Jawahar Isabgol-4 (JI-4)
मध्य प्रदेश के मंदसौर बाग़वानी महाविद्यालय की 1996 रिलीज़, नामित इसबगोल किस्मों में सबसे ऊँचे दर्ज उपज-आँकड़ों में से एक व नाव-आकार, सख़्त, हल्के-गुलाबी बीज सहित।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- अलग दर्ज नहीं
- बीज दर
- 4–5 किग्रा/हेक्टेयर, एक-सी छिड़काव को रेत या बारीक मिट्टी में मिलाकर
- अपेक्षित उपज
- 1,300–1,500 किग्रा/हेक्टेयर — किसी नामित किस्म के लिए दर्ज ऊँचे आँकड़ों में से
- उपयुक्त मिट्टी
- हल्की, अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट
- जारी
- रिलीज़ 1996 · बाग़वानी महाविद्यालय, RVSKVV, मंदसौर, मध्य प्रदेश
इस किस्म के बारे में
जवाहर इसबगोल-4 (JI-4) 1996 में राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV) के बाग़वानी महाविद्यालय, मंदसौर, मध्य प्रदेश द्वारा जारी की गई। इसमें संकरी, घनी, रोमिल गहरे-हरे पत्ते व नाव-आकार, सख़्त, हल्के-गुलाबी बीज पर गुलाबी-सफ़ेद भूसी है — नामित इसबगोल किस्मों में एक काफ़ी अलग शारीरिक विवरण। इसका दर्ज उपज-सामर्थ्य, 1,300–1,500 किग्रा/हेक्टेयर, इस पेज की नामित किस्मों में दर्ज सबसे ऊँचे आँकड़ों में से है, जो इसे उपज को प्राथमिकता देने वाले किसान के लिए एक उचित विकल्प बनाता जहाँ JI-4 बीज सच में उपलब्ध हो। इस पेज के लिए जाँचे गए स्रोतों में इसकी सटीक अवधि अलग दर्ज नहीं, तो इसके इर्द-गिर्द योजना बनाने से पहले किसान को अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से स्थानीय बुवाई-से-कटाई खिड़की पक्की करनी चाहिए।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयसबसे अच्छी उपज को नवंबर का पहला पखवाड़ा
- बीज दर4–5 किग्रा/हेक्टेयर, एक-सी छिड़काव को रेत या बारीक मिट्टी में मिलाकर
उपज व अवधि
पकने की अवधि
अलग दर्ज नहीं
अपेक्षित उपज
1,300–1,500 किग्रा/हेक्टेयर — किसी नामित किस्म के लिए दर्ज ऊँचे आँकड़ों में से
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- उपलब्ध स्रोतों में अलग दर्ज नहीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- किसी नामित इसबगोल किस्म के लिए दर्ज सबसे ऊँचे उपज-आँकड़ों में से (1,300–1,500 किग्रा/हेक्टेयर)।
- अलग, अच्छी तरह वर्णित बीज व पत्ती विशेषताएँ इसे पहचानना आसान बनातीं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- सटीक फ़सल-अवधि अलग दर्ज नहीं — स्थानीय बुवाई-से-कटाई कैलेंडर किसी KVK से पक्का करें।
- डाउनी मिल्ड्यू सहनशीलता अलग दर्ज नहीं; मानिए कि सामान्य निगरानी व फफूँदनाशी प्रथा फिर भी चाहिए।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- मध्य प्रदेश
- गुजरात
- राजस्थान
