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सुपारीसभी सीज़नपौध (चुनी हुई बीज वाली सुपारी से)अंतिम अपडेट: 20 अक्टूबर 2026

Mangala

चीन के नमूने से छाँटी CPCRI की अर्ध-ऊँची किस्म, जिसमें यहाँ की किस्मों में सबसे जल्दी फूल आते हैं (36 से 40 महीने)। लगभग 2% पेड़ कमज़ोर और लंबे-पतले निकलते हैं और 2 साल के भीतर हटा देने चाहिए। घनी छाया वाले पुराने बाग़ में बीच में लगाने पर इसे नुक़सान होता है।

सीज़नसभी सीज़न
फल कब सेरोपाई के 36–40 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)
अपेक्षित उपज2.90 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (3,700–3,900 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 4.50 किग्रा
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
पौध (चुनी हुई बीज वाली सुपारी से)
सीज़न
सभी सीज़न
फल कब से
रोपाई के 36–40 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)
बीज दर
खेत में बीज नहीं, हर गड्ढे में नर्सरी का एक पौधा। 2.7 x 2.7 मी पर लगभग 1,370 पेड़ प्रति हेक्टेयर, या मिश्रित बाग़ में 3.3 x 3.3 मी पर लगभग 920 (DASD)।
अपेक्षित उपज
2.90 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (3,700–3,900 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 4.50 किग्रा
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जलवायु
तटीय कर्नाटक और केरल के लिए समुद्र तल से लगभग 800 मी की ऊँचाई तक जारी की गई (CPCRI पुस्तिका)।
रोग-प्रतिरोध
CPCRI के परीक्षणों में कोई बड़ा रोग या कीट नहीं दिखा; जहाँ फल सड़न आम है वहाँ बचाव कीजिए
जारी
1957 में चीन से VTL-3 नमूने के रूप में लाई गई; CPCRI की संस्थान अनुसंधान परिषद ने 1972 में जारी करने की सिफ़ारिश की (ICAR-CPCRI, क्षेत्रीय केंद्र, विट्टल)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।

इस किस्म के बारे में

मंगला विट्टल के ICAR-केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान (CPCRI), क्षेत्रीय केंद्र की अर्ध-ऊँची सुपारी की चयन किस्म है। इसे VTL-3 में से छाँटा गया, जो 1957 में चीन से लाया गया नमूना था। 1972 में तटीय कर्नाटक और केरल के लिए समुद्र तल से लगभग 800 मी की ऊँचाई तक जारी करने की सिफ़ारिश हुई। पेड़ की छतरी आंशिक रूप से झुकी होती है, तना मध्यम मोटा और गाँठों के बीच की दूरी छोटी, और जिस स्थानीय किस्म से तुलना हुई उससे ज़्यादा गुच्छे लगते हैं। फूल रोपाई के 36 से 40 महीने बाद शुरू होते हैं, जो यहाँ तुलना की गई CPCRI किस्मों में सबसे जल्दी है, और उपज जल्दी जम जाती है। परीक्षण का औसत 2.90 किग्रा सूखी गिरी प्रति पेड़ प्रति साल (3,700 से 3,900 किग्रा प्रति हेक्टेयर) है, संभावित 4.50 किग्रा। CPCRI इसे सिंचित बाग़ों के लिए सुझाता है। वह बताता है कि लगभग 2% पेड़ कमज़ोर और लंबे-पतले निकलते हैं। और कहता है कि घनी छाया वाले पुराने सुपारी बाग़ में बीच में लगाने पर यह ख़राब चलती है।

क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?

सबसे जल्दी फूल की ज़रूरत हो तो मंगला चुनिए। CPCRI के अनुसार इसमें फूल रोपाई के 36 से 40 महीने बाद शुरू होते हैं, जो सुमंगला (42 से 46), श्रीमंगला (44 से 48) और स्वर्णमंगला (46) से जल्दी है। इसकी कीमत उपज है: परीक्षण में 2.90 किग्रा सूखी गिरी प्रति पेड़, जो यहाँ की ऊँची और अर्ध-ऊँची किस्मों में सबसे कम है। इसे पुराने बाग़ की छाया में मत लगाइए। CPCRI की पुस्तिका के अनुसार मंगला वहाँ ख़राब चलती है। और हर 100 में लगभग 2 पेड़ कमज़ोर और लंबे-पतले निकलेंगे, उन्हें हटाने की तैयारी रखिए। सबसे अच्छी लंबी उपज चाहिए और सिंचाई दे सकते हैं तो स्वर्णमंगला (3.88 किग्रा) देखिए।

बुवाई और खेती

  • बीज दरखेत में बीज नहीं, हर गड्ढे में नर्सरी का एक पौधा। 2.7 x 2.7 मी पर लगभग 1,370 पेड़ प्रति हेक्टेयर, या मिश्रित बाग़ में 3.3 x 3.3 मी पर लगभग 920 (DASD)।
  • दूरी2.7 x 2.7 मी; मिश्रित फसल के रूप में उगाने पर 3.3 x 3.3 मी (DASD)।
  • सिंचाईसूखा मौसम: नली से हर 4 से 7 दिन में 175 लीटर प्रति पेड़, या टपक से 20 लीटर प्रति पेड़ प्रति दिन (DASD)।
  • उर्वरकप्रति पेड़ प्रति साल 100 ग्राम N, 40 ग्राम P2O5 और 140 ग्राम K2O, 12 किग्रा हरी पत्ती, कम्पोस्ट या गोबर की खाद के साथ, अप्रैल से मई और सितंबर से अक्टूबर में 2 बराबर बार। पहले साल खुराक का 1/3, दूसरे साल 2/3 और तीसरे साल से पूरी दीजिए (DASD)।
  • कटाईरोपाई के 36 से 40 महीने बाद फूल शुरू होते हैं; CPCRI सिंचित हालत सुझाता है।

फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • रोपाई के 36 से 40 महीने बाद फूल आते हैं, यहाँ की CPCRI किस्मों में सबसे जल्दी।
  • उपज जल्दी जम जाती है, और जिस स्थानीय किस्म से परखी गई उससे ज़्यादा गुच्छे प्रति पेड़ लगते हैं।
  • तटीय कर्नाटक और केरल के लिए समुद्र तल से लगभग 800 मी की ऊँचाई तक जारी की गई।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • औसत उपज (2.90 किग्रा सूखी गिरी प्रति पेड़) सुमंगला, श्रीमंगला, मोहितनगर और स्वर्णमंगला से कम है।
  • हर 100 में लगभग 2 पेड़ कमज़ोर और लंबे-पतले निकलते हैं और उन्हें रोपाई के 2 साल के भीतर हटाना पड़ता है।
  • घनी छाया वाले पुराने बाग़ में बीच में लगाने पर ख़राब चलती है, और CPCRI इसे सिंचित हालत के लिए सुझाता है।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।

  • कर्नाटक
  • केरल

कमज़ोर पेड़ों की तैयारी रखिए और मंगला को छाया से दूर रखिए

CPCRI की मंगला पर पुस्तिका वह बात कहती है जो ज़्यादातर किस्म-पन्ने छोड़ देते हैं। फसल विषमयुग्मजी और अर्ध-ऊँची है, इसलिए हर 100 में लगभग 2 पेड़ों का तना कमज़ोर और लंबा-पतला निकलता है। CPCRI कहता है कि उन्हें ढूँढकर रोपाई के 2 साल के भीतर हटा दीजिए और उनकी जगह दूसरे लगाइए।

व्यवहार में इसके दो मतलब हैं। उसी खेप के कुछ अतिरिक्त पौधे रखिए, मोटा नियम हर 100 पर 2 या 3, और दूसरे साल में बाग़ में घूमकर पतले, लंबे पेड़ देखिए। 2.7 x 2.7 मी पर एक हेक्टेयर में, यानी लगभग 1,370 पेड़ों में, लगभग 27 निकालने पड़ सकते हैं। यह आँकड़ा CPCRI के 2% से निकला है। CPCRI ने यह गिनती नहीं की।

दूसरी चेतावनी छाया की है। CPCRI लिखता है कि घनी छाया वाले पुराने सुपारी बाग़ में बीच में लगाने पर मंगला को नुक़सान होता है, और उस काम के लिए साउथ कनारा लोकल का नाम लेता है। इसलिए मंगला साफ़, खुले टुकड़े की किस्म है, जिसका इनाम सबसे जल्दी फूल (36 से 40 महीने) है, और सूखे महीनों में सिंचाई।

क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?

यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।

दूसरी किस्मों से तुलना

सुपारी की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।

किस्मकिसके लिए ठीकफल कब सेउपजराज्य
Kahikuchiअसम और मेघालय के उन किसानों के लिए जो वह किस्म चाहते हैं जिसे CPCRI और असम का पैकेज, दोनों सुझाते हैंरोपाई के 50–52 महीने बाद पहले फूल; पाँचवें साल तक फलन (CPCRI, AAU)3.70 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (5,073 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.30 किग्राअसम, मेघालय
Mangalaयही पेजउन किसानों के लिए जो सबसे जल्दी फूल चाहते हैं और खुले बाग़ में सिंचाई दे सकते हैंरोपाई के 36–40 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)2.90 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (3,700–3,900 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 4.50 किग्राकर्नाटक, केरल
Mohitnagarउत्तर बंगाल के किसानों के लिए, और उनके लिए जो एकसमान पेड़ चाहते हैं जो जल्दी स्थिर उपज देने लगेंरोपाई के 48 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)3.67 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (5,030 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.50 किग्रापश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल
Sreemangalaउन किसानों के लिए जो सूखी चाली बेचते हैं और बड़ी, गोल सुपारी चाहते हैंरोपाई के 44–48 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)3.18 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (4,240–4,500 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.40 किग्राकर्नाटक, केरल
Sumangalaउन किसानों के लिए जो अच्छी तरह परखी हुई ऊँची किस्म चाहते हैं जो सूखे दौर को बेहतर सह लेसिंचाई में रोपाई के 42–46 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)3.28 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (3,900–4,350 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.60 किग्राकर्नाटक, केरल
Swarnamangalaउन किसानों के लिए जो सिंचाई दे सकते हैं और CPCRI की ऊँची किस्मों में सबसे अच्छी औसत उपज और रिकवरी चाहते हैंसिंचाई में रोपाई के लगभग 46 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)3.88 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (5,320 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.50 किग्राकर्नाटक, केरल
VTLAH-1उन किसानों के लिए जो छोटा, आसानी से तुड़ाई वाला पेड़ चाहते हैं, सिंचाई दे सकते हैं और प्रति पेड़ कम उपज मान सकते हैंरोपाई के 45 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)2.54 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (3,100–3,400 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 3.20 किग्राकर्नाटक, केरल

इस फ़सल के कैलकुलेटर

आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और सुपारी का भाव क्या चल रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मंगला में फूल कब शुरू होते हैं?

CPCRI के अनुसार फूल रोपाई के 36 से 40 महीने बाद शुरू होते हैं। यहाँ तुलना की गई CPCRI किस्मों में यह सबसे जल्दी है। हमें पहली तुड़ाई की तारीख़ नहीं मिली, इसलिए तीसरे साल में फसल मत गिनिए। समय पर फूल के लिए जवान पेड़ों को सूखे महीनों में पानी चाहिए, और CPCRI मंगला को सिंचित बाग़ों के लिए सुझाता है।

मंगला की उपज कितनी है?

CPCRI की किस्म-संकलन में औसत 2.90 किग्रा सूखी गिरी प्रति पेड़ प्रति साल (3,700 से 3,900 किग्रा प्रति हेक्टेयर) और संभावित 4.50 किग्रा (6,000 से 6,300 किग्रा प्रति हेक्टेयर) है। CPCRI की एक पुरानी पुस्तिका में 3.0 किग्रा चाली है। हिसाब प्रति हेक्टेयर औसत से लगाइए, संभावित उपज से नहीं।

मंगला कहाँ से आई है, और कितनी ऊँचाई तक लगा सकता हूँ?

इसे VTL-3 में से छाँटा गया, जो 1957 में चीन से लाया गया विदेशी नमूना था, और 1972 में जारी करने की सिफ़ारिश हुई। CPCRI ने इसे तटीय कर्नाटक और केरल के लिए समुद्र तल से लगभग 800 मी की ऊँचाई तक जारी किया। मंगला अर्ध-ऊँची है, छतरी आंशिक रूप से झुकी हुई।

क्या मैं मंगला को छायादार पुराने बाग़ के पेड़ों के बीच लगा सकता हूँ?

CPCRI के अनुसार नहीं। उसकी पुस्तिका कहती है कि घनी छाया वाले पुराने सुपारी बाग़ में बीच में लगाने पर मंगला को नुक़सान होता है। वहाँ बीच में लगाने के लिए वह साउथ कनारा लोकल को बताती है, जो ऊँची किस्म है और लगभग 2.0 किग्रा चाली देती है। मंगला को साफ़, खुले टुकड़े में लगाइए।

मंगला को कितनी दूरी और कितनी खाद चाहिए?

अरेकानट एंड स्पाइसेस डेवलपमेंट निदेशालय 2.7 x 2.7 मी सुझाता है, यानी लगभग 1,370 पेड़ प्रति हेक्टेयर, और मिश्रित फसल में 3.3 x 3.3 मी। साल की खाद 100 ग्राम N, 40 ग्राम P2O5 और 140 ग्राम K2O प्रति पेड़ है, 12 किग्रा हरी पत्ती, कम्पोस्ट या गोबर की खाद के साथ, अप्रैल से मई और सितंबर से अक्टूबर में 2 बराबर बार। पहले साल इसका 1/3, दूसरे साल 2/3 और तीसरे साल से पूरी दीजिए।

स्रोत: Improved varieties of coconut, arecanut and cocoa — ICAR-CPCRI (variety records, yields, flowering), Arecanut varieties — ICAR-CPCRI Regional Station, Vittal, extension leaflet (1999), Calendar for arecanut — Directorate of Arecanut and Spices Development, Technical Bulletin 67 (spacing, fertiliser, irrigation). संपादकीय नीति.