TV1 (Tocklai Vegetative 1)
टॉकलाई चाय अनुसंधान संस्थान से जारी, जड़ वाली क्लोनल कलमों से तैयार, बीज से नहीं। आधी सदी से ज़्यादा समय से असम का सबसे ज़्यादा लगाया जाने वाला क्लोन — ज़्यादातर बीजू चाय से बेहतर उपज पर अच्छी लिकर गुणवत्ता।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- चाय
- प्रकार
- हाइब्रिड
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- क्लोनल कलम से रोपाई के 2–3 साल बाद पहली तुड़ाई
- अपेक्षित उपज
- 2,000–2,500 किलो बना चाय/हेक्टेयर/साल, पूर्ण परिपक्वता पर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 1949 में जारी · टॉकलाई चाय अनुसंधान संस्थान (अब चाय अनुसंधान संघ), जोरहाट, असम — मानकीकृत वानस्पतिक-प्रवर्धित पहले तीन क्लोनों (टीवी1, टीवी2, टीवी3) में से एक
इस किस्म के बारे में
टीवी1 (टॉकलाई वेजिटेटिव 1) को 1949 में टॉकलाई चाय अनुसंधान संस्थान, जोरहाट ने जारी किया — वे पहले तीन क्लोन (टीवी1, टीवी2, टीवी3) जिन्होंने असम चाय में पहली बार वानस्पतिक (क्लोनल) प्रवर्धन को मानकीकृत किया। यह असम में लगातार सीटीसी-श्रेणी गुणवत्ता के लिए सबसे ज़्यादा लगाया जाने वाला क्लोन बना, और सात दशक बाद भी उन "नियंत्रण" (कंट्रोल) क्लोनों में से एक है जिनके मुक़ाबले टॉकलाई के नए क्लोन जाँचे जाते हैं — नए क्लोन टीटीआरआई-1 व टीटीआरआई-2 पर एक रिपोर्ट ने बताया कि उनकी उपज टीवी1 सहित नियंत्रण क्लोनों के औसत से क़रीब एक-तिहाई ज़्यादा थी। पूर्वोत्तर भारत में उगाई जाने वाली चाय के एक बहु-किस्म अध्ययन में भी टीवी1 मानसून की तुड़ाई के दौरान कुल पॉलीफ़ेनॉल सामग्री व एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि (डीपीपीएच, एबीटीएस परीक्षण) में सबसे ऊपर रहने वाले क्लोनों में शामिल पाया गया।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
क्लोनल कलम से रोपाई के 2–3 साल बाद पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपज
2,000–2,500 किलो बना चाय/हेक्टेयर/साल, पूर्ण परिपक्वता पर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- 70 साल से ज़्यादा समय से सीटीसी गुणवत्ता का मानक असम क्लोन — राज्य में आज भी सबसे ज़्यादा लगाया जाने वाला क्लोन
- टॉकलाई के अपने नए-क्लोन परीक्षणों में आधारभूत "नियंत्रण" क्लोन के रूप में उपयोग होता है, जो इसके लगातार प्रदर्शन का संकेत है
- एक अकादमिक बहु-किस्म अध्ययन में मानसून तुड़ाई के दौरान कुल पॉलीफ़ेनॉल सामग्री व एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि में जाँची गई कई किस्मों में सबसे ऊपर रहा
ध्यान रखने योग्य बातें
- टीवी1 के लिए सार्वजनिक स्रोत कई नई किस्मों से पतले हैं — इस रिकॉर्ड में पहले से दर्ज जानकारी से आगे कोई सटीक ब्लिस्टर ब्लाइट सहनशीलता रेटिंग या छँटाई-चक्र विवरण किसी उपलब्ध प्राथमिक स्रोत में नहीं मिला
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- असम
- पश्चिम बंगाल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1949 में जारी क्लोन आज भी नई किस्मों के परीक्षण में "नियंत्रण" के रूप में क्यों उपयोग होता है?
क्योंकि टीवी1 की उपज व गुणवत्ता का प्रदर्शन 70 साल से ज़्यादा समय से विश्वसनीय व अच्छी तरह दस्तावेज़ीकृत रहा है, यह शोधकर्ताओं को एक नई किस्म के सुधार को मापने के लिए एक स्थिर, समझी-बूझी आधार रेखा देता है — टॉकलाई के नए टीटीआरआई-1 व टीटीआरआई-2 क्लोनों पर एक रिपोर्ट ने बताया कि उनकी उपज टीवी1 सहित नियंत्रण क्लोनों के औसत से क़रीब एक-तिहाई ज़्यादा थी।
क्या टीवी1 को क्लोनल कलम की बजाय बीज से उगाया जा सकता है?
नहीं — टीवी1 एक क्लोन है, जिसे मातृ झाड़ी से जड़ वाली वानस्पतिक कलम के रूप में ही तैयार किया जाता है, इसीलिए इसकी उपज व गुणवत्ता पौधे-दर-पौधे इतनी स्थिर रहती है। बेटजान जैसी पुरानी बीजू झाड़ियाँ इसके बजाय बीज से उगाई जाती हैं, पर पहली तुड़ाई में देर व आम तौर पर कम उपज देती हैं।
स्रोत: Tocklai institute develops 2 tea clones — Assam Tribune, Impact of the Season on Total Polyphenol and Antioxidant Properties of Tea Cultivars of Industrial Importance in Northeast India — PMC. संपादकीय नीति.
