मलैवाझ़ उझवर मुन्नेत्र थिट्टम (पहाड़ी किसान विकास योजना)
20 पहाड़ी ज़िलों के क़रीब 63,000 किसानों के लिए ₹22.80 करोड़ — मोटे अनाज सब्सिडी, सब्ज़ी विस्तार, कृषि इनपुट, सूक्ष्म सिंचाई, मशीनीकरण और किसान क्रेडिट कार्ड।
संचालक: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, तमिलनाडु सरकार
- बजट
- ₹22.80 करोड़
- लक्षित किसान
- ~63,000
- ज़िले शामिल
- 20 पहाड़ी/बारिश-आधारित ज़िले
- घोषणा
- 2025-26 कृषि बजट
परिचय
तमिलनाडु के पहाड़ी और बारिश-आधारित इलाक़े — नीलगिरी और कन्याकुमारी, धर्मपुरी, कृष्णागिरी सहित 16 अन्य ज़िलों के हिस्से — ढलान और पतली मिट्टी पर खेती करते हैं, जहाँ मैदानी इलाक़ों के लिए बनी सामान्य योजनाएँ ठीक से फ़िट नहीं बैठतीं। कृषि मंत्री एम.आर.के. पन्नीरसेल्वम ने राज्य के 2025-26 कृषि बजट में इन्हीं किसानों के लिए "मलैवाझ़ उझवर मुन्नेत्र थिट्टम" (पहाड़ी किसान विकास योजना) की घोषणा की, जिसमें क़रीब 63,000 किसानों तक पहुँचने के लिए ₹22.80 करोड़ रखे गए हैं।
यह कोई एक ही सब्सिडी नहीं, बल्कि पहाड़ी किसान की असल ज़रूरतों का पैकेज है: छोटे अनाज (मोटे अनाज) की खेती में मदद — जो ढलान वाली सूखी ज़मीन पर धान से बेहतर बैठते हैं — पहाड़ी सब्ज़ियों की खेती बढ़ाने में सहयोग, छोटे व सीढ़ीदार खेतों के लिए कृषि इनपुट और मशीनीकरण सहायता, उपज के मूल्य-संवर्धन में मदद, कम पानी वाले पहाड़ी इलाक़े के लिए सूक्ष्म सिंचाई, फ़सल के साथ पशुपालन या बागवानी जोड़ने वाली एकीकृत खेती प्रणाली में सहयोग, और जिन किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है उन्हें कार्ड दिलवाना।
यह योजना पहाड़ी व बारिश-आधारित खेती के लिए चिन्हित 20 ज़िलों में लागू है — नीलगिरी, तिरुवन्नामलई, सलेम, कल्लाकुरिची, नामक्कल, तिरुचिरापल्ली, डिंडीगुल, तिरुपत्तूर, तिरुनेलवेली, वेल्लोर, कन्याकुमारी, थेनी, तेनकासी, विरुधुनगर, कृष्णागिरी, धर्मपुरी, इरोड, तिरुप्पुर, विल्लुपुरम और कोयंबटूर — और इसे ज़िला व ब्लॉक कृषि दफ़्तरों से ही चलाया जाता है, किसी अलग योजना पोर्टल से नहीं।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- ढलान व बारिश-आधारित ज़मीन के अनुकूल छोटे अनाज (मोटे अनाज) की खेती के लिए सब्सिडी सहयोग, ताकि पानी माँगने वाली फ़सलें ढलान पर ज़बरन न उगानी पड़ें।
- पहाड़ी सब्ज़ियों की खेती बढ़ाने में मदद — पहाड़ी किसान के लिए नक़दी कमाई का ज़रिया।
- सीढ़ीदार व छोटे खेतों के लिए कृषि इनपुट और छोटे मशीनीकरण की सहायता।
- कम पानी वाले पहाड़ी इलाक़े में सूक्ष्म सिंचाई सहयोग, ताकि उपलब्ध पानी ज़्यादा दूर तक चले।
- जिन लाभार्थियों के पास पहले से किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है, उन्हें कार्ड दिलाकर सस्ते फ़सली कर्ज़ तक पहुँच।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- चिन्हित 20 पहाड़ी/बारिश-आधारित ज़िलों में से किसी एक में खेती करने वाला किसान
- ज़िला कृषि दफ़्तर / उझावन रिकॉर्ड में भूमि व किसान पंजीकरण हो
- योजना की मुख्य फ़सलों में से कोई उगा रहा हो या उगाने को तैयार हो — छोटे अनाज, पहाड़ी सब्ज़ियाँ, या एकीकृत खेती मिश्रण
- उसी सीज़न में किसी अन्य विभागीय सब्सिडी से वही घटक पहले से न लिया हो
शामिल नहीं
- चिन्हित 20 ज़िलों के बाहर के किसान
- स्थानीय कृषि दफ़्तर में अपंजीकृत भूमि
- उसी साल किसी और योजना से पहले ही सब्सिडी पा चुके इनपुट का दोहरा दावा
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- पट्टा / भूमि स्वामित्व या पट्टे का दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
- अगर पहले से किसान क्रेडिट कार्ड है तो उसका विवरण
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
ब्लॉक कृषि दफ़्तर से संपर्क करें
अपने पहाड़ी/बारिश-आधारित ज़िले के सहायक कृषि अधिकारी या ब्लॉक दफ़्तर से मिलें — यह योजना अलग पोर्टल से नहीं, नियमित ज़िला कृषि ढाँचे से चलती है।
- 2
अपने खेत के लिए सही घटक चुनें
भूमि व किसान रिकॉर्ड के साथ संबंधित हिस्से के लिए नाम दर्ज कराएँ — छोटे अनाज/इनपुट सब्सिडी, सब्ज़ी विस्तार, मशीनीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, या किसान क्रेडिट कार्ड।
- 3
सत्यापन और वितरण
कृषि दफ़्तर भूमि व पात्रता जाँचने के बाद इनपुट या सब्सिडी राशि जारी करता है, या KCC आवेदन बैंक को भेजता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- जिस घटक के लिए नाम दर्ज कराया पर नहीं मिला, या भूमि/पात्रता ग़लत दर्ज हो, तो सहायक कृषि अधिकारी और अपने ब्लॉक के सहायक कृषि निदेशक के पास, फिर ज़िले के संयुक्त कृषि निदेशक के पास बात रखें। राज्य किसान हेल्पलाइन 044-28583323 है।
- विभाग से आगे, तमिलनाडु CM हेल्पलाइन (मुधलवरिन मुगवरी) का इस्तेमाल करें — टोल-फ्री 1100 (सुबह 7 से रात 10 बजे), cmhelpline.tnega.org, "CMHelpline Citizen" ऐप, या [email protected]। अपना आधार या फ़ैमिली कार्ड नंबर और शिकायत संदर्भ संभालकर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह एक ही नक़द लाभ है, या कई अलग चीज़ें?
यह एक पैकेज है — छोटे अनाज व इनपुट सब्सिडी, सब्ज़ी क्षेत्र विस्तार, मशीनीकरण, सूक्ष्म सिंचाई और किसान क्रेडिट कार्ड, सब एक ही योजना के तहत आते हैं; किसान आमतौर पर अपने खेत से जुड़ा हिस्सा ही लेता है।
मैं मैदानी इलाक़े में खेती करता हूँ, क्या आवेदन कर सकता हूँ?
नहीं — यह योजना ख़ास तौर पर चिन्हित 20 पहाड़ी व बारिश-आधारित ज़िलों के लिए है; मैदानी किसान नियमित इनपुट-सब्सिडी और मिलेट्स मिशन योजनाओं में देखें।
लाभ लेने से पहले क्या किसान क्रेडिट कार्ड होना ज़रूरी है?
नहीं — अगर आपके पास पहले से नहीं है, तो KCC दिलवाना ख़ुद इस योजना का एक हिस्सा है; यह बाक़ी सहयोग पाने की शर्त नहीं है।
क्या इस योजना का अलग पोर्टल या फ़ॉर्म है?
नहीं। यह नियमित ज़िला व ब्लॉक कृषि दफ़्तरों और उझावन / TNAU रिकॉर्ड से चलती है, अलग योजना पोर्टल से नहीं।
₹22.80 करोड़ कैसे ख़र्च होने थे?
यह 2025-26 कृषि बजट में घोषित राशि थी, जो 20 चिन्हित ज़िलों के क़रीब 63,000 पहाड़ी व बारिश-आधारित किसानों तक पहुँचनी थी — योजना के अलग-अलग घटकों में बँटकर, हर किसान को एक तय रक़म के रूप में नहीं।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को www.tnagrisnet.tn.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
