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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
कपासखरीफ़हाइब्रिडअपडेट किया गया 12 अगस्त 2026

Bt hybrid (Bollgard II event)

एक ही जीईएसी-मान्य इवेंट पर कई कंपनियों के नाम से बिकती है — अंतर्निहित सुरक्षा सुंडी समूह के ख़िलाफ़ है, और गुलाबी सुंडी के लिए कटाई के बाद ठूँठ नष्ट करना अब भी ज़रूरी है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि160–170 दिन
अपेक्षित उपज18–22 क्विंटल/हेक्टेयर (कपास सहित बीज)
उपयुक्त मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

फसल
कपास
प्रकार
हाइब्रिड
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
160–170 दिन
अपेक्षित उपज
18–22 क्विंटल/हेक्टेयर (कपास सहित बीज)
उपयुक्त मिट्टी
चिकनी / काली मिट्टी
जारी
2006 में GEAC मंज़ूरी · माहिको मॉन्सेंटो बायोटेक से लाइसेंस प्राप्त इवेंट, कई कंपनियाँ अपने हाइब्रिड नामों से बेचती हैं

इस किस्म के बारे में

"बीटी हाइब्रिड (बॉलगार्ड II इवेंट)" कोई एक ICAR-जारी किस्म नहीं है — यह कई बीज कंपनियों के हाइब्रिडों की एक श्रेणी है जिनमें एक ही बॉलगार्ड II आनुवंशिक इवेंट होता है, जो माहिको मॉन्सेंटो बायोटेक से लाइसेंस प्राप्त है और भारत की जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) ने इसे 2006 में व्यावसायिक खेती के लिए मंज़ूरी दी। यह इवेंट पौधे के अपने ऊतक में दो बीटी जीन — Cry1Ac और Cry2Ab — जोड़ता है, जिससे सुंडी समूह (अमेरिकन, चित्तीदार व — शुरुआत में — गुलाबी सुंडी) के ख़िलाफ़ अंतर्निहित सुरक्षा मिलती है। ICAR-CICR, नागपुर 2005 से सरकार की बीटी रेफ़रल प्रयोगशाला है, जो बीज खेप में Cry जीन की मौजूदगी की जाँच करती है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारहाइब्रिड
    अवधि160–170 दिन
    उपज क्षमता18–22 क्विंटल/हेक्टेयर (कपास सहित बीज)
    रोग-प्रतिरोधसुंडी समूह से बचाव — गुलाबी सुंडी से नहीं, जिसने प्रतिरोध विकसित कर लिया है
    मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

160–170 दिन

अपेक्षित उपज

18–22 क्विंटल/हेक्टेयर (कपास सहित बीज)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • सुंडी समूह से बचाव — गुलाबी सुंडी से नहीं, जिसने प्रतिरोध विकसित कर लिया है

प्रबंधन सुझाव

  • हर बीटी हाइब्रिड ब्लॉक के चारों ओर अनिवार्य रिफ्यूजी लगाएँ — ग़ैर-बीटी कपास की 5 सीमा-पंक्तियाँ, या खेत क्षेत्र का 20%, जो भी ज़्यादा हो — यह भारत सरकार की अनिवार्य शर्त है, वैकल्पिक नहीं
  • आख़िरी चुनाई के तुरंत बाद कपास के ठूँठ नष्ट करके हटा दें — गुलाबी सुंडी पुराने ठूँठों व बिना चुने डोडों में सर्दी बिताती है, और यह अब मुख्य बचाव है क्योंकि यह कीट क़रीब 2015 तक बॉलगार्ड II के प्रति प्रतिरोध विकसित कर चुका है

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • सुंडी समूह के ख़िलाफ़ अंतर्निहित सुरक्षा से उस कीट समूह के लिए ज़रूरी छिड़काव कम हो जाते हैं
  • एक ही इवेंट पर कई कंपनियों के हाइब्रिड उपलब्ध, अलग-अलग क्षेत्रों व मिट्टी के लिए ढले हुए

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बॉलगार्ड II के ख़िलाफ़ गुलाबी सुंडी का प्रतिरोध अब व्यापक है — यह तकनीक अब इस ख़ास सुंडी प्रजाति से भरोसेमंद बचाव नहीं देती, केवल अमेरिकन व चित्तीदार सुंडी से
  • ग़ैर-बीटी हाइब्रिड या खुली-परागित किस्म से ज़्यादा बीज लागत, और रस-चूसक कीटों (जैसिड, सफ़ेद मक्खी, थ्रिप्स, मिलीबग) से कोई अंतर्निहित सुरक्षा नहीं
  • रिफ्यूजी न लगाने से इलाक़े में बीटी कपास उगाने वाले सभी किसानों के लिए प्रतिरोध जल्दी बढ़ता है, सिर्फ़ अपने खेत के लिए नहीं

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • गुजरात
  • महाराष्ट्र
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • पंजाब

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हर कंपनी के हाइब्रिड में बीटी कपास एक जैसा होता है?

अंतर्निहित आनुवंशिक इवेंट (बॉलगार्ड II, जिसमें Cry1Ac व Cry2Ab हैं) आमतौर पर एक जैसा है, जो माहिको मॉन्सेंटो बायोटेक से लाइसेंस प्राप्त है — पर अलग-अलग कंपनियाँ इसे अलग मूल किस्मों में जोड़ती हैं, इसलिए अवधि, छत्र व क्षेत्रीय उपयुक्तता जैसे गुण ब्रांड के हिसाब से बदलते हैं।

क्या बीटी कपास अब भी गुलाबी सुंडी से बचाती है?

भरोसे से नहीं। बॉलगार्ड II के प्रति खेत-स्तर का प्रतिरोध पहली बार CICR ने क़रीब 2015 में बताया, जो काफ़ी हद तक अपर्याप्त रिफ्यूजी बुवाई से जुड़ा था — इस कीट के लिए अब कटाई के बाद ठूँठ नष्ट करना व रिफ्यूजी का पालन बीटी गुण से ज़्यादा मायने रखता है।

बीटी कपास के लिए कितना रिफ्यूजी क्षेत्र चाहिए?

ग़ैर-बीटी कपास की 5 सीमा-पंक्तियाँ, या कुल खेत क्षेत्र का 20%, जो भी ज़्यादा हो — यह हर बीटी हाइब्रिड के लिए भारत सरकार की अनिवार्य शर्त है।