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पश्चिम बंगालआपदा राहतसक्रियअपडेट 8 सितंबर 2026

मत्स्यजीबी बंधु (मृत्यु सहायता) योजना, 2023

18 से 60 साल के पंजीकृत मछुआरे की किसी भी कारण मृत्यु पर परिवार को एक बार में ₹2 लाख — ताकि कमाने वाला खोने के साथ ही सहारा भी न छूटे।

संचालक: मत्स्य, जलीय कृषि, जलीय संसाधन एवं मत्स्य पालन बंदरगाह विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार

मृत्यु सहायता
₹2,00,000 एक बार
लागू तारीख़
1 अप्रैल 2023
मछुआरे की उम्र
18 से 60 साल
मृत्यु का कारण
कोई भी कारण मान्य

परिचय

मछली पकड़ने के काम में वह जोखिम है जो ज़मीन पर खेती में नहीं होता — नाव, गहरा पानी, और मौसम जो बिना चेतावनी बदल जाए। 2023 के राज्य बजट में घोषित और 1 अप्रैल 2023 से लागू, मत्स्यजीबी बंधु (मृत्यु सहायता) योजना इस जोखिम को काग़ज़ी झंझट से नहीं, नक़द से हल्का करती है: अगर 18 से 60 साल का पंजीकृत मछुआरा किसी भी कारण से मर जाए, तो नामांकित व्यक्ति को एक बार में ₹2,00,000 मिलते हैं।

"मछुआरा" शब्द को यहाँ व्यापक रूप से लिया गया है। इसमें मछली पालक, नाव बनाने वाले, मछली पकड़ने वाले, हैचरी मालिक व कर्मी, केकड़ा पकड़ने व मोटा करने वाले, मछली विक्रेता (थोक या खुदरा) और खुटी (मछली उतारने के प्लेटफ़ॉर्म) पर काम करने वाले सभी आते हैं — सिर्फ़ वे नहीं जो पानी में नाव लेकर जाते हैं। एक शर्त में कोई ढील नहीं है: मृतक का मत्स्य विभाग के मछुआरा पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत होना ज़रूरी है, तभी भुगतान होता है।

दावा मृत्यु के तीन महीने के भीतर ज़िले के सहायक मत्स्य निदेशक के पास जाता है; देर से आया दावा ख़त्म नहीं होता, पर उसे ज़ोनल उप मत्स्य निदेशक तय करते हैं। मत्स्य विस्तार अधिकारी मौके पर जाँच करते हैं (लक्ष्य 7 कार्यदिवस), और पूरी स्वीकृति पूर्ण आवेदन के 30 कार्यदिवस के भीतर होनी चाहिए, ज़िला स्वीकृत सूची अपनी वेबसाइट पर डालता है। एक परिवार एक ही मृत्यु पर सिर्फ़ एक राज्य मृत्यु-लाभ ले सकता है — यह योजना, या कृषक बंधु मृत्यु लाभ, या सर्पदंश / बिजली गिरने की राहत — और इस बारे में स्व-घोषणा देता है।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • ₹2,00,000 सीधे नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में एक ही किस्त में।
  • किसी भी कारण से मृत्यु कवर होती है, सिर्फ़ समुद्र या पानी में दुर्घटना नहीं।
  • "मछुआरा" की व्यापक परिभाषा — मछली पालक, नाव बनाने वाले, पकड़ने वाले, हैचरी मालिक, केकड़ा पकड़ने वाले, विक्रेता और खुटी कर्मी, सभी पंजीकृत होने पर पात्र।
  • ऑनलाइन आवेदन (mjbdb-fisheries.wb.gov.in) और जिला सहायक मत्स्य निदेशक के पास ऑफ़लाइन रास्ता, दोनों उपलब्ध — यानी पंजीकरण ज़रूरी है, इंटरनेट नहीं।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • मृतक मत्स्य विभाग के मछुआरा पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत हो
  • मृत्यु के समय मृतक की उम्र 18 से 60 साल के बीच हो
  • मृत्यु 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद हुई हो
  • आवेदक मृतक का पंजीकृत नामांकित व्यक्ति हो (या नामांकन न होने पर वैध उत्तराधिकारी)

शामिल नहीं

  • मृतक कभी मछुआरा पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत नहीं था
  • मृत्यु के समय उम्र 18 साल से कम या 60 साल से ज़्यादा थी
  • मृत्यु योजना की लागू तारीख़ 1 अप्रैल 2023 से पहले हुई
  • दावेदार मृतक मछुआरे की हत्या के मुक़दमे में हो
  • उसी मृत्यु का किसी अन्य राज्य मृत्यु-लाभ योजना से पहले ही मुआवज़ा मिल चुका हो

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • पश्चिम बंगाल निवास प्रमाण
  • मृतक और आवेदक का पहचान पत्र — आधार, पैन, पासपोर्ट, वोटर कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस
  • मृत्यु प्रमाण पत्र
  • मृतक का मछुआरा पंजीकरण कार्ड
  • आवेदक की स्व-घोषणा, और आवेदक नाबालिग हो तो अभिभावक घोषणा
  • आवेदक की बैंक पासबुक का पहला पन्ना

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

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    पंजीकरण जाँचें और दस्तावेज़ इकट्ठा करें

    देखें कि मृतक मछुआरा पंजीकरण पोर्टल पर था या नहीं, फिर मृत्यु प्रमाण पत्र, पंजीकरण कार्ड, पहचान और बैंक दस्तावेज़ इकट्ठा करें।

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    ऑनलाइन या जिला कार्यालय से आवेदन करें

    mjbdb-fisheries.wb.gov.in पर मछुआरे के पंजीकरण नंबर और फ़ोन नंबर से आवेदन करें, या जिले के सहायक मत्स्य निदेशक के पास फ़ॉर्म व दस्तावेज़ जमा करें।

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    सत्यापन और भुगतान

    मत्स्य विस्तार अधिकारी मौके पर जाँच करते हैं (लक्ष्य 7 कार्यदिवस), सहायक मत्स्य निदेशक स्वीकृति व भुगतान करते हैं (पूरी प्रक्रिया का लक्ष्य 30 कार्यदिवस), और ₹2,00,000 नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में DBT से जमा होते हैं।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • जाँच 30 कार्यदिवस के मानक से आगे खिंचे, दावा बिना साफ़ कारण ख़ारिज हो, या स्वीकृत राशि न आए — तो ज़िले के सहायक मत्स्य निदेशक (जो स्वीकृति और भुगतान दोनों करते हैं) और फिर ज़ोनल उप मत्स्य निदेशक व मत्स्य निदेशक के पास बात रखें। तीन महीने से बाद का दावा ज़ोनल उप निदेशक तय करते हैं, ADF नहीं। ज़िला स्वीकृत सूची अपनी वेबसाइट पर डालता है — उसे देखें। विभाग हेल्पलाइन: 033-2357 0077।
  • विभाग से आगे, पश्चिम बंगाल का CMO शिकायत पोर्टल / लोक शिकायत निगरानी प्रणाली cmo.wb.gov.in इस्तेमाल करें — यह ट्रैक होता है और विभागाध्यक्ष तक जाता है। मछुआरे का पंजीकरण नंबर और आवेदन रसीद संभालकर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मृत्यु दुर्घटना से ही होनी चाहिए?

नहीं। योजना "किसी भी कारण" से मृत्यु को कवर करती है — यह समुद्र में दुर्घटना या डूबने तक सीमित नहीं है।

मृतक मछली पकड़कर गुज़ारा करता था पर विभाग में पंजीकृत नहीं था। क्या परिवार आवेदन कर सकता है?

नहीं। मृत्यु से पहले मछुआरा पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण ज़रूरी है — यह एक शर्त है जिसमें कोई ढील नहीं दी जाती।

क्या यह सिर्फ़ नाव लेकर समुद्र जाने वालों के लिए है?

नहीं। मछली पालक, नाव बनाने वाले, हैचरी मालिक, केकड़ा पकड़ने वाले, मछली विक्रेता और खुटी कर्मी भी कवर होते हैं, बशर्ते वे अपने मछली-संबंधी पेशे में पंजीकृत हों।

आवेदन के लिए कितना समय है?

मृत्यु के तीन महीने के भीतर, ज़िले के सहायक मत्स्य निदेशक के पास। इसके बाद दायर दावा ख़त्म नहीं होता, पर उसे ADF की जगह ज़ोनल उप मत्स्य निदेशक स्वीकृत करते हैं।

क्या उसी मृत्यु पर यह और कृषक बंधु मृत्यु लाभ दोनों ले सकते हैं?

नहीं। एक परिवार एक मृत्यु पर सिर्फ़ एक राज्य मृत्यु-लाभ ले सकता है — यह योजना, या कृषक बंधु मृत्यु लाभ, या सर्पदंश / बिजली राहत — और इस बारे में स्व-घोषणा देनी होती है। झूठा दावा 12% वार्षिक ब्याज सहित वसूला जाता है।

पैसा आने में कितना समय लगता है?

मौके की जाँच 7 कार्यदिवस में और पूरी स्वीकृति पूर्ण आवेदन के 30 कार्यदिवस में होनी चाहिए; फिर ₹2 लाख नामांकित व्यक्ति को DBT से मिलते हैं।

तथ्य 8 सितंबर 2026 को mjbdb-fisheries.wb.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.