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सफ़ेद मूसलीखरीफ़कंद-जड़ के टुकड़े, असली बीज नहींअपडेट किया गया 19 अगस्त 2026

MDB-13

माँ दंतेश्वरी हर्बल फ़ार्म एंड रिसर्च सेंटर, चिखलपुटी, कोंडागाँव (छत्तीसगढ़) की एक खेत-विकसित सफ़ेद मूसली लाइन — एक निजी कंपनी, कोई ICAR संस्थान या राज्य कृषि विश्वविद्यालय नहीं। इसके उपज, रोग-प्रतिरोध व सैपोनिन के दावे विकासकर्ता के अपने विवरण से हैं व स्वतंत्र रूप से जाँचे नहीं गए। बाक़ी ज़्यादातर किसान पिछली स्वस्थ फ़सल से बचाए जड़ के टुकड़े रोपते।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधिरोपाई के ~4–4.5 महीने बाद पत्तियाँ सूखतीं; जड़ें नवंबर–जनवरी में खुदतीं — यह प्रजाति-स्तर का आँकड़ा है; इस लाइन के लिए कोई स्वतंत्र रूप से जाँची गई अवधि दर्ज नहीं
अपेक्षित उपज2–3 टन/हेक्टेयर ताज़ा जड़ → 400–600 किग्रा/हेक्टेयर सूखी ICAR का प्रजाति-स्तर का आँकड़ा है; विकासकर्ता केंद्र MDB-13 को ख़ुद उच्च-उपज वाली बताता, पर यह निजी विकासकर्ता का अपना दावा है, स्वतंत्र रूप से जाँचा गया माप नहीं
उपयुक्त मिट्टीअच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट, pH 6.0–8.0

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
कंद-जड़ के टुकड़े, असली बीज नहीं
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
रोपाई के ~4–4.5 महीने बाद पत्तियाँ सूखतीं; जड़ें नवंबर–जनवरी में खुदतीं — यह प्रजाति-स्तर का आँकड़ा है; इस लाइन के लिए कोई स्वतंत्र रूप से जाँची गई अवधि दर्ज नहीं
बीज दर
600–1,000 किग्रा/हेक्टेयर कंद-जड़ के टुकड़े (कली-डिस्क सहित उँगलियाँ, ≥5 ग्राम) — दर दूरी पर निर्भर; यह प्रजाति-मानक दर है, इस चयन के लिए अलग से तय नहीं
अपेक्षित उपज
2–3 टन/हेक्टेयर ताज़ा जड़ → 400–600 किग्रा/हेक्टेयर सूखी ICAR का प्रजाति-स्तर का आँकड़ा है; विकासकर्ता केंद्र MDB-13 को ख़ुद उच्च-उपज वाली बताता, पर यह निजी विकासकर्ता का अपना दावा है, स्वतंत्र रूप से जाँचा गया माप नहीं
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट, pH 6.0–8.0
जारी
खेत-विकसित लाइन · माँ दंतेश्वरी हर्बल फ़ार्म एंड रिसर्च सेंटर, चिखलपुटी, कोंडागाँव (छत्तीसगढ़) — कोई ICAR/राज्य-विश्वविद्यालय जारी-किस्म नहीं

इस किस्म के बारे में

MDB-13, माँ दंतेश्वरी हर्बल फ़ार्म एंड रिसर्च सेंटर, चिखलपुटी, कोंडागाँव, छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में खेत पर विकसित सफ़ेद मूसली (Chlorophytum borivilianum) की एक लाइन है — एक निजी कंपनी (माँ दंतेश्वरी हर्बल ग्रुप का हिस्सा), कोई ICAR संस्थान या राज्य कृषि विश्वविद्यालय नहीं। विकासकर्ता केंद्र MDB-13 को उच्च-उपज, रोग/फफूंद-प्रतिरोधी व उच्च सैपोनिन-अल्केलॉइड सामग्री वाली लाइन बताता; यह साइट इन आँकड़ों को किसी सरकारी स्रोत से स्वतंत्र रूप से जाँच नहीं सकी, इसलिए इन्हें यहाँ विकासकर्ता के अपने विवरण के तौर पर दर्ज किया गया, कोई पुष्ट माप नहीं, व MDB-13 के पास JS 405 जैसी कोई ICAR या राज्य-विश्वविद्यालय जारी-किस्म अधिसूचना नहीं। चूँकि MDB-13 के लिए ख़ुद कोई स्वतंत्र रूप से जाँची गई खेती-जानकारी दर्ज नहीं, नीचे दी गई जानकारी ICAR प्रजाति-स्तर की सफ़ेद मूसली पद्धति है, हर दूसरी सफ़ेद मूसली लाइन जैसी ही।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारकंद-जड़ के टुकड़े, असली बीज नहीं
    अवधिरोपाई के ~4–4.5 महीने बाद पत्तियाँ सूखतीं; जड़ें नवंबर–जनवरी में खुदतीं — यह प्रजाति-स्तर का आँकड़ा है; इस लाइन के लिए कोई स्वतंत्र रूप से जाँची गई अवधि दर्ज नहीं
    उपज क्षमता2–3 टन/हेक्टेयर ताज़ा जड़ → 400–600 किग्रा/हेक्टेयर सूखी ICAR का प्रजाति-स्तर का आँकड़ा है; विकासकर्ता केंद्र MDB-13 को ख़ुद उच्च-उपज वाली बताता, पर यह निजी विकासकर्ता का अपना दावा है, स्वतंत्र रूप से जाँचा गया माप नहीं
    रोग-प्रतिरोधविकासकर्ता केंद्र इसे रोग/फफूंद-प्रतिरोधी बताता, पर यह निजी विकासकर्ता का अपना दावा है, ICAR या विश्वविद्यालय-जाँची रेटिंग नहीं
    मिट्टीअच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट, pH 6.0–8.0
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयमानसून की पहली या दूसरी अच्छी बारिश, आमतौर जून–जुलाई
  • बीज दर600–1,000 किग्रा/हेक्टेयर कंद-जड़ के टुकड़े (कली-डिस्क सहित उँगलियाँ, ≥5 ग्राम) — दर दूरी पर निर्भर; यह प्रजाति-मानक दर है, इस चयन के लिए अलग से तय नहीं
  • दूरी30 सेमी क़तार-से-क़तार × 10–15 सेमी पौधे-से-पौधे, मेड़ों या उठी क्यारियों पर — लगभग 3.33 लाख पौधे/हेक्टेयर
  • बुवाई विधिअंकुरित जड़ के टुकड़े मेड़ों या उठी क्यारियों पर रोपें; भारी मिट्टी या ज़्यादा बारिश वाले इलाक़ों में जल-निकासी के लिए मेड़ें ज़रूरी
  • सिंचाईमानसून समय पर हो तो लगभग कोई सिंचाई नहीं; मानसून धोखा दे या लंबा सूखा अंतराल आए तो 10–15 दिन के अंतराल पर लगभग 6–8 सिंचाई, पत्ती गिरने के बाद भी जारी
  • उर्वरकखेत-तैयारी में 10–15 टन/हेक्टेयर अच्छी सड़ी गोबर खाद, साथ ही कुल 50:40:40 किग्रा N:P:K प्रति हेक्टेयर — यह प्रजाति-मानक खुराक है जो ICAR अच्छी जड़ उपज के लिए बताता
  • कटाईरोपाई के लगभग 4–4.5 महीने बाद पत्तियाँ सूखने लगतीं। कच्चे दवा-माल के तौर पर बिक्री के लिए, पूरी तरह पकने पर नवंबर–जनवरी में खोदें; अगर जड़ें अगले सीज़न की बुवाई सामग्री के लिए रखनी हों, तो मार्च–अप्रैल तक ज़मीन में छोड़ सकते

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट, जैविक पदार्थ से भरपूर व इतनी भुरभुरी कि कंद-जड़ें बेरोकटोक फैल सकें
सिंचाई
जल-निकासी अच्छी होनी चाहिए — पानी रुकने से कंद ख़राब होते व जड़-कॉलर गलन आता, इसीलिए ज़्यादा बारिश वाले इलाक़ों में मेड़ें या उठी क्यारियाँ इस्तेमाल होतीं

जलवायु

जलवायु
दिन का 30–35°C तापमान, 500–1,500 मिमी बारिश, लगभग 1,500 मी ऊँचाई तक — यह मानसून पकड़ने के लिए रोपी जाती व सीज़न भर गिरने वाली बारिश पर ही ज़्यादातर बढ़ती

उपज व अवधि

पकने की अवधि

रोपाई के ~4–4.5 महीने बाद पत्तियाँ सूखतीं; जड़ें नवंबर–जनवरी में खुदतीं — यह प्रजाति-स्तर का आँकड़ा है; इस लाइन के लिए कोई स्वतंत्र रूप से जाँची गई अवधि दर्ज नहीं

अपेक्षित उपज

2–3 टन/हेक्टेयर ताज़ा जड़ → 400–600 किग्रा/हेक्टेयर सूखी ICAR का प्रजाति-स्तर का आँकड़ा है; विकासकर्ता केंद्र MDB-13 को ख़ुद उच्च-उपज वाली बताता, पर यह निजी विकासकर्ता का अपना दावा है, स्वतंत्र रूप से जाँचा गया माप नहीं

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • ICAR का अपना उत्पादन-नोट कहता कि सफ़ेद मूसली पर कभी-कभार पत्ती खाने वाली इल्ली व गीले मौसम में पत्ती झुलसा के अलावा अब तक कोई गंभीर रोग-कीट दर्ज नहीं हुआ — अच्छी जल-निकासी व स्वस्थ बुवाई सामग्री इस फ़सल की ज़्यादातर परेशानी रोक देतीं।
  • सीज़न भर हर आने वाली फूल-बाली तोड़ते रहें — यह अकेला काम कंद-जड़ की उपज लगभग एक-तिहाई तक बढ़ा सकता है।

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • विकासकर्ता द्वारा उच्च-उपज, रोग/फफूंद-प्रतिरोधी व उच्च सैपोनिन-अल्केलॉइड सामग्री वाली बताई गई।
  • बस्तर/छत्तीसगढ़ उगाने वाली पट्टी में विकसित — इलाक़े में ही बुवाई सामग्री लेने पर काम की।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • यह एक निजी कंपनी की अपनी खेत-विकसित लाइन है, कोई ICAR- या राज्य-विश्वविद्यालय जारी-किस्म नहीं — इसके उपज, रोग-प्रतिरोध व सैपोनिन के दावे विकासकर्ता के अपने विवरण से हैं व किसी सरकारी स्रोत से स्वतंत्र रूप से जाँचे नहीं गए; भरोसा करने से पहले स्थानीय स्तर पर (जैसे अपने KVK से) पुष्टि करें।
  • हर सफ़ेद मूसली की तरह, यह फ़सल भी सीधे दवा-बाज़ार ख़रीदारों को गुणवत्ता व ग्रेड पर बिकती, कोई एमएसपी या मंडी-शैली खुली बिक्री-व्यवस्था नहीं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • छत्तीसगढ़

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

MDB-13 क्या है?

सफ़ेद मूसली (Chlorophytum borivilianum) की एक लाइन, जो माँ दंतेश्वरी हर्बल फ़ार्म एंड रिसर्च सेंटर, चिखलपुटी, कोंडागाँव (छत्तीसगढ़) ने खेत पर विकसित की — एक निजी कंपनी, कोई सरकारी प्रजनन कार्यक्रम नहीं।

क्या MDB-13, ICAR-जारी किस्म है?

नहीं — यह एक निजी कंपनी की अपनी खेत-विकसित लाइन है, जिसकी कोई ICAR या राज्य-विश्वविद्यालय जारी-किस्म अधिसूचना नहीं। JS 405 ही अब भी ICAR-DMAPR की अपनी जारी-किस्मों की सूची में दर्ज एकमात्र सफ़ेद मूसली किस्म है।

MDB-13 कब रोपें?

मानसून की पहली या दूसरी अच्छी बारिश पर, आमतौर जून–जुलाई — यह हर सफ़ेद मूसली लाइन के लिए वही प्रजाति-स्तर की खिड़की है।

MDB-13 के उपज व रोग-प्रतिरोध के दावों पर भरोसा करें?

इन्हें विकासकर्ता का अपना विवरण मानें, कोई स्वतंत्र रूप से जाँचा गया आँकड़ा नहीं — इनके पीछे कोई ICAR या राज्य-विश्वविद्यालय ट्रायल डेटा नहीं जिसे यह साइट पुष्ट कर सके। बुवाई का फ़ैसला लेने से पहले अपने स्थानीय KVK से जाँच लें।

स्रोत: ICAR-DMAPR — Crop Production (Safed Musli agronomy). संपादकीय नीति.