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बिहारआपदा राहतसक्रियअपडेट 24 जुलाई 2026

मुख्यमंत्री कृषि इनपुट अनुदान योजना

बाढ़, सूखा या ओलावृष्टि से एक-तिहाई या उससे अधिक फसल खराब होने पर इनपुट अनुदान — प्रति किसान अधिकतम दो हेक्टेयर।

संचालक: कृषि विभाग, बिहार सरकार

असिंचित भूमि
₹8,500 / हेक्टेयर
सिंचित भूमि
₹17,000 / हेक्टेयर
बहुवर्षीय फसल
₹22,500 / हेक्टेयर
अधिकतम क्षेत्र
प्रति किसान 2 हेक्टेयर

परिचय

यह आपदा राहत है, जो इनपुट अनुदान के रूप में मिलती है: फसल नष्ट होने के बाद राज्य आपको दोबारा बीज-खाद ख़रीदने में मदद करता है, फसल के मूल्य की भरपाई नहीं करता। यह क्षति आकलन के बाद जिलेवार घोषित होती है, इसलिए एक प्रखंड की अधिसूचना का मतलब पूरा राज्य नहीं है।

दरें प्रति हेक्टेयर हैं और ज़मीन पर निर्भर करती हैं: असिंचित भूमि पर ₹8,500, सिंचित भूमि पर ₹17,000, और गन्ने जैसी बहुवर्षीय फसलों पर ₹22,500। दावा प्रति किसान दो हेक्टेयर तक सीमित है, और क्षति 33 प्रतिशत या अधिक आँकी जानी चाहिए। रैयत और ग़ैर-रैयत, दोनों तरह के किसान आवेदन कर सकते हैं।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • असिंचित भूमि पर ₹8,500 प्रति हेक्टेयर और सिंचित भूमि पर ₹17,000 प्रति हेक्टेयर।
  • गन्ने जैसी बहुवर्षीय फसलों पर ₹22,500 प्रति हेक्टेयर।
  • रैयत और ग़ैर-रैयत दोनों के लिए खुली — दावा वह कर सकता है जो खेती कर रहा था, सिर्फ़ मालिक नहीं।
  • पंजीकृत बैंक खाते में DBT से भुगतान, आवेदन के बाद कार्यालय जाने की ज़रूरत नहीं।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • बिहार में खेती करने वाला किसान, रैयत या ग़ैर-रैयत
  • फसल क्षति 33 प्रतिशत या अधिक आँकी गई हो
  • ज़मीन उस घटना के लिए प्रभावित घोषित जिले या प्रखंड में हो
  • DBT कृषि पोर्टल पर वैध किसान पंजीकरण संख्या के साथ पंजीकृत

शामिल नहीं

  • उस विशेष आपदा के लिए प्रभावित घोषित न किए गए जिले या प्रखंड
  • दो हेक्टेयर की सीमा से आगे के क्षेत्र के दावे

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • बिहार किसान पंजीकरण संख्या (DBT कृषि)
  • आधार कार्ड
  • भूमि रिकॉर्ड — LPC / रसीद — या ग़ैर-रैयत किसान के लिए स्वघोषणा
  • बैंक पासबुक, आधार से जुड़ी
  • ग़ैर-रैयत दावे के लिए पंचायत का प्रमाणन

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

  1. 1

    DBT कृषि पोर्टल पर पंजीकरण करें

    dbtagriculture.bihar.gov.in पर किसान पंजीकरण संख्या पहली शर्त है। आपदा से पहले यह करा लेना बाद के कई दिन बचाता है।

  2. 2

    घोषित अवधि के भीतर आवेदन करें

    क्षति अधिसूचना के बाद आवेदन जिलेवार सीमित अवधि के लिए खुलता है। प्रभावित क्षेत्र और फसल दर्ज करें।

  3. 3

    कृषि समन्वयक द्वारा सत्यापन

    किसान सलाहकार और कृषि समन्वयक मौके पर क्षति का सत्यापन करते हैं। इसके बाद DBT से भुगतान होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जिस ज़मीन पर खेती करता हूँ वह मेरी नहीं है। क्या दावा कर सकता हूँ?

हाँ। ग़ैर-रैयत किसान पंचायत स्तर पर प्रमाणित स्वघोषणा के साथ आवेदन कर सकते हैं। अनुदान उसी को मिलता है जिसकी फसल गई।

कितनी ज़मीन तक दावा कर सकते हैं?

प्रति किसान दो हेक्टेयर तक, उसी प्रति-हेक्टेयर दर पर जो ज़मीन से मेल खाती हो — असिंचित, सिंचित, या बहुवर्षीय फसल।

पोर्टल मेरा आवेदन नहीं ले रहा। क्यों?

अक्सर इसलिए कि आपका जिला या प्रखंड मौजूदा क्षति अधिसूचना में नहीं है, या आवेदन की अवधि बंद हो चुकी है। दोनों हर घटना के लिए अलग घोषित होते हैं।

तथ्य 24 जुलाई 2026 को dbtagriculture.bihar.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.