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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
टमाटरसभी सीज़नखुली-परागितअपडेट किया गया 12 अगस्त 2026

Pusa Ruby

खुली-परागित, इसलिए किसान अच्छे पौधे से बीज बचा सकता है — पर सफ़ेद मक्खी वाले ख़राब साल में इसमें कोई रोग-प्रतिरोध नहीं होता।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिरोपाई से 60–70 दिन
अपेक्षित उपज200–250 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
टमाटर
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
रोपाई से 60–70 दिन
अपेक्षित उपज
200–250 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
1973 में जारी · ICAR-IARI, नई दिल्ली · सायक्स × इम्प्रूव्ड मीरुती के संकरण से चयन

इस किस्म के बारे में

पूसा रूबी एक अनिश्चित बढ़वार (indeterminate) वाली, जल्दी पकने वाली टमाटर किस्म है, जिसे 1973 में ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने सायक्स × इम्प्रूव्ड मीरुती (Sioux × Improved Meeruti) के संकरण से चयन कर जारी किया। इसके मध्यम आकार के, गोल, हल्के खंडित व धारीदार फल ताज़े बाज़ार व प्रसंस्करण दोनों के लिए उपयुक्त हैं। आनुवंशिक रूपांतरण में असाधारण रूप से अच्छी प्रतिक्रिया और दशकों के दस्तावेज़ीकृत अध्ययन के कारण, पूसा रूबी भारत में टमाटर जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान की एक मानक संदर्भ किस्म भी बन गई है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधिरोपाई से 60–70 दिन
    उपज क्षमता200–250 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधकोई अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं — जीवाणु म्लानि व पत्ती मरोड़ विषाणु के प्रति संवेदनशील
    मिट्टीदोमट
    सीज़नसभी सीज़न

उपज व अवधि

पकने की अवधि

रोपाई से 60–70 दिन

अपेक्षित उपज

200–250 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • भारत की सबसे पुरानी व सबसे व्यापक रूप से अनुकूलित टमाटर किस्मों में से एक, जारी होने के दशकों बाद भी उगाई जाती है
  • फल ताज़े बाज़ार व प्रसंस्करण दोनों के लिए उपयुक्त, जिससे किसान को बेचने का विकल्प मिलता है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • अनिश्चित बढ़वार होने के कारण सहारा (staking) व लगातार छंटाई की ज़रूरत होती है, कॉम्पैक्ट सुनिश्चित (determinate) किस्म के उलट
  • अधिकांश आधुनिक रोग-प्रतिरोध कार्य से पहले बनी — इसमें कोई अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं, इसलिए सुरक्षा पूरी तरह किसान के अपने छिड़काव कार्यक्रम पर निर्भर है

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • मध्य प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टमाटर अनुसंधान अध्ययनों में पूसा रूबी का इस्तेमाल इतना ज़्यादा क्यों होता है?

यह एग्रोबैक्टीरियम-माध्यित आनुवंशिक रूपांतरण व ऊतक-संवर्धन पुनर्जनन में असाधारण रूप से अच्छी प्रतिक्रिया देती है, और दशकों के अनुसंधान से इस पर बड़ी मात्रा में फीनोटाइपिक व जीनोमिक संदर्भ आँकड़े जमा हो चुके हैं — यही इसे प्रयोगशाला अध्ययनों के लिए एक सुविधाजनक मानक किस्म बनाता है, ज़रूरी नहीं कि यह आज खेत में सबसे ज़्यादा उपज देने वाली किस्म हो।

स्रोत: Reference Guided De Novo Genome Assembly of Transformation Pliable Solanum lycopersicum cv. Pusa Ruby — PMC. संपादकीय नीति.