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ओडिशामूल्य सहायतासक्रियअपडेट 8 सितंबर 2026

समृद्ध कृषक योजना

केंद्रीय MSP के ऊपर राज्य की मदद जोड़कर, ओड़िशा के पंजीकृत धान किसान को ₹3,100 प्रति क्विंटल — भुगतान बिक्री के 48 घंटे में बैंक खाते में।

संचालक: खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण विभाग, ओड़िशा सरकार (दिशानिर्देश कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के साथ मिलकर जारी)

तय भाव
₹3,100 प्रति क्विंटल (धान)
भुगतान समय
48 घंटे में, DBT से
तौल
इलेक्ट्रॉनिक, मंडी में
मंज़ूरी
23 अक्टूबर 2024

परिचय

केंद्र सरकार हर खरीफ सीज़न में धान का MSP तय करती है, पर अकेले वह भाव बढ़ती लागत के आगे अक्सर कम पड़ जाता है। ओड़िशा मंत्रिमंडल ने 23 अक्टूबर 2024 को समृद्ध कृषक योजना मंज़ूर की, ताकि यह अंतर पाटा जा सके — राज्य केंद्रीय MSP के ऊपर अपनी तरफ़ से मदद जोड़ता है, ताकि सरकारी व्यवस्था से बेचने वाले हर पंजीकृत किसान को ₹3,100 प्रति क्विंटल मिले, चाहे केंद्रीय MSP हर साल जैसे भी बदले।

योजना ने ख़रीद के तरीक़े को भी साफ़ किया है। मंडियाँ अब पुराने कटनी-छटनी वाले तरीक़े की जगह इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन से धान तौलती हैं, जिसमें पहले चुपचाप अनाज घट जाता था, और भुगतान DBT से किसान के बैंक खाते में ख़रीद के 48 घंटे के भीतर जमा होता है, न कि बिचौलिए या देर से आने वाले चेक के भरोसे।

2025-26 के खरीफ सीज़न तक, इस योजना के तहत 18.84 लाख किसानों से धान ख़रीदा गया, 77.48 लाख मीट्रिक टन धान की ख़रीद हुई, और MSP के ऊपर ₹5,663 करोड़ से अधिक इनपुट सब्सिडी दी गई। राज्य ने 2026-27 के लिए ₹3,100 का भाव बनाए रखने को ₹6,088 करोड़ का बजट रखा, साथ में भुगतान बिना देरी चलते रहें इसके लिए ₹5,000 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड प्रस्तावित किया।

आपको क्या मिलता है

लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।

  • धान पर ₹3,100 प्रति क्विंटल तय — केंद्रीय MSP के ऊपर राज्य की मदद जुड़कर, यानी किसान को मिलने वाला भाव सिर्फ़ केंद्रीय दर पर निर्भर नहीं रहता।
  • ख़रीद के 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में भुगतान, बिचौलिए या काग़ज़ी चेक के इंतज़ार के बिना।
  • ख़रीद मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनें, जिससे पुरानी कटनी-छटनी की कटौती ख़त्म होती है जो चुपचाप किसान का हक़ घटा देती थी।
  • ओड़िशा राज्य बीज एवं जैविक उत्पाद प्रमाणन अभिकरण (OSSOPCA) से पंजीकृत और OSSC लिमिटेड के ज़रिए बेचने वाले बीज-उत्पादक किसान भी इनपुट सहायता में शामिल हैं।
  • योजना के साथ ₹5,000 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड प्रस्तावित है, ताकि ख़रीद का भुगतान बिना नक़दी की कमी वाली देरी के चलता रहे।

कौन पात्र है

राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।

आप पात्र हैं अगर

  • ओड़िशा का स्थायी निवासी जो राज्य में धान उगाता हो
  • किसान और ज़मीन का विवरण Krushak Odisha पोर्टल पर पंजीकृत हो
  • तय मंडी में सरकारी ख़रीद व्यवस्था के ज़रिए धान बेचा जा रहा हो
  • OTP सत्यापन के लिए किसान रिकॉर्ड से जुड़ा पंजीकृत मोबाइल नंबर हो
  • बीज-उत्पादक श्रेणी के लिए OSSOPCA से पंजीकृत और OSSC लिमिटेड से बेचने वाले किसान

शामिल नहीं

  • सरकारी ख़रीद व्यवस्था के बाहर खुले बाज़ार में बेचा गया धान
  • ऐसे किसान जिनका ज़मीन या Krushak Odisha पंजीकरण ख़रीद के समय अधूरा हो
  • ऐसा अनाज जो मंडी में नमी और गुणवत्ता की जाँच में खरा न उतरे

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।

  • आधार कार्ड
  • धान के खेत को दिखाने वाला भूमि अभिलेख / RoR
  • DBT भुगतान के लिए बैंक पासबुक या खाता विवरण
  • Krushak Odisha पोर्टल पंजीकरण
  • OTP सत्यापन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर

आवेदन कैसे करें

केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।

  1. 1

    Krushak Odisha पोर्टल पर पंजीकरण करें

    krushak.odisha.gov.in पर ज़मीन, फसल और बैंक का विवरण दर्ज करें — यही पंजीकरण वह आधार रिकॉर्ड है जिससे ख़रीद जाँची जाती है।

  2. 2

    तय मंडी में धान बेचें

    सूचित ख़रीद केंद्र पर धान लाएँ, जहाँ इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन से उसका वज़न और गुणवत्ता जाँची जाती है।

  3. 3

    48 घंटे में DBT से भुगतान पाएँ

    केंद्रीय MSP और राज्य की इनपुट सहायता मिलाकर बना ₹3,100 प्रति क्विंटल का भाव ख़रीद के 48 घंटे के भीतर पंजीकृत बैंक खाते में जमा होता है।

अगर कुछ गड़बड़ हो

नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।

  • टोकन न मिलना, कम तौल या ग़लत ग्रेडिंग, अब भी हो रही कटनी-छटनी कटौती, या 48 घंटे में न आया भुगतान — पहले मंडी में मार्केटिंग इंस्पेक्टर / धान ख़रीद समिति और फिर ज़िला नागरिक आपूर्ति अधिकारी व कलेक्टर के पास रखें; एक योजना निगरानी समिति ऐसी शिकायतें देखती है, और स्थिति Krushak Odisha पोर्टल व P-PAS (ppas.pdsodisha.gov.in) पर जाँची जा सकती है।
  • हल न हो तो ओड़िशा के E-Abhijoga शिकायत पोर्टल (cmgcodisha.gov.in) पर दर्ज करें, जो राज्य की मुख्यमंत्री शिकायत कोशिका की व्यवस्था है — 24 घंटे में पुष्टि और ट्रैक करने योग्य।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ₹3,100 ही MSP है, या इसके ऊपर कुछ अलग से मिलता है?

यह मिला-जुला आँकड़ा है — सीज़न का केंद्रीय MSP और ओड़िशा की अपनी इनपुट सहायता जोड़कर, जिससे तय भाव ₹3,100 प्रति क्विंटल पर बना रहता है, भले ही केंद्रीय MSP हर साल बदले।

धान बेचने से पहले कहीं पंजीकरण कराना ज़रूरी है?

हाँ। Krushak Odisha पोर्टल पर ज़मीन और बैंक का विवरण पंजीकृत होना चाहिए — ख़रीद और DBT भुगतान, दोनों इसी पंजीकरण से जाँचे जाते हैं।

पैसा असल में कितनी जल्दी खाते में आता है?

मंडी में बिक्री दर्ज होने के बाद योजना का लक्ष्य है कि सीधे बैंक ट्रांसफ़र से 48 घंटे के भीतर भुगतान हो जाए।

कटनी-छटनी क्या है, और क्या यह अब भी चलती है?

यह मंडी में सफ़ाई और नमी के नाम पर की जाने वाली कटौती थी, जो चुपचाप उस मात्रा को घटा देती थी जिसका किसान को भुगतान मिलता। इस योजना में धान इलेक्ट्रॉनिक मशीन से तौला जाता है और यह कटौती बंद होनी चाहिए — अगर अब भी हो रही हो तो ख़रीद समिति में शिकायत करें।

क्या खुले बाज़ार में बेचकर भी ₹3,100 मिलता है?

नहीं। ₹3,100 का भाव सिर्फ़ उस धान पर है जो आपकी Krushak Odisha पंजीकरण के विरुद्ध तय मंडी में सरकारी ख़रीद व्यवस्था से बेचा जाए। खुले बाज़ार की बिक्री कवर नहीं है।

क्या बीज-उत्पादक किसान भी कवर हैं?

हाँ। OSSOPCA से पंजीकृत और OSSC लिमिटेड से बेचने वाले धान बीज-उत्पादक किसानों को भी इस योजना के तहत इनपुट सहायता मिलती है।

तथ्य 8 सितंबर 2026 को www.foododisha.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.