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झारखंडअनुदानसक्रियअपडेट 8 सितंबर 2026

आहार आधारित मत्स्य पालन योजना

केज, RAS या बायोफ्लॉक में मछली पालते हैं तो आहार की आधी कीमत वापस — ₹22 प्रति किलो तक, अगर आप छह तय जिलों में आते हैं।

संचालक: मत्स्य निदेशालय, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार

आहार अनुदान
50% या ₹22/किलो, जो कम हो
कवर तरीके
केज, RAS, बायोफ्लॉक
जिले
6 — रांची, रामगढ़, कोडरमा, बोकारो, धनबाद, सरायकेला
बायोफ्लॉक सीमा
2,000 किलो आहार/तालाब
भुगतान
DBT से बैंक खाते में

परिचय

खुले तालाब से केज, RAS (रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम) या बायोफ्लॉक टैंक की तरफ बढ़ते ही मछली पालन का हिसाब बदल जाता है — घनत्व बढ़ता है, पर साथ ही आहार का खर्च भी। इन सघन तरीकों में सबसे बड़ा रोज़ का खर्च आहार ही होता है, और यही योजना ठीक उसी खर्च को हल्का करने के लिए बनी है।

यह योजना आहार पर हुए खर्च का 50 प्रतिशत, अधिकतम ₹22 प्रति किलो तक, वापस करती है — बशर्ते आहार में कम-से-कम 24% प्रोटीन हो। फिलहाल यह छह जिलों — रांची, रामगढ़, कोडरमा, बोकारो, धनबाद और सरायकेला — में लागू है और केज कल्चर, RAS और बायोफ्लॉक तीनों तरीकों को कवर करती है; बायोफ्लॉक इकाई को प्रति तालाब 2,000 किलो तक आहार पर अनुदान मिल सकता है। दावा GST बिल के साथ सत्यापित होने के बाद राशि सीधे बैंक खाते में DBT से आती है।

यह आहार-कवर झारखंड के व्यापक जलाशय केज-कल्चर अभियान का हिस्सा है, जो 2011 में राष्ट्रीय प्रोटीन अनुपूरक मिशन (राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से वित्तपोषित) के तहत शुरू हुआ था और अब राज्य के बांधों पर करीब 3,625 केज चला रहा है — रांची क्षेत्र के चांडिल, कांके व गेतलसूद, धनबाद का मैथन, बोकारो के तेनुघाट व कोनार, और कोडरमा का तिलैया इनमें शामिल हैं। यही वजह है कि आहार योजना के छह अधिसूचित जिले उन्हीं जगहों से मेल खाते हैं जहाँ केज समूह पहले से मौजूद हैं — और राज्य सहकारी मत्स्य संघ इन्हीं में से चार जिलों — रांची, चांडिल (सरायकेला), धनबाद और बोकारो — में आहार मिलें भी चलाता है।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • आहार की लागत का 50% वापस, अधिकतम ₹22 प्रति किलो, अगर आहार में कम-से-कम 24% प्रोटीन हो।
  • तीनों सघन तरीके कवर — केज कल्चर, RAS और बायोफ्लॉक — जहाँ आहार का खर्च सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
  • बायोफ्लॉक इकाई प्रति तालाब 2,000 किलो तक आहार पर अनुदान ले सकती है।
  • राशि सीधे DBT से बैंक खाते में आती है, नकद लेन-देन की ज़रूरत नहीं।
  • यह सघन मत्स्य पालन के लिए अलग से बना आहार-लागत कवर है, किसी दूसरी योजना से जोड़ने की ज़रूरत नहीं।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • रांची, रामगढ़, कोडरमा, बोकारो, धनबाद या सरायकेला जिले में केज, RAS या बायोफ्लॉक इकाई चलाने वाला सक्रिय मछली पालक
  • जिला मत्स्य कार्यालय में कम-से-कम एक साल का पिछला उत्पादन रिकॉर्ड
  • अधिकृत विक्रेता से सही GST बिल पर खरीदा गया आहार
  • उसी इकाई के लिए किसी दूसरी योजना के तहत आहार अनुदान न लिया गया हो

शामिल नहीं

  • बिना GST बिल या इनवॉइस के खरीदा गया आहार
  • फिलहाल छह तय जिलों से बाहर की मत्स्य पालन इकाई
  • 24% से कम प्रोटीन वाला आहार
  • जिस इकाई को पहले से किसी दूसरी योजना में आहार अनुदान मिल रहा हो

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड (पहचान व पता प्रमाण)
  • बैंक पासबुक या खाता विवरण
  • खरीदे गए आहार का GST बिल/इनवॉइस
  • पिछले साल का उत्पादन रिकॉर्ड
  • जिला मत्स्य कार्यालय का सत्यापन प्रमाण पत्र

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

  1. 1

    जिला मत्स्य कार्यालय में अपनी इकाई दर्ज कराएं

    अपनी केज, RAS या बायोफ्लॉक इकाई को पिछले उत्पादन रिकॉर्ड के साथ दर्ज कराएं — दावे की जाँच इसी रिकॉर्ड से होती है।

  2. 2

    आहार खरीदें और GST बिल संभालकर रखें

    अधिकृत विक्रेता से कम-से-कम 24% प्रोटीन वाला आहार खरीदें और असली GST इनवॉइस संभालकर रखें — बिना बिल के दावा स्वीकार नहीं होता।

  3. 3

    दावा जमा करें, DBT से भुगतान पाएं

    GST बिल, उत्पादन रिकॉर्ड और जिला मत्स्य कार्यालय का प्रमाण पत्र जमा करें; सत्यापन के बाद लागत का 50% (अधिकतम ₹22/किलो) बैंक खाते में आ जाता है।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • दावे के सत्यापन या DBT भुगतान में देरी की शिकायत पहले उस जिला मत्स्य कार्यालय में करें जहाँ इकाई पंजीकृत है।
  • समाधान न होने पर सीएम जनसंवाद — झारखंड की सामान्य लोक-शिकायत इकाई — के टोल-फ्री हेल्पलाइन 181 (24x7, वैकल्पिक नंबर 0651-2282201) पर, cmjansamvad.jharkhand.gov.in पोर्टल पर, या [email protected] पर ईमेल कर आगे बढ़ाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यह साधारण मिट्टी के तालाब पर भी लागू है?

नहीं। यह योजना सिर्फ सघन तरीकों के लिए है — केज कल्चर, RAS (रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम) और बायोफ्लॉक टैंक। साधारण तालाब इसमें पात्र नहीं है।

अगर मेरे आहार में 24% से कम प्रोटीन है तो?

तब वह अनुदान के लिए पात्र नहीं होगा। खरीदने से पहले आहार की बोरी या बिल पर प्रोटीन प्रतिशत ज़रूर देख लें — योजना में कम-से-कम 24% ज़रूरी है।

मैं इन छह जिलों से बाहर से हूँ, क्या आवेदन कर सकता हूँ?

फिलहाल नहीं। यह योजना केवल रांची, रामगढ़, कोडरमा, बोकारो, धनबाद और सरायकेला जिलों के लिए अधिसूचित है। विस्तार की जानकारी के लिए अपने जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क करें।

क्या यह योजना तालाब या केज बनाने में भी मदद करती है?

नहीं — वह अलग योजना है। नए तालाब निर्माण पर SC/ST किसानों को 90% और अन्य को 80% अनुदान मिलता है, ₹3 लाख प्रति एकड़ की इकाई लागत पर, और जलाशय केज पर ऐतिहासिक रूप से 90% तक अनुदान मिलता रहा है। आहार आधारित मत्स्य पालन योजना सिर्फ चालू केज, RAS या बायोफ्लॉक इकाई के आहार खर्च को कवर करती है।

अनुदान-योग्य आहार कहाँ से खरीदें?

राज्य सहकारी मत्स्य संघ रांची, चांडिल (सरायकेला), धनबाद और बोकारो — छह में से चार अधिसूचित जिलों — में आहार मिलें चलाता है, इसके अलावा अन्य अधिकृत निजी विक्रेता भी हैं। कहीं से भी खरीदें, पर GST बिल ज़रूर रखें — बिना बिल दावा स्वीकार नहीं होता।

क्या इस योजना के साथ मछली पालकों के लिए दुर्घटना बीमा भी है?

हाँ, पर वह अलग लाभ है — मत्स्य विभाग की समूह दुर्घटना बीमा योजना 18-70 आयु के पंजीकृत मछली पालकों को मृत्यु या पूर्ण अपंगता पर ₹5 लाख और आंशिक अपंगता पर ₹2.5 लाख कवर देती है। नामांकन के लिए अपने जिला मत्स्य कार्यालय से पूछें।

अगर DBT भुगतान में देरी हो या दावा बिना स्पष्ट कारण अस्वीकार हो जाए तो?

पहले जिला मत्स्य कार्यालय में शिकायत करें। समाधान न हो तो सीएम जनसंवाद के टोल-फ्री 181 हेल्पलाइन या cmjansamvad.jharkhand.gov.in पर आगे बढ़ाएँ।

तथ्य 8 सितंबर 2026 को www.myscheme.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.