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एवोकाडोसभी सीज़नबिना-कलम बीज-मूल प्रकार (कोई विकसित/जारी किस्म नहीं)अपडेट किया गया 2 सितंबर 2026

Green (local seedling type)

पर्पल बीज-प्रकार का हरे-छिलके समकक्ष, इसी तरह बिना-कलम व पुरानी रोपाइयों में आम — सिक्किम में आमतौर सितंबर-अक्टूबर के आसपास तोड़ा जाता, पर्पल-छिलका प्रकार से सीज़न में बाद में।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिबीज-पेड़ के रूप में पहले फलन तक 5–6+ साल
अपेक्षित उपजपेड़-दर-पेड़ अलग-अलग, क्योंकि बीज-मूल माता-सच्चा नहीं होता
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
बिना-कलम बीज-मूल प्रकार (कोई विकसित/जारी किस्म नहीं)
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
बीज-पेड़ के रूप में पहले फलन तक 5–6+ साल
अपेक्षित उपज
पेड़-दर-पेड़ अलग-अलग, क्योंकि बीज-मूल माता-सच्चा नहीं होता
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
कोई विकसित या जारी किस्म नहीं — भारत की नामित एवोकाडो किस्मों से पहले का एक सामान्य बीज-मूल फल-रंग प्रकार

इस किस्म के बारे में

ग्रीन प्रकार पर्पल बीज-प्रकार का हरे-छिलके समकक्ष है, कुर्ग, केरल व सिक्किम भर मिलने वाले उन पुराने, बिना-कलम बीज-मूल एवोकाडो पेड़ों को दर्शाता जो किसी औपचारिक भारतीय किस्म-कार्यक्रम से पहले के हैं। पर्पल प्रकार की तरह, गुठली से उगा पेड़ अपने मातृ-पेड़ के सटीक गुण दोबारा नहीं देता, तो फल-गुणवत्ता व उपज पेड़-दर-पेड़ व्यापक रूप से अलग-अलग होते। हरे-छिलके फल सिक्किम में आमतौर सितंबर-अक्टूबर के आसपास तोड़ा जाता, उसी क्षेत्र में उगाए जाने वाले पर्पल-छिलका प्रकार से सीज़न में बाद में, जो दोनों प्रकार रखने वाले किसान को तुड़ाई व बाज़ार-सीज़न फैलाने देता है। किसी भी बिना-कलम बीज-स्टॉक की तरह, नए पेड़ लगाने वाले किसान को अनुमानित फलन-समय व फल-गुणवत्ता के लिए एक नामित कलमी किस्म बेहतर सेवा देती है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारबिना-कलम बीज-मूल प्रकार (कोई विकसित/जारी किस्म नहीं)
    अवधिबीज-पेड़ के रूप में पहले फलन तक 5–6+ साल
    उपज क्षमतापेड़-दर-पेड़ अलग-अलग, क्योंकि बीज-मूल माता-सच्चा नहीं होता
    रोग-प्रतिरोधदर्ज नहीं; व्यक्तिगत पेड़ अनुसार अलग-अलग
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई व खेती

  • कटाईपरिपक्वता भर छिलका हरा रहता, तो रंग-बदलाव से ज़्यादा फल-आकार व तोड़ने-बाद-नरम होने की मानक जाँच मायने रखती; सिक्किम में आमतौर सितंबर-अक्टूबर के आसपास तोड़ा जाता है।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

बीज-पेड़ के रूप में पहले फलन तक 5–6+ साल

अपेक्षित उपज

पेड़-दर-पेड़ अलग-अलग, क्योंकि बीज-मूल माता-सच्चा नहीं होता

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • पर्पल प्रकार से बाद की तुड़ाई-खिड़की (सितंबर-अक्टूबर), दोनों प्रकार रखने वाले बाग़ भर तुड़ाई व बाज़ार-आपूर्ति फैलाने में उपयोगी।
  • कई पुराने बाग़ों में पहले से स्थापित, उत्पादन जारी रखने को दोबारा-रोपाई का फ़ैसला नहीं चाहिए।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • नई व्यावसायिक रोपाई को अनुशंसित नहीं — बीज-पेड़ को फलन में 5–6 साल या ज़्यादा लगते, कलमी किस्म के 3–4 के मुक़ाबले, और फल-गुणवत्ता या उपज की कोई गारंटी नहीं।
  • चूँकि परिपक्वता पर भी छिलका हरा रहता, किसानों को परिपक्वता आँकने में रंग-बदलाव के बजाय फल-आकार व तोड़ने-बाद की मानक नरम-होने जाँच पर भरोसा करना चाहिए।

उपयुक्त क्षेत्र

कुर्ग, केरल व सिक्किम भर पुराने, बिना-कलम बाग़-पेड़ों के रूप में व्यापक रूप से उगाई जाती — किसी आधिकारिक अनुशंसित क्षेत्र वाली विकसित किस्म नहीं।

  • कर्नाटक
  • केरल
  • सिक्किम

स्रोत: Avocado Production in India — FAO (Saurindra P. Ghosh). संपादकीय नीति.