आउटबोर्ड मोटर सब्सिडी योजना (मात्स्यफेड, केरल)
पारंपरिक मछली पकड़ने वाली नौका पर 10 HP से कम के नए आउटबोर्ड मोटर पर ₹30,000 — एक बार मिलने वाला लाभ, 1988-89 से चल रहा।
संचालक: केरल राज्य सहकारी मत्स्य विकास संघ (मात्स्यफेड), मत्स्य विभाग, केरल सरकार
- प्रति मोटर सब्सिडी
- ₹30,000 (2007-08 से)
- इंजन क्षमता
- 10 HP से कम
- दावा प्रति मछुआरा
- सिर्फ़ एक बार
- योजना चालू है
- 1988-89 से
- अब तक मोटरयुक्त नौकाएँ
- 8,502
परिचय
बिना मोटर की पारंपरिक नौका मछुआरे को किनारे के पास ही रोक देती है, क्योंकि वह उतना ही आगे जा सकता है जितना खुद खे या पाल से जा पाए। मात्स्यफेड — केरल राज्य सहकारी मत्स्य विकास संघ, राज्य की शीर्ष मछुआरा सहकारी संस्था — 1988-89 से मोटरीकरण योजना चला रहा है, ताकि पारंपरिक नौकाएँ दूर के मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों तक पहुँच सकें और ज़्यादा पकड़ लेकर आ सकें।
यह सब्सिडी 2007-08 से प्रति आउटबोर्ड मोटर ₹30,000 पर टिकी है — इससे पहले यह ₹10,000 थी — 10 HP से कम क्षमता वाले उन मोटरों के लिए जो पात्र पारंपरिक नौका पर लगाए जाते हैं। यह एक बार मिलने वाला लाभ है — जिस मछुआरे को यह पहले मिल चुका है, वह बाद के इंजन पर दोबारा दावा नहीं कर सकता। मात्स्यफेड दक्षिण भारत में सुज़ुकी आउटबोर्ड मोटरों का इकलौता अधिकृत आयातक और वितरक भी है, इसलिए सब्सिडी वाली खरीद उसी के डीलर नेटवर्क से होकर आती है, निर्माता की गारंटी के साथ।
योजना शुरू होने के बाद से इसने केरल के तटीय इलाके में 8,502 नौकाओं को मोटर से लैस किया है — यह सब मात्स्यफेड से जुड़ी मछुआरा सहकारी समितियों के ज़रिए होता है, सीधे व्यक्तिगत नकद भुगतान के रूप में नहीं। यह मात्स्यफेड की अलग बैंकेबल स्कीम से अलग है, जो इसके बजाय मछुआरे द्वारा स्वतंत्र रूप से लिए गए बैंक ऋण का 25% वापस करती है — उस योजना ने अब तक 2,211 लाभार्थी समूहों की मदद की है और यह पूरी तरह अलग प्रक्रिया से चलती है।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- पारंपरिक मछली पकड़ने वाली नौका के लिए नए आउटबोर्ड मोटर (10 HP से कम) पर ₹30,000 सब्सिडी — यह दर 2007-08 से बनी हुई है।
- खुद खे या पाल से चलने वाली नौका से कहीं दूर तक मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों में पहुँचाती है, जिससे पकड़ और कमाई सीधे बढ़ती है।
- मात्स्यफेड दक्षिण भारत में सुज़ुकी आउटबोर्ड मोटरों का इकलौता अधिकृत आयातक-वितरक है, इसलिए सब्सिडी वाला इंजन असली निर्माता गारंटी और सर्विस के साथ आता है।
- देश की सबसे लंबे समय से चल रही मोटरीकरण योजनाओं में से एक — शुरुआत से अब तक 8,500 से ज़्यादा नौकाओं को मोटर से लैस कर चुकी है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- केरल का पारंपरिक मछुआरा जो मछली पकड़ने वाली नौका (देसी डोंगी/कैनो) का मालिक हो
- नौका पर 10 HP से कम का आउटबोर्ड मोटर लगा हो, या लगाया जा रहा हो
- यह सब्सिडी पहले किसी और इंजन पर न ली हो — यह प्रति मछुआरा एक बार मिलने वाला लाभ है
- मात्स्यफेड से जुड़ी प्राथमिक मछुआरा सहकारी समिति का पंजीकृत सदस्य
शामिल नहीं
- 10 HP या उससे ज़्यादा क्षमता वाले मोटर
- वह मछुआरा जो पहले ही एक बार यह सब्सिडी ले चुका हो
- मात्स्यफेड से जुड़ी मछुआरा सहकारी समिति में पंजीकृत न होने वाली नौका
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- मछुआरा पहचान पत्र या सहकारी समिति सदस्यता प्रमाण
- नौका स्वामित्व प्रमाण
- आधार कार्ड
- सब्सिडी समायोजन/ट्रांसफर के लिए बैंक खाता विवरण
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
अपनी मछुआरा सहकारी समिति के ज़रिए आवेदन करें
अपनी नज़दीकी मात्स्यफेड से जुड़ी प्राथमिक मछुआरा सहकारी समिति में जाएँ और आउटबोर्ड मोटर सब्सिडी के लिए पंजीकरण कराएँ।
- 2
मात्स्यफेड से मोटर खरीदें
मात्स्यफेड के अपने वितरण नेटवर्क से 10 HP से कम का सुज़ुकी आउटबोर्ड मोटर खरीदें, जिसमें सब्सिडी पहले से ही प्रक्रिया में शामिल होती है।
- 3
सब्सिडी समायोजित या जारी होती है
₹30,000 की सब्सिडी खरीद कीमत में समायोजित होती है या सत्यापन के बाद मछुआरे को जारी की जाती है — याद रखें यह एक बार का लाभ है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- आवेदन या सब्सिडी जारी होने से जुड़ी समस्या पहले अपनी स्थानीय मछुआरा सहकारी समिति या मात्स्यफेड ज़िला कार्यालय में बताएं — मुख्य कार्यालय से 0471-2458606/2457756 या [email protected] पर भी संपर्क किया जा सकता है।
- समाधान न होने पर मुख्यमंत्री लोक शिकायत निवारण प्रकोष्ठ — केरल की सामान्य लोक-शिकायत व्यवस्था — के टोल-फ्री हेल्पलाइन 1076 पर, या cmo.kerala.gov.in पोर्टल पर आगे बढ़ाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मुझे यह सब्सिडी दो नौकाओं के लिए दो बार मिल सकती है?
नहीं। यह प्रति मछुआरा एक बार मिलने वाला लाभ है — एक इंजन पर मिलने के बाद दूसरे पर दोबारा पात्रता नहीं बनती।
अगर मुझे 15 HP का मोटर चाहिए तो?
यह सब्सिडी सिर्फ़ 10 HP से कम के आउटबोर्ड मोटर पर लागू होती है। इससे ज़्यादा क्षमता वाला इंजन इस योजना में पात्र नहीं होगा।
क्या मुझे मोटर मात्स्यफेड से ही खरीदना ज़रूरी है?
हाँ — मात्स्यफेड इन सब्सिडी वाले मोटरों का इकलौता अधिकृत वितरक है, और दक्षिण भारत में सुज़ुकी आउटबोर्ड मोटरों का इकलौता आयातक भी, इसलिए खरीद और सब्सिडी दोनों उसी के नेटवर्क से होकर गुज़रती हैं।
मैंने मात्स्यफेड की 25%-ऋण सब्सिडी के बारे में भी सुना है — क्या वह यही योजना है?
नहीं — वह मात्स्यफेड की अलग बैंकेबल स्कीम है, जो मछुआरे द्वारा स्वतंत्र रूप से लिए गए बैंक ऋण का 25% वापस करती है, सीधे बैंक को जारी होकर। यह अलग प्रक्रिया से चलती है और यहाँ बताई गई फ्लैट ₹30,000 आउटबोर्ड-मोटर सब्सिडी नहीं है।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को matsyafed.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
