झूठा कंडुआ / मिथ्या कंडुआ (धान)
बाली में बिखरे दाने मख़मली हरे-पीले से काले बीजाणु-गोलों में बदलते — फूल आते समय हरी-भरी, ज़्यादा-नाइट्रोजन फसल में सबसे बुरा।
- रोगजनक
- फफूँद (Ustilaginoidea virens)
- फैलाव
- हवा/बारिश-छींटे बीजाणु; बीज व मलबा
- अनुकूल
- फूल पर नम मौसम + ज़्यादा नाइट्रोजन
- मुख्य जोखिम
- दाने बीजाणु-गोलों में; संदूषण
परिचय
झूठा कंडुआ धान का एक फफूँद रोग है जो दाना-भराव अवस्था पर दिखता है। यह बाली में अलग दानों को बड़े मख़मली गोलों में बदल देता है — पहले नारंगी-पीले से हरे-पीले, बाद में हरे-काले — जो सामान्य दाने से कहीं बड़े होते और फटकर चूर्णी बीजाणु-ढेर छोड़ते हैं। आमतौर पर प्रति बाली कुछ ही दाने प्रभावित होते, पर अतिसंवेदनशील, हरी-भरी फसल में संख्या बढ़ती है।
यह तब से ज़्यादा आम हुआ जब से किसान ज़्यादा नाइट्रोजन के साथ अधिक-उपज किस्में उगाते हैं। यह फूल आने के आसपास नम, आर्द्र मौसम, बारिश व उच्च आर्द्रता से, और ज़्यादा नाइट्रोजन व घनी फसल से अनुकूल है। प्रभावित दानों के सीधे नुकसान के अलावा, बीजाणु-गोले दाने को और कभी उपज को दूषित कर सकते हैं। यह संक्रमित मलबे व बीज पर बचता है, इसलिए प्रबंधन संतुलित पोषण, प्रतिरोधी किस्में, साफ़ बीज व गभोट-से-बाली अवस्था पर सही समय के सुरक्षात्मक फफूँदनाशी को मिलाता है।
कैसे पहचानें
- बाली में अलग दाने बड़े मख़मली गोलों में फूले, सामान्य दाने से कहीं बड़े।
- गोले पहले नारंगी-पीले से हरे-पीले, बाद में हरे-काले, फटकर चूर्णी बीजाणु-ढेर छोड़ते।
- आमतौर पर प्रति बाली बिखरे कुछ ही दाने प्रभावित, हरी-भरी अतिसंवेदनशील फसल में ज़्यादा।
- दाना-भराव पर दिखता, ख़ासकर फूल के आसपास नम, आर्द्र मौसम के बाद।
कारण व कब
- फफूँद Ustilaginoidea virens, हवा व बारिश-छींटे बीजाणुओं से फैलती और संक्रमित मलबे व बीज पर चलती।
- फूल के आसपास (गभोट से बाली) नम, आर्द्र मौसम, बारिश व उच्च आर्द्रता से अनुकूल।
- ज़्यादा नाइट्रोजन, देर/भारी टॉप-ड्रेसिंग व घनी, हरी-भरी फसल से बदतर।
- अधिक-उपज किस्मों में और गीले फूल-काल वाले वर्षों में ज़्यादा आम।
सांस्कृतिक व जैविक नियंत्रण
- संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करें — ज़्यादा व देर से नाइट्रोजन से बचें, जो रोग बढ़ाती है।
- जहाँ उपलब्ध हो सहनशील/प्रतिरोधी किस्में उगाएँ और साफ़, स्वस्थ बीज इस्तेमाल करें।
- बहुत घनी रोपाई से बचें ताकि छत्र खुला रहे और बारिश के बाद सूखे।
- दिखते संक्रमित बालियाँ व मलबा इकट्ठा कर नष्ट करें ताकि बचाव घटे।
रासायनिक नियंत्रण
- प्रभावी खिड़की सुरक्षात्मक है: गभोट से आरंभिक बाली पर छिड़कें, बीजाणु-गोले बनने से पहले — बाद का छिड़काव कम करता है।
- जहाँ रोग की आशंका हो वहाँ धान के लिए CIB&RC-पंजीकृत फफूँदनाशी (जैसे प्रोपिकोनाज़ोल या ताँबा-आधारित/अन्य अनुशंसित) गभोट पर।
- छिड़काव मौसम व फसल-अवस्था से समयबद्ध करें, और कटाई-पूर्व अंतराल मानें।
- अपने क्षेत्र के लिए मौजूदा उत्पाद, मात्रा व समय स्थानीय KVK से पक्का करें।
दोबारा न हो, इसके लिए
- नाइट्रोजन संतुलित व सही बँटवारे में रखें, और फफूँद को भाती हरी-भरी, अधिक-खिलाई फसल से बचें।
- सहनशील किस्में व साफ़ बीज इस्तेमाल करें, और पौध-दूरी खोलें।
- जहाँ रोग नियमित हो वहाँ बीजाणु-गोले दिखने के बाद प्रतिक्रिया के बजाय गभोट-अवस्था का सुरक्षात्मक छिड़काव पहले से योजना बनाएँ।
सबसे ज़्यादा जोखिम वाली फसलें
हमारी फसल गाइडों में जहाँ यह समस्या बताई गई है — पूरी पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ के लिए कोई फसल खोलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरी धान की बाली के कुछ दाने हरे-काले मख़मली गोलों में बदल गए हैं। यह क्या है?
वे बड़े मख़मली गोले — पहले नारंगी-पीले, फिर हरे-काले — झूठा कंडुआ हैं, एक फफूँद रोग जो दाना-भराव पर अलग दानों की जगह लेता है। आमतौर पर प्रति बाली कुछ ही दाने प्रभावित होते। यह फूल के आसपास नम मौसम व ज़्यादा नाइट्रोजन से बढ़ता है। ज़्यादा नाइट्रोजन घटाएँ, सहनशील किस्में व साफ़ बीज इस्तेमाल करें, और जहाँ नियमित हो वहाँ गभोट अवस्था पर सुरक्षात्मक छिड़काव करें।
क्या झूठा कंडुआ चावल को असुरक्षित बनाता या मूल्य घटाता है?
सीधा नुकसान प्रभावित दाने हैं, जिनकी जगह बीजाणु-गोले ले लेते हैं। इसके अलावा, बीजाणु-गोले कटी उपज को दूषित कर उसकी गुणवत्ता व बाज़ार-मूल्य घटा सकते हैं, और भारी संक्रमित उपज को साफ़ कर अलग रखना बेहतर है। संतुलित नाइट्रोजन, सहनशील किस्मों व समय पर सुरक्षात्मक छिड़काव से रोग कम रखना उपज व दाना-गुणवत्ता दोनों बचाता है।
झूठे कंडुआ के लिए कब छिड़कूँ?
छिड़काव केवल सुरक्षात्मक रूप में काम करता है, बीजाणु-गोले बनने से पहले — इसलिए खिड़की गभोट से आरंभिक बाली है। हरे-काले गोले दिखने के बाद लगाया फफूँदनाशी बहुत कम करता है। जहाँ झूठे कंडुआ की आशंका हो (संवेदनशील किस्म, भारी नाइट्रोजन, गीला फूल-काल), गभोट पर पंजीकृत फफूँदनाशी छिड़काव की योजना बनाएँ; उत्पाद, मात्रा व समय KVK से पक्का करें।
लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल व क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.
