Pusa Nanha
आईएआरआई से जारी — किचन गार्डन व सघन रोपाई के लिए बनाई गई बौनी, गठीली किस्म, जो पूसा डिलीशियस और सीओ 7 से कहीं कम ऊँचाई पर ज़मीन के पास फल देती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- पपीता
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- रोपाई के 8–9 महीने बाद पहली तुड़ाई
- अपेक्षित उपज
- 400–450 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- आईसीएआर-आईएआरआई क्षेत्रीय केंद्र, पूसा, बिहार में विकसित। कई स्वतंत्र खोज-परिणामों में इसे उत्परिवर्तन-प्रजनन वंशक्रम बताया गया है (किसी एक सीधे फ़ेच किए गए प्राथमिक स्रोत से पुष्टि नहीं) — 'पूसा 1-15' के बीजों को 15 केआर गामा किरणों से उपचारित किया गया। किसी भी स्रोत में सटीक जारी होने का साल नहीं मिला।
इस किस्म के बारे में
पूसा नन्हा एक अत्यंत बौना, द्विलिंगी (डायइशियस) पपीता वंशक्रम है, जिसे आईसीएआर-आईएआरआई क्षेत्रीय केंद्र, पूसा, बिहार में विकसित किया गया। खोज-परिणाम इसे लगातार एक उत्परिवर्तन-प्रजनन (म्यूटेशन ब्रीडिंग) उत्पाद बताते हैं — मौजूदा किस्म 'पूसा 1-15' के बीजों को 15 केआर गामा किरणों से विकिरणित कर एक स्थिर बौना, एक-समान, ज़्यादा उपज देने वाला प्रकार तैयार किया गया — हालाँकि किसी भी सीधे फ़ेच किए गए प्राथमिक पेज ने इस विधि का स्पष्ट ज़िक्र नहीं किया, इसलिए यहाँ इसे कई स्वतंत्र खोज-परिणामों से समर्थित माना गया है, किसी एक फ़ेच किए गए दस्तावेज़ से सोर्स नहीं किया गया। एक सीधे फ़ेच की गई राष्ट्रीय बाग़वानी बोर्ड (एनएचबी) परियोजना रिपोर्ट पुष्टि करती है कि सघन रोपाई के लिए किस्म पूसा नन्हा हेतु ख़ासतौर पर 1.2 × 1.2 मीटर की क़रीबी दूरी की सिफ़ारिश की जाती है, और इसे (पूसा डिलीशियस के साथ) कर्नाटक, केरल, झारखंड व ओडिशा में उगाई जाने वाली किस्मों में गिनती है — यह इस रिकॉर्ड के अपने दिल्ली/उत्तर प्रदेश states फ़ील्ड से आगे है। एक सीधे फ़ेच किया गया बायोटेक आर्टिकल्स सारांश जोड़ता है कि यह पौधा तीन साल तक फल दे सकता है और आईएआरआई, नई दिल्ली की प्रजनन-पहचान की पुष्टि करता है। एक दूसरा व्यापारिक स्रोत (एग्रीबॉट, सीधे फ़ेच किया गया, निचले दर्जे का पर व्यावहारिक आँकड़ों से मेल खाता) पेड़ को 4–5 फ़ुट ऊँचा, रोपाई के लगभग 9–10 महीने बाद 500–700 ग्राम के गहरे नारंगी, ख़ुशबूदार फल देने वाला बताता है — यह इस रिकॉर्ड के अपने 8–9-महीने वाले पहली-तुड़ाई फ़ील्ड के क़रीब है, पर उससे थोड़ा बाद में; एक सीधे फ़ेच किया गया फ़ार्म एक्सटेंशन मैनेजर पेज स्वतंत्र रूप से आईएआरआई क्षेत्रीय केंद्र, पूसा वाली उत्पत्ति व किचन-गार्डन/गमले/छत-खेती वाली पहचान की पुष्टि करता है। अपने बौने कद के कारण इसे ख़ासतौर पर किचन गार्डन, गमलों व छत-खेती के लिए बेचा जाता है, जो पूसा डिलीशियस व सीओ.7 जैसी मानक किस्मों के लंबे, ज़्यादा फैले हुए कद से अलग है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- दूरीएक सीधे फ़ेच की गई राष्ट्रीय बाग़वानी बोर्ड परियोजना रिपोर्ट के अनुसार सघन रोपाई के लिए 1.2 × 1.2 मीटर की सिफ़ारिश
उपज व अवधि
पकने की अवधि
रोपाई के 8–9 महीने बाद पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपज
400–450 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- अत्यंत बौना कद (लगभग 4–5 फ़ुट), किचन गार्डन, गमलों व छत-खेती के लिए उपयुक्त — पूसा डिलीशियस व सीओ.7 जैसी लंबी, बाग़-शैली किस्मों से वाक़ई अलग निशा
- एक सीधे फ़ेच की गई राष्ट्रीय बाग़वानी बोर्ड परियोजना रिपोर्ट इस किस्म के लिए सघन रोपाई हेतु ख़ासतौर पर 1.2 × 1.2 मीटर की क़रीबी दूरी की सिफ़ारिश करती है
- एक सीधे फ़ेच किए गए व्यापारिक सारांश के अनुसार यह तीन साल तक फल दे सकता है — यह उन किस्मों के लिए काम की बात है जिन्हें अक्सर छोटे घरेलू बाग़ीचों में उगाया जाता है, हर साल दोबारा नहीं लगाया जाता
ध्यान रखने योग्य बातें
- इसकी उत्परिवर्तन-प्रजनन वाली उत्पत्ति (गामा-विकिरणित पूसा 1-15) खोज-परिणामों में लगातार दोहराई गई है, पर इस बार किसी एक सीधे फ़ेच किए गए प्राथमिक पेज से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी — इसे पूरी तरह सोर्स किए गए तथ्य के बजाय खोज-परिणामों से समर्थित माना गया है
- एक सीधे फ़ेच किए गए व्यापारिक स्रोत के अनुसार पहली-फलन अवधि (लगभग 9–10 महीने) इस रिकॉर्ड के अपने 8–9-महीने वाले पहली-तुड़ाई फ़ील्ड से थोड़ा बाद में है — यह एक मामूली अंतर है, विरोधाभास नहीं
- इस रिकॉर्ड के अपने दिल्ली/उत्तर प्रदेश states फ़ील्ड से आगे भी उगाई जाती है — एक सीधे फ़ेच की गई राष्ट्रीय बाग़वानी बोर्ड परियोजना रिपोर्ट अतिरिक्त रूप से कर्नाटक, केरल, झारखंड व ओडिशा भी गिनती है
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- दिल्ली
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूसा नन्हा अन्य पपीता किस्मों से इतनी छोटी क्यों है?
इसे व्यापक रूप से एक उत्परिवर्तन-प्रजनन वंशक्रम बताया जाता है — पहले की आईएआरआई किस्म पूसा 1-15 के बीजों को गामा विकिरण से उपचारित कर एक स्थिर बौना, एक-समान प्रकार तैयार किया गया — न कि कोई क्रॉस-नस्ल संकर। यही वजह है कि यह लगभग 4–5 फ़ुट ऊँची रहती है, जबकि मानक किस्में कहीं ज़्यादा लंबी होती हैं।
पूसा नन्हा के बौने कद के लिए कौन-सी रोपाई दूरी उपयुक्त है?
एक सीधे फ़ेच की गई राष्ट्रीय बाग़वानी बोर्ड परियोजना रिपोर्ट इस ख़ास किस्म के लिए सघन रोपाई हेतु 1.2 × 1.2 मीटर की क़रीबी दूरी की सिफ़ारिश करती है — जो लंबी पपीता किस्मों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दूरी से ज़्यादा क़रीबी है।
स्रोत: Varietal Wealth of Papaya in India — Biotech Articles, PAPAYA — Model Project Report, National Horticulture Board, Papaya varieties – Pusa Dwarf, Pusa Megesty, Pusa Nanna, Pusa Jayant — AgriBot, Papaya - Variety information — Farm Extension Manager. संपादकीय नीति.
