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मक्काखरीफ़हाइब्रिडअपडेट किया गया 13 अगस्त 2026

Ganga Safed 2

1963 में त्रि-मार्गीय, टॉप-क्रॉस हाइब्रिड — (सीएम 400 × सीएम 300) × सीएम 600 — के रूप में विकसित व जारी, कम्पोज़िट नहीं। दशकों से किसानों द्वारा अपनी फ़सल का बीज दोबारा बोए जाने से यह आज खुली-परागित किस्म जैसी व्यवहार करती है व वैसे ही बेची जाती है — नीचे FAQ देखें।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि100–110 दिन
अपेक्षित उपज40–50 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
मक्का
प्रकार
हाइब्रिड
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
100–110 दिन
अपेक्षित उपज
40–50 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
1963 में दिल्ली मक्का प्रजनन केंद्र से जारी, वंशावली (सीएम 400 × सीएम 300) × सीएम 600; उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल व राजस्थान के लिए अधिसूचित

इस किस्म के बारे में

गंगा सफ़ेद 2 (गंगा सफ़ेद-2 भी लिखा जाता है) भारत की सबसे पुरानी सार्वजनिक रूप से विकसित मक्का किस्मों में से एक है, जो 1960 के दशक के शुरुआती दौर के रॉकफ़ेलर फ़ाउंडेशन-सहायता प्राप्त गहन मक्का कार्यक्रम से आई। यह 1963 में दिल्ली मक्का प्रजनन केंद्र से (सीएम 400 × सीएम 300) × सीएम 600 वंशावली — इनब्रेड लाइनों का त्रि-मार्गीय, टॉप-क्रॉस हाइब्रिड संयोजन, कम्पोज़िट नहीं — के साथ जारी हुई। इसका सफ़ेद, अर्ध-फ़्लिंट दाना व सबसे पुरानी बची सार्वजनिक किस्मों में से एक होना ही इसकी आज भी बिक्री की वजह है। दशकों पुराना सार्वजनिक हाइब्रिड जननद्रव्य होने और किसानों द्वारा पीढ़ियों से अपनी फ़सल से बीज बचाकर दोबारा बोए जाने के कारण, आज के कृषि-विस्तार स्रोत आमतौर पर इसे बीज-बचत के लिए उपयुक्त खुली-परागित किस्म के रूप में बेचते व बताते हैं — यह आज इसके उपयोग/बिक्री का अंतर है, इसके प्रजनन तरीक़े का नहीं; नीचे FAQ देखें।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारहाइब्रिड
    अवधि100–110 दिन
    उपज क्षमता40–50 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधमध्यम — पत्ती झुलसा
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

100–110 दिन

अपेक्षित उपज

40–50 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • मध्यम — पत्ती झुलसा

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • भारत की सबसे लंबे समय तक टिकी सार्वजनिक मक्का किस्मों में से एक, इसलिए बीज राज्य बीज निगमों से सस्ता व व्यापक रूप से उपलब्ध रहता है
  • सफ़ेद, अर्ध-फ़्लिंट दाना, जो इसके सिफ़ारिश-क्षेत्र की क्षेत्रीय खाद्य पसंद के अनुकूल है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • उद्धृत कृषि जागरण स्रोत इस किस्म के लिए 100–110 दिन की अवधि व उपज आँकड़ा "40 से 50 क्विंटल प्रति एकड़" देता है — यहाँ इसे प्रति-हेक्टेयर आँकड़ा मानकर लिया गया है, क्योंकि सचमुच प्रति एकड़ इतनी उपज अव्यावहारिक रूप से अधिक होगी और कोई अन्य स्रोत इसकी पुष्टि नहीं करता; ऊपर अवधि व उपज इसी स्रोत के अनुसार हैं
  • एक तीसरे-पक्ष के शोध-नोट में अतिरिक्त रूप से ICAR/CIMMYT-दस्तावेज़ीकृत त्रि-मार्गीय हाइब्रिड वंशावली (जो इस रिकॉर्ड में पहले से दर्ज है, उससे मेल खाती) के साथ-साथ पौधे की ऊँचाई, भुट्टे के छिलके व डाउनी-मिल्ड्यू/रस्ट/तना-छेदक सहनशीलता के विशेष आँकड़े दावा किए गए, जो CIMMYT रिपॉज़िटरी PDF, JIRCAS आर्काइव PDF, बिहार सरकार की अधिसूचित-किस्म PDF व एक रिसर्चगेट समीक्षा से जोड़े गए थे। इन चारों की यहाँ स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी — CIMMYT व बिहार-सरकार PDF तथा रिसर्चगेट पेज ने 403 Forbidden दिया, व JIRCAS PDF खुला तो पर इस किस्म से मेल खाता कोई पाठ नहीं मिला — इसलिए ये अतिरिक्त पौधे/रोग आँकड़े नहीं जोड़े गए
  • विवरण/जारी होने के पाठ में अधिसूचित क्षेत्र उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल व राजस्थान बताया गया है, पर नीचे states सूची में पश्चिम बंगाल की जगह मध्य प्रदेश दर्ज है — जाँचे गए स्रोत यह नहीं सुलझाते कि कौन सही है, इसलिए इसे यहाँ बिना मनमाने ढंग से एक चुने चिह्नित किया गया है

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • मध्य प्रदेश
  • राजस्थान

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गंगा सफ़ेद 2 यहाँ हाइब्रिड के रूप में दर्ज है — तो किसान इसका बीज खुली-परागित किस्म की तरह बचाकर दोबारा क्यों बोते हैं?

इसका 1963 का प्रजनन रिकॉर्ड दिखाता है कि यह त्रि-मार्गीय टॉप-क्रॉस हाइब्रिड — (सीएम 400 × सीएम 300) × सीएम 600 — के रूप में जारी हुई थी, इनब्रेड लाइनों का संयोजन, न कि असली खुली-परागित कम्पोज़िट। यही इसका सही प्रजनन वर्गीकरण है, इसलिए ऊपर type फ़ील्ड में हाइब्रिड दर्ज है। पर यह पुराना, सार्वजनिक रूप से विकसित जननद्रव्य है, आधुनिक मालिकाना सिंगल-क्रॉस नहीं, इसलिए दशकों से किसानों द्वारा अपनी काटी फ़सल का बीज दोबारा बोए जाने पर भी ठीक-ठाक नतीजे मिलने से यह आज खुली-परागित किस्म जैसी व्यवहार करती है और वैसे ही बेची भी जाती है। अधिकतम ओज चाहिए तो फ़ार्म-बचाए बीज की बजाय प्रमाणित ताज़ा बीज उपयोग करें।

गंगा सफ़ेद 2 आधुनिक हाइब्रिड जैसे डीएचएम 117 से कैसे तुलना करती है?

इसकी उपज सीमा कहीं कम है, पर इसका बीज बहुत सस्ता है और किसान की अपनी फ़सल से दोबारा बोए जाने पर भी ठीक-ठाक प्रदर्शन देता है, जबकि आधुनिक सिंगल-क्रॉस हाइब्रिड को अपनी उपज-बढ़त बनाए रखने के लिए हर सीज़न ताज़ा प्रमाणित बीज चाहिए।

स्रोत: Maize Profit Booster: Choose the Best High-Yield Varieties for Smart Farming — Krishi Jagran. संपादकीय नीति.