भेड़ वितरण योजना, चरण-2
चरवाहा समुदाय के परिवारों को 75% सरकारी सब्सिडी पर 20 भेड़ और 1 मेढ़े की इकाई, ताकि परंपरागत आजीविका क़र्ज़ से नहीं, चलते-फिरते झुंड से दोबारा शुरू हो।
संचालक: पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य विभाग, तेलंगाना सरकार (तेलंगाना राज्य भेड़-बकरी विकास सहकारी संघ के माध्यम से लागू)
- इकाई
- 20 भेड़ + 1 मेढ़ा
- सरकारी सब्सिडी
- इकाई लागत का 75%
- चरण-2 लक्षित परिवार
- लगभग 3.5 लाख
- न्यूनतम आयु
- 18 वर्ष
परिचय
तेलंगाना की भेड़ वितरण योजना जून 2017 में शुरू हुई, जो राज्य के गोल्ला, कुरुमा और यादव चरवाहा परिवारों में घटती भेड़ संख्या और गिरती आय का सीधा जवाब थी — ऐसे समुदाय जिनका परंपरागत पेशा भेड़ पालना है, पर बीमारी, सूखे या मजबूरी में बिक्री से खोया झुंड दोबारा जुटाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा था। 2018 की शुरुआत तक चरण-1 में राज्यभर में लगभग 3.93 लाख भेड़ इकाइयाँ दी गईं, जो तेलंगाना राज्य भेड़-बकरी विकास सहकारी संघ (TSSGDCF) के तहत गाँव स्तर की भेड़पालक सहकारी समितियों के ज़रिए चलीं।
चरण-2 की शुरुआत नलगोंडा ज़िले से राज्य के स्थापना दिवस समारोह के हिस्से के रूप में हुई, जिसमें मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और MLC ने उसी दिन अपने-अपने ज़िलों और निर्वाचन क्षेत्रों में इकाइयाँ बाँटीं। इसका लक्ष्य लगभग 3.5 लाख अतिरिक्त चरवाहा परिवार था, ₹6,000 करोड़ के नए बजट के साथ, चरण-1 जैसी ही इकाई संरचना पर — प्रति लाभार्थी 20 भेड़ और 1 मेढ़ा, 75% सरकारी सब्सिडी पर, बाक़ी हिस्सा लाभार्थी आमतौर पर बैंक ऋण से जुटाता है।
ज़िला सरकारी पोर्टल आज भी इस योजना को जारी, सक्रिय कार्यक्रम बताते हैं, और हर वित्त वर्ष में वितरण के नए दौर चल रहे हैं — यानी चरण-2 कोई एक बार का बंद हो चुका आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की भेड़-अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने की जारी कोशिश का हिस्सा है, जिसमें नस्ल चयन (नेल्लोर ब्राउन, नेल्लोर जोडिपी, डेक्कनी, मद्रास रेड) स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार होता है और सहकारी ढाँचा शुरुआती वितरण से आगे भी टिकाऊ बना रहता है।
योजना का दागी रिकॉर्ड जानना ज़रूरी है। फरवरी 2024 में रखी CAG रिपोर्ट ने पहले चरण में बड़े पैमाने पर "रीसाइक्लिंग" पकड़ी — वही झुंड बार-बार वितरित दिखाना, इकाइयाँ फ़र्ज़ी या मृत लाभार्थियों के नाम, डुप्लिकेट ईयर टैग, और शारीरिक रूप से असंभव परिवहन बिल (एक मामले में 126 भेड़ें दोपहिया पर ले जाना दिखाया गया) — सात ज़िलों में नुक़सान ₹253 करोड़ आँका, राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बाद में ₹700 करोड़ से ज़्यादा का शक़ जताया; 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे पड़े। चरण-2 के आवेदक के लिए इसका मतलब अब सख़्त जाँच है — हर पशु की ईयर-टैगिंग, फ़ोटो और जियो-टैग वाला वितरण, और रिकॉर्ड से लाभार्थी की पुष्टि — और कुछ ज़िलों में पुराने खातों के ऑडिट के चलते धीमा वितरण।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- नक़द नहीं, एक तैयार झुंड — 20 भेड़ और 1 मेढ़ा — एक इकाई के रूप में सौंपा जाता है, ताकि परिवार चालू पशुधन के साथ शुरुआत करे, न कि कहीं और ख़र्च होने वाली एकमुश्त रक़म के साथ।
- इकाई लागत का 75% सरकार देती है; लाभार्थी का 25% हिस्सा आमतौर पर पूरा नक़द अग्रिम देने के बजाय बैंक ऋण से जुटाया जाता है।
- मौत बीमा कवर शामिल — किसी भेड़ की मौत पर लगभग ₹5,000 और मेढ़े पर ₹7,000, यानी एक नुक़सान पूरी इकाई की क़ीमत ख़त्म नहीं करता।
- चारे के लिए घास बीज पर 75% सब्सिडी, जो चारे की कमी की उस समस्या को दूर करती है जिससे कई छोटे झुंड शुरुआत में ही असफल हो जाते हैं।
- लाभार्थियों को TSSGDCF के तहत गाँव स्तर की भेड़पालक सहकारी समितियों में संगठित किया जाता है, जिससे सिर्फ़ एक बार की मदद नहीं बल्कि लगातार पशु चिकित्सा सहायता और प्रजनन सलाह मिलती रहती है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- आवेदन के समय आयु 18 वर्ष या उससे अधिक
- गोल्ला, कुरुमा या यादव चरवाहा समुदाय का सदस्य, तेलंगाना का स्थायी निवासी
- भेड़ पालन का परंपरागत पेशा, या इसे परिवार की आजीविका के रूप में अपनाने की वास्तविक मंशा
- प्रति परिवार एक पात्र लाभार्थी, स्थानीय पहचान प्रक्रिया से चुना गया
शामिल नहीं
- अधिसूचित चरवाहा समुदायों से बाहर के आवेदक
- एक ही वितरण दौर में किसी पात्र परिवार को एक से ज़्यादा इकाई
- जो लाभार्थी अपना 25% हिस्सा नहीं जुटा सकते, क्योंकि इकाई बिना किसी योगदान के मुफ़्त नहीं दी जाती
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- गोल्ला/कुरुमा/यादव समुदाय की पुष्टि करने वाला जाति प्रमाण पत्र
- तेलंगाना निवास प्रमाण
- बैंक खाते का विवरण, ख़ासकर लाभार्थी हिस्से के लिए ऋण घटक लेने पर
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
गाँव स्तर पर लाभार्थी की पहचान
तीन-सदस्यीय समिति — मंडल राजस्व अधिकारी, मंडल विकास अधिकारी और एक पशु चिकित्सक — पात्र चरवाहा समुदाय के सदस्यों की पहचान और सूची बनाती है, अक्सर स्थानीय भेड़पालक सहकारी समिति की ग्राम सभाओं के ज़रिए।
- 2
ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन
पात्र आवेदक ऑफ़लाइन गाँव स्तर की प्रक्रिया के साथ-साथ पशुपालन विभाग के ई-सेवा पोर्टल elaabh.telangana.gov.in पर आवेदन करते हैं या अपने विवरण की पुष्टि कराते हैं।
- 3
बैंक ऋण जोड़ना और इकाई का वितरण
चयन के बाद लाभार्थी का 25% हिस्सा (आमतौर पर बैंक ऋण के रूप में) तय किया जाता है, और सहकारी समिति के ज़रिए एक सार्वजनिक वितरण कार्यक्रम में ईयर-टैग वाली 20 भेड़ + मेढ़े की इकाई, फ़ोटो और जियो-टैग रिकॉर्ड के साथ सौंपी जाती है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- चयन विवाद, ऋण जुड़ने के बाद इकाई न मिलना, मरे पशु का बीमा दावा न निपटना, या चारा-बीज सब्सिडी न मिलना — सहायक पशुपालन निदेशक और जिला पशुपालन अधिकारी के पास, फिर पशुपालन निदेशक के पास बात रखें — विभाग हेल्पलाइन 1962 है। आवेदन आईडी, ईयर-टैग नंबर और वितरण रिकॉर्ड संभालकर रखें।
- भ्रष्टाचार या रीसाइक्लिंग की शिकायत के लिए तेलंगाना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सही रास्ता है। बाक़ी सबके लिए तेलंगाना के प्रजावाणी पोर्टल prajavani.cgg.gov.in पर, या मंगलवार/शुक्रवार को महात्मा ज्योतिबा फुले प्रजा भवन में ख़ुद जाकर दर्ज करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या झुंड पूरी तरह मुफ़्त दिया जाता है?
नहीं। सरकार इकाई लागत का 75% देती है; लाभार्थी का 25% हिस्सा आमतौर पर पूरा नक़द अग्रिम देने के बजाय बैंक ऋण से जुटाया जाता है।
अगर इकाई मिलने के तुरंत बाद कोई भेड़ मर जाए तो क्या होगा?
इकाई में मौत बीमा कवर शामिल है — मोटे तौर पर प्रति भेड़ लगभग ₹5,000 और मेढ़े पर ₹7,000 — यानी एक नुक़सान की भरपाई होती है, आपके झुंड की क़ीमत स्थायी रूप से नहीं घटती।
मैं गोल्ला, कुरुमा या यादव समुदाय से नहीं हूँ पर भेड़ पालता हूँ। क्या मैं आवेदन कर सकता हूँ?
नहीं — यह योजना ख़ासतौर पर इन्हीं समुदायों के चरवाहा परिवारों के लिए है; इन समुदायों के बाहर के भेड़पालकों के लिए यह खुली नहीं है।
सुना है इस योजना में घोटाला हुआ था। क्या यह अब भी चल रही है?
हाँ, यह अब भी सक्रिय कार्यक्रम है। CAG ने पहले चरण में बड़े पैमाने पर "रीसाइक्लिंग" और फ़र्ज़ी लाभार्थी पकड़े (नुक़सान ₹253 करोड़, ACB को ज़्यादा का शक़), और जाँच जारी है। नए आवेदक के लिए इसका असर सख़्त जाँच है, योजना बंद होना नहीं।
अब वही भेड़ें दो बार गिने जाने से क्या रोकता है?
इकाई के हर पशु की ईयर-टैगिंग होती है, वितरण फ़ोटो और जियो-टैग वाला होता है, और इकाई देने से पहले लाभार्थी की रिकॉर्ड से पुष्टि होती है।
चयन से झुंड मिलने तक कितना समय लगता है?
यह ज़िले और आपके 25% हिस्से के बैंक ऋण के जुड़ने की रफ़्तार पर निर्भर है। पुराने चरण के खातों के ऑडिट के चलते कुछ ज़िले धीमे हैं।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को ahddf.telangana.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
