गोधन न्याय योजना
गाँव के गौठान में सरकार आपके पशु का गोबर ₹2 प्रति किलो और गोमूत्र ₹4 प्रति लीटर की दर से ख़रीदती है, उसे जैविक खाद में बदलती है, और हर पखवाड़े भुगतान करती है।
संचालक: कृषि विकास, किसान कल्याण एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
- गोबर दर
- ₹2 प्रति किलो, कोई सीमा नहीं
- गोमूत्र दर
- ₹4 प्रति लीटर
- वर्मी कम्पोस्ट बिक्री
- किसानों को ₹8/किलो
- भुगतान चक्र
- हर 15 दिन, DBT से
- ख़रीद केंद्र
- 7,000+ गाँव गौठान
- कुल (अगस्त 2022 तक)
- ~73.5 लाख क्विंटल, ₹147cr भुगतान
- महिला विक्रेता
- ~45%
परिचय
ज़्यादातर पशुपालक परिवारों के लिए गोबर सिर्फ रोज़ की सफ़ाई का झंझट था, कमाई का ज़रिया नहीं। 20 जुलाई 2020 को शुरू हुई गोधन न्याय योजना ने यह तस्वीर बदल दी — छत्तीसगढ़ सरकार खुद गोबर ख़रीदती है, तय दर ₹2 प्रति किलो पर, और बाद में गोमूत्र भी ₹4 प्रति लीटर की दर से जुड़ गया, और एक परिवार कितना बेच सकता है इसकी कोई सीमा नहीं है।
ख़रीद गाँव के गौठान में होती है — छत्तीसगढ़ में 7,000 से ज़्यादा गौठान बन चुके हैं — जहाँ आपका लाया गोबर और गोमूत्र तौलकर आपके नाम दर्ज होता है। गौठान में काम करने वाले महिला स्वयं सहायता समूह इसी गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाते हैं, जो किसानों को ₹8 प्रति किलो पर सस्ती जैविक खाद के रूप में बेचा जाता है; राज्य ने इसी गौठान आपूर्ति श्रृंखला से खाद के अलावा बायोगैस और जैव-कीटनाशक जैसे और उत्पाद बनाने की योजना भी बनाई है। आपकी बिक्री का भुगतान लगभग हर 15 दिन में DBT से आपके पंजीकृत बैंक खाते में होता है, और यह योजना मौजूदा राज्य सरकार में भी जारी है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस योजना को एक रिवॉल्विंग फंड ढाँचे के साथ शुरू किया — ₹500 करोड़ का चालू आवंटन, जिसे ₹100 करोड़ की बीज-राशि का समर्थन था, दोनों को खर्च करके ख़त्म करने के बजाय वापस लेकर दोबारा इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया। पहले दो हफ़्तों में ही 46,964 पशुपालकों को 82,711 क्विंटल गोबर के लिए ₹1.6 करोड़ का भुगतान हो चुका था; अगस्त 2022 तक कुल मिलाकर क़रीब 73.5 लाख क्विंटल गोबर ख़रीदा जा चुका था और लगभग ₹147.06 करोड़ भुगतान हो चुका था। बालोद, धमतरी, दुर्ग, रायपुर और राजनांदगांव मात्रा के हिसाब से अग्रणी ज़िलों में रहे हैं, और योजना के पशुपालक लाभार्थियों में एक बड़ा हिस्सा भूमिहीन ग्रामीण हैं, जबकि लगभग 45% महिलाएँ हैं।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- कोई मात्रा सीमा नहीं — आपका झुंड जितना गोबर देता है, उतना ₹2 प्रति किलो की तय दर पर बेच सकते हैं।
- गोमूत्र भी ₹4 प्रति लीटर पर ख़रीदा जाता है, यानी उसी पशु से दूसरी कमाई भी।
- भुगतान लगभग हर 15 दिन में DBT से आता है, महीनों इंतज़ार वाली एकमुश्त राशि नहीं।
- आपका बेचा गोबर ही ₹8/किलो की वर्मी कम्पोस्ट बनकर गाँव में लौटता है, जिससे रासायनिक खाद का ख़र्च भी कम होता है।
- गौठान में महिला स्वयं सहायता समूह खाद बनाने का काम करती हैं, वहाँ से भी कमाई होती है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- गाँव में सक्रिय गौठान होने पर, वहाँ पशु पालने या चराने वाला पशुपालक या किसान
- भूमिहीन पशुपालक भी पंजीकरण कर बेच सकते हैं — ज़मीन का मालिक होना शर्त नहीं
- गोबर-गोमूत्र ख़ुद या पंजीकृत पशु मालिक के ज़रिए, अधिसूचित गौठान केंद्र पर बेचना
- DBT भुगतान के लिए विक्रेता के अपने नाम पर बैंक खाता
शामिल नहीं
- पंजीकृत गौठान केंद्र पर न लाया गया गोबर या गोमूत्र
- स्थानीय गौठान समिति में पंजीकरण के बिना की गई बिक्री
- वज़न बढ़ाने के लिए मिट्टी, रेत या अन्य चीज़ मिलाया गोबर
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक या खाता विवरण
- पशु स्वामित्व या चराई घोषणा, जैसा लागू हो
- स्थानीय गौठान समिति में पंजीकरण
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
अपने गाँव के गौठान में पंजीकरण करें
गौठान प्रबंधन समिति को अपना नाम, आधार और बैंक विवरण दें, ताकि गोबर-गोमूत्र विक्रेता के रूप में सूचीबद्ध हो सकें।
- 2
ख़रीद केंद्र पर बेचें
गोबर और गोमूत्र गौठान में लाएं; हर बार बिक्री पर मात्रा तौलकर आपके नाम दर्ज होती है।
- 3
हर पखवाड़े भुगतान पाएं
अवधि में आपके नाम दर्ज कुल मात्रा का हिसाब लगाकर, लगभग हर 15 दिन में DBT से आपके पंजीकृत बैंक खाते में भुगतान होता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- तौल को लेकर विवाद, छूटा भुगतान, या गोबर न लिए जाने की समस्या के लिए पहले स्थानीय गौठान समिति या प्रखंड कृषि/पशुपालन कार्यालय से संपर्क करें।
- समाधान न मिलने पर छत्तीसगढ़ CM हेल्पलाइन पर आगे बढ़ें — 1076 (टोल-फ़्री, 24/7) पर कॉल करें या cmhelpline.cg.gov.in इस्तेमाल करें — या राज्य के जन शिकायत पोर्टल पर, जहाँ शिकायत ट्रैक कर सकते हैं और पहला जवाब संतोषजनक न होने पर जन चौपाल के ज़रिए फिर से खुलवा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गोबर बेचने की कोई सीमा है?
नहीं। कोई मात्रा सीमा नहीं है — आपका झुंड जितना गोबर देता है, तय ₹2/किलो दर पर उतना बेच सकते हैं।
मेरे पास ज़मीन नहीं है, क्या फिर भी पंजीकरण कर सकता हूँ?
हाँ। भूमिहीन पशुपालक भी पंजीकरण और बिक्री कर सकते हैं; यह योजना पशुपालन और चराई पर आधारित है, ज़मीन के मालिकाना हक़ पर नहीं।
गोबर बेचने के बाद उसका क्या होता है?
गौठान में महिला स्वयं सहायता समूह उसे वर्मी कम्पोस्ट में बदलते हैं, जो फिर किसानों को ₹8 प्रति किलो पर जैविक खाद के रूप में बेचा जाता है। राज्य ने इसी आपूर्ति श्रृंखला से बायोगैस और जैव-कीटनाशक जैसे अन्य उत्पाद बनाने की भी योजना बनाई है।
यह योजना कब शुरू हुई, और इसका वित्तपोषण कैसे होता है?
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे 20 जुलाई 2020 को शुरू किया, ₹500 करोड़ के रिवॉल्विंग फंड और ₹100 करोड़ की बीज-राशि के सहारे — दोनों को खर्च करके ख़त्म करने के बजाय वापस लेकर दोबारा इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया, यही एक वजह है कि यह योजना एक-सीज़न की घोषणा न होकर सालों से चल रही है।
क्या इस योजना ने असल में बड़े पैमाने पर भुगतान किया है, या यह ज़्यादातर प्रतीकात्मक है?
इसका असली पैमाना है: पहले पखवाड़े में ही क़रीब 47,000 पशुपालकों को ₹1.6 करोड़ का भुगतान हुआ, और अगस्त 2022 तक कुल मिलाकर क़रीब 73.5 लाख क्विंटल गोबर ख़रीदा जा चुका था और लगभग ₹147 करोड़ भुगतान हो चुका था, जिसमें लगभग 45% लाभार्थी महिलाएँ थीं।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को godhannyay.cgstate.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
