मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना
पैक्ड साइलेज/TMR चारा ₹2.75 प्रति किलो पर — लागत पर 75% सब्सिडी — ताकि पहाड़ी परिवार को घंटों पैदल जाकर हाथ से घास काटनी न पड़े।
संचालक: पशुपालन एवं कृषि विभाग, उत्तराखंड सरकार
- चारा मूल्य
- ~₹2.75/किलो (भारी रियायती)
- चारा प्रकार
- पैक्ड साइलेज / TMR
- शुरुआत
- 1 नवंबर 2021 (मंत्रिमंडल मंज़ूरी 25 फरवरी 2021)
- कौन देता है
- सहकारी डेयरी (आँचल) + पशुपालन
- मुख्य लाभ
- महिलाओं पर चारा जुटाने का बोझ कम
परिचय
उत्तराखंड के पहाड़ों में चारा जुटाना आमतौर पर महिला का काम है — "घसियारी" यानी घास काटने वाली औरत — और इसका मतलब है रोज़ घंटों खड़ी ढलान पर पैदल चलकर हाथ से चारा काटना, अक्सर भारी सिर-बोझ लेकर लौटना। यह योजना तैयार पैक्ड साइलेज या टोटल मिक्स्ड राशन (TMR) चारा भारी रियायती दर पर बेचती है, करीब ₹2.75 प्रति किलोग्राम, जबकि असल लागत कई गुना ज़्यादा है — ताकि परिवार दिन भर घास काटने के बजाय चारा ख़रीद सके।
उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने इस योजना को 25 फरवरी 2021 को मंज़ूरी दी, और इसे 1 नवंबर 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ शुरू किया। इसे राज्य के सहकारी डेयरी ढाँचे (आँचल नेटवर्क) और पशुपालन विभाग के ज़रिए दिया जाता है: सहकारी मक्का खेती साइलेज और TMR उत्पादन इकाइयों को कच्चा माल देती है, और पैक्ड चारा पहाड़ी ब्लॉकों में डेयरी समिति के आउटलेट और चारा केंद्रों से बेचा जाता है।
रोज़ाना मेहनत घटाने के अलावा, ज़्यादा स्थिर चारा गुणवत्ता दूध उत्पादन भी बढ़ाती है, इसलिए योजना को कल्याण लाभ के साथ-साथ डेयरी आय बढ़ाने वाली भी बताया जाता है। पैक का आकार, मौजूदा रियायती दर और कौन-से आउटलेट इसे रखते हैं — ये ज़िले-ज़िले अलग हैं और समय के साथ बदलते हैं, इसलिए अपनी डेयरी समिति या ब्लॉक पशुपालन कार्यालय से जाँच लें।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- असल लागत से कई गुना कम, करीब ₹2.75/किलो पर तैयार चारा।
- पहाड़ी ढलान पर हाथ से घास काटने में लगने वाले रोज़ के घंटे बचते हैं — यह बोझ ज़्यादातर महिलाओं पर पड़ता है।
- स्थिर चारा गुणवत्ता से दूध उत्पादन बेहतर हो सकता है।
- दूर के डिपो नहीं, सहकारी डेयरी नेटवर्क और ब्लॉक स्तर के चारा केंद्रों से बिकता है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- उत्तराखंड के पहाड़ी ज़िले में पशुपालन करने वाला परिवार
- गाँव में या पास में चालू चारा केंद्र तक पहुँच
- स्थानीय पशुपालन विभाग में डेयरी/पशुपालक के रूप में पंजीकृत
शामिल नहीं
- पास में चालू चारा केंद्र न होने वाले इलाके
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- पशु स्वामित्व/पंजीकरण रिकॉर्ड
- पहाड़ी ज़िले का निवास प्रमाण
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
नज़दीकी आउटलेट खोजें
रियायती चारा रखने वाले नज़दीकी आउटलेट के लिए अपनी गाँव डेयरी सहकारी समिति, ग्राम पंचायत या ब्लॉक पशुपालन कार्यालय से संपर्क करें।
- 2
लाभार्थी के रूप में पंजीकरण करें
नियमित रूप से रियायती चारा खरीद पाने के लिए डेयरी समिति या पशुपालन कार्यालय में अपने पशु विवरण पंजीकृत करें।
- 3
रियायती दर पर चारा खरीदें
ज़रूरत अनुसार रियायती दर (करीब ₹2.75/किलो) पर पैक्ड साइलेज / TMR खरीदें, हाथ से घास काटने के बजाय।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- रियायती चारा आपके आउटलेट तक न पहुँच रहा हो, ग़लत दाम लिया जा रहा हो, या गुणवत्ता ख़राब हो — स्थानीय डेयरी सहकारी समिति और ब्लॉक / ज़िला पशुपालन कार्यालय के पास, फिर उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन और पशुपालन निदेशक के पास बात रखें।
- विभाग से आगे, उत्तराखंड CM हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें — टोल-फ्री 1905 (पंजीकरण 24×7, कॉल सेंटर सुबह 8 से रात 10 बजे), पोर्टल cmhelpline.uk.gov.in, या CM हेल्पलाइन ऐप। ट्रैक करने के लिए शिकायत रेफ़रेंस नंबर संभालकर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या चारा पूरी तरह मुफ्त है?
नहीं। यह भारी रियायती दर, करीब ₹2.75/किलो पर बिकता है — असल लागत का ज़्यादातर हिस्सा राज्य उठाता है, बाक़ी किसान देता है।
किस तरह का चारा दिया जाता है?
पैक्ड साइलेज या टोटल मिक्स्ड राशन (TMR), जो हाथ से काटी घास से पोषण में ज़्यादा स्थिर रहता है और लंबे समय टिकता है।
योजना कौन चलाता है, कृषि या पशुपालन?
यह पशुपालन विभाग और राज्य के सहकारी डेयरी ढाँचे (आँचल) के ज़रिए दी जाती है, जिसमें सहकारी मक्का खेती साइलेज और TMR इकाइयों को कच्चा माल देती है।
क्या यह उत्तराखंड के हर ज़िले में उपलब्ध है?
यह उन पहाड़ी ज़िलों पर केंद्रित है जहाँ चारा जुटाना सबसे मुश्किल है, और नई इकाइयों व आउटलेट के साथ दायरा बढ़ रहा है — नज़दीकी के लिए स्थानीय डेयरी समिति या पशुपालन कार्यालय से पूछें।
"घसियारी" नाम क्यों?
घसियारी वह पहाड़ी औरत है जो पशुओं के लिए घास काटती और ढोती है। योजना उसी के नाम पर है क्योंकि उसी रोज़ाना मेहनत को घटाना इसका मक़सद है।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को uk.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
