Pusa Ruby
खुली-परागित, इसलिए किसान अच्छे पौधे से बीज बचा सकता है — पर सफ़ेद मक्खी वाले ख़राब साल में इसमें कोई रोग-प्रतिरोध नहीं होता।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- टमाटर
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- रोपाई से 60–70 दिन
- अपेक्षित उपज
- 200–250 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 1973 में जारी · ICAR-IARI, नई दिल्ली · सायक्स × इम्प्रूव्ड मीरुती के संकरण से चयन
इस किस्म के बारे में
पूसा रूबी एक अनिश्चित बढ़वार (indeterminate) वाली, जल्दी पकने वाली टमाटर किस्म है, जिसे 1973 में ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने सायक्स × इम्प्रूव्ड मीरुती (Sioux × Improved Meeruti) के संकरण से चयन कर जारी किया। इसके मध्यम आकार के, गोल, हल्के खंडित व धारीदार फल ताज़े बाज़ार व प्रसंस्करण दोनों के लिए उपयुक्त हैं। आनुवंशिक रूपांतरण में असाधारण रूप से अच्छी प्रतिक्रिया और दशकों के दस्तावेज़ीकृत अध्ययन के कारण, पूसा रूबी भारत में टमाटर जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान की एक मानक संदर्भ किस्म भी बन गई है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
रोपाई से 60–70 दिन
अपेक्षित उपज
200–250 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- भारत की सबसे पुरानी व सबसे व्यापक रूप से अनुकूलित टमाटर किस्मों में से एक, जारी होने के दशकों बाद भी उगाई जाती है
- फल ताज़े बाज़ार व प्रसंस्करण दोनों के लिए उपयुक्त, जिससे किसान को बेचने का विकल्प मिलता है
ध्यान रखने योग्य बातें
- अनिश्चित बढ़वार होने के कारण सहारा (staking) व लगातार छंटाई की ज़रूरत होती है, कॉम्पैक्ट सुनिश्चित (determinate) किस्म के उलट
- अधिकांश आधुनिक रोग-प्रतिरोध कार्य से पहले बनी — इसमें कोई अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं, इसलिए सुरक्षा पूरी तरह किसान के अपने छिड़काव कार्यक्रम पर निर्भर है
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- मध्य प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टमाटर अनुसंधान अध्ययनों में पूसा रूबी का इस्तेमाल इतना ज़्यादा क्यों होता है?
यह एग्रोबैक्टीरियम-माध्यित आनुवंशिक रूपांतरण व ऊतक-संवर्धन पुनर्जनन में असाधारण रूप से अच्छी प्रतिक्रिया देती है, और दशकों के अनुसंधान से इस पर बड़ी मात्रा में फीनोटाइपिक व जीनोमिक संदर्भ आँकड़े जमा हो चुके हैं — यही इसे प्रयोगशाला अध्ययनों के लिए एक सुविधाजनक मानक किस्म बनाता है, ज़रूरी नहीं कि यह आज खेत में सबसे ज़्यादा उपज देने वाली किस्म हो।
स्रोत: Reference Guided De Novo Genome Assembly of Transformation Pliable Solanum lycopersicum cv. Pusa Ruby — PMC. संपादकीय नीति.
