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पपीतासभी सीज़नखुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

Pusa Delicious

आईएआरआई से जारी — द्विलिंगी, मध्यम-बड़ा, गहरे नारंगी गूदे वाला फल, खाने और प्रसंस्करण दोनों के लिए अच्छा — अलग रखने पर असली बीज लगभग सही किस्म देता है।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिरोपाई के 10–11 महीने बाद पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपज600–700 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
पपीता
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
रोपाई के 10–11 महीने बाद पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपज
600–700 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली में लगातार सिब-मेटिंग व चयन से विकसित — एक पारंपरिक-प्रजनन वंशक्रम, कोई एक नामित क्रॉस नहीं। किसी भी स्रोत में सटीक जारी होने का साल नहीं मिला; बाद में टीएनएयू की सीओ.7 किस्म में पैरेंट लाइन के रूप में इस्तेमाल हुई।

इस किस्म के बारे में

पूसा डिलीशियस एक द्विलिंगी (गायनोडायइशियस — उभयलिंगी + मादा) पपीता वंशक्रम है, जिसे आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली में लगातार सिब-मेटिंग व चयन से पारंपरिक प्रजनन विधि द्वारा विकसित किया गया — यह जानकारी एक सीधे फ़ेच किए गए बायोटेक आर्टिकल्स किस्म-सूची से मिलती है — इस बार किसी भी स्रोत में सटीक जारी होने का साल या ख़ास पैरेंटेज-क्रॉस की पुष्टि नहीं मिली। उसी स्रोत के अनुसार यह मध्यम-ऊँचा, भारी उपज देने वाला पौधा (58–61 किलो/पौधा) है, जो 70–80 सेमी पौध-ऊँचाई पर, रोपाई के लगभग 260–270 दिन (क़रीब 8.5–9 महीने) के भीतर फल देना शुरू करता है — जो इस रिकॉर्ड के अपने 10–11-महीने वाले पहली-तुड़ाई फ़ील्ड से कुछ पहले है। फल मध्यम आकार का (1.5–2.0 किलो), गहरे नारंगी गूदे वाला, अच्छी मिठास (स्रोतों में टीएसएस 10–13° ब्रिक्स) व बेहतरीन स्वाद वाला होता है। एक सीधे फ़ेच किया गया आधिकारिक टीएनएयू किस्म-पेज स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है कि पूसा डिलीशियस, सीओ.3, सीपी.75 व कूर्ग हनी ड्यू के साथ, बाद में जारी हुई टीएनएयू किस्म सीओ.7 को विकसित करने में इस्तेमाल हुई चार पैरेंट लाइनों में से एक थी — जो यह दिखाता है कि यह सिर्फ़ एक स्वतंत्र खाने की किस्म ही नहीं, बल्कि व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली पपीता प्रजनन-सामग्री भी है। एक सीधे फ़ेच की गई राष्ट्रीय बाग़वानी बोर्ड (एनएचबी) परियोजना रिपोर्ट पूसा डिलीशियस को, पूसा नन्हा के साथ, कर्नाटक, केरल, झारखंड व ओडिशा में उगाई जाने वाली किस्मों में गिनती है — यह इस रिकॉर्ड के अपने उत्तर प्रदेश, बिहार व पश्चिम बंगाल राज्यों के अलावा है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधिरोपाई के 10–11 महीने बाद पहली तुड़ाई
    उपज क्षमता600–700 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधपपीता रिंग स्पॉट विषाणु की मध्यम सहनशीलता
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

रोपाई के 10–11 महीने बाद पहली तुड़ाई

अपेक्षित उपज

600–700 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • भारी उपज (58–61 किलो/पौधा) के साथ अच्छी मिठास (10–13° ब्रिक्स) व गहरे नारंगी, स्वादिष्ट गूदे के लिए जानी जाती है — इतनी अच्छी विशेषताएँ कि टीएनएयू ने इसे अपनी बाद की सीओ.7 किस्म बनाने में चार पैरेंट लाइनों में से एक के रूप में इस्तेमाल किया
  • इस रिकॉर्ड के अपने तीन बताए गए राज्यों से कहीं आगे उगाई जाती है — एक राष्ट्रीय बाग़वानी बोर्ड परियोजना रिपोर्ट इसे कर्नाटक, केरल, झारखंड व ओडिशा में भी गिनती है, जो रिकॉर्ड के states फ़ील्ड से ज़्यादा व्यापक अनुकूलन क्षमता दिखाता है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • स्रोत में बताई गई पहली-फलन अवधि (लगभग 260–270 दिन, क़रीब 8.5–9 महीने) इस रिकॉर्ड के अपने 10–11-महीने वाले पहली-तुड़ाई फ़ील्ड से कुछ पहले है — रिकॉर्ड के आँकड़े को ज़्यादा रूढ़िवादी अनुमान मानें
  • इस बार किसी भी स्रोत में पूसा डिलीशियस का सटीक जारी होने का साल या ख़ास पैरेंटेज-क्रॉस नहीं मिला, भले ही यह अन्य किस्मों के लिए प्रजनन-सामग्री के रूप में अच्छी तरह दर्ज है

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • पश्चिम बंगाल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पूसा डिलीशियस सिर्फ़ उत्तर भारत में उगाई जाती है?

इस रिकॉर्ड में उत्तर प्रदेश, बिहार व पश्चिम बंगाल बताए गए हैं, पर एक राष्ट्रीय बाग़वानी बोर्ड परियोजना रिपोर्ट कर्नाटक, केरल, झारखंड व ओडिशा को भी उगाई जाने वाले राज्यों के रूप में गिनती है — यानी इसकी असली पहुँच सिर्फ़ उत्तर/पूर्व भारत से कहीं ज़्यादा है।

टीएनएयू की सीओ.7 पपीता किस्म में पूसा डिलीशियस का ज़िक्र क्यों है?

पूसा डिलीशियस को सीओ.7 बनाने के लिए टीएनएयू द्वारा किए गए कई क्रॉस में — सीओ.3, सीपी.75 व कूर्ग हनी ड्यू के साथ — चार पैरेंट लाइनों में से एक के रूप में इस्तेमाल किया गया, जो बाद में जारी हुई एक भारी उपज वाली किस्म है। यह एक स्वतंत्र खाने की किस्म भी है और स्थापित प्रजनन-सामग्री भी।

स्रोत: Varietal Wealth of Papaya in India — Biotech Articles, Horticulture :: TNAU :: Varieties :: Fruit crops-Papaya, PAPAYA — Model Project Report, National Horticulture Board. संपादकीय नीति.