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एवोकाडोसभी सीज़नबिना-कलम बीज-मूल प्रकार (कोई विकसित/जारी किस्म नहीं)अपडेट किया गया 2 सितंबर 2026

Purple (local seedling type)

भारत के एवोकाडो इलाक़ों भर किसी औपचारिक किस्म-कार्यक्रम से पहले उगाई जाने वाला पुराना, बिना-कलम बीज-मूल प्रकार — परिपक्वता पर बैंगनी-छिलका, सिक्किम में आमतौर जुलाई के आसपास तोड़ा जाता।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिबीज-पेड़ के रूप में पहले फलन तक 5–6+ साल
अपेक्षित उपजपेड़-दर-पेड़ अलग-अलग, क्योंकि बीज-मूल माता-सच्चा नहीं होता
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
बिना-कलम बीज-मूल प्रकार (कोई विकसित/जारी किस्म नहीं)
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
बीज-पेड़ के रूप में पहले फलन तक 5–6+ साल
अपेक्षित उपज
पेड़-दर-पेड़ अलग-अलग, क्योंकि बीज-मूल माता-सच्चा नहीं होता
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
कोई विकसित या जारी किस्म नहीं — भारत की नामित एवोकाडो किस्मों से पहले का एक सामान्य बीज-मूल फल-रंग प्रकार

इस किस्म के बारे में

पर्पल प्रकार कुर्ग, केरल व सिक्किम भर मिलने वाले उन कई पुराने, बिना-कलम बीज-मूल एवोकाडो पेड़ों को दर्शाता है जो भारत के औपचारिक एवोकाडो किस्म-कार्यक्रम व नामित कलमी किस्मों के आगमन से पहले के हैं। चूँकि बीज-पेड़ कलम की बजाय गुठली से उगता, यह अपने मातृ-पेड़ के सटीक गुण दोबारा नहीं देता, तो एक ही बाग़ के भीतर भी फल-आकार, गुणवत्ता व उपज पेड़-दर-पेड़ व्यापक रूप से अलग-अलग होते। पर्पल-छिलका फल सिक्किम में आमतौर जुलाई के आसपास तोड़ा जाता, हरे-छिलके समकक्ष से सीज़न में कुछ पहले। ये पेड़ पुराने, स्थापित बाग़ों में आम बने हुए हैं, पर नए पेड़ लगाने वाले किसान को अनुमानित फलन-समय, फल-गुणवत्ता व उपज के लिए एक नामित कलमी किस्म — अर्का सुप्रीम, अर्का कुर्ग रवि, हास या फ़्यूर्ते — बेहतर सेवा देती है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारबिना-कलम बीज-मूल प्रकार (कोई विकसित/जारी किस्म नहीं)
    अवधिबीज-पेड़ के रूप में पहले फलन तक 5–6+ साल
    उपज क्षमतापेड़-दर-पेड़ अलग-अलग, क्योंकि बीज-मूल माता-सच्चा नहीं होता
    रोग-प्रतिरोधदर्ज नहीं; व्यक्तिगत पेड़ अनुसार अलग-अलग
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई व खेती

  • कटाईपरिपक्व पर सख़्त तोड़ा जाता, सिक्किम में आमतौर जुलाई के आसपास, और किसी भी एवोकाडो की तरह लगभग 6–10 दिन में पेड़ से अलग पकता है।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

बीज-पेड़ के रूप में पहले फलन तक 5–6+ साल

अपेक्षित उपज

पेड़-दर-पेड़ अलग-अलग, क्योंकि बीज-मूल माता-सच्चा नहीं होता

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • कई पुराने बाग़ों में पहले से स्थापित, तो एक मौजूदा पर्पल-प्रकार पेड़ को उत्पादन जारी रखने को दोबारा-रोपाई का फ़ैसला नहीं चाहिए।
  • ज़मीन में पहले से लगे पेड़ को नर्सरी-स्रोत कलमी सामग्री पर कोई निर्भरता नहीं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • नई व्यावसायिक रोपाई को अनुशंसित नहीं — बीज-पेड़ को फलन में 5–6 साल या ज़्यादा लगते, कलमी किस्म के 3–4 के मुक़ाबले, और फल-गुणवत्ता या उपज की कोई गारंटी नहीं।
  • एक ही बाग़ के भीतर भी अलग-अलग बीज-पेड़ों में फल-गुणवत्ता व उपज व्यापक रूप से अलग-अलग होते, तो एक पेड़ के नतीजे दूसरे के लिए नहीं माने जा सकते।

उपयुक्त क्षेत्र

कुर्ग, केरल व सिक्किम भर पुराने, बिना-कलम बाग़-पेड़ों के रूप में व्यापक रूप से उगाई जाती — किसी आधिकारिक अनुशंसित क्षेत्र वाली विकसित किस्म नहीं।

  • कर्नाटक
  • केरल
  • सिक्किम

स्रोत: Avocado Production in India — FAO (Saurindra P. Ghosh). संपादकीय नीति.