Sreemangala
सिंगापुर के नमूने से छाँटी CPCRI की ऊँची किस्म, बड़ी, गोल सुपारी, लंबी गाँठ-दूरी और ऐसा तना जिसे CPCRI मज़बूत कहता है। इसने साउथ कनारा लोकल से 59% ज़्यादा दिया। हवा या गिरने का कोई परीक्षण नहीं मिला।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- सुपारी
- प्रकार
- पौध (चुनी हुई बीज वाली सुपारी से)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- फल कब से
- रोपाई के 44–48 महीने बाद पहले फूल (CPCRI)
- बीज दर
- खेत में बीज नहीं, हर गड्ढे में नर्सरी का एक पौधा। 2.7 x 2.7 मी पर लगभग 1,370 पेड़ प्रति हेक्टेयर, या मिश्रित बाग़ में 3.3 x 3.3 मी पर लगभग 920 (DASD)।
- अपेक्षित उपज
- 3.18 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (4,240–4,500 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.40 किग्रा
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जलवायु
- सुपारी समुद्र तल से लगभग 1,000 मी की ऊँचाई तक उगाई जा सकती है (DASD)।
- रोग-प्रतिरोध
- CPCRI के परीक्षणों में कोई बड़ा रोग या कीट नहीं दिखा; पानी की कमी में तुलनात्मक रूप से सहनशील
- जारी
- 1957 में सिंगापुर से VTL-17 नमूने के रूप में लाई गई; CPCRI की संस्थान अनुसंधान परिषद ने 1985 में जारी करने की सिफ़ारिश की
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है।
इस किस्म के बारे में
श्रीमंगला विट्टल के ICAR-केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान (CPCRI), क्षेत्रीय केंद्र की ऊँची सुपारी की चयन किस्म है। इसे VTL-17 में से छाँटा गया, जो 1957 में सिंगापुर से लाया गया नमूना था, और 1985 में कर्नाटक और केरल के सुपारी इलाक़ों के लिए जारी करने की सिफ़ारिश हुई। पेड़ ऊँचा है, छतरी आंशिक रूप से झुकी, गाँठों के बीच की दूरी लंबी और तना ऐसा जिसे CPCRI मज़बूत कहता है, और सुपारी गोल और बड़ी होती है। इसने साउथ कनारा लोकल से 59% ज़्यादा दिया, परीक्षण का औसत 3.18 किग्रा सूखी गिरी प्रति पेड़ प्रति साल (4,240 से 4,500 किग्रा प्रति हेक्टेयर) और संभावित 5.40 किग्रा। फूल 44 से 48 महीने पर शुरू होते हैं और उपज मध्यम गति से जमती है। CPCRI इसे पानी की कमी में तुलनात्मक रूप से सहनशील बताता है। उसकी 1999 की पुस्तिका कहती है कि सुपारी सिर्फ़ चाली में जाती है, जबकि बाद का किस्म-संकलन कहता है कि वह चबाने की कच्ची सुपारी के मानक पर भी खरी है।
क्या यह किस्म आपके लिए ठीक है?
चाली आपका उत्पाद है और बड़ी, गोल सुपारी आपके ख़रीदार को भाती है तो श्रीमंगला चुनिए। CPCRI ने इसे 1985 में जारी किया, जब इसने साउथ कनारा लोकल से 59% ज़्यादा दिया, परीक्षण का औसत 3.18 किग्रा सूखी गिरी प्रति पेड़। इसका तना मज़बूत और गाँठों के बीच की दूरी लंबी बताई गई है, पर हमें हवा या गिरने का कोई परीक्षण नहीं मिला, इसलिए इसे वर्णन मानिए, नतीजा नहीं। सबसे ऊँची उपज के लिए इसे मत चुनिए। सुमंगला (3.28 किग्रा), मोहितनगर (3.67 किग्रा) और स्वर्णमंगला (3.88 किग्रा), तीनों ने ज़्यादा दिया, और CPCRI की 1999 की पुस्तिका कहती है कि श्रीमंगला की सुपारी सिर्फ़ चाली के लिए इस्तेमाल होती है।
बुवाई और खेती
- बीज दरखेत में बीज नहीं, हर गड्ढे में नर्सरी का एक पौधा। 2.7 x 2.7 मी पर लगभग 1,370 पेड़ प्रति हेक्टेयर, या मिश्रित बाग़ में 3.3 x 3.3 मी पर लगभग 920 (DASD)।
- दूरी2.7 x 2.7 मी; मिश्रित फसल के रूप में उगाने पर 3.3 x 3.3 मी (DASD)।
- सिंचाईसूखा मौसम: नली से हर 4 से 7 दिन में 175 लीटर प्रति पेड़, या टपक से 20 लीटर प्रति पेड़ प्रति दिन (DASD)।
- उर्वरकप्रति पेड़ प्रति साल 100 ग्राम N, 40 ग्राम P2O5 और 140 ग्राम K2O, 12 किग्रा हरी पत्ती, कम्पोस्ट या गोबर की खाद के साथ, अप्रैल से मई और सितंबर से अक्टूबर में 2 बराबर बार। पहले साल खुराक का 1/3, दूसरे साल 2/3 और तीसरे साल से पूरी दीजिए (DASD)।
- कटाईरोपाई के 44 से 48 महीने बाद फूल शुरू होते हैं।
फ़ायदे और ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- साउथ कनारा लोकल से 59% ज़्यादा दिया, गोल और बड़ी सुपारी के साथ।
- लंबी गाँठ-दूरी और ऐसा तना जिसे CPCRI मज़बूत कहता है।
- पानी की कमी में तुलनात्मक रूप से सहनशील, और CPCRI के परीक्षणों में कोई बड़ा रोग या कीट नहीं दिखा।
ध्यान रखने योग्य बातें
- CPCRI के परीक्षणों में सुमंगला (3.28 किग्रा), मोहितनगर (3.67 किग्रा) और स्वर्णमंगला (3.88 किग्रा) से कम दिया।
- रोपाई के 44 से 48 महीने बाद फूल आते हैं और उपज मध्यम गति से जमती है।
- हवा या गिरने का कोई परीक्षण नहीं मिला, इसलिए मज़बूत तना वर्णन है, नतीजा नहीं।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है। स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में सुझाया इलाक़ा एक से ज़्यादा हो सकता है।
- कर्नाटक
- केरल
मज़बूत तना: क्या दर्ज है और क्या नहीं
CPCRI श्रीमंगला को ऊँचा पेड़ बताता है, जिसमें गाँठों के बीच की दूरी लंबी और तना मज़बूत है। यह पौधे का वर्णन है, और इसी वजह से इस किस्म को अक्सर हवादार बाग़ों के लिए सुझाया जाता है। हमें CPCRI का कोई परीक्षण नहीं मिला जिसने झुकाव, टूटना या हवा से नुक़सान मापा हो, इसलिए इस सुझाव के पीछे कोई आँकड़ा नहीं है।
इसके आँकड़े साफ़ हैं। परीक्षण का औसत 3.18 किग्रा सूखी गिरी प्रति पेड़ (4,240 से 4,500 किग्रा प्रति हेक्टेयर) है, साउथ कनारा लोकल से 59% ज़्यादा। फूल 44 से 48 महीने पर शुरू होते हैं और उपज मध्यम गति से जमती है। यहाँ की 1985 और 1991 की ऊँची किस्मों में इसकी उपज सबसे कम है।
हवा आपकी असली चिंता है तो परखिए। अपने बाग़ के खुले किनारे पर 20 श्रीमंगला के पेड़ 20 सुमंगला के पेड़ों के पास लगाइए और दोनों की देखभाल एक जैसी कीजिए। दूसरे मानसून के बाद गिनिए कि हर समूह में कितने झुके या टूटे, और तभी तय कीजिए कि बाग़ का कितना हिस्सा इससे लगाना है।
क्या अपनी रोपाई सामग्री ख़ुद रख सकते हैं?
यह खुली-परागित किस्म है, इसलिए अपनी अच्छी फ़सल का बीज दोबारा बोया जा सकता है। बीज सिर्फ़ रोग-मुक्त पौधों से लीजिए, ठीक से सुखाइए, ठंडी-सूखी जगह रखिए, और हर तीन-चार साल में नया प्रमाणित बीज ले आइए ताकि किस्म बिगड़े नहीं।
दूसरी किस्मों से तुलना
सुपारी की वे सभी किस्में, जिनका पेज इस साइट पर है, एक साथ देखें। जो किस्म आप अभी देख रहे हैं, उसकी पंक्ति रंग से अलग दिखती है।
| किस्म | किसके लिए ठीक | फल कब से | उपज | राज्य |
|---|---|---|---|---|
| Kahikuchi | असम और मेघालय के उन किसानों के लिए जो वह किस्म चाहते हैं जिसे CPCRI और असम का पैकेज, दोनों सुझाते हैं | रोपाई के 50–52 महीने बाद पहले फूल; पाँचवें साल तक फलन (CPCRI, AAU) | 3.70 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (5,073 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.30 किग्रा | असम, मेघालय |
| Mangala | उन किसानों के लिए जो सबसे जल्दी फूल चाहते हैं और खुले बाग़ में सिंचाई दे सकते हैं | रोपाई के 36–40 महीने बाद पहले फूल (CPCRI) | 2.90 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (3,700–3,900 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 4.50 किग्रा | कर्नाटक, केरल |
| Mohitnagar | उत्तर बंगाल के किसानों के लिए, और उनके लिए जो एकसमान पेड़ चाहते हैं जो जल्दी स्थिर उपज देने लगें | रोपाई के 48 महीने बाद पहले फूल (CPCRI) | 3.67 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (5,030 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.50 किग्रा | पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल |
| Sreemangalaयही पेज | उन किसानों के लिए जो सूखी चाली बेचते हैं और बड़ी, गोल सुपारी चाहते हैं | रोपाई के 44–48 महीने बाद पहले फूल (CPCRI) | 3.18 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (4,240–4,500 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.40 किग्रा | कर्नाटक, केरल |
| Sumangala | उन किसानों के लिए जो अच्छी तरह परखी हुई ऊँची किस्म चाहते हैं जो सूखे दौर को बेहतर सह ले | सिंचाई में रोपाई के 42–46 महीने बाद पहले फूल (CPCRI) | 3.28 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (3,900–4,350 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.60 किग्रा | कर्नाटक, केरल |
| Swarnamangala | उन किसानों के लिए जो सिंचाई दे सकते हैं और CPCRI की ऊँची किस्मों में सबसे अच्छी औसत उपज और रिकवरी चाहते हैं | सिंचाई में रोपाई के लगभग 46 महीने बाद पहले फूल (CPCRI) | 3.88 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (5,320 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 5.50 किग्रा | कर्नाटक, केरल |
| VTLAH-1 | उन किसानों के लिए जो छोटा, आसानी से तुड़ाई वाला पेड़ चाहते हैं, सिंचाई दे सकते हैं और प्रति पेड़ कम उपज मान सकते हैं | रोपाई के 45 महीने बाद पहले फूल (CPCRI) | 2.54 किग्रा सूखी गिरी/पेड़/साल (3,100–3,400 किग्रा/हेक्टेयर); संभावित 3.20 किग्रा | कर्नाटक, केरल |
इस फ़सल के कैलकुलेटर
आगे के हिसाब यहाँ कर लीजिए — कितना बीज ख़रीदें, बोरा अंकुरित होगा या नहीं, खाद का ख़र्च कितना बैठेगा, और सुपारी का भाव क्या चल रहा है।
- बीज दर कैलकुलेटरआपके सुपारी के खेत के लिए कितना बीज चाहिए — आपके बोरे के अंकुरण के हिसाब से सुधारा हुआ।
- बीज किस्म खोजकइस साइट की हर सुपारी किस्म को राज्य, सीज़न, अवधि और मिट्टी से छानिए।
- खाद कैलकुलेटरसुपारी की एनपीके सिफ़ारिश को अपने खेत के हिसाब से यूरिया, डीएपी और एमओपी के बोरों में बदलिए।
- फ़सल कैलेंडरआपके राज्य में सुपारी की बुवाई, निराई, सिंचाई और कटाई के महीने।
- फ़सल लाभ कैलकुलेटरबीज, मज़दूरी और लागत को इस किस्म से मिलने वाली उपज के सामने रखकर देखिए।
- मंडी भाव जाँचकव्यापारी से भाव तय करने से पहले अपनी नज़दीकी मंडी में सुपारी का आज का रेट देखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
श्रीमंगला की उपज कितनी है?
CPCRI के संकलन में परीक्षण का औसत 3.18 किग्रा सूखी गिरी प्रति पेड़ प्रति साल है, यानी 4,240 से 4,500 किग्रा प्रति हेक्टेयर, और संभावित 5.40 किग्रा (7,100 से 7,300 किग्रा प्रति हेक्टेयर)। पुरानी पुस्तिका में भी यही 3.18 किग्रा और साउथ कनारा लोकल से 59% ज़्यादा है। अपने हिसाब के लिए प्रति हेक्टेयर औसत लीजिए।
क्या मैं श्रीमंगला को चबाने की कच्ची सुपारी के रूप में बेच सकता हूँ?
CPCRI के दोनों दस्तावेज़ थोड़ा अलग कहते हैं। 1999 की पुस्तिका कहती है कि सुपारी सिर्फ़ चाली बनाने में जाती है। बाद का किस्म-संकलन कहता है कि गुणवत्ता चाली और चबाने की कच्ची सुपारी, दोनों के मानक पर खरी है। कच्ची बेचनी हो तो पहले अपने ख़रीदार के साथ एक छोटी खेप आज़माइए।
श्रीमंगला में फूल कब आते हैं?
CPCRI के अनुसार फूल रोपाई के 44 से 48 महीने बाद शुरू होते हैं, और पुस्तिका 4 से 5 साल कहती है। वह उपज के जमने को भी मध्यम बताती है, जो मंगला और मोहितनगर से धीमा है। पहली पूरी फसल उन दोनों से देर से आएगी।
श्रीमंगला कहाँ से आई है?
इसे VTL-17 में से छाँटा गया, जो 1957 में सिंगापुर से लाया गया सुपारी का नमूना था, और CPCRI की संस्थान अनुसंधान परिषद ने 1985 में जारी करने की सिफ़ारिश की। सुझाया हुआ इलाक़ा कर्नाटक और केरल है। CPCRI इसे पानी की कमी में तुलनात्मक रूप से सहनशील भी बताता है।
श्रीमंगला में कौन-सा रोग देखना चाहिए?
CPCRI ने अपने खेत परीक्षणों में कोई बड़ा रोग या कीट हमला नहीं देखा, और जहाँ फल सड़न आम है वहाँ बचाव के उपाय करने की सलाह दी है। फल सड़न (कोलेरोगा) ज़्यादातर सुपारी बाग़ों की मानसून की समस्या है, इसलिए छिड़काव की योजना तैयार रखिए। सुपारी फसल-गाइड का कोलेरोगा वाला हिस्सा इसे बताता है।
स्रोत: Improved varieties of coconut, arecanut and cocoa — ICAR-CPCRI (variety records, yields, flowering), Arecanut varieties — ICAR-CPCRI Regional Station, Vittal, extension leaflet (1999), Calendar for arecanut — Directorate of Arecanut and Spices Development, Technical Bulletin 67 (spacing, fertiliser, irrigation). संपादकीय नीति.
