प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना (मध्य प्रदेश)
बिना बिजली कनेक्शन वाले किसानों को पहले, 7.5 HP तक का सोलर सिंचाई पंप क़रीब 10% लागत पर — SC/ST किसान को क़रीब 5% पर।
संचालक: मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL), ऊर्जा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार
- किसान नक़द हिस्सा (सामान्य)
- क़रीब 10% लागत
- किसान नक़द हिस्सा (SC/ST)
- क़रीब 5% लागत
- बाक़ी हिस्सा
- ~63% आपके नाम बैंक ऋण
- पंप क्षमता
- 1 से 7.5 HP सोलर
- नाम बदला व विस्तार
- 24 जनवरी 2025
- FY2026-27 लक्ष्य
- 1 लाख पंप, ₹3,000cr बजट
परिचय
मध्य प्रदेश के ऊर्जा विभाग ने अपनी पुरानी किसान बिजली-कनेक्शन योजना — मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना, जो सितंबर 2023 में स्थायी बिजली पंप कनेक्शन में मदद के लिए शुरू हुई थी — को 24 जनवरी 2025 से बढ़ाकर प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना का नाम दे दिया। अब यह उन किसानों तक भी सोलर सिंचाई पंप पहुँचाती है जिनके पास कोई बिजली कनेक्शन नहीं है या सिर्फ़ अस्थायी कनेक्शन है — यह काम केंद्र की PM-KUSUM योजना के कम्पोनेंट-B ढाँचे के तहत राज्य के ऊर्जा विकास निगम MPUVNL के ज़रिए होता है।
इसे अलग योजना मानने की असल वजह राज्य का अपना अतिरिक्त अनुदान है: नवंबर 2025 के कैबिनेट संशोधन के बाद सामान्य श्रेणी का किसान अब पंप की क़ीमत का सिर्फ़ क़रीब 10% देता है, और SC/ST किसान क़रीब 5% — यह केंद्र के सामान्य PM-KUSUM कम्पोनेंट-B अनुदान से कहीं ज़्यादा है, 1 HP से 7.5 HP तक के पंप पर। जिन किसानों के पास कोई कनेक्शन नहीं या सिर्फ़ अस्थायी कनेक्शन है, उन्हें पहले लिया जाता है; स्थायी बिजली पंप कनेक्शन वाले किसानों को योजना के बाद के चरण में शामिल किया जाएगा।
आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है — MPUVNL के पोर्टल cmsolarpump.mp.gov.in पर किसान आधार से जुड़े खसरा विवरण से पंजीकरण करता है, पंप की क्षमता चुनता है, पंजीकरण राशि भरता है, और स्व-प्रमाणित करता है कि उस ज़मीन पर पहले से कोई बिजली पंप नहीं चल रहा — इसके बाद विभाग आवेदन की जाँच करता है। MP का 2026-27 बजट इस मुहिम के लिए राज्यभर 1 लाख सोलर पंप लगाने हेतु ₹3,000 करोड़ रखता है।
आवेदन से पहले एक ज़रूरी स्पष्टीकरण जान लें, जिसे स्वतंत्र रिपोर्टिंग ने सामने लाया है: विज्ञापित "~90% अनुदान" का मतलब यह नहीं कि किसान सिर्फ़ 10% अपनी जेब से देता है। रिपोर्टरों द्वारा देखे गए बैंकिंग दस्तावेज़ों के अनुसार असल ढाँचा है — लगभग 27% सरकारी अनुदान, क़रीब 10% किसान का नक़द हिस्सा, और बाक़ी लगभग 63% किसान के अपने नाम पर स्वीकृत बैंक ऋण के रूप में — जिसकी ज़िम्मेदारी सरकार की नहीं, किसान की होती है। एक दर्ज मामले में एक किसान के पंप पर ₹2.53 लाख का ऋण, 8.30% फ़्लोटिंग ब्याज पर, 84 महीनों के लिए जुड़ा हुआ था। चूँकि दर फ़्लोटिंग है, ब्याज दर बढ़ने पर किस्त बढ़ सकती है; छूटी किस्त पर 2% मासिक चक्रवृद्धि दंड ब्याज लगता है; और ऋण न चुकाने पर बैंक सैद्धांतिक रूप से पंप ज़ब्त कर नीलाम कर सकता है। स्थापना में भी देरी हुई है — नीमच ज़िले में, उदाहरण के लिए, 2026 के मध्य तक स्वीकृत स्थापनाओं में से लगभग पाँचवाँ हिस्सा ही पूरा हुआ था, कुछ किसान 2023 से इंतज़ार कर रहे हैं।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- सोलर सिंचाई पंप जहाँ किसान का अपना नक़द ख़र्च क़रीब 10% (SC/ST को 5%) है — पर ध्यान दें, बाक़ी हिस्सा शुद्ध अनुदान नहीं; लगभग 63% आमतौर पर किसान के अपने नाम बैंक ऋण के रूप में संरचित होता है, ~27% सरकारी हिस्से के ऊपर (आवेदन से पहले नीचे विवरण देखें)।
- 1 HP से 7.5 HP तक, AC और DC दोनों मॉडल में पंप उपलब्ध — छोटी और बड़ी दोनों तरह की जोत के लिए।
- पंप लगने के बाद सिंचाई के लिए न डीज़ल का ख़र्च, न बिजली बिल — पंप सीधे धूप से चलता है।
- जिनके पास बिजली कनेक्शन नहीं या सिर्फ़ अस्थायी कनेक्शन है, उन्हें पहली प्राथमिकता; स्थायी कनेक्शन वाले किसान अगले चरण में जुड़ेंगे।
- यह पुरानी कृषक मित्र स्थायी-कनेक्शन योजना पर ही बनी है, तो जो किसान सोलर की बजाय तार वाला स्थायी कनेक्शन चाहता है, वह उसी विभाग से उस लागत-साझा योजना में भी आवेदन कर सकता है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- मध्य प्रदेश में खेती योग्य ज़मीन वाला किसान, खसरा आधार से जुड़ा हो
- जिस ज़मीन के लिए सोलर पंप माँगा जा रहा है, वहाँ पहले से कोई बिजली पंप न चल रहा हो (आवेदन के समय स्व-प्रमाणन)
- पहले चरण के लिए: कोई स्थायी बिजली कनेक्शन न हो, या सिर्फ़ अस्थायी कनेक्शन हो
- cmsolarpump.mp.gov.in पर वैध मोबाइल नंबर से OTP सत्यापन के साथ पंजीकृत
शामिल नहीं
- जिस ज़मीन पर पहले से चालू बिजली पंप कनेक्शन है, जब तक स्व-प्रमाणन सुधारा न जाए
- 7.5 HP से ज़्यादा क्षमता का पंप चाहने वाले किसान, मौजूदा स्लैब में शामिल नहीं
- जो ज़मीन आवेदक के अपने आधार-खसरा रिकॉर्ड से जुड़ी न हो
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- भूमि रिकॉर्ड से जुड़ा आधार कार्ड
- खसरा / भूमि स्वामित्व दस्तावेज़
- OTP सत्यापन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर
- बुकिंग के समय पंजीकरण राशि (डिमांड ड्राफ़्ट या ऑनलाइन भुगतान)
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
MPUVNL सोलर पंप पोर्टल पर पंजीकरण करें
cmsolarpump.mp.gov.in पर जाएँ, OTP से मोबाइल सत्यापित करें, और जिस ज़मीन पर पंप लगेगा उसका आधार से जुड़ा खसरा विवरण भरें।
- 2
पंप चुनें और किसान अंश जमा करें
1 HP से 7.5 HP तक क्षमता चुनें, स्व-प्रमाणित करें कि ज़मीन पर पहले से बिजली पंप नहीं है, और क़रीब 10% (SC/ST को 5%) अंश ऑनलाइन जमा करें।
- 3
स्वीकृति और स्थापना
MPUVNL आवेदन की जाँच करता है, स्वीकृति के बाद सूचीबद्ध वेंडर मौक़े पर सोलर पंप लगाता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- आवेदन, ऋण शर्तें साफ़ न बताए जाने, या स्थापना में देरी की शिकायत पहले MPUVNL / ज़िला ऊर्जा विभाग कार्यालय में करें।
- समाधान न होने पर सीएम हेल्पलाइन — मध्य प्रदेश की सामान्य लोक-शिकायत व्यवस्था — के टोल-फ्री नंबर 181 (सुबह 7 से रात 11 बजे) पर, या cmhelpline.mp.gov.in पोर्टल पर आगे बढ़ाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह केंद्र की PM-KUSUM योजना जैसी ही है?
सोलर पंप का ढाँचा PM-KUSUM कम्पोनेंट-B पर आधारित है, पर मध्य प्रदेश केंद्र के मानक से ऊपर अपना अतिरिक्त अनुदान जोड़ता है और पुरानी कृषक मित्र स्थायी-कनेक्शन योजना को भी इसमें मिला देता है — इसीलिए राज्य ने इसे अलग नाम, कैबिनेट मंज़ूरी और पोर्टल दिया है।
मेरे पास पहले से स्थायी बिजली पंप कनेक्शन है, क्या मैं आवेदन कर सकता हूँ?
पहले चरण में बिना कनेक्शन या अस्थायी कनेक्शन वाले किसानों को प्राथमिकता है; स्थायी कनेक्शन वाले किसानों को योजना के अगले चरण में शामिल किया जाएगा।
मेरे पास SC/ST प्रमाणपत्र नहीं है, तो मुझे कितना देना होगा?
सामान्य श्रेणी के किसान को पंप की लागत का क़रीब 10% नक़द अंश देना होता है; संबंधित प्रमाणपत्र वाले SC/ST किसान को क़रीब 5% नक़द। पर आगे का सवाल पढ़े बिना इसे पूरी कहानी न मानें।
क्या बाक़ी लागत सच में मुफ़्त अनुदान है, या उस पर पैसा चुकाना पड़ता है?
यहाँ सावधान रहें। स्वतंत्र रिपोर्टिंग के अनुसार पंप लागत का केवल लगभग 27% ही शुद्ध सरकारी अनुदान है — बाक़ी लगभग 63%, आपके 10% (या 5%) नक़द हिस्से के ऊपर, आमतौर पर आपके अपने नाम बैंक ऋण के रूप में स्वीकृत होता है, सरकार के नाम नहीं। इसे चुकाने की ज़िम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से आपकी है, फ़्लोटिंग ब्याज दर पर, छूटी किस्त पर 2% मासिक चक्रवृद्धि दंड के साथ, और ऋण न चुकाने पर बैंक सैद्धांतिक रूप से पंप ज़ब्त कर नीलाम कर सकता है। कुछ भी दस्तख़त करने से पहले MPUVNL व वित्तपोषक बैंक से सटीक ऋण राशि, अवधि व ब्याज दर लिखित में माँगें।
ऋण स्वीकृत होने के बाद पंप वास्तव में कितनी जल्दी लगेगा?
इसे जल्दी मान कर न चलें। उदाहरण के लिए नीमच ज़िले में, 2026 के मध्य तक स्वीकृत स्थापनाओं में से लगभग पाँचवाँ हिस्सा ही पूरा हुआ था, कुछ किसान 2023 से इंतज़ार कर रहे हैं। ऋण स्वीकृति स्थापना के बराबर नहीं है — अपना सिंचाई सीज़न उसी हिसाब से योजित करें और देरी होने पर MPUVNL से संपर्क बनाए रखें।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को cmsolarpump.mp.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
