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उत्तर प्रदेशअनुदानसक्रियअपडेट 5 सितंबर 2026

पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना

बीहड़, बंजर और जलभराव वाली ज़मीन सुधारने पर 100% अनुदान, और खेती लायक बनने के बाद बागवानी व कृषि वानिकी लगाने में भी मदद।

संचालक: कृषि विभाग (भूमि संरक्षण शाखा), उत्तर प्रदेश सरकार

ज़मीन सुधार अनुदान
100%
2026-27 का लक्ष्य
43,850 हेक्टेयर
2026-27 का बजट
~₹100–125 करोड़
योजना अवधि
2022-23 से 2026-27

परिचय

उत्तर प्रदेश में 2017-18 से चल रही यह योजना उस ज़मीन को ठीक करती है जिसे खेती लायक नहीं माना जाता — बीहड़ से कटी, बंजर पड़ी, या पानी भरने से बर्बाद हुई ज़मीन। कृषि विभाग की भूमि संरक्षण शाखा गाँव चुनती है, फिर वहाँ चेकडैम और जल-संग्रहण ढांचे बनवाती है, ज़मीन समतल करवाती है और पानी निकासी के लिए नाले बनवाती है — यह सारा काम 100% अनुदान पर होता है, यानी मिट्टी के इस काम का पैसा किसान को नहीं देना पड़ता।

राज्य सरकार ने इस योजना को पांच साल और बढ़ाया है — 2022-23 से 2026-27 तक, गौतम बुद्ध नगर को छोड़कर बाकी सभी ज़िलों में। अकेले 2026-27 की मंज़ूर योजना में 43,850 हेक्टेयर का लक्ष्य है — करीब 35,600 हेक्टेयर बीहड़-बंजर ज़मीन और 8,250 हेक्टेयर जलभराव वाली ज़मीन — जिस पर लगभग ₹100–125 करोड़ खर्च होंगे। इससे पहले 2017-18 से 2021-22 के बीच 1,57,190 हेक्टेयर ज़मीन खेती लायक बनाई जा चुकी है, जिस पर करीब ₹332 करोड़ खर्च हुए, और इसमें छोटे-सीमांत किसानों, भूमिहीन मज़दूरों और SC/ST परिवारों को प्राथमिकता दी गई।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • बीहड़, बंजर और जलभराव वाली ज़मीन ठीक करने पर पूरा 100% अनुदान — चेकडैम, जल-संग्रहण ढांचे, समतलीकरण और नाले, मिट्टी के काम का कोई पैसा किसान को नहीं देना।
  • ज़मीन खेती लायक होने के बाद बागवानी और कृषि वानिकी लगाने पर आगे भी अनुदान, ताकि ज़मीन दोबारा बेकार न पड़े।
  • अकेले 2026-27 में 43,850 हेक्टेयर सुधारने का लक्ष्य, जबकि 2017-18 से 2021-22 के बीच पहले ही 1,57,190 हेक्टेयर ठीक हो चुकी है।
  • प्रोजेक्ट क्षेत्र में छोटे-सीमांत किसानों, भूमिहीन खेत मज़दूरों और SC/ST परिवारों को प्राथमिकता।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • ऐसे गाँव का किसान या भूमिधर जिसे ज़िला भूमि संरक्षण अधिकारी / कृषि विभाग ने प्रोजेक्ट क्षेत्र चुना हो
  • ज़मीन बीहड़, बंजर या जलभराव वाली दर्ज हो
  • प्रोजेक्ट क्षेत्र में छोटे-सीमांत किसान, भूमिहीन मज़दूर और SC/ST परिवार को प्राथमिकता
  • विभाग को अपनी ज़मीन पर सुधार का काम (चेकडैम, समतलीकरण, नाले) करने देने की सहमति

शामिल नहीं

  • ऐसे गाँव की ज़मीन जो अभी मौजूदा चरण के प्रोजेक्ट क्षेत्र में शामिल नहीं है

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड
  • खतौनी / भूमि रिकॉर्ड जिसमें ज़मीन बीहड़, बंजर या जलभराव दर्ज हो
  • SC/ST प्राथमिकता के लिए जाति प्रमाण पत्र
  • बैंक पासबुक
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

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    ज़िला भूमि संरक्षण अधिकारी के पास आवेदन करें

    गाँव के प्रोजेक्ट क्षेत्र घोषित होने पर, ज़िला कृषि कार्यालय के भूमि संरक्षण अधिकारी से संपर्क करें, या agridarshan.up.gov.in से आवेदन करें।

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    ज़मीन का सर्वे और चुनाव

    विभाग का स्टाफ खेत का सर्वे करके पुष्टि करता है कि वह बीहड़, बंजर या जलभराव वाली है, और प्राथमिकता के लिए आवेदक की श्रेणी जाँचता है।

  3. 3

    सुधार का काम, फिर बागवानी में मदद

    विभाग 100% अनुदान पर चेकडैम, समतलीकरण और नाले बनवाता है; ज़मीन खेती लायक होने पर बागवानी और कृषि वानिकी लगाने में अनुदान मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इस योजना में कितना अनुदान मिलता है?

ज़मीन सुधार का काम — चेकडैम, जल-संग्रहण ढांचे, समतलीकरण और नाले — पूरे 100% अनुदान पर होता है। बाद में बागवानी या कृषि वानिकी लगाने पर अलग से अनुदान मिलता है।

कौन सी ज़मीन इसमें आती है?

बीहड़, बंजर और जलभराव वाली ज़मीन, लेकिन सिर्फ उन गाँवों में जिन्हें ज़िला भूमि संरक्षण शाखा ने प्रोजेक्ट क्षेत्र चुना हो — हर गाँव एक साथ शामिल नहीं होता।

मौजूदा चरण कितना बड़ा है?

यह योजना 2022-23 से 2026-27 तक पूरे उत्तर प्रदेश में चलती है, सिवाय गौतम बुद्ध नगर के। अकेले 2026-27 की योजना में 43,850 हेक्टेयर और करीब ₹100–125 करोड़ का बजट है।

तथ्य 5 सितंबर 2026 को agridarshan.up.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.