IPM 02-3
आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर से जारी — 2009 में उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए जारी, फ़ोटो- व थर्मो-असंवेदनशील इसलिए खरीफ़ व गर्मी दोनों में बोई जा सकती है, आईआईपीआर की अपनी बेंचमार्क जाँच-किस्म के रूप में उपयोग होती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- मूंग
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- 65–70 दिन
- अपेक्षित उपज
- 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 2009 में आईसीएआर-आईआईपीआर, कानपुर द्वारा उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए जारी (सीवीआरसी अधिसूचना)।
इस किस्म के बारे में
आईपीएम 02-3 आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर की एक मूंग (हरा चना) किस्म है, जो 2009 में उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश व दिल्ली) के लिए अधिसूचित हुई। आईसीएआर-आईआईपीआर के अपने मौजूदा किस्म डेटाबेस — जिसे इस सुधार के लिए सीधे जाँचा गया — के अनुसार यह 65–70 दिन में 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर पर पकती है, फ़ोटो- व थर्मो-असंवेदनशील है इसलिए खरीफ़ व ग्रीष्म/बसंत दोनों बुवाई-खिड़कियों में बोई जा सकती है, पीला मोज़ेक रोग के प्रति उच्च प्रतिरोध रखती है; इसे आईआईपीआर अपनी तुलनात्मक परीक्षणों में बेंचमार्क जाँच-किस्म के रूप में भी उपयोग करता है। एक अलग, तेज़ पकने वाली आईआईपीआर किस्म 'आईपीएम 205-7', जो व्यावसायिक नाम 'विराट' से बिकती है, अपने अलग पेज पर बताई गई है — देखें 'आईपीएम 205-7 (विराट)'।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
65–70 दिन
अपेक्षित उपज
12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- फ़ोटो- व थर्मो-असंवेदनशील, इसलिए खरीफ़ व ग्रीष्म/बसंत दोनों बुवाई-खिड़कियों में बिना अवधि के नुक़सान के उगाई जा सकती है।
- पीला मोज़ेक रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी, उत्तर भारत का सबसे नुक़सानदेह मूंग रोगजनक — इतनी भरोसेमंद कि आईसीएआर-आईआईपीआर स्वयं आईपीएम 02-3 को नई किस्मों के तुलनात्मक परीक्षणों में बेंचमार्क जाँच-किस्म के रूप में उपयोग करता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- आधिकारिक स्रोत अवधि व उपज पर थोड़ा भिन्न हैं: आईसीएआर-आईआईपीआर का अपना मौजूदा किस्म पृष्ठ (सीधे जाँचा गया) 65–70 दिन में 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर बताता है, जबकि दलहन विकास निदेशालय की जारी-किस्म सूची (अनुरोधकर्ता द्वारा उद्धृत; इस चरण में हर फ़ेच प्रयास पर अनुपलब्ध — कनेक्शन अस्वीकृत) 62–68 दिन में कम 11 क्विंटल/हेक्टेयर बताती है। यहाँ दोनों का औसत निकालने की बजाय मूल संस्थान के मौजूदा आँकड़ों को प्राथमिक मान के रूप में उपयोग किया गया है।
- आईपीएम 02-3 (2009, यह रिकॉर्ड) व आईपीएम 205-7 'विराट' (2016, स्पष्ट रूप से तेज़) दो अलग आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर किस्में हैं, न कि एक ही किस्म के दो नाम — दूसरी किस्म के लिए 'आईपीएम 205-7 (विराट)' देखें।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- पंजाब
- हरियाणा
- राजस्थान
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या आईपीएम 02-3 और 'विराट' एक ही किस्म हैं?
नहीं। आईपीएम 02-3 (2009, 65–70 दिन) व आईपीएम 205-7 'विराट' (2016, ~55 दिन) दो अलग आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर किस्में हैं; तेज़ किस्म के लिए 'आईपीएम 205-7 (विराट)' देखें।
आईपीएम 02-3 खरीफ़ व ग्रीष्म दोनों बुवाई के लिए क्यों उपयुक्त है?
आईसीएआर-आईआईपीआर के अपने किस्म डेटाबेस के अनुसार यह फ़ोटो- व थर्मो-असंवेदनशील है, यानी इसका फूल आना व पकना दिन की लंबाई या तापमान के साथ उतना नहीं बदलता जितना एक संवेदनशील किस्म का बदलता — इसलिए 65–70 दिन की वही अवधि खरीफ़ व ग्रीष्म/बसंत दोनों बुवाई-खिड़कियों में बनी रहती है।
स्रोत: Varieties — ICAR-Indian Institute of Pulses Research (IIPR), Kanpur. संपादकीय नीति.
