Waris
सघन-बाग़बानी को उपयुक्त बढ़वार आदत सहित SKUAST-कश्मीर-मूल्यांकित किस्म, मध्यम-आकार, नरम-छिलका मेवे।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- बादाम
- प्रकार
- कलमी रोपण सामग्री
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- 3 साल में पहला फलन (कलमी)
- अपेक्षित उपज
- सघन रोपाई तले अच्छी
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छी जल-निकासी शीतोष्ण बाग़ दोमट
- जारी
- SKUAST-कश्मीर शीतोष्ण फलदार शोध कार्यक्रम; सटीक अधिसूचना वर्ष इस चरण में पुष्ट नहीं
इस किस्म के बारे में
वारिस SKUAST-कश्मीर के शीतोष्ण फलदार शोध कार्यक्रम तले मूल्यांकित व जम्मू-कश्मीर में व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली बादाम चयनों में एक है। बाग़वानी तुलनाओं में इसे लगातार सघन-बाग़बानी को अच्छी तरह उपयुक्त बढ़वार आदत सहित बताया जाता — एक वाक़ई उपयोगी गुण, कश्मीर के बादाम-विस्तार साहित्य में घाटी की सीमित करेवा भूमि पर अधिक उत्पादक पेड़ फिट करने पर कितना ज़ोर दिया जाता उसे देखते हुए। यह मध्यम-आकार, नरम-छिलका मेवे लगभग 48% दर्ज छिलाई-प्रतिशत के साथ देती, क्षेत्र की नामित रिलीज़ों में उच्च-छिलाई शालीमार व निम्न-छिलाई मखदूम के बीच बैठता एक सम्मानजनक गिरी-वसूली आँकड़ा। वारिस को कैलिफ़ोर्निया पेपर शेल व मर्स्ड जैसी आयातित किस्मों के साथ इसकी फूल-फीनोलॉजी व पर-संगति के लिए भी ख़ासतौर अध्ययन किया गया, जो एक अकेले-हिस्से किस्म के बजाय एक योजित, बहु-किस्म परागण-प्रणाली के हिस्से के रूप में इसकी भूमिका दर्शाता।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- दूरी6–7 मी, हर तीसरी कतार में एक संगत परागणकर्ता किस्म सहित
- उर्वरकयुवावस्था में संतुलित NPK खुराक, फलन शुरू होने पर बहार-व-कटाई-बाद-बँटी अधिक खुराक की ओर (पूरी समय-सारणी को फसल-गाइड देखें)
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी, अच्छी जल-निकासी दोमट; pH 6.0–7.5; कश्मीर की करेवा मिट्टी इसे अच्छी तरह सूट करती
उपज व अवधि
पकने की अवधि
3 साल में पहला फलन (कलमी)
अपेक्षित उपज
सघन रोपाई तले अच्छी
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
मुख्य कीट
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- सघन-बाग़बानी को ख़ासतौर उपयुक्त बढ़वार आदत, कश्मीर की ज़मीन-सीमित करेवा पट्टियों पर उपयोगी।
- स्थापित आयातित किस्मों के साथ पर-संगति के लिए अध्ययन की गई, एक अच्छी तरह योजित परागण-लेआउट सहारा देती।
ध्यान रखने योग्य बातें
- हर बादाम की तरह, यह स्व-असंगत है व इसे वाक़ई पर-संगत, अतिव्यापी-बहार-समय वाली परागणकर्ता किस्म के साथ लगाना चाहिए — इसे एक-किस्म ठोस हिस्से के रूप में नहीं उगाया जा सकता।
- सटीक रिलीज़-वर्ष व औपचारिक रोग-प्रतिरोध डेटा इस शोध चरण में पुष्ट नहीं हुआ — मौजूदा सिफ़ारिशें SKUAST-कश्मीर से पक्का करें।
उपयुक्त क्षेत्र
SKUAST-कश्मीर के शीतोष्ण फलदार शोध कार्यक्रम तले मूल्यांकित; वाक़ई कश्मीर घाटी की संकरी शीत-अनुकूल पट्टी तक सीमित।
- जम्मू और कश्मीर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैं अपने बाग़ में केवल वारिस लगा सकता हूँ?
नहीं — बादाम, वारिस सहित, स्व-असंगत है, तो केवल एक किस्म का ठोस हिस्सा न के बराबर फल बाँधेगा। इसे कम-से-कम एक वाक़ई पर-संगत, अतिव्यापी-बहार-समय वाली किस्म के साथ लगाएँ, जैसे कोई स्थापित आयातित किस्म या अन्य SKUAST-कश्मीर रिलीज़।
स्रोत: Compatibility Studies in Exotic and Indigenous Almond Varieties — Kashmir Valley, Genetic Diversity in Rosaceous Fruits of J&K: Apple, Apricot, and Almond. संपादकीय नीति.
