Black Quinoa
सबसे गहरे-छिलके वाला दाना-रंग प्रकार, भारतीय खेती में आमतौर तीनों में सबसे कम आम, अपने आकर्षक रंग-रूप के लिए लाल जितना या उससे ज़्यादा प्रीमियम पाता।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- क्विनोआ
- प्रकार
- दाना-रंग प्रकार (कोई विकसित/जारी किस्म नहीं)
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 120–150 दिन
- बीज दर
- फसल जैसी ही आम तौर पर — कतार बुवाई को लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- बीज-स्रोत अनुसार अलग-अलग; भारतीय खेती में आमतौर तीनों रंग-प्रकारों में सबसे कम आम
- उपयुक्त मिट्टी
- लवणीय / कमज़ोर
- जारी
- कोई विकसित या जारी किस्म नहीं — आयातित व निजी व्यापारित बीज-लाइनों से मिलने वाला एक दाना-रंग व्यापार-वर्ग
इस किस्म के बारे में
काली क्विनोआ गहरा, लगभग-काला बीज-आवरण रखती और सफ़ेद या लाल क्विनोआ से पकाने पर सख़्त, कुछ मिट्टी-जैसी बनावट देती, और भारत में तीनों रंग-प्रकारों में आमतौर सबसे कम उगाई जाती। अन्य रंगों की तरह, यह कोई नामित विकसित किस्म नहीं — यह आयातित या निजी व्यापारित बीज-लाइनों से मिलने वाला एक दाना-रंग व्यापार-वर्ग है, जो खुले बीज-बाज़ार के बजाय निजी निर्यातकों व अनुबंध-खेती व्यवस्थाओं से चलता। भारतीय खेती में इसकी दुर्लभता, इसके आकर्षक रंग-रूप में ख़रीदार-रुचि के साथ, कारण है कि यह लाल क्विनोआ जितना या उससे ज़्यादा भाव पाती। कृषि की दृष्टि से यह अन्य रंग-प्रकारों जैसे ही उगाई जाती, तो रंगों के बीच चुनाव मुख्यतः बाज़ार व ख़रीदार-माँग का फ़ैसला है, खेती का नहीं।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयनवंबर-दिसंबर, फसल की सामान्य रबी खिड़की
- बीज दरफसल जैसी ही आम तौर पर — कतार बुवाई को लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर
- दूरी30 सेमी कतार, कतार में लगभग 20 सेमी तक विरल
उपज व अवधि
पकने की अवधि
120–150 दिन
अपेक्षित उपज
बीज-स्रोत अनुसार अलग-अलग; भारतीय खेती में आमतौर तीनों रंग-प्रकारों में सबसे कम आम
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- भारतीय खेती में दुर्लभता व विशिष्ट गहरे रंग-रूप के कारण लाल क्विनोआ जितना या उससे ज़्यादा भाव पाती।
- सफ़ेद व लाल क्विनोआ जैसी ही कम-लागत, सूखा- व खारापन-सहनशील उगाने की ज़रूरतें।
ध्यान रखने योग्य बातें
- भारत में तीनों रंग-प्रकारों में सबसे छोटा, सबसे विशेष बाज़ार — सार्थक ज़मीन समर्पित करने से पहले असली ख़रीदार-माँग पक्का करें, क्योंकि सफ़ेद या लाल क्विनोआ से चलती मात्रा छोटी है।
- इसके पीछे कोई ICAR रिलीज़ न होने के कारण, बीज-गुणवत्ता व अंकुरण पूरी तरह निजी आपूर्तिकर्ता या अनुबंध-खेती साझेदार पर निर्भर है।
उपयुक्त क्षेत्र
क्विनोआ भारत में अभी भी एक नई फ़सल है, किसी दाना-रंग प्रकार का कोई तय खेती-पट्टा नहीं — यह इस रंग के लिए सबसे ज़्यादा रिपोर्ट किया गया राज्य है, कोई पूर्ण या आधिकारिक रूप से सुझाई सूची नहीं।
- राजस्थान
स्रोत: Quinoa Seeds in India: Cultivation in Rajasthan, Himachal Pradesh & Uttarakhand. संपादकीय नीति.
