मुख्यमंत्री बळीराजा शेत/पाणंद रस्ते योजना
गांव से खेत तक जाने वाले कच्चे रास्ते — शेत/पाणंद रस्ता — को सरकारी मशीनों से पक्का व हर मौसम में चलने लायक बनाया जाता है, किसान का कोई खर्च नहीं।
संचालक: राजस्व एवं वन विभाग, महाराष्ट्र सरकार
- खर्च कौन उठाता है
- 100% सरकारी खर्च
- लागत सीमा
- ₹15 लाख/किमी तक
- किसान पर शुल्क
- कोई नहीं — सर्वे, रॉयल्टी, पुलिस शुल्क माफ
- निर्णय कौन लेता है
- विधानसभा क्षेत्र समिति + 5 किसान
परिचय
खेत तक जाने वाला कच्चा, संकरा रास्ता किसी नियमित सड़क योजना में शामिल नहीं होता, इसलिए बारिश के बाद महीनों कीचड़ में डूबा रहता है और ट्रैक्टर, हार्वेस्टर व माल ले जाने वाली गाड़ी वहीं फंस जाती है जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो। मुख्यमंत्री बळीराजा शेत/पाणंद रस्ते योजना, जिसे राज्य मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2025 में मंजूरी दी, ठीक इन्हीं रास्तों को जेसीबी, रोलर और मुरुम से मजबूत करती है — जल्दी, और पूरी तरह सरकारी खर्च पर।
इसमें किसी किसान को सीधे नकद नहीं मिलता — यह गांव की सड़क-सुविधा की योजना है, अनुदान की नहीं। हर विधानसभा क्षेत्र की एक समिति, जिसमें स्थानीय विधायक और 5 प्रगतिशील किसान शामिल होते हैं, तय करती है कि कौन सा रास्ता पहले बनेगा, और उसे लगभग 25 किलोमीटर के गुच्छे में पंजीकृत ठेकेदार से बनवाती है। ज़मीन जबरन नहीं ली जाती — अगर किसी किसान के खेत की सीमा से थोड़ी ज़मीन रास्ते के लिए चाहिए, तो किसान उस टुकड़े का पंजीकृत दानपत्र देता है, और बाद में वह ज़मीन वापस नहीं मांगी जा सकती।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- खेत व पाणंद रस्तों को जेसीबी, रोलर, मुरुम और गिट्टी से पूरी तरह सरकारी खर्च पर मजबूत किया जाता है — काम के लिए किसान कुछ नहीं देता।
- न सर्वे/मोजणी शुल्क, न इस्तेमाल हुई मिट्टी-मुरुम-पत्थर पर रॉयल्टी, न अतिक्रमण हटाते समय पुलिस बंदोबस्त का शुल्क।
- हर बने रास्ते के दोनों तरफ पेड़ लगाना अनिवार्य है।
- रास्ता हर मौसम में चलने लायक रहना चाहिए, ठेकेदार की कम से कम 6 महीने या एक बरसात की दोष-सुधार गारंटी के साथ।
- हर विधानसभा क्षेत्र की समिति में 5 प्रगतिशील किसान शामिल होते हैं, ताकि किसानों की बात सीधे सुनी जाए कि कौन सा रास्ता पहले बने।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- शेत/पाणंद रस्ता गांव के भूमि रिकॉर्ड नक्शे पर पहले से मौजूद हो, या उस पर पड़ने वाले किसान ज़रूरी हिस्से का पंजीकृत दानपत्र देने को तैयार हों
- रास्ता ग्राम पंचायत या विधानसभा क्षेत्र समिति के ज़रिए प्रस्तावित किया जाए — कोई अलग व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन नहीं है
- उसी हिस्से पर PMGSY/CMGSY जैसी किसी दूसरी सड़क योजना का काम पहले से मंजूर न हो
शामिल नहीं
- नया पुल बनाना — केवल पानी निकासी के लिए ज़रूरी पुलिया (कल्वर्ट) का काम शामिल है
- भूमि अधिग्रहण — योजना केवल किसान की मर्ज़ी से मिली, पंजीकृत दानपत्र वाली ज़मीन लेती है, ज़बरन खरीद नहीं
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- यदि रास्ते के लिए स्वेच्छा से ज़मीन दे रहे हैं तो 7/12 भूमि उतारा
- उस ज़मीन के टुकड़े का पंजीकृत दानपत्र
- रास्ता बनाने की मांग वाला ग्राम पंचायत या विधानसभा क्षेत्र समिति को लिखित निवेदन
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
ग्राम पंचायत के ज़रिए मांग रखें
किसान अपने शेत/पाणंद रस्ते की मांग ग्राम पंचायत के सामने रखते हैं, जो इसे विधानसभा क्षेत्र समिति तक पहुंचाती है।
- 2
समिति मंजूरी देकर निविदा निकालती है
स्थानीय विधायक, अधिकारी और 5 प्रगतिशील किसानों वाली समिति गांव का नक्शा देखकर रास्ते को मंजूर करती है और लगभग 25 किमी के गुच्छे में पंजीकृत ठेकेदार से बनवाती है।
- 3
रास्ता बनता है, जांचा जाता है, दर्ज होता है
तय चौड़ाई व परत के हिसाब से रास्ता मजबूत किया जाता है, कोर-कटिंग टेस्ट और ड्रोन फोटो से जांचा जाता है, और पूरा होने पर ग्राम पंचायत के रस्ते रजिस्टर में दर्ज होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह योजना असल में क्या बनाती है?
यह गांव और खेत के बीच के कच्चे शेत/पाणंद रास्ते को जेसीबी, रोलर, मुरुम और गिट्टी से हर मौसम में चलने लायक बनाती है — यह नया हाईवे या पुल नहीं है।
क्या इसमें किसान को सीधे पैसा मिलता है?
नहीं। कोई व्यक्तिगत नकद अनुदान नहीं है — सरकार ठेकेदार को सीधे भुगतान कर गांव की सड़क-सुविधा बनवाती है।
अगर रास्ता मेरे खेत से होकर गुज़रे तो?
आपकी ज़मीन ज़बरन नहीं ली जाएगी। अगर आप हिस्सा देने को राज़ी हों, तो पंजीकृत दानपत्र देना होगा, और बाद में वह ज़मीन वापस नहीं मांगी जा सकती। इसके लिए कोई सर्वे शुल्क नहीं लगता।
अगर रास्ते पर किसी का अतिक्रमण हो तो?
तहसीलदार अतिक्रमण हटाने का 7 दिन का नोटिस देते हैं। न हटाने पर सरकार इसे हटाती है — ज़रूरत पड़ने पर पुलिस की मदद से — और इसके लिए किसी से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
तथ्य 5 सितंबर 2026 को rfd.maharashtra.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
