मेघालय राज्य जैविक मिशन (MSOM) — चरण II
मुफ्त जैविक प्रमाणन, इनपुट व क्षमता-निर्माण सहायता, और जैविक किसान का समर्थन करने वाली गाँव-स्तरीय सहकारिताओं को सीधी फंडिंग।
संचालक: कृषि विभाग, मेघालय सरकार
- मिशन बजट
- ₹295 करोड़ (2024–2028)
- चरण I क्षेत्र
- 28,742 हेक्टेयर जैविक
- चरण II लक्ष्य
- +44,000 हे. · ~46,000 किसान
- प्रमाणन
- मुफ्त जैविक प्रमाणन सहायता
- चरण II लॉन्च
- 26 जून 2026 (मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा द्वारा)
परिचय
मेघालय वर्षों से खुद को जैविक-खेती राज्य के रूप में पेश करता रहा है, और मौजूदा मेघालय राज्य जैविक मिशन 2024 से 2028 तक चलने वाला ₹295 करोड़ का कार्यक्रम है। इसमें जैविक प्रमाणन की लागत (जो आमतौर पर छोटे किसान के लिए असली बाधा होती है), गाँव सहकारिताओं के ज़रिए जैविक इनपुट सहायता, और जैविक खेती पद्धति पर प्रशिक्षण शामिल है। मेघालय की अपनी जैविक प्रमाणन एजेंसी भी है — पूर्वोत्तर में ऐसी एजेंसी वाला दूसरा राज्य।
इस मिशन के चरण I ने 28,742 हेक्टेयर को जैविक खेती में लाया। चरण II को 26 जून 2026 को मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने शिलांग में महिला किसानों व सतत जैविक कृषि पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शुरू किया, और इसका लक्ष्य और 44,000 हेक्टेयर जोड़ना है, जिससे करीब 46,000 लघु व सीमांत किसानों को लाभ हो, महिला-नेतृत्व वाले समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को केंद्र में रखते हुए। राज्य का घोषित लक्ष्य करीब दो साल में 1 लाख हेक्टेयर जैविक है।
एक अलग विशेषता यह है कि जैविक इनपुट फंडिंग सिर्फ़ व्यक्तिगत किसान को नहीं, समेकित ग्राम सहकारी समितियों (IVCS) को मिलती है, ताकि गाँव समूह साझा प्रसंस्करण या भंडारण क्षमता बना सके। चरण II लॉन्च के दिन 12 ज़िलों की इन सहकारिताओं को जैविक इनपुट सहायता की दूसरी किस्त के रूप में ₹5.8 करोड़ जारी किए गए।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- मुफ्त या रियायती जैविक प्रमाणन, छोटे किसान के लिए बड़ी लागत बाधा हटाती है।
- जैविक खेती पद्धति के लिए इनपुट व क्षमता-निर्माण सहायता।
- जैविक इनपुट फंडिंग समेकित ग्राम सहकारी समितियों को साझा प्रसंस्करण/भंडारण हेतु — चरण II लॉन्च के दिन 12 ज़िलों में ₹5.8 करोड़ जारी।
- महिला-नेतृत्व वाले समूह और किसान उत्पादक संगठन चरण II की घोषित प्राथमिकता।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- मेघालय में जैविक खेती कर रहा या उसमें बदल रहा किसान या किसान समूह
- सहकारिता-फंडिंग हिस्से के लिए गाँव-स्तरीय सहकारिता बनाने या जुड़ने को तैयार
- मिशन के तहत स्थानीय कृषि विभाग कार्यालय में पंजीकृत
शामिल नहीं
- उसी उपज के लिए किसी अन्य जैविक प्रमाणन योजना में पहले से प्रमाणित व वित्तपोषित फार्म
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- भूमि रिकॉर्ड
- लागू होने पर सहकारिता/किसान समूह पंजीकरण
- बैंक पासबुक
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
गाँव सहकारिता से जुड़ें या बनाएँ
मौजूदा जैविक किसान सहकारिता से नामांकन करें, या मिशन के गाँव-स्तरीय ढाँचे के तहत नई बनाने में मदद करें।
- 2
प्रमाणन व इनपुट सहायता के लिए आवेदन करें
MSOM चरण II के तहत जैविक प्रमाणन सहायता व इनपुट मदद के लिए स्थानीय कृषि कार्यालय में पंजीकरण करें।
- 3
सहायता लें और उपज बाज़ार में बेचें
प्रमाणित व सहायता मिलने के बाद जैविक प्रमाणन की अतिरिक्त विश्वसनीयता के साथ सहकारिता के ज़रिए उपज बेचें।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- प्रमाणन, इनपुट-सहायता या सहकारिता-भुगतान की दिक्कत के लिए पहले मिशन देख रहे ब्लॉक/ज़िला कृषि कार्यालय और अपनी समेकित ग्राम सहकारी समिति में शिकायत रखें।
- हल न हो तो मेघालय की लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (MegPGRAMS) megpgrams.gov.in पर दर्ज करें, जो SMS से ट्रैकिंग नंबर देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या प्रमाणन लागत वाकई मुफ्त है?
मिशन जैविक प्रमाणन सहायता कवर करता है ताकि यह लागत छोटा किसान अकेले न उठाए — और मेघालय की अपनी प्रमाणन एजेंसी है। सटीक कवरेज के लिए स्थानीय कृषि कार्यालय से पुष्टि करें।
क्या व्यक्तिगत किसान आवेदन कर सकता है या समूह ही चाहिए?
व्यक्तिगत किसान इनपुट व प्रमाणन सहायता ले सकते हैं, लेकिन जैविक इनपुट फंडिंग समेकित ग्राम सहकारी समितियों के ज़रिए जाती है, इसलिए साझा प्रसंस्करण या भंडारण क्षमता के लिए ऐसी समिति से जुड़ना होता है।
चरण II का लक्ष्य क्या है?
चरण II का लक्ष्य और 44,000 हेक्टेयर जैविक खेती में लाना है, जिससे करीब 46,000 लघु व सीमांत किसानों को लाभ हो — चरण I के 28,742 हेक्टेयर के ऊपर। राज्य का कुल लक्ष्य करीब दो साल में 1 लाख हेक्टेयर है।
क्या चरण II में वाकई पैसा बँट रहा है?
हाँ। 26 जून 2026 को लॉन्च के दिन 12 ज़िलों की समेकित ग्राम सहकारी समितियों को जैविक इनपुट सहायता की दूसरी किस्त के रूप में ₹5.8 करोड़ जारी किए गए।
मिशन किसे प्राथमिकता दे रहा है?
लघु व सीमांत किसान, महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह, और किसान उत्पादक संगठन — चरण II को खासतौर पर महिला किसानों व जैविक कृषि पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शुरू किया गया।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को megagriculture.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
