मेरा पानी मेरी विरासत
धान छोड़कर मक्का, कपास, दलहन या बाजरा उगाने पर ₹7,000–8,000 प्रति एकड़।
संचालक: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा सरकार
- प्रोत्साहन राशि
- ₹7,000–8,000/एकड़
- लागू
- सिर्फ़ खरीफ सीज़न
- विकल्प फसल
- मक्का, कपास, दलहन, बाजरा
- पोर्टल
- मेरी फसल मेरा ब्यौरा
- लक्षित क्षेत्र
- 40मी+ गहरे भूजल वाले प्रखंड
- शुरुआत
- 2020, ~1 लाख हेक्टेयर लक्ष्य
परिचय
हरियाणा के धान क्षेत्र में भूजल तेज़ी से घट रहा है, इसलिए राज्य किसान को खरीफ में धान की जगह कुछ और उगाने के लिए सीधे भुगतान करता है। यह राशि प्रति एकड़ है, सीधे बैंक खाते में आती है, और मक्का, कपास, दलहन, बाजरा व कुछ अन्य स्वीकृत फसलों को कवर करती है।
पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर सामान्य फसल घोषणा के साथ ही होता है — अगर ज़मीन का रिकॉर्ड पहले से अपडेट है तो अलग दफ़्तर जाने की ज़रूरत नहीं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यह योजना 2020 में शुरू की, शुरुआत में उन प्रखंडों को लक्षित करते हुए जहाँ भूजल स्तर पहले ही 40 मीटर से नीचे गिर चुका था, उन प्रखंडों में क़रीब एक लाख हेक्टेयर धान से हटाने के लक्ष्य के साथ। कुछ अधिसूचित वर्षों में इस योजना में लाभ पाने के लिए किसान को अपने सामान्य खरीफ धान क्षेत्र का आधे से अधिक हिस्सा बदलना ज़रूरी रहा है, न कि कोई भी छोटा बदलाव अपने-आप योग्य बन जाए — यह मान लेने के बजाय, चालू वर्ष का दिशा-निर्देश देख लें। योजना के पहले कुछ सीज़न में ही 53,000 से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके थे।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- खरीफ में धान छोड़ने पर प्रति एकड़ ₹7,000–8,000 सीधे खाते में।
- मक्का, कपास, दलहन, बाजरा व अन्य अधिसूचित विकल्प फसल कवर।
- सीधा बैंक ट्रांसफर, कोई बिचौलिया कटौती नहीं।
- धान क्षेत्र में गिरते भूजल पर पंपिंग का बोझ कम करने में मदद।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- हरियाणा में कृषि भूमि का मालिक या पट्टेदार किसान
- ज़मीन पिछले खरीफ सीज़न में धान के नीचे रही हो
- इस खरीफ में उस ज़मीन पर स्वीकृत विकल्प फसल बोई जाए
- कुछ अधिसूचित वर्षों में योग्य होने के लिए किसान के सामान्य खरीफ धान क्षेत्र का आधे से अधिक हिस्सा बदलना ज़रूरी रहा है — सटीक सीमा के लिए चालू वर्ष की अधिसूचना देखें
- सही भूमि रिकॉर्ड के साथ मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर पंजीकृत
शामिल नहीं
- इस सीज़न भी धान के नीचे रहने वाली ज़मीन
- अपंजीकृत ज़मीन या गलत खसरा विवरण
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- आधार से जुड़ी बैंक पासबुक
- भूमि स्वामित्व या पट्टा रिकॉर्ड (जमाबंदी)
- मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण संख्या
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
फसल बदलाव दर्ज करें
मेरी फसल मेरा ब्यौरा में लॉगिन कर खेत को इस खरीफ धान की जगह विकल्प फसल के रूप में घोषित करें।
- 2
खेत सत्यापन
कृषि विभाग घोषणा को भूमि रिकॉर्ड से मिलाता है, ज़रूरत पड़ने पर खेत का दौरा भी करता है।
- 3
भुगतान
सत्यापन के बाद प्रति एकड़ राशि किसान के जुड़े बैंक खाते में सीधे आती है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- ख़ारिज घोषणा, खेत-सत्यापन विवाद, या देर से भुगतान के लिए पहले अपने प्रखंड-स्तरीय कृषि कार्यालय से, या मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के अपने सहायता विकल्प से संपर्क करें।
- समाधान न मिलने पर CM विंडो पर आगे बढ़ें, हरियाणा की लोक शिकायत निवारण व निगरानी व्यवस्था, जो 25 दिसंबर 2014 से चल रही है — cmharyanacell.nic.in पर ऑनलाइन दर्ज करें या किसी भी ई-दिशा केंद्र, DC कार्यालय या SDM कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाएँ। आपको ट्रैकिंग नंबर के साथ SMS मिलता है, और निपटान की अधिकतम तय अवधि 45 दिन है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इस योजना के लिए अलग पंजीकरण करना होगा?
नहीं — यह हर हरियाणा किसान की सामान्य मेरी फसल मेरा ब्यौरा फसल घोषणा पर ही चलता है।
क्या धान की ज़मीन का कुछ हिस्सा ही बदल सकता हूँ?
हाँ — राशि उतनी ही ज़मीन पर मिलती है जितनी असल में बदली गई हो, पूरी जोत पर नहीं। हालाँकि कुछ अधिसूचित वर्षों में किसी भी भुगतान के लिए आपके सामान्य धान क्षेत्र का आधे से अधिक हिस्सा बदलना ज़रूरी रहा है, इसलिए छोटी-सी पट्टी बदलना काफ़ी न हो — चालू वर्ष का दिशा-निर्देश देख लें।
कौन-सी फसल विकल्प में मान्य है?
मक्का, कपास (नरमा), दलहन, बाजरा व कुछ अन्य अधिसूचित खरीफ फसल — पूरी सूची के लिए agriharyana.gov.in पर मौजूदा वर्ष की अधिसूचना देखें।
यह योजना कब शुरू हुई, और क्या यह पूरे राज्य में लागू है?
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसे 2020 में शुरू किया, शुरुआत में उन प्रखंडों को लक्षित करते हुए जहाँ भूजल स्तर पहले ही 40 मीटर से नीचे गिर चुका था, उन्हीं प्रखंडों में क़रीब एक लाख हेक्टेयर धान से हटाने के लक्ष्य के साथ, पूरे राज्य में एक साथ नहीं।
असल में कितने किसानों ने इसे अपनाया है?
योजना के पहले कुछ सीज़न में ही 53,000 से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके थे — यानी यह एक असली, सक्रिय रूप से इस्तेमाल होने वाला कार्यक्रम है, महज़ घोषणा नहीं।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को agriharyana.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
