Priyanka
धना के साथ एक ख़ासतौर बड़े, भारी काजू-सेब के लिए विकसित केरल-अनुशंसित किस्म, जहाँ सेब-प्रोसेसिंग असली मूल्य जोड़ती वहाँ आकर्षक।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- काजू
- प्रकार
- सॉफ्टवुड कलमी रोपण सामग्री (दोहरे-उद्देश्य)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- 3 साल में पहला फलन (कलमी)
- अपेक्षित उपज
- बड़े, प्रोसेसिंग-योग्य काजू-सेब सहित अच्छी मेवा-उपज
- उपयुक्त मिट्टी
- ख़राब, लैटेराइट व रेतीली तटीय मिट्टी सहनशील
- जारी
- केरल; मडक्कथारा काजू शोध कार्यक्रम से जुड़ा कार्य, सटीक अधिसूचना वर्ष इस चरण में पुष्ट नहीं
इस किस्म के बारे में
प्रियंका एक केरल-अनुशंसित काजू किस्म है, मडक्कथारा काजू शोध कार्यक्रम से जुड़े प्रजनन-कार्य से संबद्ध, व राज्य को धना, कनका, अमृता व मडक्कथारा-1/मडक्कथारा-2 के साथ अनुशंसित। धना की तरह, इसे ख़ासतौर एक बड़े, भारी काजू-सेब के लिए नोट किया जाता, इस जोड़ी किस्मों के लिए आमतौर 68–76.5 ग्राम रेंज में उद्धृत, दोनों को उन किसानों व छोटे प्रोसेसरों को आकर्षक बनाती जो सेब को मेवा निकालने बाद कचरा मानने के बजाय जूस, फेनी या जैम उत्पादन को क़ीमती मानते। प्रियंका के लिए विस्तृत प्रति-पेड़ कच्चा-मेवा उपज व गिरी-ग्रेड आँकड़े इस शोध चरण में वेंगुर्ला-7 या VRI-3 जितने विस्तार से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुए।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- दूरी7 × 7 मी परंपरागत (~204 पेड़/हे.); सघन प्रणालियों में नज़दीक लगाई जा सकती
- उर्वरकफलदार पेड़ को लगभग प्रति वर्ष 500 ग्राम N, 125 ग्राम P2O5 व 125 ग्राम K2O, फूल-पूर्व व कटाई-बाद के आसपास बाँटा (पूरी समय-सारणी को फसल-गाइड देखें)
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- ख़राब, लैटेराइट, कंकरीली या रेतीली तटीय मिट्टी सहनशील; pH 5.0–6.5
उपज व अवधि
पकने की अवधि
3 साल में पहला फलन (कलमी)
अपेक्षित उपज
बड़े, प्रोसेसिंग-योग्य काजू-सेब सहित अच्छी मेवा-उपज
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- एक वाक़ई बड़ा, भारी काजू-सेब जो सामान्य मेवा-उपज के ऊपर ख़रीदार या यूनिट उपलब्ध होने पर असली प्रोसेसिंग-मूल्य जोड़ता।
- राज्य के लिए रिलीज़ों के व्यापक सेट (धना, कनका, अमृता, मडक्कथारा शृंखला) का हिस्सा, एक मान्यता-प्राप्त केरल राज्य सिफ़ारिश।
ध्यान रखने योग्य बातें
- सेब-प्रोसेसिंग फ़ायदा तभी फल देता जब प्रोसेसिंग तक असली पहुँच हो — इसके बिना, मूल्य किसी अन्य किस्म की केवल मेवा-उपज जितना ही है।
- विस्तृत, स्वतंत्र रूप से पुष्ट कच्चा-मेवा उपज व गिरी-ग्रेड आँकड़े इस पेज की कुछ अन्य किस्मों जितने विस्तार से उपलब्ध नहीं थे — मौजूदा अपेक्षित प्रदर्शन केरल के कृषि शोध स्टेशनों से पक्का करें।
उपयुक्त क्षेत्र
केरल को अनुशंसित, धना, कनका, अमृता व मडक्कथारा शृंखला के साथ।
- केरल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रियंका, धना से कैसे अलग है, जबकि दोनों बड़े काजू-सेब के लिए जानी जातीं?
दोनों बड़े, प्रोसेसिंग-योग्य सेब गुण व समान सेब-वज़न आँकड़े साझा करतीं, पर प्रियंका ख़ासतौर केरल-अनुशंसित व मडक्कथारा कार्यक्रम से जुड़ी, जबकि धना कर्नाटक व केरल दोनों में अनुशंसित — इनमें चुनने से पहले क्षेत्रीय उपलब्धता व ज़िला-विशिष्ट प्रदर्शन जाँचने लायक़ व्यावहारिक कारक हैं।
स्रोत: Top Cashew Varieties for Different Regions in India — Agriculture.Institute. संपादकीय नीति.
