भेड़, बकरी व पश्मीना पालन इकाई अनुदान
भेड़, बकरी और पश्मीना बकरी पालन इकाई लगाने के लिए पूँजीगत अनुदान — मूल झुंड, शेड या शीयरिंग मशीन पर 75%, पश्मीना किड पेन पर 90% तक — ताकि सालों की गिरावट के बाद लद्दाख के झुंड फिर से खड़े हो सकें।
संचालक: भेड़ पालन विभाग, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख
- पशुधन इकाई (5मादा+1नर / 9मादा+1नर)
- 75% अनुदान
- किड पेन / शेड
- 90% तक अनुदान
- शेड, फेंसिंग, शीयरिंग मशीन
- 75% अनुदान
- न्यूनतम जोत (अधिकांश घटक)
- 30 भेड़/बकरी
परिचय
यह लद्दाख की पश्मीना सहायता का पुराना, संपत्ति-आधारित हिस्सा है — बेची गई ऊन पर नक़द प्रोत्साहन नहीं, बल्कि परिवार को वाक़ई ज़्यादा और बेहतर सुरक्षित पशु रखने में मदद करने वाला पूँजीगत अनुदान। इसका केंद्र है पशुधन इकाई: पश्मीना बकरी, दुधारू बकरी या मेरिनो भेड़ की 5 मादा + 1 नर, या 9 मादा + 1 नर की मूल इकाई, जो लाभार्थी को 75% अनुदान पर मिलती है, बाक़ी 25% पालक ख़ुद देता है।
इसके इर्द-गिर्द भेड़ पालन विभाग द्वारा चलाए जाने वाले आधा दर्जन जुड़े घटक हैं: 30 या ज़्यादा पशुओं की जोत के लिए पशुधन शेड और चेन-लिंक/इलेक्ट्रिक फेंसिंग 75% अनुदान पर, इतनी ही जोत के लिए ऊन शीयरिंग मशीन और स्पिनिंग यूनिट 75% पर, और 50 से ज़्यादा पशुओं वाले सामुदायिक पालकों के लिए 2-टन जैव-उर्वरक संयंत्र 75% पर। सबसे ज़्यादा 90% अनुदान किड पेन/शेड पर मिलता है, जो सर्दियों में पश्मीना बकरी के बच्चों को ठंड और शिकारियों से बचाता है, और चांगथांग बेल्ट में हाथ से पाले जाने वाले बच्चों के लिए दूध पाउडर पर भी।
किड पेन का आवंटन झुंड के आकार के अनुसार बढ़ता है — 200-300 पशुओं पर 1 इकाई, 300-500 पर 2, 500 से ज़्यादा पर 3 — यानी यह सचमुच बड़ा झुंड रखने वाले पालकों के लिए है, दिखावटी मदद नहीं। एक जुड़ी हुई रार्ज़ी योजना में, जहाँ झुंड इतना बड़ा हो कि एक परिवार अकेले न संभाल सके, वहाँ छह महीने तक के अस्थायी चरवाहे को 90% अनुदान पर ₹10,000/महीना मानदेय (DBT से) दिया जाता है।
आपको क्या मिलता है
लाभ वैसा ही, जैसा राज्य ने अधिसूचित किया है — यहाँ कुछ भी अनुमान नहीं है।
- पश्मीना बकरी, दुधारू बकरी या मेरिनो भेड़ की मूल इकाई — 5 मादा+1 नर, या 9 मादा+1 नर — पर 75% अनुदान, 25% हिस्सा लाभार्थी का।
- पश्मीना बच्चों को ठंड व शिकारियों से बचाने वाले किड पेन/शेड पर झुंड के आकार अनुसार 90% तक अनुदान (300 तक पशुओं पर 1 इकाई, 500 तक पर 2, इससे ज़्यादा पर 3)।
- पशुधन शेड, चेन-लिंक या इलेक्ट्रिक फेंसिंग, ऊन शीयरिंग मशीन और घर पर ऊन के मूल्यवर्धन के लिए स्पिनिंग यूनिट पर 75% अनुदान।
- चांगथांग पश्मीना बेल्ट में हाथ से पाले जाने वाले बच्चों के लिए दूध पाउडर पर 90% अनुदान, जिससे दूध की कमी से होने वाली मौतें घटती हैं।
- 50 से ज़्यादा भेड़/बकरी वाले सामुदायिक पालकों के लिए 2-टन जैव-उर्वरक संयंत्र पर 75% अनुदान, जो गोबर को बिकने लायक खाद में बदलता है।
कौन पात्र है
राज्य योजनाएँ अपने मानदंड आमतौर पर सूची में नहीं, विवरण में लिखती हैं। यह वही विवरण खोलकर रखा गया है — अंतिम फ़ैसला विभाग के सत्यापन का होता है।
आप पात्र हैं अगर
- लद्दाख का निवासी भेड़/बकरी/पश्मीना बकरी पालक, मुख्यतः लेह और कारगिल ज़िले
- शेड, फेंसिंग, शीयरिंग मशीन और स्पिनिंग यूनिट के लिए न्यूनतम 30 भेड़/बकरी की जोत
- सामुदायिक जैव-उर्वरक संयंत्र के लिए न्यूनतम 50 पशु
- लागत में अपना हिस्सा देने की तैयारी — अधिकांश घटकों के लिए 25%, किड पेन व दूध पाउडर के लिए 10%
- विभागीय अधिकारी के ज़रिए पहचान व स्वीकृति, स्थानीय पार्षद/ब्लॉक प्रशासन की सहमति से
शामिल नहीं
- किसी घटक के लिए तय न्यूनतम जोत से कम पशु रखने वाले
- विभागीय स्वीकृति से पहले ख़रीदी/बनाई गई इकाई, शेड या मशीन
- जो अपना लागत हिस्सा पहले या प्रतिपूर्ति के विरुद्ध नहीं दे सकते
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — ज़्यादातर आवेदन हक़ न होने से नहीं, कोई काग़ज़ छूट जाने से रद्द होते हैं।
- आधार कार्ड
- लद्दाख निवास प्रमाण
- मौजूदा पशुधन जोत का प्रमाण (झुंड का आकार)
- DBT/अनुदान हस्तांतरण के लिए बैंक पासबुक
- स्थानीय पार्षद या ब्लॉक कार्यालय की सिफ़ारिश
आवेदन कैसे करें
केंद्रीय योजना से कम कदम, और आमतौर पर पोर्टल नहीं, एक कार्यालय।
- 1
भेड़ पालन विभाग में अपनी जोत पंजीकृत कराएँ
लेह या कारगिल में भेड़ पालन विभाग के कार्यालय, या अपने स्थानीय पार्षद/ब्लॉक प्रशासन से संपर्क कर अपने झुंड का आकार दर्ज कराएँ — अधिकांश घटकों के लिए न्यूनतम जोत ज़रूरी है।
- 2
ज़रूरी घटक के लिए आवेदन करें
तय करें कि कौन-सा घटक आपके लिए सही है — पशुधन इकाई, शेड, फेंसिंग, शीयरिंग मशीन, स्पिनिंग यूनिट, किड पेन या जैव-उर्वरक संयंत्र — और अपने ज़िले के विभागीय अधिकारी से आवेदन करें।
- 3
स्वीकृति के बाद ख़रीद/निर्माण करें
स्वीकृति मिलने पर इकाई या ढाँचा आपके अपने हिस्से (अधिकांश के लिए 25%, किड पेन व दूध पाउडर के लिए 10%) के साथ विभाग के अनुदान हिस्से से बनता/मिलता है।
अगर कुछ गड़बड़ हो
नाम सूची में न हो, या भुगतान अटका हो — विभाग ने ख़ुद जो रास्ता बताया है, वह यहाँ है।
- स्वीकृति या अनुदान जारी होने से जुड़ी समस्या पहले लेह या कारगिल के भेड़ पालन विभाग कार्यालय, या अपने स्थानीय पार्षद/ब्लॉक प्रशासन में बताएं।
- समाधान न होने पर लद्दाख की इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम पर — 8588816003 पर कॉल करें, 9541786450 पर व्हाट्सऐप करें, या grievance.ladakh.gov.in पोर्टल का उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
5मादा+1नर और 9मादा+1नर पशुधन इकाई में क्या फ़र्क़ है?
दोनों 75% अनुदान पर मिलने वाली मूल-झुंड इकाइयाँ हैं — 5 मादा+1 नर छोटी इकाई है, 9 मादा+1 नर बड़ी। आपको कौन-सी मिलेगी यह आपकी मौजूदा जोत और विभाग की स्वीकृति पर निर्भर करता है।
क्या यह पश्मीना बिक्री पर 25% अतिरिक्त भुगतान जैसा ही है?
नहीं। यह पालन इकाई, शेड, किड पेन या उपकरण लगाने/बढ़ाने में मदद करने वाला पूँजीगत अनुदान है। आपके द्वारा बेची गई पश्मीना के मूल्य पर 25% अतिरिक्त भुगतान एक अलग, नई योजना है — देखें पश्मीना पशुधन विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम।
मेरे पास 30 से कम पशु हैं। क्या मुझे मदद मिल सकती है?
शेड, फेंसिंग, शीयरिंग मशीन और स्पिनिंग यूनिट अनुदान के लिए न्यूनतम 30 भेड़/बकरी चाहिए, और सामुदायिक जैव-उर्वरक संयंत्र के लिए 50। छोटे पालकों को पशुधन-इकाई और किड-पेन घटकों के बारे में विभाग से पूछना चाहिए, जो इस तरह की सीमा से बंधे नहीं हैं।
ज़ांस्कर में इंटीग्रेटेड वूल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IWDP) के बारे में सुना है — क्या यह इसी योजना का हिस्सा है?
यह कारगिल ज़िले में भेड़ पालन विभाग द्वारा चलाया जाने वाला एक संबंधित पर अलग कार्यक्रम है, जो ज़ांस्कर घाटी में ऊन विकास पर केंद्रित है। अपने इलाके के लिए यह इस योजना के किसी घटक से मेल खाता है या नहीं, अपने स्थानीय विभागीय कार्यालय से पूछें।
तथ्य 8 सितंबर 2026 को ladakh.gov.in से जाँचे गए। संपादकीय नीति.
