Mudigere-2
कोडगु, उत्तर वायनाड, हासन व चिकमगलूर को अनुशंसित बाद की मलबार-प्रकार रिलीज़, लगभग 475 किग्रा/हे. के दर्ज परीक्षण-औसत उपज सहित।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- इलायची
- प्रकार
- प्रकंद/सकर्स रोपण-सामग्री (मलबार प्रकार)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- 2–3 साल में पहला फलन
- अपेक्षित उपज
- ~475 किग्रा/हे. (परीक्षण औसत)
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 1994 में जारी · ICAR-IISR, इलायची शोध केंद्र, अप्पांगला, कर्नाटक
इस किस्म के बारे में
मुडिगेरे-2, कर्नाटक के अप्पांगला स्थित ICAR-IISR इलायची शोध केंद्र से 1994 में जारी एक मलबार-प्रकार क्लोनल चयन है, ख़ासतौर कोडगु, उत्तर वायनाड, हासन व चिकमगलूर को अनुशंसित — भारत की इलायची पट्टी के कर्नाटक-पक्ष का मूल। कई बाग़वानी स्रोत लगातार लगभग 475 किग्रा/हे. औसत परीक्षण-उपज दर्ज करते, राष्ट्रीय स्तर पर लघु-किसान इलायची की सामान्य 150–300 किग्रा/हे. के मुक़ाबले वाक़ई उच्च आँकड़ा, हालाँकि वह आँकड़ा किसी गारंटीशुदा खेत-स्तर परिणाम के बजाय परीक्षण-स्टेशन दशाओं को दर्शाता। अधिकांश इलायची रिलीज़ों की तरह, सामान्य मलबार-प्रकार ओज से आगे मुडिगेरे-2 विशिष्ट विस्तृत रोग-प्रतिरोध डेटा इस शोध चरण में स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुआ।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- दूरीरोपाई-घनत्व अनुसार 2 से 2.5 मी
- उर्वरकयुवावस्था में संतुलित NPK खुराक, फलन शुरू होने पर मानसून-बँटी अधिक खुराक की ओर (पूरी समय-सारणी को फसल-गाइड देखें)
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- छाया तले गहरी वन-दोमट, pH 5.5–6.5
उपज व अवधि
पकने की अवधि
2–3 साल में पहला फलन
अपेक्षित उपज
~475 किग्रा/हे. (परीक्षण औसत)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- किसी भी नामित इलायची रिलीज़ के लिए दर्ज उच्च आँकड़ों में एक वाक़ई उच्च परीक्षण-स्टेशन उपज (~475 किग्रा/हे.)।
- सामान्य अखिल-भारतीय दावे के बजाय ख़ासतौर कर्नाटक-उत्तर वायनाड पहाड़ी पट्टी को अनुशंसित व वहीं मूल्यांकित।
ध्यान रखने योग्य बातें
- ~475 किग्रा/हे. आँकड़ा एक परीक्षण-स्टेशन औसत है, गारंटीशुदा खेत-स्तर परिणाम नहीं — असली लघु-किसान उपज छाया, निकासी व रोग-प्रबंधन पर भारी निर्भर करती।
- मुडिगेरे-2 विशिष्ट विस्तृत रोग-प्रतिरोध डेटा इस चरण में स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुआ — किसी भी इलायची रोपाई जैसी वही मानक कट्टे/कैप्सूल-सड़न सावधानियाँ लागू करें।
उपयुक्त क्षेत्र
ख़ासतौर कोडगु, उत्तर वायनाड, हासन व चिकमगलूर को अनुशंसित — 1994 में ICAR-IISR के अप्पांगला इलायची शोध केंद्र से जारी।
- कर्नाटक
- केरल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुडिगेरे-2 विशेष रूप से कहाँ अनुशंसित है?
कोडगु, उत्तर वायनाड, हासन व चिकमगलूर — भारत की इलायची पट्टी के कर्नाटक-पक्ष के मूल पहाड़ी ज़िले, जहाँ यह विकसित व मूल्यांकित हुई।
स्रोत: Cardamom Varieties — ICAR-Indian Institute of Spices Research, Grow These Cardamom Varieties for Higher Profitability — Krishi Jagran. संपादकीय नीति.
