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रोगFusarium oxysporum f. sp. cubenseसमीक्षा 15 अक्टूबर 2026

पनामा विल्ट (केला)

पुरानी पत्तियाँ किनारे से अंदर की ओर पीली पड़कर लटक जाती हैं, तने का आधार फटता है और अंदर का ऊतक भूरा हो जाता है। मिट्टी में बरसों टिकने वाला Fusarium रोग।

रोगकारक
फफूँद (Fusarium oxysporum f.sp. cubense)
फैलाव
संक्रमित सकर; मिट्टी, पानी और औज़ार
किसमें बढ़ता है
संक्रमित मिट्टी; संवेदनशील किस्में
मुख्य ख़तरा
नलियाँ बंद; पौधा मुरझाकर मर जाता है

परिचय

केले का पनामा विल्ट (Fusarium उकठा) मिट्टी में रहने वाली फफूँद Fusarium oxysporum f. sp. cubense (Foc) से होता है। यह जड़ों से भीतर घुसती है और पानी ढोने वाली नलियों में बस जाती है। इससे नलियाँ बंद हो जाती हैं। पहला दिखने वाला लक्षण निचली, पुरानी पत्तियों का पीला पड़ना है, जो पत्ती के किनारे से अंदर की ओर बढ़ता है। फिर पत्तियाँ टूटकर तने के चारों ओर घाघरे की तरह लटक जाती हैं। सबसे नई पत्तियाँ कुछ समय तक हरी रह सकती हैं।

एक ख़ास निशानी है तने के आधार का लंबाई में फटना। तने या कंद को आड़ा काटें तो अंदर की नलियाँ लाल-भूरी से गहरी धारियों और बदरंगी दिखाती हैं। फफूँद मिट्टी में कई साल सुप्त बीजाणुओं (क्लैमाइडोस्पोर) के रूप में बची रहती है। यह संक्रमित सकर, मिट्टी, पानी और औज़ारों से फैलती है। पौधा एक बार संक्रमित हो जाए, तो कोई असरदार इलाज या छिड़काव नहीं है। प्रबंधन इन बातों पर टिका है। साफ़, रोगमुक्त (टिशू कल्चर) पौधे या सकर लगाएँ। प्रतिरोधी किस्में उगाएँ। मिट्टी और निकासी अच्छी रखें। संक्रमित मिट्टी या सकर को साफ़ खेतों में न ले जाएँ।

कैसे पहचानें

  • निचली, पुरानी पत्तियाँ किनारे से अंदर की ओर पीली पड़ती हैं, फिर टूटकर तने के चारों ओर घाघरे की तरह लटक जाती हैं।
  • तने का आधार लंबाई में फट जाता है।
  • तने या कंद को आड़ा काटने पर अंदर की नलियों में लाल-भूरी से गहरी धारियाँ दिखती हैं।
  • पौधे मुरझाकर मरते हैं। अक्सर टुकड़ों में, जो मिट्टी में रोग-बीजाणु बढ़ने के साथ मौसम-दर-मौसम फैलते जाते हैं।

कारण और समय

  • मिट्टी में रहने वाली फफूँद Fusarium oxysporum f. sp. cubense, जो जड़ों से घुसकर पानी की नलियाँ बंद कर देती है।
  • क्लैमाइडोस्पोर के रूप में मिट्टी में कई साल बची रहती है, इसलिए एक बार संक्रमित खेत संक्रमित ही रहता है।
  • संक्रमित सकर से फैलती है, और फफूँद ले जाने वाली मिट्टी, पानी, औज़ार और मशीन से भी।
  • संवेदनशील किस्मों पर और जिन खेतों में फफूँद पहले से हो, वहाँ ज़्यादा बुरा।

खेती और जैविक तरीक़े

  • सिर्फ़ रोगमुक्त, प्रमाणित टिशू कल्चर पौधे या स्वस्थ स्रोत के साफ़ सकर लगाएँ। उकठा वाले खेत से सकर कभी न लें।
  • जहाँ मिले, प्रतिरोधी या सहनशील किस्में उगाएँ। मिट्टी से फैलने वाले उकठे के ख़िलाफ़ यही सबसे भरोसेमंद बचाव है।
  • निकासी और मिट्टी की सेहत अच्छी रखें। जैविक खाद और जैव-एजेंट (जैसे Trichoderma) डालें, ताकि फफूँद दबी रहे।
  • प्रभावित पौधे कंद समेत उखाड़कर नष्ट करें। संक्रमित मिट्टी, सकर या पानी साफ़ खेतों में न ले जाएँ।

रासायनिक नियंत्रण

  • पनामा विल्ट से संक्रमित पौधे को ठीक करने वाला कोई असरदार छिड़काव नहीं है। नियंत्रण रोकथाम, किस्म और मिट्टी से होता है।
  • जहाँ सिफ़ारिश हो, सकर या मिट्टी का फफूँदनाशी या जैव-एजेंट से उपचार रोग का जमना घटा सकता है, पर संक्रमित पौधे को बचा नहीं सकता।
  • रसायनों से ज़्यादा ध्यान साफ़ रोपाई सामग्री, प्रतिरोधी किस्मों और मिट्टी की सेहत पर दें।
  • अपने इलाक़े के लिए सकर या मिट्टी का उपचार और किस्म की सलाह अपने KVK से पक्की कर लें।

दोबारा न हो, इसके लिए

  • नई रोपाई प्रतिरोधी किस्मों और साफ़ टिशू कल्चर पौधों पर रखें, ख़ासकर संक्रमित इलाक़ों में।
  • मिट्टी स्वस्थ और अच्छी निकासी वाली रखें, जैव-एजेंट बढ़ाएँ, और प्रभावित पौधे कंद समेत उखाड़ें।
  • संक्रमित मिट्टी, सकर, पानी या औज़ार प्रभावित खेतों से साफ़ खेतों में हरगिज़ न ले जाएँ।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरे केले की पुरानी पत्तियाँ किनारे से पीली पड़ रही हैं और तने का आधार फट रहा है। यह क्या है?

पुरानी पत्तियाँ किनारे से अंदर की ओर पीली पड़कर तने के चारों ओर लटक जाएँ और तने का आधार फटे, तो यह केले का पनामा विल्ट (Fusarium उकठा) है। आड़ा काटने पर अंदर लाल-भूरी धारियाँ भी दिखती हैं। फफूँद मिट्टी में बरसों रहती है और इसका इलाज नहीं है। प्रभावित पौधे कंद समेत उखाड़कर नष्ट करें। फिर स्वस्थ, अच्छी निकासी वाली मिट्टी में प्रतिरोधी किस्में और साफ़ टिशू कल्चर पौधे लगाएँ।

केले में पनामा विल्ट और बंची टॉप में क्या फ़र्क़ है?

दोनों देखने में काफ़ी अलग हैं। पनामा विल्ट मिट्टी की फफूँद है। यह निचली पुरानी पत्तियों को किनारे से अंदर की ओर पीला करती है, तने का आधार फाड़ती है और अंदर की नलियाँ भूरी कर देती है। पौधा मुरझाकर मर जाता है। बंची टॉप माहू से फैलने वाला विषाणु रोग है, जो ऊपर की नई पत्तियों को बौने गुच्छे में समेट देता है और शिराओं पर गहरी हरी बिंदी-डैश धारियाँ बनाता है। पनामा विल्ट को प्रतिरोधी किस्में, साफ़ सकर और मिट्टी की सेहत से संभाला जाता है। बंची टॉप को रोगी पौधे हटाकर, विषाणु-मुक्त सकर लगाकर और माहू नियंत्रण से।

पनामा विल्ट को फफूँदनाशी छिड़ककर क्यों नहीं रोका जा सकता?

क्योंकि फफूँद पौधे की नलियों के अंदर रहती है और मिट्टी में बरसों सुप्त बीजाणुओं के रूप में बची रहती है। पत्तियों पर छिड़की दवा उस तक पहुँचकर उसे ठीक नहीं कर सकती, और वह मिट्टी से फिर संक्रमण कर देती है। इसीलिए नियंत्रण रोकथाम पर टिका है। प्रतिरोधी किस्में और साफ़ टिशू कल्चर पौधे लगाएँ। मिट्टी स्वस्थ और अच्छी निकासी वाली रखें, जैव-एजेंट डालें, प्रभावित पौधे कंद समेत उखाड़ें, और संक्रमित मिट्टी या सकर साफ़ खेतों में न ले जाएँ।

लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल और क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.