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मूंगसभी सीज़नखुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

IPM 02-3

आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर से जारी — 2009 में उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए जारी, फ़ोटो- व थर्मो-असंवेदनशील इसलिए खरीफ़ व गर्मी दोनों में बोई जा सकती है, आईआईपीआर की अपनी बेंचमार्क जाँच-किस्म के रूप में उपयोग होती है।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधि65–70 दिन
अपेक्षित उपज12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
मूंग
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
65–70 दिन
अपेक्षित उपज
12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
2009 में आईसीएआर-आईआईपीआर, कानपुर द्वारा उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए जारी (सीवीआरसी अधिसूचना)।

इस किस्म के बारे में

आईपीएम 02-3 आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर की एक मूंग (हरा चना) किस्म है, जो 2009 में उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश व दिल्ली) के लिए अधिसूचित हुई। आईसीएआर-आईआईपीआर के अपने मौजूदा किस्म डेटाबेस — जिसे इस सुधार के लिए सीधे जाँचा गया — के अनुसार यह 65–70 दिन में 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर पर पकती है, फ़ोटो- व थर्मो-असंवेदनशील है इसलिए खरीफ़ व ग्रीष्म/बसंत दोनों बुवाई-खिड़कियों में बोई जा सकती है, पीला मोज़ेक रोग के प्रति उच्च प्रतिरोध रखती है; इसे आईआईपीआर अपनी तुलनात्मक परीक्षणों में बेंचमार्क जाँच-किस्म के रूप में भी उपयोग करता है। एक अलग, तेज़ पकने वाली आईआईपीआर किस्म 'आईपीएम 205-7', जो व्यावसायिक नाम 'विराट' से बिकती है, अपने अलग पेज पर बताई गई है — देखें 'आईपीएम 205-7 (विराट)'।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि65–70 दिन
    उपज क्षमता12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधपीला मोज़ेक रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

65–70 दिन

अपेक्षित उपज

12–15 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • फ़ोटो- व थर्मो-असंवेदनशील, इसलिए खरीफ़ व ग्रीष्म/बसंत दोनों बुवाई-खिड़कियों में बिना अवधि के नुक़सान के उगाई जा सकती है।
  • पीला मोज़ेक रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी, उत्तर भारत का सबसे नुक़सानदेह मूंग रोगजनक — इतनी भरोसेमंद कि आईसीएआर-आईआईपीआर स्वयं आईपीएम 02-3 को नई किस्मों के तुलनात्मक परीक्षणों में बेंचमार्क जाँच-किस्म के रूप में उपयोग करता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • आधिकारिक स्रोत अवधि व उपज पर थोड़ा भिन्न हैं: आईसीएआर-आईआईपीआर का अपना मौजूदा किस्म पृष्ठ (सीधे जाँचा गया) 65–70 दिन में 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर बताता है, जबकि दलहन विकास निदेशालय की जारी-किस्म सूची (अनुरोधकर्ता द्वारा उद्धृत; इस चरण में हर फ़ेच प्रयास पर अनुपलब्ध — कनेक्शन अस्वीकृत) 62–68 दिन में कम 11 क्विंटल/हेक्टेयर बताती है। यहाँ दोनों का औसत निकालने की बजाय मूल संस्थान के मौजूदा आँकड़ों को प्राथमिक मान के रूप में उपयोग किया गया है।
  • आईपीएम 02-3 (2009, यह रिकॉर्ड) व आईपीएम 205-7 'विराट' (2016, स्पष्ट रूप से तेज़) दो अलग आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर किस्में हैं, न कि एक ही किस्म के दो नाम — दूसरी किस्म के लिए 'आईपीएम 205-7 (विराट)' देखें।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • पंजाब
  • हरियाणा
  • राजस्थान
  • उत्तर प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या आईपीएम 02-3 और 'विराट' एक ही किस्म हैं?

नहीं। आईपीएम 02-3 (2009, 65–70 दिन) व आईपीएम 205-7 'विराट' (2016, ~55 दिन) दो अलग आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर किस्में हैं; तेज़ किस्म के लिए 'आईपीएम 205-7 (विराट)' देखें।

आईपीएम 02-3 खरीफ़ व ग्रीष्म दोनों बुवाई के लिए क्यों उपयुक्त है?

आईसीएआर-आईआईपीआर के अपने किस्म डेटाबेस के अनुसार यह फ़ोटो- व थर्मो-असंवेदनशील है, यानी इसका फूल आना व पकना दिन की लंबाई या तापमान के साथ उतना नहीं बदलता जितना एक संवेदनशील किस्म का बदलता — इसलिए 65–70 दिन की वही अवधि खरीफ़ व ग्रीष्म/बसंत दोनों बुवाई-खिड़कियों में बनी रहती है।

स्रोत: Varieties — ICAR-Indian Institute of Pulses Research (IIPR), Kanpur. संपादकीय नीति.