Bhaskara
सघन (500 पेड़/हे.) दूरी तले उल्लाल-3 के साथ मूल्यांकित एक उच्च-उपज कर्नाटक रिलीज़, जहाँ दोनों ने परीक्षित किस्मों में सबसे अधिक संचयी मेवा-उपज दिखाई।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- काजू
- प्रकार
- सॉफ्टवुड कलमी रोपण सामग्री
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- 3 साल में पहला फलन (कलमी)
- अपेक्षित उपज
- उच्च, सघन-रोपाई तले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शकों में
- उपयुक्त मिट्टी
- ख़राब, लैटेराइट व रेतीली तटीय मिट्टी सहनशील
- जारी
- कर्नाटक रिलीज़, ICAR-DCR, पुत्तूर के ज़रिए वितरण को मान्यता-प्राप्त; सटीक अधिसूचना वर्ष इस चरण में पुष्ट नहीं
इस किस्म के बारे में
भास्कर कर्नाटक के पुत्तूर स्थित ICAR-DCR की NHB-मान्यता-प्राप्त नर्सरी के ज़रिए रोपण-सामग्री वितरण को मान्यता-प्राप्त एक काजू रिलीज़ है, व परीक्षण-साहित्य में उल्लाल-3 से निकटता से जुड़ी — दोनों को सघन-रोपाई तुलनाओं में लगातार साथ मूल्यांकित किया जाता। 500 पेड़/हेक्टेयर की सघन दूरी पर परीक्षणों में उल्लाल-3 व भास्कर ने परीक्षित किस्मों में सबसे अधिक संचयी मेवा-उपज हासिल की, दोनों को केवल परंपरागत चौड़ी दूरी के बजाय ख़ासतौर सघन काजू-रोपाई प्रणालियों को मज़बूत चुनाव बनाते। वेंगुर्ला-7 या VRI-3 के लिए दर्ज तरह के विस्तृत प्रति-पेड़ उपज, मेवा-वज़न व छिलाई-प्रतिशत आँकड़े भास्कर के लिए इस शोध चरण में उतने विस्तार से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुए।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- दूरीसघन दूरी (~500 पेड़/हे.) पर मज़बूत प्रदर्शन करती, ज़्यादा परंपरागत 7 × 7 मी रोपाई के साथ भी
- उर्वरकफलदार पेड़ को लगभग प्रति वर्ष 500 ग्राम N, 125 ग्राम P2O5 व 125 ग्राम K2O, फूल-पूर्व व कटाई-बाद के आसपास बाँटा (पूरी समय-सारणी को फसल-गाइड देखें)
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- ख़राब, लैटेराइट, कंकरीली या रेतीली तटीय मिट्टी सहनशील; pH 5.0–6.5
उपज व अवधि
पकने की अवधि
3 साल में पहला फलन (कलमी)
अपेक्षित उपज
उच्च, सघन-रोपाई तले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शकों में
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- सघन रोपाई तले सीधे परीक्षण-तुलनाओं में सबसे अधिक संचयी मेवा-उपज में दर्शित।
- NHB-मान्यता-प्राप्त नर्सरी (ICAR-DCR, पुत्तूर) के ज़रिए वितरित, ख़रीदारों को कलम का एक ट्रेस-योग्य, गुणवत्ता-जाँचा स्रोत देती।
ध्यान रखने योग्य बातें
- विस्तृत प्रति-पेड़ उपज, मेवा-वज़न व छिलाई-प्रतिशत आँकड़े इस चरण में वेंगुर्ला-7 या VRI-3 जितने विस्तार से पुष्ट नहीं हुए — अपने ज़िले के लिए मौजूदा अपेक्षित प्रदर्शन ICAR-DCR से पक्का करें।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- कर्नाटक
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भास्कर परंपरागत चौड़ी-दूरी रोपाई को उपयुक्त है या केवल सघन प्रणालियों को?
इसे विशेष रूप से उल्लाल-3 के साथ सघन (500 पेड़/हे.) रोपाई तले मज़बूत प्रदर्शन करते दिखाया गया, जहाँ सीधा परीक्षण-प्रमाण सबसे मज़बूत है, हालाँकि इसे ज़्यादा परंपरागत दूरी पर भी उगाया जा सकता।
स्रोत: ICAR-DCR, Puttur — Directorate of Cashew Research (accredited nursery), FOCUS Cashew research in India — Journal of Horticultural Sciences (IIHR). संपादकीय नीति.
