Local Green-spined biotype
कश्मीर की डल झील सहित कई उन्हीं तालाबों में लाल-काँटेदार प्रकार के साथ उगाया जाने वाला दूसरा आम किसान-सहेजा प्रकार, हरे फल के साथ जो स्थानीय रूप से स्वाद में हल्का माना जाता।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- किसान-सहेजा कंद/पौध (स्थानीय प्रकार)
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- ~6–7 महीने
- अपेक्षित उपज
- 20–30 क्विंटल/हे., तालाब पर निर्भर
- उपयुक्त मिट्टी
- तालाब/घिरे-खेत की गाद (खड़ा पानी)
इस किस्म के बारे में
लोकल ग्रीन-स्पाइन्ड प्रकार बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल व, ख़ासतौर, कश्मीर की डल व वुलर झीलों की परंपरागत नाव-परिवार मत्स्य-पालन जैसी सिंघाड़ा-उगाई तालाबों भर लाल-काँटेदार प्रकार के साथ व्यापक रूप से उगाया जाता। लाल-काँटेदार प्रकार की तरह इसे भी किसान-सहेजे कंद या स्वयं-उगी पौध से अनौपचारिक रूप से फैलाया जाता, किसी प्रमाणित बीज चैनल से नहीं — कोई संस्थान-जारी, ब्रांडेड हरा-काँटेदार किस्म मौजूद नहीं। कुछ इलाक़ों के किसान हरे-काँटेदार फल को लाल-काँटेदार प्रकार से थोड़ा हल्का व कम स्टार्चयुक्त स्वाद में बताते, हालाँकि यह किसी दर्ज, मापे अंतर के बजाय स्थानीय पसंद व बाज़ार-आदत का मामला है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
~6–7 महीने
अपेक्षित उपज
20–30 क्विंटल/हे., तालाब पर निर्भर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- औपचारिक रूप से दर्ज नहीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- बिहार–बंगाल पट्टी व कश्मीर की डल झील मत्स्य-पालन दोनों में अच्छी तरह स्थापित, दो बहुत अलग उगाई-क्षेत्रों भर एक सच में व्यापक रिकॉर्ड देता।
- लाल-काँटेदार प्रकार के साथ ख़रीदार-विविधता के लिए पेश करने लायक़ एक हल्के-स्वाद वाला विकल्प माना जाता।
ध्यान रखने योग्य बातें
- कोई औपचारिक गुणवत्ता-गारंटी या संस्थागत बीज-स्रोत नहीं — सोर्सिंग पूरी तरह स्थानीय किसानों या तालाबों पर निर्भर।
- लाल-काँटेदार प्रकार से हल्के-स्वाद का अंतर किस्सागत है, प्रकाशित शोध में मापा नहीं गया।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- बिहार
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
- जम्मू और कश्मीर
