मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना
बकरी, सुअर, मुर्गी, बत्तख और दुधारू पशु — सबके लिए एक ही योजना, 50 से 90 प्रतिशत तक अनुदान, सबसे ज़्यादा हिस्सा महिलाओं और सबसे ज़रूरतमंद परिवारों के लिए।
संचालक: पशुपालन निदेशालय, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार
- अनुदान दायरा
- 50% – 90%
- बकरी इकाई
- 4 मादा + 1 नर (ब्लैक बंगाल)
- सुअर इकाई
- 4 मादा + 1 नर (T&D/विदेशी)
- मुर्गी व बत्तख
- लेयर + ब्रॉयलर इकाई, 15 चूज़े
- चल रही है
- वित्त वर्ष 2020-21 से
- FY2023-24 आवंटन
- ₹300cr इसी योजना के लिए
परिचय
2020-21 से चल रही यह झारखंड की छत्री (अंब्रेला) पशुधन योजना है — इसने पहले की कई अलग-अलग बिखरी हुई पशुपालन योजनाओं को एक ही झंडाबरदार कार्यक्रम में समेट दिया है, ताकि किसी परिवार को बकरी पालने, सुअर रखने, मुर्गी-बत्तख पालने या दुधारू पशु खरीदने के लिए पाँच अलग खिड़कियों पर न भटकना पड़े। राज्य का मक़सद है दूध, मांस और अंडे की माँग और उपलब्धता के बीच का फ़र्क़ पाटना, साथ ही ग्रामीण घरों को एक स्थायी अतिरिक्त आमदनी देना।
इकाइयाँ तय पैटर्न में बनती हैं: बकरी इकाई में 4 मादा और 1 नर (ब्लैक बंगाल नस्ल), सुअर इकाई में 4 मादा और 1 नर (T&D या स्वीकृत विदेशी नस्ल), और मुर्गी सहायता में बैकयार्ड/कम-लागत वाली लेयर मुर्गी और ब्रॉयलर दोनों शामिल हैं, साथ ही प्रति लाभार्थी 15 बत्तख के चूज़े। एक अलग घटक दुधारू पशु — गाय या भैंस — खरीदने और उसके लिए शेड बनाने में मदद करता है, जिसमें आपदा-पीड़ित, परित्यक्त या दिव्यांग-मुखिया वाले परिवारों की महिलाओं को 90 प्रतिशत तक और अन्य प्राथमिकता वाले लाभार्थियों को 75 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है — जो ज़्यादातर श्रेणियों के सामान्य 50 प्रतिशत अनुदान से काफ़ी ज़्यादा है।
वित्त वर्ष 2023-24 के राज्य बजट में इस योजना के तहत अधिक लाभार्थियों तक पहुँचने के लिए ₹300 करोड़ अलग से रखे गए थे, साथ ही गिरिडीह व जमशेदपुर में नए डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट और रांची में मिल्क-पाउडर/मिल्क-प्रोडक्ट प्लांट के लिए अलग से ₹180 करोड़ — यह ढाँचागत निवेश बड़े दूध उत्पादन से जुड़ा तो है, पर एक अलग परियोजना के रूप में वित्तपोषित व संचालित होता है, व्यक्तिगत परिवार के अनुदान का हिस्सा नहीं। दुधारू पशु घटक में, योजना के तहत दी जाने वाली दुधारू गाय की क़ीमत आमतौर पर लगभग ₹60,000 आँकी जाती है, और कुछ ज़िलों में लाभार्थियों को पहली गाय के करीब छह महीने बाद दूसरी गाय भी मिली है।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- बकरी, सुअर, लेयर मुर्गी, ब्रॉयलर मुर्गी और बत्तख इकाई पर 50-90% अनुदान — बाक़ी हिस्सा किसान अपनी ओर से लगाता है।
- आपदा-पीड़ित, परित्यक्त या दिव्यांग परिवार की महिलाओं को गाय-भैंस खरीदने पर 90% तक, अन्य प्राथमिकता वाले लाभार्थियों को 75% तक अनुदान।
- सहायता सिर्फ पशु तक सीमित नहीं, शेड बनाने में भी मदद मिलती है।
- कई बिखरी योजनाओं की जगह अब एक ही झंडाबरदार योजना।
- पात्र मामलों में शेड निर्माण की मज़दूरी MGNREGA से भी जोड़ी जा सकती है, जिससे किसान का अपना ख़र्च और कम होता है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- झारखंड का स्थायी निवासी जो पशुपालन कर रहा हो या शुरू करना चाहता हो
- अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, BPL, दिव्यांग और स्वयं सहायता समूह सदस्यों को प्राथमिकता
- स्वीकृत इकाई को सुरक्षित रखने लायक़ घर पर या आसपास पर्याप्त जगह
- बकरी और सुअर इकाई के लिए तय मादा-नर अनुपात बनाए रखने की सहमति
शामिल नहीं
- बकरी और सुअर इकाई में तय 4:1 मादा-नर अनुपात से हटकर बनाई गई इकाई
- वह लाभार्थी जिसे उसी तरह की इकाई पर किसी दूसरी विभागीय योजना से पहले ही लाभ मिल चुका हो
- ब्लॉक/जिला पशुपालन पदाधिकारी से सत्यापित व अग्रसारित न किया गया आवेदन
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- प्राथमिकता श्रेणी का दावा करने पर जाति/BPL/दिव्यांग प्रमाण पत्र
- बैंक पासबुक
- प्रस्तावित शेड स्थल का भूमि या निवास प्रमाण
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
ब्लॉक पशुपालन पदाधिकारी या पंचायत मुखिया से संपर्क करें
तय करें कि कौन-सी इकाई चाहिए — बकरी, सुअर, मुर्गी, बत्तख या दुधारू पशु — और ब्लॉक/जिला कार्यालय या पंचायत मुखिया से आवेदन फ़ॉर्म लें।
- 2
सत्यापन और स्वीकृति
पदाधिकारी आपकी श्रेणी, शेड स्थल और तय पशु अनुपात की जाँच करते हैं, फिर आपके हिस्से का अनुदान स्वीकृत होता है।
- 3
इकाई तैयार होने पर अनुदान जारी
शेड और इकाई तैयार होने और निरीक्षण के बाद स्वीकृत अनुदान (श्रेणी अनुसार 50-90%) जारी होता है; बाक़ी हिस्सा किसान अपनी ओर से देता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- दिए गए पशु से जुड़ी शिकायत — स्वास्थ्य, नस्ल में गड़बड़ी या वादे से बहुत कम दूध — पहले उस ब्लॉक या जिला पशुपालन पदाधिकारी को बताएं जिसने इकाई स्वीकृत की थी; कुछ ज़िलों में कम दूध देने वाली गायों की शिकायतें आई हैं, इसलिए पशु लेने से पहले उसका स्वास्थ्य रिकॉर्ड ज़रूर जाँच लें।
- समाधान न होने पर सीएम जनसंवाद — झारखंड की सामान्य लोक-शिकायत इकाई — के टोल-फ्री हेल्पलाइन 181 (24x7, वैकल्पिक नंबर 0651-2282201) पर, cmjansamvad.jharkhand.gov.in पर, या [email protected] पर ईमेल कर आगे बढ़ाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बकरी या सुअर इकाई में मादा-नर का अनुपात क्या रखना होगा?
चार मादा पर एक नर — बकरी के लिए ब्लैक बंगाल नस्ल, सुअर के लिए T&D या स्वीकृत विदेशी नस्ल। यह 4:1 अनुपात योजना में तय है और बदला नहीं जा सकता।
मेरे परिवार का घर आग में जल गया, हमें क्या मिलेगा?
आपदा-पीड़ित, परित्यक्त या दिव्यांग-मुखिया परिवार की महिलाएं सबसे ऊँची श्रेणी में आती हैं — गाय-भैंस सहित 90% तक अनुदान, प्राथमिकता के साथ प्रक्रिया।
क्या आवेदन के लिए कोई ऑनलाइन पोर्टल है?
हाँ — mpvyjharkhand.in योजना का आधिकारिक आवेदन पोर्टल है; आप ब्लॉक या जिला पशुपालन पदाधिकारी के पास, या पंचायत मुखिया के माध्यम से ऑफ़लाइन भी आवेदन कर सकते हैं, वे आपकी चुनी इकाई के सही फ़ॉर्म तक पहुँचाएंगे।
योजना के तहत दुधारू गाय की क़ीमत कितनी है, और क्या एक से ज़्यादा मिलती हैं?
योजना के तहत दी जाने वाली दुधारू गाय की क़ीमत आमतौर पर लगभग ₹60,000 आँकी जाती है। कुछ ज़िलों में लाभार्थियों को पहली गाय के करीब छह महीने बाद दूसरी गाय भी मिली है, हालाँकि यह स्थानीय क्रियान्वयन पर निर्भर करता है।
अगर मिली गाय उम्मीद से बहुत कम दूध दे तो?
कुछ ज़िलों (धनबाद सहित) में ऐसा हुआ है। तुरंत ब्लॉक या जिला पशुपालन पदाधिकारी को बताएं — पशु का स्वास्थ्य व दूध-उत्पादन जाँच करवाने को कहें, और समाधान न होने पर सीएम जनसंवाद के ज़रिए आगे बढ़ाएँ।
क्या गिरिडीह, जमशेदपुर और रांची के नए डेयरी प्लांट के लिए ₹180 करोड़ मेरे व्यक्तिगत अनुदान का हिस्सा है?
नहीं। यह वित्त वर्ष 2023-24 के उसी बजट में घोषित राज्य-स्तरीय दूध प्रसंस्करण व पाउडर प्लांट के लिए अलग ढाँचागत राशि है — इससे किसी किसान की व्यक्तिगत इकाई अनुदान में न कुछ जुड़ता है, न घटता है।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को animalhusbandry.jharkhand.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
