मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
केरलअनुदानसक्रियअपडेट 8 सितंबर 2026

सब्ज़ी विकास कार्यक्रम

सब्ज़ी उगाने वाले किसान को मुफ्त बीज किट, रेन शेल्टर पर 75% सब्सिडी, और क्लस्टर व VFPCK बाज़ार सहायता — हर साल स्थानीय कृषि भवन के ज़रिए।

संचालक: कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग, केरल सरकार

हाल का बजट
₹78 करोड़ (2024-25)
रेन शेल्टर सब्सिडी
लागत का 75%
बीज सहायता
मुफ्त/रियायती किट
बाज़ार जुड़ाव
VFPCK क्लस्टर बिक्री
VFPCK स्थापना
2001 (1993 KHDP का उत्तराधिकारी)
VFPCK स्वामित्व
50% किसान SHG, 30% सरकार, 20% अन्य

परिचय

केरल अपनी अधिकांश सब्ज़ी पड़ोसी राज्यों से मंगाता है, इसलिए यह सालाना कार्यक्रम स्थानीय उत्पादन बढ़ाता है — सीज़न शुरू करने के लिए मुफ्त या रियायती बीज किट, और रेन शेल्टर ढाँचे पर भारी 75% सब्सिडी जो मानसून में भी सब्ज़ी उगाने देती है, न कि सिर्फ़ सूखे महीनों में।

किसान को क्लस्टर बनाने या जुड़ने में भी मदद मिलती है जो वेजिटेबल एंड फ्रूट प्रमोशन काउंसिल केरलम (VFPCK) के ज़रिए सामूहिक रूप से बेचता है, ताकि छोटा किसान अकेले थोक खरीदार से मोलभाव न करे।

VFPCK खुद 2001 में केरल हॉर्टिकल्चर विकास कार्यक्रम (KHDP) के उत्तराधिकारी के रूप में बना, जिसे यूरोपीय संघ और राज्य सरकार ने मिलकर 1993 से वित्तपोषित किया था, शुरुआत तिरुवनंतपुरम, एर्णाकुलम व कोट्टायम ज़िलों से हुई थी, बाद में यह राज्यभर फैला। VFPCK एक किसान-बहुल संस्था के रूप में बनी है — किसान स्वयं सहायता समूहों के पास इसके 50% शेयर हैं, केरल सरकार के पास 30%, और बाकी 20% अन्य संबंधित संस्थाओं के पास — इसीलिए क्लस्टर के फ़ैसले विभाग-संचालित नहीं, किसान-नेतृत्व वाले रहते हैं।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • हर सीज़न मुफ्त या भारी रियायती सब्ज़ी बीज किट।
  • रेन शेल्टर/संरक्षित खेती ढाँचे पर 75% सब्सिडी।
  • सामूहिक बिक्री के लिए VFPCK-समर्थित क्लस्टर बनाने या जुड़ने में सहायता।
  • एकबारगी अभियान नहीं, हर साल स्थानीय कृषि भवन के ज़रिए चलता है।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • केरल में स्थानीय कृषि भवन में पंजीकृत किसान या घरेलू बाग़ान उत्पादक
  • उपलब्ध ज़मीन पर सब्ज़ी उगा रहा हो या उगाने की योजना हो, छोटे घरेलू बाग़ान सहित
  • बाज़ार-सहायता हिस्से के लिए VFPCK क्लस्टर में जुड़ने को तैयार

शामिल नहीं

  • कृषि भवन में अपंजीकृत/असत्यापित ज़मीन

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड
  • कृषि भवन किसान पंजीकरण
  • भूमि रिकॉर्ड या घरेलू बाग़ान स्वामित्व प्रमाण
  • बैंक पासबुक

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

  1. 1

    स्थानीय कृषि भवन में पंजीकरण करें

    पंचायत-स्तरीय कृषि भवन में सब्ज़ी उत्पादक के रूप में नामांकन करें, जो स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम चलाता है।

  2. 2

    बीज किट लें / रेन शेल्टर के लिए आवेदन करें

    मौसमी बीज किट लें, या मानसून में खेती के लिए 75%-सब्सिडी वाले रेन शेल्टर ढाँचे हेतु आवेदन करें।

  3. 3

    VFPCK क्लस्टर से बेचें

    बेहतर मोलभाव दर पर सामूहिक बिक्री के लिए नज़दीकी VFPCK क्लस्टर से जुड़ें।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • बीज किट, रेन शेल्टर सब्सिडी या क्लस्टर पंजीकरण में देरी या समस्या पहले अपने स्थानीय कृषि भवन में बताएं।
  • समाधान न होने पर मुख्यमंत्री लोक शिकायत निवारण प्रकोष्ठ — केरल की सामान्य लोक-शिकायत व्यवस्था — के टोल-फ्री हेल्पलाइन 1076 पर, या cmo.kerala.gov.in पोर्टल पर आगे बढ़ाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यह सिर्फ़ बड़े सब्ज़ी फार्म के लिए है?

नहीं, इसमें कृषि भवन में पंजीकृत छोटे घरेलू बाग़ान सब्ज़ी उत्पादक भी शामिल हैं।

क्या रेन शेल्टर सब्सिडी पूरी लागत कवर करती है?

यह लागत का 75% कवर करती है, पूरी राशि नहीं — बाक़ी 25% उत्पादक को देना होता है।

क्या बीज किट पाने के लिए VFPCK से बेचना ज़रूरी है?

नहीं, बीज किट सहायता अलग है; VFPCK क्लस्टर से जुड़ना बाज़ार पहुँच के लिए अतिरिक्त, वैकल्पिक लाभ है।

VFPCK असल में चलाता कौन है — क्या यह सरकारी विभाग है?

बिल्कुल नहीं। VFPCK एक किसान-बहुल संस्था है: किसान स्वयं सहायता समूहों के पास इसके 50% शेयर हैं, केरल सरकार के पास 30%, और अन्य संबंधित संस्थाओं के पास 20%। यह 1993 में शुरू हुए EU-व-राज्य वित्तपोषित केरल हॉर्टिकल्चर विकास कार्यक्रम (KHDP) से निकला और 2001 में औपचारिक रूप से VFPCK बना।

तथ्य 8 सितंबर 2026 को keralaagriculture.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.