VRI-3
पहले की VRI-1 व VRI-2 से 35–39% उपज-सुधार, निर्यात-मानक W210-ग्रेड गिरी सहित।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- काजू
- प्रकार
- सॉफ्टवुड कलमी रोपण सामग्री
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- 3 साल में पहला फलन (कलमी)
- अपेक्षित उपज
- ~10 किग्रा/पेड़; मेवा-वज़न 7.2 ग्राम; ~29.1% छिलाई, W210 गिरी-ग्रेड
- उपयुक्त मिट्टी
- ख़राब, लैटेराइट व रेतीली तटीय मिट्टी सहनशील
- जारी
- काजू शोध स्टेशन, वृधाचलम, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय; सटीक अधिसूचना वर्ष इस चरण में पुष्ट नहीं
इस किस्म के बारे में
VRI-3 तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय तले काजू शोध स्टेशन, वृधाचलम में विकसित हुई, स्टेशन की पहले की VRI-1 व VRI-2 चयनों की उत्तराधिकारी रिलीज़ के रूप में। इसे उन दो पूर्ववर्तियों से 35–39% उपज-सुधार देते दर्ज किया जाता, एक वाक़ई बड़ी पीढ़ीगत छलांग, साथ प्रति पेड़ लगभग 10 किग्रा कच्चा-मेवा औसत उपज, प्रति मेवा 7.2 ग्राम वज़न, लगभग 29.1% छिलाई-प्रतिशत, व W210 पर गिरी-ग्रेडिंग — एक निर्यात-मानक आकार-श्रेणी। साथ मिलकर, ये आँकड़े VRI-3 को इस पेज की अधिक पूर्ण रूप से दर्ज काजू रिलीज़ों में एक बनाते, तमिलनाडु किसानों को पुरानी VRI चयनों के मुक़ाबले तुलना का स्पष्ट, आँकड़ा-समर्थित आधार देते।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- दूरी7 × 7 मी परंपरागत (~204 पेड़/हे.); सघन प्रणालियों में नज़दीक लगाई जा सकती
- उर्वरकफलदार पेड़ को लगभग प्रति वर्ष 500 ग्राम N, 125 ग्राम P2O5 व 125 ग्राम K2O, फूल-पूर्व व कटाई-बाद के आसपास बाँटा (पूरी समय-सारणी को फसल-गाइड देखें)
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- ख़राब, लैटेराइट, कंकरीली या रेतीली तटीय मिट्टी सहनशील; pH 5.0–6.5
उपज व अवधि
पकने की अवधि
3 साल में पहला फलन (कलमी)
अपेक्षित उपज
~10 किग्रा/पेड़; मेवा-वज़न 7.2 ग्राम; ~29.1% छिलाई, W210 गिरी-ग्रेड
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- स्टेशन की अपनी पहले की VRI-1 व VRI-2 चयनों से एक दर्ज 35–39% उपज-सुधार।
- निर्यात-मानक W210 गिरी-ग्रेडिंग, किसानों को निर्यात-बाज़ार के लिए एक स्पष्ट गुणवत्ता-मानदंड देती।
ध्यान रखने योग्य बातें
- ~29.1% छिलाई-प्रतिशत सम्मानजनक है पर इस पेज की किस्मों में सबसे उच्च नहीं — गिरी-वसूली कुल प्रतिफल के कई कारकों में एक है।
- ख़ासतौर तमिलनाडु दशाओं के लिए विकसित व मूल्यांकित — उस क्षेत्र से काफ़ी बाहर रोपाई से पहले उपयुक्तता पक्की करें।
उपयुक्त क्षेत्र
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के काजू शोध स्टेशन, वृधाचलम में विकसित।
- तमिलनाडु
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
VRI-3, पुरानी VRI-1 व VRI-2 से कितनी बेहतर है?
इसे उसी वृधाचलम स्टेशन की उन दो पहले की रिलीज़ों से 35–39% अधिक उपज, साथ बड़े, निर्यात-ग्रेड (W210) गिरी देते दर्ज किया जाता।
स्रोत: Model Profile for 1.0 ha Cashew Cultivation — NABARD/TNAU, Cashew Varieties: Recent Developments in India — ResearchGate. संपादकीय नीति.
