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चायखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 13 अगस्त 2026

Betjan

असम की मूल झाड़ी, क्लोनल कलम की जगह बीज से उगाई जाती है — टीवी1 जैसे आधुनिक क्लोन से पहली तुड़ाई में देर और कम उपज, पर बीजू झाड़ियाँ अब भी असम के कई सबसे पुराने बाग़ों की नींव हैं।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधिबीजू मूल की झाड़ी में रोपाई के 4–5 साल बाद पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपज1,600–2,000 किलो बना चाय/हेक्टेयर/साल, पूर्ण परिपक्वता पर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
चाय
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
बीजू मूल की झाड़ी में रोपाई के 4–5 साल बाद पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपज
1,600–2,000 किलो बना चाय/हेक्टेयर/साल, पूर्ण परिपक्वता पर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
बेटजान चाय बाग़ान की बीज बारियों के नाम पर रखी गई असम की पारंपरिक बीजू किस्म — यह आधुनिक क्लोनल किस्म-जारी प्रणाली से पहले की है, इसलिए कोई औपचारिक अधिसूचना वर्ष दर्ज नहीं है

इस किस्म के बारे में

"बेटजान" असम की पारंपरिक "बीजू" (जात) चाय किस्मों में से एक है — इसे क्लोनल कलम की बजाय बीज से उगाया जाता है, और इसका नाम ऊपरी असम के बेटजान चाय बाग़ान पर पड़ा है, जहाँ इसकी बीज बारियाँ (बीज बाग़) रखी जाती थीं। यह एक बहु-मातृ (पॉली-पैरेंट) बीज किस्म है, यानी इसका बीज एक ही क्लोन की बजाय आनुवंशिक रूप से विविध मातृ झाड़ियों की आबादी से आता है, जिसने इसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की अच्छी क्षमता दी। बेटजान झाड़ियों को मज़बूत व पर्यावरण-सहनशील बताया जाता है, जो गहरे बॉडी व स्वाद वाली चाय देती हैं — ऐसे गुण जिन्हें असम चाय की शुरुआती पहचान बनाने का श्रेय दिया जाता है। बेटजान का बीज भारत के बाहर भी निर्यात हुआ और अर्जेंटीना सहित अन्य देशों में चाय की खेती शुरू करने में उपयोग हुआ।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधिबीजू मूल की झाड़ी में रोपाई के 4–5 साल बाद पहली तुड़ाई
    उपज क्षमता1,600–2,000 किलो बना चाय/हेक्टेयर/साल, पूर्ण परिपक्वता पर
    रोग-प्रतिरोधब्लिस्टर ब्लाइट की मध्यम सहनशीलता
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

बीजू मूल की झाड़ी में रोपाई के 4–5 साल बाद पहली तुड़ाई

अपेक्षित उपज

1,600–2,000 किलो बना चाय/हेक्टेयर/साल, पूर्ण परिपक्वता पर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • एक ही क्लोन की बजाय आनुवंशिक रूप से विविध बहु-मातृ बीज आबादी, जिसने ऐतिहासिक रूप से स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में मदद की
  • मज़बूत, पर्यावरण-सहनशील झाड़ियाँ, जो गहरे बॉडी व स्वाद वाली चाय देती हैं
  • इसका बीज निर्यात हुआ और अर्जेंटीना सहित विदेशों में चाय की खेती शुरू करने में मदद की

ध्यान रखने योग्य बातें

  • टीवी1 जैसी आधुनिक क्लोनल कलमें बीजू बेटजान झाड़ियों से पहली तुड़ाई जल्दी व ज़्यादा उपज देती हैं, यही वजह है कि आज ज़्यादातर नया रोपण बीजू की बजाय क्लोनल होता है
  • मूल बेटजान बीज बारियाँ बाग़ानों के क्लोनल रोपण में बदलने से काफ़ी सिकुड़ गई हैं; कुछ संरक्षण-केंद्रित बहु-मातृ बीज बारियाँ (जैसे आइडियोबारी चाय बाग़ान में, क़रीब 2015 में फिर शुरू) अब सीमित वार्षिक बीज आपूर्ति ही देती हैं

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • असम

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बेटजान का बीज अर्जेंटीना क्यों भेजा गया?

क्लोनल प्रवर्धन के मानक बनने से पहले के दौर में असम बीजू बीज, बेटजान सहित, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग में था, क्योंकि यह गुणवत्तापूर्ण चाय रोपण सामग्री के कुछ भरोसेमंद स्रोतों में से एक था। अर्जेंटीना में चाय की खेती आयातित बेटजान बीजू बीज से शुरू होने का दस्तावेज़ीकरण मिलता है।

क्या बेटजान आज भी व्यावसायिक रूप से लगाई जाती है?

ज़्यादातर एक विरासत के रूप में — असम के कई सबसे पुराने बाग़ानों में आज भी पुरानी बेटजान बीजू झाड़ियाँ हैं, पर नया व्यावसायिक रोपण लगभग पूरी तरह टीवी1 जैसे ज़्यादा उपज वाले क्लोनों की ओर शिफ़्ट हो चुका है। हाल के वर्षों में कुछ संरक्षण-केंद्रित बाग़ानों ने सीमित बहु-मातृ बेटजान बीज उत्पादन फिर शुरू किया है।

स्रोत: Assam Jat — The Lost Seed — Rujani Tea (Medium). संपादकीय नीति.