स्वर्ण मत्स्य योजना
पूर्ब मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के लिए खारे पानी की मत्स्य पालन सहायता योजना — सरकार की ओर से बीज और एरेटर, चुने गए घटक के हिसाब से प्रति बीघा ₹82,000 तक सहायता।
संचालक: मत्स्य, जलीय कृषि, जलीय संसाधन एवं मत्स्य पालन बंदरगाह विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार
- झींगा मोनोकल्चर
- ₹82,000/बीघा
- झींगा-मुलेट पॉलीकल्चर
- ₹75,000/बीघा
- वन्नामेई झींगा मोनोकल्चर
- ₹77,250/बीघा
- केकड़ा मोटा करना
- ₹42,500/बीघा
परिचय
मई 2021 में चक्रवात यास ने पश्चिम बंगाल के तट से टकराकर दक्षिण बंगाल के डेल्टा में खारे पानी के झींगा और केकड़ा तालाबों को खारे पानी और मलबे से भर दिया। मत्स्य विभाग ने 2021-22 में स्वर्ण मत्स्य योजना को एक प्रमुख राहत योजना के रूप में शुरू किया, जिसमें ₹1,683.25 लाख की प्रशासनिक मंज़ूरी दी गई, ताकि पूर्ब मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के प्रभावित खारे पानी के मछली पालकों के तालाब फिर से उत्पादन दे सकें।
योजना चार अलग-अलग खेती घटकों के रूप में चलती है, हर एक की अपनी प्रति बीघा सरकारी सहायता के साथ: झींगा मोनोकल्चर (₹82,000), झींगा-मुलेट पॉलीकल्चर (₹75,000), वन्नामेई झींगा मोनोकल्चर (₹77,250), और केकड़ा मोटा करना (₹42,500, 150-200 ग्राम आकार के केकड़ों के साथ)। सरकार का हिस्सा बीज — झींगा बीज, मुलेट बीज या पानी के केकड़े — और एरेटर देता है; किसान बढ़वार के दौरान खाद, चारा और प्रोबायोटिक्स देता है, प्रति लाभार्थी लगभग 1 बीघा की इकाई पर।
स्वर्ण मत्स्य योजना अब भी मत्स्य विभाग की मौजूदा योजनाओं की सूची में मत्स्यजीबी बंधु और मत्स्यजीबी क्रेडिट कार्ड के साथ शामिल है, इसलिए तीनों अधिसूचित ज़िलों के खारे पानी के किसान को यह मानने से पहले कि योजना बंद हो गई, ज़िला मत्स्य कार्यालय से मौजूदा घटक-वार आवंटन की जाँच करनी चाहिए।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- चुने गए चार घटकों में से जो भी स्वीकृत हो, उसके अनुसार सरकार की ओर से झींगा बीज, मुलेट बीज या पानी के केकड़े (150-200 ग्राम), साथ में एरेटर।
- झींगा मोनोकल्चर के लिए प्रति बीघा ₹82,000 तक सहायता, चारों घटकों में सबसे ज़्यादा।
- झींगा-मुलेट पॉलीकल्चर के लिए ₹75,000 प्रति बीघा और वन्नामेई झींगा मोनोकल्चर के लिए ₹77,250 प्रति बीघा।
- केकड़ा मोटा करने के लिए ₹42,500 प्रति बीघा, उन किसानों के लिए जिनके तालाब झींगे की बजाय केकड़ा पालन के लिए उपयुक्त हैं।
- चक्रवात यास की खारे पानी की बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित तीन ज़िलों पर केंद्रित, पूरे राज्य में बिखराव की बजाय।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- पूर्ब मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना या दक्षिण 24 परगना का खारे पानी का मछली पालक
- चुने गए घटक के लिए उपयुक्त तालाब या जल निकाय — झींगा मोनोकल्चर, झींगा-मुलेट पॉलीकल्चर, वन्नामेई झींगा, या केकड़ा मोटा करना
- बढ़वार के दौरान किसान का हिस्सा — खाद, चारा और प्रोबायोटिक्स — देने में सक्षम
- प्रति लाभार्थी दावे की इकाई लगभग 1 बीघा
शामिल नहीं
- पूर्ब मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के बाहर के किसान
- सिर्फ़ मीठे पानी के तालाब जहाँ खारे पानी की पहुँच नहीं है
- अधिसूचित 1 बीघा प्रति लाभार्थी इकाई से ज़्यादा क्षेत्र का दावा
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- पहचान और पता प्रमाण (आधार, वोटर आईडी)
- खारे पानी के तालाब का स्वामित्व या पट्टा दस्तावेज़
- मछुआरा पंजीकरण कार्ड, यदि पहले से बना हो
- बैंक पासबुक का पहला पन्ना
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
ज़िला मत्स्य कार्यालय से संपर्क करें
पूर्ब मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना या दक्षिण 24 परगना के खारे पानी के किसान ज़िले के सहायक मत्स्य निदेशक से मौजूदा घटक-वार आवंटन जानने और रुचि दर्ज कराने के लिए संपर्क करें।
- 2
घटक चयन और सत्यापन
सहायता स्वीकृत करने से पहले विभाग तालाब और चुने गए घटक — झींगा मोनोकल्चर, झींगा-मुलेट पॉलीकल्चर, वन्नामेई झींगा, या केकड़ा मोटा करना — के लिए उसकी उपयुक्तता जाँचता है।
- 3
सामग्री आपूर्ति और भंडारण
विभाग बीज (झींगा/मुलेट बीज या पानी के केकड़े) और एरेटर देता है; किसान तालाब में भंडारण करता है और चक्र के दौरान खाद, चारा और प्रोबायोटिक्स देता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- दर्ज रुचि आगे न बढ़े, तालाब को ग़लत तरीके से अनुपयुक्त बताया जाए, या सीज़न के लिए स्वीकृत बीज और एरेटर न मिलें — तो मत्स्य विस्तार अधिकारी और ज़िले के सहायक मत्स्य निदेशक, फिर ज़ोन के उप मत्स्य निदेशक और मत्स्य निदेशक के पास बात रखें। विभाग हेल्पलाइन: 033-2357 0072।
- विभाग से आगे, पश्चिम बंगाल का CMO शिकायत पोर्टल / लोक शिकायत निगरानी प्रणाली cmo.wb.gov.in इस्तेमाल करें — यह ट्रैक होता है और विभागाध्यक्ष तक जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या स्वर्ण मत्स्य योजना सिर्फ़ 2021 के चक्रवात यास से प्रभावित किसानों के लिए है?
यह 2021-22 में विशेष रूप से तीन अधिसूचित ज़िलों के यास-प्रभावित खारे पानी के किसानों की मदद के लिए शुरू हुई थी, और मत्स्य विभाग अब भी इसे अपनी मौजूदा योजनाओं में शामिल रखता है — मौजूदा साल के आवंटन और कवरेज के लिए ज़िला कार्यालय से जाँच करें।
चारों घटकों में सबसे ज़्यादा प्रति बीघा सहायता किसमें मिलती है?
झींगा मोनोकल्चर में, ₹82,000 प्रति बीघा तक, उसके बाद वन्नामेई झींगा मोनोकल्चर में ₹77,250 और झींगा-मुलेट पॉलीकल्चर में ₹75,000। केकड़ा मोटा करने में ₹42,500 प्रति बीघा मिलता है।
क्या मुझे नक़द मिलता है या सामग्री?
सरकार का हिस्सा सामग्री के रूप में है — बीज (झींगा बीज, मुलेट बीज या पानी के केकड़े) और एरेटर। किसान बढ़वार के चक्र के लिए खाद, चारा और प्रोबायोटिक्स देता है।
एक किसान कितने तालाब क्षेत्र का दावा कर सकता है?
इकाई प्रति लाभार्थी लगभग 1 बीघा है। इससे बड़े क्षेत्र का दावा इस योजना में कवर नहीं होता।
मेरा तालाब केकड़े के लिए ठीक है, झींगे के लिए नहीं — क्या मेरे लिए कुछ है?
हाँ। केकड़ा मोटा करने वाला घटक प्रति बीघा ₹42,500 देता है और मोटा करने के लिए 150–200 ग्राम के पानी के केकड़े देता है, उन तालाबों के लिए जो झींगे की बजाय केकड़े के लिए बेहतर हैं।
योजना किन ज़िलों में लागू है?
पूर्ब मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना — चक्रवात यास से सबसे ज़्यादा प्रभावित तीन खारे पानी के ज़िले। इन तीन ज़िलों से बाहर का किसान कवर नहीं है।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को wbfisheries.wb.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
