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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
पानी का सिंघाड़ा (वॉटर चेस्टनट)खरीफ़किसान-सहेजा कंद/पौध (स्थानीय प्रकार)अपडेट किया गया 7 सितंबर 2026

Local Green-spined biotype

कश्मीर की डल झील सहित कई उन्हीं तालाबों में लाल-काँटेदार प्रकार के साथ उगाया जाने वाला दूसरा आम किसान-सहेजा प्रकार, हरे फल के साथ जो स्थानीय रूप से स्वाद में हल्का माना जाता।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि~6–7 महीने
अपेक्षित उपज20–30 क्विंटल/हे., तालाब पर निर्भर
उपयुक्त मिट्टीतालाब/घिरे-खेत की गाद (खड़ा पानी)

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
किसान-सहेजा कंद/पौध (स्थानीय प्रकार)
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
~6–7 महीने
अपेक्षित उपज
20–30 क्विंटल/हे., तालाब पर निर्भर
उपयुक्त मिट्टी
तालाब/घिरे-खेत की गाद (खड़ा पानी)

इस किस्म के बारे में

लोकल ग्रीन-स्पाइन्ड प्रकार बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल व, ख़ासतौर, कश्मीर की डल व वुलर झीलों की परंपरागत नाव-परिवार मत्स्य-पालन जैसी सिंघाड़ा-उगाई तालाबों भर लाल-काँटेदार प्रकार के साथ व्यापक रूप से उगाया जाता। लाल-काँटेदार प्रकार की तरह इसे भी किसान-सहेजे कंद या स्वयं-उगी पौध से अनौपचारिक रूप से फैलाया जाता, किसी प्रमाणित बीज चैनल से नहीं — कोई संस्थान-जारी, ब्रांडेड हरा-काँटेदार किस्म मौजूद नहीं। कुछ इलाक़ों के किसान हरे-काँटेदार फल को लाल-काँटेदार प्रकार से थोड़ा हल्का व कम स्टार्चयुक्त स्वाद में बताते, हालाँकि यह किसी दर्ज, मापे अंतर के बजाय स्थानीय पसंद व बाज़ार-आदत का मामला है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारकिसान-सहेजा कंद/पौध (स्थानीय प्रकार)
    अवधि~6–7 महीने
    उपज क्षमता20–30 क्विंटल/हे., तालाब पर निर्भर
    रोग-प्रतिरोधऔपचारिक रूप से दर्ज नहीं
    मिट्टीतालाब/घिरे-खेत की गाद (खड़ा पानी)
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

~6–7 महीने

अपेक्षित उपज

20–30 क्विंटल/हे., तालाब पर निर्भर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • औपचारिक रूप से दर्ज नहीं

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • बिहार–बंगाल पट्टी व कश्मीर की डल झील मत्स्य-पालन दोनों में अच्छी तरह स्थापित, दो बहुत अलग उगाई-क्षेत्रों भर एक सच में व्यापक रिकॉर्ड देता।
  • लाल-काँटेदार प्रकार के साथ ख़रीदार-विविधता के लिए पेश करने लायक़ एक हल्के-स्वाद वाला विकल्प माना जाता।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • कोई औपचारिक गुणवत्ता-गारंटी या संस्थागत बीज-स्रोत नहीं — सोर्सिंग पूरी तरह स्थानीय किसानों या तालाबों पर निर्भर।
  • लाल-काँटेदार प्रकार से हल्के-स्वाद का अंतर किस्सागत है, प्रकाशित शोध में मापा नहीं गया।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • बिहार
  • उत्तर प्रदेश
  • पश्चिम बंगाल
  • जम्मू और कश्मीर