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उत्तर प्रदेशजीवन व दुर्घटना सुरक्षासक्रियअपडेट 24 जुलाई 2026

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना

खेती के दौरान दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता पर परिवार को ₹5 लाख तक — न कोई प्रीमियम, न कोई पॉलिसी।

संचालक: राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश सरकार

मृत्यु / पूर्ण दिव्यांगता
₹5 लाख तक
60%+ दिव्यांगता
₹2 लाख
प्रीमियम
कोई नहीं — राज्य वहन करता है
दावा अवधि
घटना से 45 दिन

परिचय

यह दुर्घटना राहत है, फसल बीमा नहीं। दुर्घटना में किसान की मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता पर राज्य परिवार को ₹5 लाख तक देता है; 60 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता पर ₹2 लाख। प्रीमियम कोई नहीं देता — खर्च राज्य उठाता है।

ज़्यादातर दावे दो बातों पर तय होते हैं। कवर सिर्फ़ दर्ज भूमि मालिक तक सीमित नहीं है — परिवार के सदस्य और बटाई पर दूसरे की ज़मीन जोतने वाले भी शामिल हैं। और आवेदन घटना के 45 दिन के भीतर तहसील पहुँचना चाहिए — सही दावे भी सबसे ज़्यादा इसी वजह से ख़ारिज होते हैं।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • खेती से जुड़ी दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी पूर्ण दिव्यांगता पर परिवार को ₹5 लाख तक।
  • 60 प्रतिशत या अधिक आँकी गई दिव्यांगता पर ₹2 लाख।
  • न प्रीमियम, न नामांकन — राज्य का किसान होने भर से कवर लागू।
  • सिर्फ़ भूमि मालिक नहीं, बटाईदार और खेत में काम करने वाले परिवारजन भी शामिल।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • 18 से 70 वर्ष का किसान या परिवार का सदस्य
  • उत्तर प्रदेश का निवासी
  • दुर्घटना खेती के काम के दौरान हुई हो
  • घटना के 45 दिन के भीतर तहसील में आवेदन

शामिल नहीं

  • 45 दिन की अवधि के बाद बिना अवधि-छूट आदेश के दायर दावे
  • खेती के काम से असंबंधित घटनाएँ

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • मृत्यु प्रमाण पत्र, या सक्षम मेडिकल बोर्ड का दिव्यांगता प्रमाण पत्र
  • दुर्घटना की FIR या पंचनामा
  • जहाँ लागू हो, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट
  • दावेदार का आधार और पहचान प्रमाण
  • भूमि रिकॉर्ड या खेती का प्रमाण
  • दावेदार की बैंक पासबुक

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

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    दुर्घटना की सूचना दें और कागज़ बनवाएँ

    पहले FIR या पंचनामा, फिर मृत्यु या दिव्यांगता प्रमाण पत्र। दावा इन्हीं दो दस्तावेज़ों पर खड़ा होता है।

  2. 2

    45 दिन के भीतर तहसील में आवेदन करें

    आवेदन तहसील कार्यालय में जाता है। 45 दिन की अवधि चूकना ही अधिकांश वैध दावों के डूबने की वजह है।

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    आवेदन ट्रैक करें

    राजस्व परिषद के पोर्टल पर तहसील और जिला स्तर पर आवेदन की स्थिति दिखती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पॉलिसी ख़रीदनी या प्रीमियम देना पड़ता है?

नहीं। न नामांकन है, न प्रीमियम। राहत का खर्च राज्य उठाता है; कवर उत्तर प्रदेश के किसानों पर एक वर्ग के रूप में लागू होता है।

ज़मीन मेरे नाम नहीं है। क्या मेरा परिवार कवर है?

हाँ। योजना में परिवार के सदस्य और बटाई पर दूसरे की ज़मीन जोतने वाले भी शामिल हैं, सिर्फ़ दर्ज मालिक नहीं।

45 दिन निकल गए। क्या दावा ख़त्म?

ख़तरा बड़ा है। देर से आए आवेदन के लिए सक्षम अधिकारी से अवधि-छूट लेनी पड़ती है और ऐसे दावे अक्सर ख़ारिज होते हैं — जितनी जल्दी हो सके तहसील में आवेदन करें।

तथ्य 24 जुलाई 2026 को bor.up.nic.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.