहाँ फूल के समय का बचाव का छिड़काव पहले से तय करें।
  • प्रभावित पौधे स्क्लेरोशिया समेत हटाएँ। निकासी ठीक रखें, ताकि इसे पसंद आने वाली ठंडी, गीली हालत कम बने।

सबसे ज़्यादा जोखिम वाली फसलें

हमारी फसल गाइडों में जहाँ यह समस्या बताई गई है — पूरी पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ के लिए कोई फसल खोलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरी सरसों/सूरजमुखी का तना सड़ रहा है, उस पर सफ़ेद रुई-सी फफूँद है और अंदर कड़े काले टुकड़े हैं। यह क्या है?

पानी भरी तना सड़न, सफ़ेद रुई जैसी फफूँद, और खोखले तने के अंदर चूहे की मेंगनी जैसे बड़े, कड़े काले दाने (स्क्लेरोशिया), यह स्क्लेरोटिनिया तना सड़न है। यह ठंडे, नम मौसम में आती है और अक्सर फूल के समय पंखुड़ियाँ चिपकने की जगह से संक्रमण करती है। स्क्लेरोशिया मिट्टी में बरसों बचे रहते हैं। इसलिए फसल-चक्र, गहरी जुताई, हवादार फसल और फूल के समय बचाव की फफूँदनाशी अपनाएँ।

सड़े हुए तने के अंदर के कड़े काले टुकड़े क्या हैं?

ये स्क्लेरोटिनिया के स्क्लेरोशिया हैं। ये बड़े, कड़े, बेढंगे काले आराम करने वाले दाने हैं, जो संक्रमित तने के खोखले गूदे के अंदर बनते हैं और चूहे की मेंगनी जैसे दिखते हैं। तने से गिरकर ये मिट्टी में कई साल बचे रहते हैं, और इसी तरह फफूँद टिकी रहती है। इन्हें देखना स्क्लेरोटिनिया की पक्की पुष्टि है, और चेतावनी भी कि खेत में अब लंबे समय टिकने वाला रोग-स्रोत है। इसलिए फसल-चक्र और गहरी जुताई ज़रूरी हो जाते हैं।

स्क्लेरोटिनिया के लिए छिड़काव कब करूँ?

फूल आने के समय, जब बचाव का मौक़ा रहता है। स्क्लेरोटिनिया आम तौर पर फूल के समय फसल को संक्रमित करता है, अक्सर पौधे पर चिपकी झड़ी पंखुड़ियों के रास्ते। इसलिए फूल शुरू होते ही फफूँदनाशी (जैसे कार्बेन्डाज़िम) छिड़कने से फसल बचती है। तने सड़ जाने के बाद छिड़काव कुछ नहीं करता। जिन खेतों में रोग पहले आ चुका हो, वहाँ फूल का छिड़काव पहले से तय करें और उसे फसल-चक्र और हवादार फसल के साथ जोड़ें। दवा अपने KVK से पक्की कर लें।

लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल और क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.