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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
इसबगोल (साइलियम)रबीखुली-परागितअपडेट किया गया 2 सितंबर 2026

Rajasthan Isabgol-1 (RI-1)

उपलब्ध सबसे बेहतर-दर्ज डाउनी-मिल्ड्यू-सहनशील इसबगोल किस्म — जोधपुर में RI-89 के गामा-किरण उत्परिवर्तन से विकसित व पीयर-रिव्यूड बहु-वर्षीय परीक्षणों में सिद्ध, जो इसे रोग पहले हमला कर चुके इलाक़े में सुरक्षित डिफ़ॉल्ट बनाती।

सीज़नरबी
पकने की अवधि115 दिन
अपेक्षित उपज14 स्थल-वर्षों भर पूल्ड परीक्षण औसत लगभग 1,074 किग्रा/हेक्टेयर; किसान-खेत अनुकूलन-परीक्षण में 1,255 किग्रा/हेक्टेयर तक
उपयुक्त मिट्टीशुष्क पश्चिमी मैदान की हल्की, अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
115 दिन
बीज दर
4–5 किग्रा/हेक्टेयर, एक-सी छिड़काव को रेत या बारीक मिट्टी में मिलाकर
अपेक्षित उपज
14 स्थल-वर्षों भर पूल्ड परीक्षण औसत लगभग 1,074 किग्रा/हेक्टेयर; किसान-खेत अनुकूलन-परीक्षण में 1,255 किग्रा/हेक्टेयर तक
उपयुक्त मिट्टी
शुष्क पश्चिमी मैदान की हल्की, अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट
जारी
रिलीज़ 2006 · कृषि अनुसंधान स्टेशन, जोधपुर

इस किस्म के बारे में

राजस्थान इसबगोल-1 (RI-1) 2006 में कृषि अनुसंधान स्टेशन, जोधपुर द्वारा जारी की गई, पुरानी RI-89 किस्म के गामा-किरण उत्परिवर्तन-प्रजनन से विकसित। यह 115 दिन में पकती व 14 स्थल-वर्षों भर एक पूल्ड परीक्षण में, औसतन लगभग 1,074 किग्रा/हेक्टेयर, एक किसान-खेत अनुकूलन-परीक्षण में 1,255 किग्रा/हेक्टेयर तक पहुँची। जो RI-1 को अलग करता है वह इसकी डाउनी मिल्ड्यू सहनशीलता है: इसकी RI-89, GI-2 व HI-2 चेक किस्मों से तुलना करने वाले पीयर-रिव्यूड खेत-परीक्षणों में, RI-1 ने लगातार समूह की सबसे कम रोग-गंभीरता दिखाई। चूँकि डाउनी मिल्ड्यू — ख़ासकर वह रूप जो फूल को सीधे संक्रमित करता व बाँझ बनाता — वह रोग है जो अधिकांश इसबगोल सीज़न तय करता, यह दर्ज सहनशीलता किसी भी रोग-इतिहास वाली पट्टी में, ख़ासकर राजस्थान व गुजरात के खेती-बेल्ट के नम-प्रवण हिस्सों में, पुरानी किस्म से RI-1 को प्राथमिकता देने का एक असली, साक्ष्य-समर्थित कारण है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि115 दिन
    उपज क्षमता14 स्थल-वर्षों भर पूल्ड परीक्षण औसत लगभग 1,074 किग्रा/हेक्टेयर; किसान-खेत अनुकूलन-परीक्षण में 1,255 किग्रा/हेक्टेयर तक
    रोग-प्रतिरोधपीयर-रिव्यूड खेत-परीक्षणों में RI-89, GI-2 व HI-2 चेक से सार्थक रूप से बेहतर डाउनी मिल्ड्यू सहनशीलता — तुलना की गई चार जीनोटाइप में सबसे कम रोग-गंभीरता
    मिट्टीशुष्क पश्चिमी मैदान की हल्की, अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयसबसे अच्छी उपज को नवंबर का पहला पखवाड़ा
  • बीज दर4–5 किग्रा/हेक्टेयर, एक-सी छिड़काव को रेत या बारीक मिट्टी में मिलाकर

उपज व अवधि

पकने की अवधि

115 दिन

अपेक्षित उपज

14 स्थल-वर्षों भर पूल्ड परीक्षण औसत लगभग 1,074 किग्रा/हेक्टेयर; किसान-खेत अनुकूलन-परीक्षण में 1,255 किग्रा/हेक्टेयर तक

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • किसी भी नामित इसबगोल किस्म की सबसे बेहतर-दर्ज डाउनी मिल्ड्यू सहनशीलता, तीन चेक किस्मों के विरुद्ध पीयर-रिव्यूड बहु-वर्षीय परीक्षणों में पुष्ट।
  • ठोस, अच्छी तरह दर्ज उपज-प्रदर्शन (लगभग 1,074 किग्रा/हेक्टेयर पूल्ड परीक्षण औसत, खेत पर 1,255 किग्रा/हेक्टेयर तक)।
  • अपेक्षाकृत छोटी, अच्छी तरह परिभाषित 115-दिन अवधि।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • आधिकारिक रूप से राजस्थान के लिए विकसित व अनुशंसित; राजस्थान के बाहर बुवाई से पहले स्थानीय उपलब्धता व किसी राज्य-विशिष्ट सिफ़ारिश की पुष्टि करें।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • राजस्थान

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

GI-1 या GI-2 जैसी पुरानी किस्म से RI-1 की सिफ़ारिश क्यों की जाती?

RI-1 की पुरानी चेक किस्मों (GI-2 सहित) से तुलना करने वाले पीयर-रिव्यूड खेत-परीक्षणों में इसने लगातार समूह की सबसे कम डाउनी मिल्ड्यू गंभीरता दिखाई — एक असली, साक्ष्य-समर्थित फ़ायदा उस फ़सल में जहाँ यही एक रोग अधिकांश सीज़न तय करता है।

स्रोत: Agricultural Research Station, Jodhpur (Agriculture University, Jodhpur). संपादकीय नीति.