भूरी सड़न / मंजर झुलसा
एक वसंत फफूँद बीमारी जो ठंडे, गीले मौसम में बादाम के फूल व नई टहनियाँ मारती, गोंद-रिसती गाँठें छोड़ती, व आगे पकते मेवे भी सड़ा सकती — सुरक्षा लक्षण दिखने के बाद नहीं, बहार पर ठीक समय छिड़काव पर निर्भर है।
- रोगजनक
- Monilinia laxa (फफूँद)
- संक्रमित करता
- खुले फूल, टहनी, बाद में पकते मेवे/फल
- अनुकूल
- ठंडा, नम, धुंधला या बरसाती बहार-मौसम
- मुख्य जोखिम
- फूल व टहनी मृत्यु; गाँठें; बाद में फल-सड़न
परिचय
भूरी सड़न, फफूँद Monilinia laxa से होती, बादाम व अन्य गुठलीदार फलों की मंजर-समय की सबसे गंभीर बीमारियों में एक है। बीजाणु ठंडे, नम या बरसाती बहार-मौसम में खुले फूल-भागों — पंखुड़ी, स्त्रीकेसर व पुंकेसर — को संक्रमित करते, और संक्रमण जल्दी फूल मारकर उसकी टहनी में वापस बढ़ता, वह टहनी भी मारता। संक्रमित टहनियों पर गाँठें बनतीं जो अक्सर गोंद-सा पदार्थ रिसतीं, और लगातार धुंध या नम मौसम में मरे फूल व गाँठें भूरे-से-तन बीजाणु-द्रव्यमान बना सकतीं जो आगे और पास के फूल संक्रमित करते।
वही फफूँद सीज़न में बाद में पकते मेवे व फल भी संक्रमित व सड़ा सकती, ख़ासकर घायल होने पर या लंबे गीले मौसम में, हालाँकि मंजर-समय चरण (मंजर झुलसा) अधिकांश भारतीय उगाऊ-सीज़न में बादाम को सबसे ज़्यादा नुक़सान करता है। चूँकि संक्रमण एक संकरी बहार-खिड़की में तेज़ी से होता व अधिक आर्द्रता या धीमी-सूखने दशाएँ इसे कहीं बदतर करतीं, पूरा प्रबंधन-तरीक़ा गुलाबी-कली व पूर्ण-बहार पर समय पर फफूँदनाशी छिड़काव पर केंद्रित है — झुलसे फूल या टहनी-गाँठें स्पष्ट होने तक इंतज़ार का मतलब है उस सीज़न का नुक़सान पहले ही हो चुका।
कैसे पहचानें
- खुले फूल भूरे पड़ते, मुरझाते व जल्दी मरते, अक्सर गिरने के बजाय टहनी पर ही लटके रहते।
- संक्रमण मरे फूल से उसकी टहनी में वापस बढ़ता, टहनी मारकर गाँठ बनाता।
- संक्रमित टहनियों की गाँठें अक्सर गोंद-सा पदार्थ रिसतीं, व लगातार नम मौसम में भूरे-से-तन बीजाणु-द्रव्यमान बनातीं।
- सीज़न में बाद में, पकते मेवे व फल मुलायम, फैलती भूरी सड़न दिखा सकते, ख़ासकर छिलका घायल होने पर।
कारण व कब
- फफूँद Monilinia laxa, जो खुले फूलों की पंखुड़ी, स्त्रीकेसर व पुंकेसर से संक्रमित करती।
- ठीक बहार पर ठंडे, नम, धुंधले या बरसाती मौसम से भारी अनुकूल — बहार-अवधि जितनी गीली व धीमी-सूखने वाली, प्रकोप उतना बुरा।
- संक्रमित फूलों व टहनी-गाँठों के बीजाणु हवा व छींटती बारिश से फैलकर पास के और फूल संक्रमित करते।
- सीज़न में बाद का मेवा व फल-संक्रमण बदतर जहाँ फल-सतह घायल हो या पकते समय गीला मौसम बना रहे।
सांस्कृतिक व जैविक नियंत्रण
- अगली बहार से पहले, सुप्तावस्था सीज़न में संक्रमित टहनी-गाँठें छाँटकर हटाएँ ताकि आगे ले जाई गई बीजाणु-सामग्री घटे।
- बारिश या ओस बाद बेहतर हवा-चाल व तेज़ सूखने को छत्र पतला करें, क्योंकि लंबी नमी ही फफूँद को जमने देती है।
- पिछले सीज़न से पेड़ या ज़मीन पर छूटे ममीकृत फल हटाएँ, क्योंकि ये भी फफूँद सर्दी भर ले जाते।
- जहाँ संभव हो पतलाई, हैंडलिंग या पक्षी/कीट-नुक़सान से फल घायल होने से बचें, क्योंकि घाव बाद में आसान प्रवेश-द्वार बनते।
रासायनिक नियंत्रण
- गुलाबी-कली पर समय पर व पूर्ण-बहार पर दोहराया सुरक्षात्मक फफूँदनाशी छिड़काव सबसे अहम एकल नियंत्रण-उपाय है — परीक्षण लगातार दिखाते कि पूर्ण-बहार छिड़काव सबसे ज़्यादा मायने रखता।
- बहार के दौरान व बाद गीला, नम मौसम जारी रहे तो एक और छिड़काव उचित हो सकता, क्योंकि संक्रमण-अनुकूल दशाएँ कई हफ़्तों तक टिक सकतीं।
- फूल पहले से झुलस चुके या टहनी-गाँठें बन चुकीं तब छिड़काव उस सीज़न का नुक़सान नहीं पलटता — छिड़काव का मूल्य निवारक है।
- बादाम भूरी सड़न के लिए मौजूदा अनुशंसित फफूँदनाशी, समय व मात्रा स्थानीय KVK या SKUAST-कश्मीर की बाग़वानी सलाह से पक्का करें।
दोबारा न हो, इसके लिए
- गीले वसंत पर बाद में प्रतिक्रिया के बजाय गुलाबी-कली व पूर्ण-बहार छिड़काव-समय बाग़ के स्थिर वार्षिक कैलेंडर में शामिल करें।
- हर सुप्तावस्था सीज़न गाँठें छाँटें व ममीकृत फल हटाएँ ताकि अगली बहार तक कम रोगजनक बचे।
- बारिश बाद जल्दी सूखने को छत्र पर्याप्त खुला रखें, व सीज़न भर अनावश्यक फल-चोट से बचें।
- बहार-समय मौसम-पूर्वानुमान देखें व अनुमानित ठंडे, गीले दौर के आने के बाद नहीं, पहले छिड़कने को तैयार रहें।
सबसे ज़्यादा जोखिम वाली फसलें
हमारी फसल गाइडों में जहाँ यह समस्या बताई गई है — पूरी पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ के लिए कोई फसल खोलें।
विचार करने योग्य किस्में
नामी बीज किस्में जिनकी इस समस्या के प्रति प्रतिरोधकता या संवेदनशीलता उनके अपने किस्म पेज पर बताई गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ठंडे, नम मौसम के दौर बाद मेरे बादाम के फूल भूरे पड़कर मर गए। क्या हुआ?
यह भूरी सड़न (मंजर झुलसा) का क्लासिक संकेत है, फफूँद Monilinia laxa से होती, जो ठंडे, नम या बरसाती बहार-मौसम में खुले फूल सबसे तेज़ संक्रमित करती। एक बार फूल संक्रमित होने पर उसे बचाया नहीं जा सकता, और संक्रमण अक्सर टहनी में वापस बढ़कर उसे भी मार देता। अगले साल का सबक़ है गुलाबी-कली पर व फिर पूर्ण-बहार पर सुरक्षात्मक फफूँदनाशी छिड़कना, मौसम गीला होने का इंतज़ार करने के बजाय।
झुलसे फूल या टहनी-गाँठें देखने के बाद छिड़काव क्यों मदद नहीं करता?
क्योंकि फूल स्पष्ट रूप से झुलस चुके या टहनी-गाँठ बन चुकी तब तक फफूँद वह ऊतक पहले ही मार चुकी होती — फफूँदनाशी पहले से हुआ नुक़सान नहीं पलट सकता। छिड़काव का काम संक्रमण होने से पहले स्वस्थ, अभी खुले फूलों की रक्षा करना है, इसीलिए गुलाबी-कली व पूर्ण-बहार का समय लक्षण दिखने पर प्रतिक्रियात्मक छिड़काव से कहीं ज़्यादा मायने रखता है।
क्या भूरी सड़न बादाम के मेवे को भी नुक़सान कर सकती, सिर्फ़ फूलों को नहीं?
हाँ — मंजर झुलसा करने वाली वही फफूँद सीज़न में बाद में पकते मेवे व फल भी संक्रमित व सड़ा सकती, ख़ासकर सतह घायल होने या पकते समय मौसम गीला बने रहने पर। अधिकांश भारतीय बादाम-उगाऊ सीज़न में मंजर-समय चरण सबसे ज़्यादा आर्थिक नुक़सान करता, पर फल-चोट से बचना व हर सीज़न ममीकृत फल हटाना इस बाद-सीज़न संक्रमण को सीमित करने में भी मदद करता है।
लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल व क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.
