महोगनी
Swietenia macrophylla
मध्य अमेरिका से लाया गया एक उष्णकटिबंधीय कठोर-लकड़ी वाला पेड़, प्रायद्वीपीय भारत भर में इसकी बेशक़ीमती लाल-भूरी फ़र्नीचर लकड़ी के लिए लगाया जाता है — पेड़ सही जगह पर तेज़ और सीधा बढ़ता है, पर महोगनी शूट बोरर (Hypsipyla robusta) मुख्य शीर्ष कोंपल पर हमला कर तने को दोफाड़ कर देता है, जो दुनिया भर में महोगनी उगाने की सबसे बड़ी चुनौती है।

त्वरित सारांश
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त्वरित सारांश
महोगनी (Swietenia macrophylla), मूल रूप से मध्य और दक्षिण अमेरिका का पेड़, दुनिया की सबसे क़ीमती फ़र्नीचर लकड़ियों में से एक है — अपने गहरे लाल-भूरे रंग, आसान कारीगरी, मज़बूती व प्राकृतिक दीमक-प्रतिरोध के लिए मशहूर। अंग्रेज़ों के ज़माने में भारत लाया गया और अब केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र व ओडिशा के गरम-नम इलाक़ों में खेत-वानिकी व सड़क-किनारे का लोकप्रिय लकड़ी का पेड़ है।
पेड़ बीज से उगाया जाता है — अच्छे मातृ-पेड़ से इकट्ठे ताज़े पंखदार बीज (समारा) पॉलीबैग नर्सरी में बोए जाते, और 6–12 महीने का पौधा मानसून की शुरुआत में गड्ढों में लगाया जाता। गहरी, अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी पर अच्छी बारिश (1,500–3,000 मिमी) में यह तेज़ बढ़ता और पहले कुछ सालों में 2–3 मी सालाना ऊँचाई पकड़ सकता। दूरी आमतौर 3 × 3 मी से 5 × 5 मी, पूरा रोटेशन 15–25 साल।
महोगनी को सच में कठिन बनाने वाली चीज़ पेड़ का जीव-विज्ञान नहीं, एक कीट है: महोगनी शूट बोरर (Hypsipyla robusta)। इल्ली मुख्य शीर्ष कोंपल में घुसती है, उसे मार देती है और पेड़ को किनारे की शाखा से दोफाड़ कर देती है — और दोफाड़ तना सीधे तने से कहीं कम उपयोगी लकड़ी देता है। दुनिया भर में कोई पक्का रासायनिक या जैविक इलाज इसे नहीं रोक पाया; भारत में सबसे कारगर तरीक़ा है महोगनी को एक ऊँचे तेज़-बढ़ने वाले "नर्स" पेड़ (ऐलेंथस या यूकेलिप्टस) के साथ मिलाकर लगाना जो ऊपर से छाया दे, साथ में जहाँ भी दोफाड़ हो तुरंत काट-छाँट।
सागौन की तरह, महोगनी का न कोई MSP है न कोई मंडी व्यापार — लकड़ी लठ्ठों या खड़े पेड़ों के रूप में पंजीकृत लकड़ी डिपो व आरा मिलों से बिकती है, घेराव, लंबाई व रेशे की गुणवत्ता पर आँकी। निजी ज़मीन पर कटाई अधिकांश राज्यों में नियंत्रित है, हालाँकि कुछ राज्यों में विदेशी प्रजातियों को छूट मिली है; सटीक नियम अपने स्थानीय वन रेंज कार्यालय या NTMS पोर्टल से कटाई से पहले पक्का करें।
- फसल प्रकार
- अर्ध-पर्णपाती लंबी-अवधि कठोर-लकड़ी वाला पेड़ (विदेशी)
- सीज़न
- मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) में रोपाई
- उपयुक्त राज्य
- केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा
- रोटेशन अवधि
- पूरे-मूल्य की लकड़ी तक 15–25 साल
- जल आवश्यकता
- ज़्यादा; 1,500–3,000 मिमी बारिश चाहिए, जलभराव नहीं
- तापमान
- उष्णकटिबंधीय; 25–35°C बढ़वार सीमा, पाला-संवेदनशील
- मिट्टी
- गहरी, अच्छी जल-निकासी वाली लैटेराइट या लाल दोमट; pH 6.0–7.5
- कठिनाई स्तर
- मध्यम (शूट-बोरर प्रबंधन, बुनियादी कृषि-विज्ञान नहीं)
- अपेक्षित उपज
- लकड़ी-आयतन 15–25 साल में बनता; मूल्य घेराव व रेशे पर, तौल पर नहीं
- मुख्य जोखिम
- महोगनी शूट बोरर (Hypsipyla robusta) तने को दोफाड़ करना
परिचय
महोगनी (Swietenia macrophylla), भारत में बस "महोगनी" कहा जाता, मध्य अमेरिका से लाया गया एक बड़ा सदाबहार-से-अर्ध-पर्णपाती उष्णकटिबंधीय लकड़ी का पेड़ है और अब प्रायद्वीपीय भारत में सबसे ज़्यादा लगाए जाने वाले विदेशी कठोर-लकड़ी के पेड़ों में से एक है। इसकी लकड़ी — लाल-भूरी, सीधे-रेशे वाली, काम करने में आसान, प्राकृतिक रूप से दीमक व सड़न प्रतिरोधी — फ़र्नीचर, पैनलिंग व आंतरिक लकड़ी-काम बाज़ार में प्रीमियम पाती है, और पेड़ की नम उष्णकटिबंधीय जगहों पर तेज़ शुरुआती बढ़वार इसे केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र व ओडिशा के किसानों में लोकप्रिय बनाती है।
पेड़ बीज से उगाया जाता है। फल एक बड़ा काष्ठीय कैप्सूल है जो खुलकर चपटे, पंखदार बीज (समारा) छोड़ता है, जिन्हें अच्छे अंकुरण के लिए ताज़ा (इकट्ठा करने के कुछ हफ़्तों में) बोना ज़रूरी है। पौधे पॉलीबैग नर्सरी में लगभग 6–12 महीने पाले जाते और मानसून की शुरुआत में पहले से खोदे गड्ढों में लगाए जाते, थिनिंग योजना व अंतिम उपयोग के हिसाब से 3 × 3 मी से 5 × 5 मी दूरी पर। पेड़ गहरी, अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी पर 1,500–3,000 मिमी सालाना बारिश में तेज़ बढ़ता और पाले के प्रति संवेदनशील है, यही वजह है कि यह उष्णकटिबंधीय व गरम-उपोष्णकटिबंधीय भारत तक सीमित है।
एक समस्या जो दुनिया भर में — सिर्फ़ भारत में नहीं — महोगनी उगाने को परिभाषित करती है, वह है महोगनी शूट बोरर (Hypsipyla robusta)। इल्ली मुख्य शीर्ष कोंपल में सुरंग बनाती है, शिखर को मार देती है और पेड़ को किनारे की शाखा से दोफाड़ कर देती है; शुरुआती सालों में बार-बार हमले एक संभावित सीधे, एक-तने वाले पेड़ को बहु-शाखा वाले, कम-मूल्य रूप में बदल सकते हैं। दशकों के वैश्विक शोध के बावजूद कोई पक्का रासायनिक या जैविक इलाज नहीं है। भारत में सबसे कारगर व्यावहारिक तरीक़ा है एक ऊँचे नर्स पेड़ (ऐलेंथस ट्राइफ़ाइसा या यूकेलिप्टस) के साथ मिलाकर लगाना जो महोगनी कैनोपी पर ऊपर से आंशिक छाया दे — बोरर बिना-छाया वाले, पूरी तरह खुले शिखर पर हमला करता, इसलिए छाया हमला कम करती — साथ में जो भी दोफाड़ बने उसकी तुरंत काट-छाँट कर एक सीधा तना बनाए रखना।
फसल की समयरेखा, बुवाई से कटाई तक
पूरे सीज़न की एक झलक — हर अवस्था की पूरी जानकारी के लिए नीचे संबंधित सेक्शन पर जाएँ।
- माह 0 (मार्च-अप्रैल)
बीज संग्रह व बुवाई
कैप्सूल खुलने पर (दक्षिण भारत में आमतौर मार्च-अप्रैल) एक परिपक्व, अच्छे-बने मातृ-पेड़ से ताज़े पंखदार बीज इकट्ठे कर तुरंत पॉलीबैग नर्सरी में बोए जाते — कुछ हफ़्तों से ज़्यादा रखने पर अंकुरण तेज़ी से गिरता है।
- माह 6–12 (जून-जुलाई)
रोपाई
छह से बारह महीने के, लगभग 30–50 सेमी ऊँचे पॉलीबैग पौधे मानसून की शुरुआत में पहले से खोदे गड्ढों में लगाए जाते; शूट-बोरर हमला कम करने को बीच-बीच की पंक्तियों में या पंक्ति में हर दूसरे पेड़ के रूप में एक तेज़-बढ़ने वाला ऊँचा नर्स पेड़ (ऐलेंथस, यूकेलिप्टस) भी लगाया जाता।
- वर्ष 1–5
जमाव व शूट-बोरर निगरानी
युवा पेड़ तेज़ ऊँचाई-बढ़वार पकड़ते (अच्छी जगह पर 2–3 मी सालाना); शूट बोरर इन शुरुआती सालों में सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह, इसलिए बढ़वार-मौसम में ब्लॉक की हर महीने जाँच, और कोई भी दोफाड़ शिखर तुरंत काटकर एक लीडर बनाया जाता।
- वर्ष 5–10
पहली थिनिंग व कैनोपी प्रबंधन
भीड़भरे, ख़राब-बने या भारी-बोरर-क्षतिग्रस्त पेड़ बल्ली व जलावन के लिए पतले किए जाते; नर्स-पेड़ भी काटा जा सकता अगर छाया का काम पूरा हो गया और अब रोशनी के लिए मुक़ाबला कर रहा हो।
- वर्ष 15–25
अंतिम कटाई
बचे, सबसे बेहतर-बने सीधे-तने वाले पेड़ पूरे-मूल्य की चीरने वाली लकड़ी के लिए काटे जाते, एक बार घेराव, हार्टवुड-रंग व रेशा परिपक्व हो जाएँ — अच्छी तरह उगा, सीधे-तने वाला महोगनी लठ्ठा भारतीय बाज़ार में अधिकांश अन्य रोपण-लकड़ी से प्रीमियम पाता है।
उपयुक्त राज्य
जिन राज्यों में यह फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, वे नीचे हाइलाइट हैं। आपके खेत के लिए अंतिम सलाह हमेशा आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही देगा।
- जम्मू और कश्मीर
- हिमाचल प्रदेश
- पंजाब
- उत्तराखंड
- हरियाणा
- दिल्ली
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान
- बिहार
- झारखंड
- पश्चिम बंगाल
- सिक्किम
- असम
- अरुणाचल प्रदेश
- मेघालय
- नागालैंड
- मणिपुर
- मिज़ोरम
- त्रिपुरा
- गुजरात
- मध्य प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- महाराष्ट्र
- ओडिशा
- गोवा
- तेलंगाना
- आंध्र प्रदेश
- कर्नाटक
- केरल
- तमिलनाडु
- पुदुचेरी
- लद्दाख
- चंडीगढ़
- लक्षद्वीप
यहाँ उगाई जाती है
जलवायु की ज़रूरतें
मध्य व दक्षिण अमेरिका में महोगनी की प्राकृतिक सीमा नम उष्णकटिबंधीय जंगल है, और भारत में इसकी सबसे अच्छी जगहें — पश्चिमी घाट बेल्ट व पूर्वी तटीय नम क्षेत्र — उन स्थितियों को काफ़ी हद तक दोहराती हैं। इसे सूखे, ठंडे या पाला-प्रवण इलाक़ों में लगाना लगभग हमेशा ग़लती है।
आदर्श तापमान
महोगनी एक गरम-उष्णकटिबंधीय प्रजाति है जो 25°C से 35°C के बीच सबसे अच्छी बढ़ती और हल्के पाले से भी मर या बुरी तरह पीछे हट जाती — यही वजह है कि यह भारत में लगभग 700–800 मी ऊँचाई से ऊपर नहीं उगाई जाती, और ठंडी सर्दियों वाले उत्तर-भारतीय मैदान अनुपयुक्त हैं।
वर्षा
पेड़ को ज़्यादा बारिश चाहिए, आदर्श रूप से 1,500–3,000 मिमी सालाना, कम-से-कम पाँच-छह महीने के मानसून में अच्छी तरह बँटी। यह एक मध्यम सूखा मौसम (दो-तीन महीने) सहता पर सागौन को सूट करने वाले अर्ध-शुष्क इलाक़ों में ख़राब करता है।
नमी
बढ़वार-मौसम भर ऊँची आर्द्रता महोगनी को अच्छी सूट करती — यह नम उष्णकटिबंध का पेड़ है। बहुत कम आर्द्रता और सूखी, सुखा देने वाली हवाएँ युवा पत्तों को तनाव देतीं और बढ़वार धीमी करतीं।
धूप
कैनोपी बनने के बाद पूरी धूप, पर पहले कुछ सालों में एक नर्स पेड़ से मध्यम ऊपरी छाया असल में मदद करती — यह शूट-बोरर हमला कम करती, मिश्रित-प्रजाति रोपण का सबसे ज़रूरी व्यावहारिक फ़ायदा।
मिट्टी की ज़रूरतें
पश्चिमी घाट की तलहटी की लैटेराइट व लाल-दोमट मिट्टी, जहाँ अधिकांश भारतीय महोगनी लगाई जाती, इसे अच्छी सूट करती — पर समतल या नीची ज़मीन पर लगाने से पहले जल-निकासी व गहराई जाँचें, जहाँ जलभराव युवा पेड़ मार सकता है।
उपयुक्त मिट्टी
गहरी, अच्छी जल-निकासी वाली लैटेराइट, लाल दोमट या जलोढ़ मिट्टी आदर्श। महोगनी कर्नाटक व महाराष्ट्र के हिस्सों की गहरी ज्वालामुखीय मिट्टी पर भी अच्छी बढ़ती, जब तक जल-निकासी मुक्त हो। उथली, पथरीली, जलभराव वाली या भारी चिकनी मिट्टी पर ख़राब करता।
pH स्तर
हल्की अम्लीय से तटस्थ, pH 6.0–7.5; तेज़ अम्लीय या क्षारीय मिट्टी दोनों ख़राब बढ़वार देतीं।
जल निकासी
मुक्त जल-निकासी अनिवार्य — महोगनी की जड़ें जलभराव और फफूँद जड़-सड़न के प्रति संवेदनशील हैं अगर मिट्टी लंबे समय संतृप्त रहे।
जैविक तत्व
रोपण-गड्ढे में मिलाई अच्छी तरह सड़ी गोबर-खाद या कंपोस्ट पर अच्छी प्रतिक्रिया देता, और ब्लॉक परिपक्व होने पर अपनी पत्ती-गिराव मल्च से लाभान्वित होता।
खेत की तैयारी
क्षेत्र चाहे जो हो, चार कदम वही रहते हैं — बस समय बुवाई के अनुसार बदलता है।
- 1
रोपण-ग्रिड चिह्नित करें व गड्ढे खोदें
योजित थिनिंग व नर्स-पेड़ व्यवस्था के हिसाब से 3 × 3 मी से 5 × 5 मी ग्रिड (लगभग 160–450 पेड़/एकड़) चिह्नित करें; मानसून से कम-से-कम दो-तीन हफ़्ते पहले लगभग 45 सेमी × 45 सेमी × 45 सेमी गड्ढे खोदें ताकि मिट्टी खुल जाए।
- 2
टॉपसॉइल व जैविक पदार्थ से भरें
हर गड्ढे को टॉपसॉइल के साथ लगभग 2–3 किग्रा अच्छी तरह सड़ी गोबर-खाद या कंपोस्ट मिलाकर भरें; दीमक-प्रवण इलाक़ों में गड्ढे में एक अनुशंसित मिट्टी-कीटनाशक या Metarhizium जैव-फ़ॉर्मूलेशन मिलाएँ।
- 3
नर्स-पेड़ लेआउट तय करें
शूट-बोरर नुक़सान कम करने को मिश्रित ब्लॉक लगाने पर, महोगनी की बीच-बीच पंक्तियों में एक तेज़-बढ़ने वाला ऊँचा नर्स पेड़ (केरल व कर्नाटक में ऐलेंथस ट्राइफ़ाइसा सबसे ज़्यादा इस्तेमाल; यूकेलिप्टस विकल्प) लगाएँ जो 2–3 साल में महोगनी कैनोपी पर ऊपर से छाया देगा।
बीज की जानकारी
मुख्य किस्मों की तुलना — अवधि, उपज, रोग-प्रतिरोध या आप किस मक़सद से उगा रहे हैं, इसके आधार पर चुनें।
| किस्म | अवधि | उपज | रोग-प्रतिरोध | सर्वश्रेष्ठ राज्य | किसके लिए उपयुक्त |
|---|---|---|---|---|---|
केरल की स्थापित महोगनी रोपाई (निलांबुर, चालकुड़ी, कोन्नी प्रभागों) में परिपक्व, अच्छी तरह बने मातृ-पेड़ों से इकट्ठा बीज — दक्षिण भारत में खेत-रोपण के लिए सबसे ज़्यादा उपलब्ध गुणवत्ता वाला बीज-स्रोत, KFD प्रभागीय नर्सरियों व KFRI बीज-केंद्र के ज़रिए आपूर्तित। | पूरे-मूल्य की लकड़ी तक 15–25 साल | अच्छा; केरल की पुरानी रोपाई भारत में कुछ बेहतरीन महोगनी बढ़वार दिखातीं | अलग से दस्तावेज़ीकृत नहीं; मानक शूट-बोरर निगरानी लागू | केरल | केरल व सटे नम-क्षेत्र ज़िलों में सामान्य खेत-वानिकी व सड़क-किनारे रोपण |
KFRI (केरल वन अनुसंधान संस्थान) के चयनित प्लस-पेड़ों — बेहतर तना-रूप, ऊँचाई, मोटाई व शाखा-कोण के लिए अलग-अलग पहचाने पेड़ — से इकट्ठे बीज से उगाए पौधे, जो बिना-चयन के खुले-परागण बीज से ज़्यादा सीधे-तने वाली संतति देते। KFRI के बीज-आपूर्ति कार्यक्रम के ज़रिए उपलब्ध। | पूरे-मूल्य की लकड़ी तक 15–25 साल; तुलनीय जगहों पर बिना-चयन स्टॉक से थोड़ी तेज़ शुरुआती बढ़वार | ऊँचा; बेहतर तना-रूप प्रति-पेड़ चीरी-लकड़ी प्राप्ति बढ़ाता | अलग से दस्तावेज़ीकृत नहीं; शूट-बोरर संवेदनशीलता प्रजाति-व्यापी गुण है, बीज-लॉट अंतर नहीं | केरल | सबसे कम पौधा-लागत से ज़्यादा लकड़ी-गुणवत्ता को प्राथमिकता देने वाले खेत-वानिकी ब्लॉक |
तमिलनाडु वन विभाग नर्सरी स्टॉक तमिलनाडु वन विभाग की नर्सरियों में राज्य की स्थापित महोगनी रोपाई से इकट्ठे बीज से उगाए पौधे — तमिलनाडु के किसानों के लिए महोगनी रोपण-सामग्री का मुख्य माध्यम, आमतौर मानसून-रोपाई के लिए प्रभागीय वन कार्यालयों व KVK संपर्कों के ज़रिए उपलब्ध। | पूरे-मूल्य की लकड़ी तक 15–25 साल | अच्छा; तमिलनाडु की लैटेराइट-बेल्ट रोपाई अच्छा प्रदर्शन करतीं | अलग से दस्तावेज़ीकृत नहीं | तमिलनाडु | तमिलनाडु लैटेराइट व लाल-दोमट बेल्ट भर खेत-वानिकी रोपण |
निजी टिशू-कल्चर / क्लोनल महोगनी कुछ गिनी-चुनी निजी टिशू-कल्चर प्रयोगशालाओं द्वारा सीधे-तने वाले, तेज़-बढ़ने वाले मातृ-पेड़ों से चयनित क्लोनल पौधे, किसानों को प्रीमियम रोपण-स्टॉक के रूप में बेचे जाते — एक उभरता हुआ रास्ता, अभी सागौन या यूकेलिप्टस जितना व्यापक नहीं, पर केरल, कर्नाटक व तमिलनाडु में बढ़ती नर्सरियों द्वारा पेश। | बीज-स्टॉक से तेज़ शुरुआती बढ़वार; पूरा रोटेशन फिर भी 15–25 साल | संभावित रूप से ज़्यादा; ज़्यादा एक-समान तना-रूप अगर मातृ-पेड़ चयन सही | अलग से दस्तावेज़ीकृत नहीं; शूट-बोरर संवेदनशीलता प्रसार-विधि से बदले प्रजाति-व्यापी गुण बनी रहती | केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु | खेत-वानिकी ब्लॉक जहाँ ज़्यादा प्रति-पौधा लागत अधिक एक-समान लकड़ी-गुणवत्ता से जायज़ |
Tamil Nadu Forest Department Seed Source तमिलनाडु वन विभाग के नीलगिरि व पश्चिमी घाट तलहटी में स्थापित महोगनी बागानों से एकत्र बीज से उगाए पौधे — सरकारी नर्सरियों व सामाजिक वानिकी योजनाओं के ज़रिए उपलब्ध। | 15–25 साल का रोटेशन | मानक लकड़ी उपज; ज्ञात प्रदर्शन वाले TN बागानों से बीज | मानक शूट-बोरर संवेदनशीलता; नर्स-पेड़ रोपण अनुशंसित | Tamil Nadu | — |
Private Clonal / Tissue-Culture Stock निजी नर्सरियों से क्लोनल या टिश्यू-कल्चर महोगनी पौधे — बेहतर आकार व लकड़ी उपज के लिए सीधे-तने, तेज़-बढ़वार मातृ-पेड़ों से चयनित, हालाँकि शूट-बोरर समस्या आनुवंशिकी से अनसुलझी। | 15–20 साल का रोटेशन; बीज-मूल स्टॉक से तेज़ शुरुआती बढ़वार | संभावित रूप से ज़्यादा — सीधे-तने, तेज़-बढ़वार मातृ-पेड़ों से क्लोनल चयन | शूट-बोरर संवेदनशीलता अपरिवर्तित; कोई क्लोन हिप्सिपिला-प्रतिरोधी सिद्ध नहीं | Kerala | — |
- बीज दर
- महोगनी बीज (पंखदार समारा) से उगाई जाती, सागौन जैसे स्टंप या कटिंग से नहीं। एक एकड़ के लिए पर्याप्त पौधे उगाने को लगभग 400–1,000 बीज चाहिए (अंकुरण दर व दूरी के हिसाब से), पॉलीबैग नर्सरी में बोए जाते और 6–12 महीने के पौधे के रूप में लगाए। बीज ताज़ा होना चाहिए — कुछ हफ़्तों से ज़्यादा रखने पर अंकुरण-क्षमता तेज़ी से गिरती है।
- प्रमाणित बीज
- बीज या पौधे राज्य वन विभाग नर्सरी, KFRI के बीज-आपूर्ति कार्यक्रम, या पहचाने प्लस-पेड़ों से काम करने वाली मान्य निजी नर्सरी से लें। दुबले-पतले, पॉलीबैग में जड़-बँधे, या शूट-बोरर क्षति (मरा या दोफाड़ शिखर) दिखाने वाले पौधे अस्वीकार करें — पहले से दोफाड़ तने वाला पौधा कभी सीधी लकड़ी नहीं देगा।
- दूरी
- योजित थिनिंग वाले घने ब्लॉक के लिए 3 × 3 मी (लगभग 450 पेड़/एकड़), कम थिनिंग वाली चौड़ी दूरी के लिए 5 × 5 मी (लगभग 160 पेड़/एकड़)। नर्स पेड़ वाले मिश्रित ब्लॉक में, महोगनी पंक्तियाँ आमतौर 4–5 मी दूर नर्स पेड़ बीच-बीच की पंक्तियों में।
- बीज उपचार
- ताज़े समारा सीधे मिट्टी-रेत-कंपोस्ट भरी पॉलीबैग में, नुकीला सिरा नीचे, लगभग 1–2 सेमी गहरे बोए जाते। सच में ताज़े बीज (इकट्ठा करने के 2–3 हफ़्ते में) को किसी ख़ास पूर्व-उपचार की ज़रूरत नहीं; पुराने बीज को बीज-कवच नरम करने को 12–24 घंटे पानी में भिगोया जा सकता, पर अंकुरण फिर भी कम होगा।
बुवाई गाइड
बहुत गहरा या टूटे जड़-गोले से लगाया पौधा धीरे जमता और पहले साल शूट-बोरर हमले के प्रति ज़्यादा कमज़ोर होता — ध्यान से सँभालें।
- सबसे अच्छा समय
- मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) में पौधे लगाएँ, एक बार पहली अच्छी बारिश से मिट्टी गीली हो जाए — पौधे को अगले सूखे मौसम से पहले जड़-तंत्र जमाने को कई महीने लगातार नमी चाहिए।
- क़तार की दूरी
- ब्लॉक डिज़ाइन व नर्स-पेड़ योजना के हिसाब से पंक्तियों के बीच 3–5 मी
- पौधे की दूरी
- पंक्ति के भीतर 3–5 मी, चौकोर या लगभग-चौकोर ग्रिड को पंक्ति-दूरी से मिलाते
- बुवाई की गहराई
- पौधे को उतनी ही गहराई पर सेट करें जितनी पॉलीबैग में था — जड़-कॉलर ज़मीन-स्तर पर बैठे, न दबा न खुला।
- तरीक़ा
- ध्यान से पॉलीबैग काटकर हटाएँ, जड़-गोला बरक़रार रखते; पौधा गड्ढे में रखें, जड़-गोले के चारों ओर टॉपसॉइल-कंपोस्ट मिश्रण भरें, हाथ से दबाकर जमाएँ, और अगर मिट्टी पहले से संतृप्त नहीं तो तुरंत पानी दें।
खाद कार्यक्रम
बुवाई के समय एक साथ पूरी खाद डालने से बँटी हुई मात्रा बेहतर है — खासकर नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या रिसकर बह जाता है।
- 1
रोपाई पर (आधार)
वर्ष 0
गड्ढे में अच्छी तरह सड़ी गोबर-खाद या कंपोस्ट (लगभग 2–3 किग्रा प्रति गड्ढा) मिलाई। महोगनी एक उचित लैटेराइट या लाल-दोमट मिट्टी पर अकेले जैविक पदार्थ से अच्छी तरह जमती।
- 2
युवा पेड़
वर्ष 1–3
NPK की एक मामूली खुराक (लगभग प्रति पेड़ प्रति साल 50–100 ग्राम यूरिया, 50 ग्राम SSP, 25 ग्राम MOP, मानसून की शुरुआत में आधार के चारों ओर एक घेरे में) कमज़ोर या बलुई मिट्टी पर मदद करती। प्राकृतिक रूप से समृद्ध जलोढ़ या ज्वालामुखीय मिट्टी पर छोड़ दें जहाँ बढ़वार पहले से मज़बूत।
- 3
जमा ब्लॉक
वर्ष 4 आगे
अधिकांश जमे महोगनी ब्लॉक अपनी पत्ती-गिराव वापसी से आगे नियमित रूप से उर्वरित नहीं किए जाते। हल्की मिट्टी पर आधार के चारों ओर कंपोस्ट की एक पतली परत आम अभ्यास है जहाँ अतिरिक्त इनपुट मूल्यवान समझा जाता।
सिंचाई कार्यक्रम
1. जमाव
पहले 1–2 सूखे मौसम
अगर बारिश कम रही हो — ख़ासकर हल्की मिट्टी पर या 1,500 मिमी से कम सालाना बारिश वाली जगहों पर — एक युवा पौधा अपने पहले एक-दो सूखे मौसमों भर पानी से लाभान्वित होता।
2. जमा ब्लॉक
वर्ष 3 आगे
1,500+ मिमी बारिश वाली नम-क्षेत्र जगह पर महोगनी जमने के बाद सामान्यतः बारानी होती और नियमित सिंचाई नहीं चाहती।
महत्वपूर्ण अवस्थाएँ
- रोपाई के बाद पहला सूखा मौसम
- वर्ष 1–2 में कोई असामान्य रूप से लंबा सूखा दौर
पानी बचाने के तरीक़े
- मानसून की सच्ची शुरुआत में लगाएँ, उससे पहले नहीं, ताकि युवा जड़-तंत्र को अधिकतम नम-मौसम नमी मिले।
- वर्ष 1 में हर पौधे के चारों ओर एक उथला बेसिन किसी भी पूरक सिंचाई को जड़-क्षेत्र पर केंद्रित करता।
- पेड़ की अपनी पत्ती-गिराव मल्च के रूप में छोड़ें — यह मिट्टी-नमी रोकती और समय के साथ जैविक पदार्थ बनाती है।
खरपतवार प्रबंधन
आम खरपतवार
जैविक नियंत्रण
- पहले दो-तीन साल हर पौधे के चारों ओर 1–1.5 मी दायरे में साल में दो-तीन कटाई मानक — उसके बाद बंद होती कैनोपी अधिकांश खरपतवार छाँट देती।
- पहले 2–3 साल पंक्तियों के बीच एक छोटी अंतर-फ़सल (केला, अनानास, अदरक, हल्दी) उगाना आय भी कमाता और ज़मीन काम में व काफ़ी हद तक खरपतवार-मुक्त रखता।
- क्रोमोलैना व लैंटाना को बीज व फूल बनने से पहले काटें, और कटाई को मल्च के रूप में छोड़ें।
रासायनिक नियंत्रण
- पहले दो-तीन साल में खरपतवार नियंत्रण मुख्यतः हर पौधे के चारों ओर घेरे में हाथ-कटाई या कुदाल से — खेत-वानिकी महोगनी ब्लॉकों में नियमित शाकनाशी उपयोग असामान्य।
- बड़े ब्लॉक में रोपण-पंक्ति भर एक निर्देशित प्री-इमर्जेंस ग्लाइफ़ोसेट पट्टी इस्तेमाल हो सकती, युवा छाल व पत्तों से अच्छी तरह दूर रखते; वर्तमान उत्पाद व खुराक अपने राज्य वन विभाग या KVK से पक्की करें।
पोषक तत्व की कमी की पहचान
हर पोषक तत्व की कमी पौधे पर असल में कैसी दिखती है — ताकि ग़लत स्प्रे करने से पहले आप कमी और रोग में फ़र्क़ कर सकें।
नाइट्रोजन
दिखने वाला लक्षण
पीली, हल्के-हरे पुराने पत्ते और पतली सालाना ऊँचाई-बढ़वार — आमतौर सिर्फ़ ख़राब, धुली लैटेराइट या बलुई मिट्टी पर।
फ़ॉस्फ़ोरस
दिखने वाला लक्षण
धीमा शुरुआती जमाव, ख़राब जड़-विकास और युवा पेड़ के पुराने पत्तों पर एक धुँधला, गहरा-हरा या बैंगनी-सा रंग।
पोटैशियम
दिखने वाला लक्षण
पुराने पत्तों के किनारों का जलना (भूरापन), और पोटैशियम-कमी वाली मिट्टी पर तना-मोटाई बढ़ोतरी में सामान्य कमी।
ध्यान देने योग्य रोग
लक्षण, संभावित कारण और असल में क्या इलाज करता है — सिर्फ़ किसी स्प्रे का नाम नहीं।
ध्यान देने योग्य कीट
नुक़सान दिखने से पहले क्या देखें, और रसायन से पहले जैविक विकल्प क्या हैं।
महोगनी शूट बोरर (Hypsipyla robusta)
- पहचान
- एक छोटा भूरा-सलेटी शलभ जिसकी इल्ली महोगनी पेड़ की बढ़ती हुई शिखर कोंपल (टर्मिनल शूट) में घुसकर लीडर को मारती और तने को किनारे की शाखा से दोफाड़ कर देती। शिखर पर बुरादे-सा मल (फ़्रास), मुरझाता या मरा लीडर, और एक किनारे की शाखा का नए मुख्य तने के रूप में ले लेना ये पक्के संकेत हैं। पहले 5–8 साल में सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह जब पेड़ ऊँचाई पकड़ रहा।
- नुक़सान
- दुनिया भर में महोगनी का सबसे ज़रूरी कीट। शुरुआती सालों में बार-बार शूट-बोरर हमले एक संभावित सीधे, एक-तने वाले पेड़ को बहु-शाखा वाले, कम-मूल्य रूप में बदल देते — दोफाड़ तना सीधे तने से कहीं कम उपयोगी चीरने वाली लकड़ी देता, और दाम का फ़र्क़ बहुत बड़ा।
- जैविक नियंत्रण
- एक ऊँचे नर्स पेड़ (बीच-बीच पंक्तियों में ऐलेंथस ट्राइफ़ाइसा या यूकेलिप्टस) के साथ मिलाकर लगाना जो ऊपर से महोगनी कैनोपी पर छाया दे, सबसे कारगर व्यावहारिक तरीक़ा — बोरर बिना-छाया वाले, पूरी तरह खुले लीडर पर हमला करता। प्राकृतिक शत्रुओं (परजीवी-ततैया, शिकारी पक्षी) को संरक्षित करें। जहाँ भी दोफाड़ बने तुरंत काट-छाँट कर एक सीधा लीडर बनाए रखें।
- रासायनिक नियंत्रण
- किसी भी देश में कोई रासायनिक स्प्रे शूट बोरर को भरोसेमंद ढंग से नहीं रोक पाया — इल्ली कोंपल के अंदर खाती, संपर्क कीटनाशकों से सुरक्षित, और सिस्टेमिक उपचारों ने लगातार खेत-परिणाम नहीं दिखाए। एक पंजीकृत सिस्टेमिक कीटनाशी के तना-इंजेक्शन का प्रयोग प्रायोगिक तौर पर हुआ, पर यह नियमित सिफ़ारिश नहीं — अपने राज्य वन विभाग या ICFRE संस्थान से कोई वर्तमान पंजीकृत विकल्प पक्का करें।
पत्ती-खाने वाली इल्लियाँ
- पहचान
- मानसून में युवा महोगनी पेड़ों की पत्तियों पर खाती विभिन्न शलभ इल्लियाँ, कभी-कभी स्थानीय प्रकोपों में जो कैनोपी नंगी कर सकतीं — शूट बोरर से कम आर्थिक नुक़सानदेह पर हमले के साल बढ़वार धीमी कर सकतीं।
- नुक़सान
- बार-बार पत्ती-हानि ऊँचाई व मोटाई बढ़वार धीमी करती, ख़ासकर युवा पेड़ों में; आमतौर क्षणिक समस्या जो प्राकृतिक परजीवी बनने पर बिना हस्तक्षेप सुलझ जाती।
- जैविक नियंत्रण
- छोटे व स्थानीय प्रकोप में युवा पेड़ों से हाथ से इल्लियाँ इकट्ठा करें; परजीवी-ततैया व शिकारी पक्षियों को संरक्षित करें।
- रासायनिक नियंत्रण
- एक CIB&RC-पंजीकृत संपर्क कीटनाशक केवल उच्च-मूल्य युवा ब्लॉक पर स्पॉट-स्प्रे करें जहाँ भारी, लगातार प्रकोप नापे जाने लायक़ बढ़वार धीमा कर रहा — वर्तमान उत्पाद अपने स्थानीय KVK या वन विभाग से पक्का करें।
दीमक
- पहचान
- ताज़े लगे पौधों व युवा पेड़ों के तने पर मिट्टी की परत, नीचे नरम छाल व जड़-कॉलर खाया हुआ; बलुई मिट्टी व जहाँ गड्ढे में ताज़ा जैविक पदार्थ मिलाया गया वहाँ सबसे ख़राब।
- नुक़सान
- ताज़े लगे पौधे को ठीक से जड़ पकड़ने से पहले मार सकती, या युवा पेड़ को कॉलर पर घेर सकती।
- जैविक नियंत्रण
- रोपण-गड्ढे में केवल अच्छी तरह सड़ी खाद इस्तेमाल करें (ताज़ी खाद दीमक आकर्षित करती); ज्ञात दीमक-प्रवण इलाक़ों में गड्ढे को Metarhizium जैव-कीटनाशक से भिगोएँ।
- रासायनिक नियंत्रण
- दीमक-प्रवण इलाक़ों में रोपाई पर गड्ढे में एक अनुशंसित मिट्टी-कीटनाशक मिलाएँ; वर्तमान उत्पाद अपने स्थानीय KVK या वन विभाग से पक्का करें।
आम ग़लतियाँ जिनसे बचें
जो ग़लतियाँ किसानों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाती हैं, खेत में जितनी बार दिखती हैं उसी क्रम में — हमेशा वैसे नहीं जैसा आप सोचें।
- 1
नर्स पेड़ के बिना शुद्ध, बिना-छाया वाले ब्लॉकों में महोगनी लगाना।
नुक़सान क्यों होता है
खुला, पूरी तरह धूप-जोखिम ब्लॉक सबसे भारी शूट-बोरर हमला झेलता — हर शीर्ष कोंपल शलभ को दिखती व पहुँच में होती। एक ऊँची नर्स प्रजाति के साथ मिलाकर लगाना जो ऊपर से छाया दे, हमला कम करने का सबसे कारगर तरीक़ा है, और इसे छोड़ना शुरुआती सालों में भारी दोफाड़ की लगभग गारंटी।
- 2
दोफाड़ लीडर को तुरंत काट-छाँट कर एक तना बनाने के बजाय नज़रअंदाज़ करना।
नुक़सान क्यों होता है
बिना-ध्यान छोड़ा दोफाड़ तने की स्थायी विशेषता बन जाता — दो सह-प्रमुख तने प्रभुत्व के लिए मुक़ाबला करते, कोई सीधा नहीं बढ़ता, और नतीजा दोफाड़ लठ्ठा कटाई पर एक सीधे तने की एक छोटी-सी क़ीमत पर बिकता।
- 3
जलभराव वाली, ख़राब जल-निकासी या भारी चिकनी मिट्टी पर लगाना।
नुक़सान क्यों होता है
महोगनी की जड़ें संतृप्त मिट्टी पर जड़-सड़न के प्रति संवेदनशील। नीची, पानी-जमा करने वाली जगह पर लगा ब्लॉक पहले कुछ बरसातों में ही जड़-सड़न से पेड़ खोएगा और अपनी पूरी उम्र ख़राब प्रदर्शन करेगा।
- 4
नर्सरी के लिए ताज़े समारा के बजाय पुराने, रखे बीज इस्तेमाल करना।
नुक़सान क्यों होता है
महोगनी बीज की अंकुरण-क्षमता इकट्ठा करने के हफ़्तों में तेज़ी से गिरती — रखे बीज बोने पर कमज़ोर, धब्बेदार अंकुरण और कमज़ोर नर्सरी बैच। हमेशा इकट्ठा करने के 2–3 हफ़्ते में बोएँ।
- 5
हर राज्य में महोगनी के लिए सागौन-जैसी परमिट-छूट मान लेना।
नुक़सान क्यों होता है
हालाँकि महोगनी एक विदेशी (एक्ज़ोटिक) प्रजाति है, सभी राज्यों ने निजी ज़मीन पर इसकी कटाई पूरी तरह विनियमन-मुक्त नहीं की। कटाई या ढुलाई से पहले स्थानीय वन रेंज कार्यालय या NTMS पोर्टल से जाँचें — नियम राज्य व पेड़ों की संख्या दोनों से बदलते।
- 6
पाला-प्रवण या सूखे इलाक़े में यह मानकर लगाना कि "उष्णकटिबंधीय पेड़ है, सँभाल लेगा"।
नुक़सान क्यों होता है
महोगनी को सच्ची उष्णकटिबंधीय गर्मी और ज़्यादा बारिश (1,500–3,000 मिमी) चाहिए। यह पाला सहन नहीं करती, और 1,000 मिमी से कम बारिश वाले अर्ध-शुष्क इलाक़ों में ख़राब बढ़ती — ऐसी जगहें सागौन को सूट करती, महोगनी को नहीं।
कटाई
महोगनी चरणों में पतली की जाती — ख़राब-बने, बोरर-क्षतिग्रस्त या भीड़भरे पेड़ लगभग वर्ष 5–8 से बल्ली व जलावन के लिए हटाए जाते, और बचे, सबसे बेहतर-बने सीधे-तने वाले पेड़ वर्ष 15–25 से आगे पूरे-मूल्य की चीरने वाली लकड़ी के लिए काटे जाते, एक बार घेराव व हार्टवुड परिपक्व हो जाएँ। कई मालिक पूरे ब्लॉक की एक बार में कटाई के बजाय अंतिम कटाई कई सालों में फैलाते।
तैयार होने के संकेत
- हार्टवुड ने विशिष्ट लाल-भूरा रंग विकसित किया है और रेशा कठोर हुआ है
- घेराव उस वर्ग तक पहुँचा है जिस पर स्थानीय आरा मिल या लकड़ी डिपो प्रीमियम भुगतान कर रहा
- कटाई शुरू होने से पहले राज्य वन विभाग या NTMS पोर्टल से (जहाँ ज़रूरी) एक वैध कटाई-परमिट प्राप्त किया गया
उपकरण
- कटाई व टुकड़े काटने को चेनसॉ या क्रॉसकट आरी
- पारगमन-काग़ज़ी काम ठीक होने के बाद ही लठ्ठे ढोने को ट्रैक्टर-ट्रॉली या ट्रक
- ग्रेडिंग व बिक्री के लिए एक पंजीकृत लकड़ी डिपो या आरा मिल
अपेक्षित उपज
लकड़ी-आयतन व मूल्य दोनों उम्र के साथ बनते — 20-साल रोटेशन से अच्छी तरह उगा, सीधे-तने वाला महोगनी लठ्ठा एक उच्च-मूल्य उत्पाद है। असली भाव तना-सीधापन, घेराव, हार्टवुड-अनुपात व रेशा-गुणवत्ता से तेज़ी से बदलता — दोफाड़ या ख़राब-बना पेड़ सीधे तने की एक छोटी-सी क़ीमत पर बिकता।
कटाई के बाद व भंडारण
भंडारण
महोगनी लठ्ठे प्राकृतिक रूप से दीमक व फफूँद-सड़न प्रतिरोधी हैं और मध्यम अवधि तक रखे जा सकते, पर सिरा-फटन, धूप-जाँच व सतह-दाग़ रोकने को छाया में आड़ी बत्तियों पर ज़मीन से ऊपर चट्टे रखने चाहिए।
पैकेजिंग
लठ्ठे नापी घेराव, लंबाई व दिखती रेशा/हार्टवुड गुणवत्ता के हिसाब से ग्रेड व बेचे जाते — आमतौर एक पंजीकृत लकड़ी डिपो, आरा मिल या स्थानीय लकड़ी-व्यापारी के ज़रिए।
परिवहन
कोई भी लठ्ठा ले जाने से पहले अपने राज्य में महोगनी के लिए कटाई व पारगमन परमिट आवश्यकता जाँचें। हालाँकि महोगनी एक विदेशी (एक्ज़ोटिक) प्रजाति है, कुछ राज्य अब भी इसे अपने निजी-ज़मीन पेड़-कटाई नियमों में नियंत्रित करते — National Timber Management System (NTMS) पोर्टल परमिट-आवेदन का वर्तमान केंद्रीय माध्यम है, पर विदेशी प्रजातियों की छूट-स्थिति राज्य से बदलती है। पेड़ कटाई-योग्य होने से काफ़ी पहले अपने स्थानीय वन रेंज कार्यालय से पक्का करें।
भंडारण अवधि
चीरी महोगनी लकड़ी, एक बार सीज़न होने पर, लंबे समय टिकती और विशेष भंडारण नहीं चाहती — इसकी प्राकृतिक टिकाऊपन, आयामी स्थिरता व सड़न-प्रतिरोध ही फ़र्नीचर व आंतरिक लकड़ी-काम में इसके मूल्य का आधार है।
मंडी भाव
सरकार के अपने एगमार्कनेट डेटा से, आपके नज़दीक का आज का मंडी भाव — लाइव।
सरकारी एगमार्कनेट डेटा से रोज़ाना लाइव मंडी भाव।
इस फ़सल का सरकारी मंडी भाव उपलब्ध नहीं
यह फ़सल सरकार के एगमार्कनेट सिस्टम में शामिल एपीएमसी मंडियों से नहीं बिकती, इसलिए यहाँ कोई मंडी भाव दिखाने को नहीं है।
मौसम
आपके चुने गए स्थान की मौजूदा स्थिति और 5-दिन का पूर्वानुमान, फसल की अवस्था के अनुसार एक सलाह के साथ।
मौजूदा स्थिति और 5-दिन के पूर्वानुमान के लिए अपना राज्य चुनें।
Open-Meteo से लाइव डेटा
मुनाफ़ा कैलकुलेटर
आपकी अपनी लागत, अपेक्षित उपज और बिक्री भाव — हमारी नहीं।
पैसा कहाँ जाता है
नीचे कैलकुलेटर की डिफ़ॉल्ट लागत के अनुसार प्रति एकड़ कुल लागत में हर मद का हिस्सा — वहाँ अपने आँकड़े बदलने पर यह तस्वीर पूरी तरह आप पर लागू नहीं रहेगी, पर क्रम शायद ही बदलता है।
- ज़मीन का किराया37% (₹9,000)
- मज़दूरी20% (₹5,000)
- बीज16% (₹4,000)
- खाद6% (₹1,500)
- कीटनाशक और खरपतवारनाशक6% (₹1,500)
- सिंचाई6% (₹1,500)
- मशीन4% (₹1,000)
- ब्याज4% (₹1,000)
आधिकारिक डाउनलोड
केवल सरकार और ICAR के दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ किसी आधिकारिक सर्वर पर है।
केरल वन अनुसंधान संस्थान (KFRI)
केरल में महोगनी बढ़वार, शूट बोरर व मिश्रित-रोपण परीक्षणों पर शोध
काष्ठ विज्ञान व प्रौद्योगिकी संस्थान (IWST), बेंगलुरु
लकड़ी गुणवत्ता, लकड़ी परीक्षण व रोपण-वानिकी हेतु ICFRE संस्थान
National Timber Management System (NTMS)
खेत-पेड़ रोपण पंजीकरण व कटाई/पारगमन परमिट आवेदन हेतु केंद्रीय पोर्टल
किसान कॉल सेंटर — 1800-180-1551
आपकी भाषा में निःशुल्क फसल सलाह
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महोगनी भारत का देशी पेड़ है?
नहीं। Swietenia macrophylla मूल रूप से मध्य व दक्षिण अमेरिका का है और अंग्रेज़ों के ज़माने में भारत लाया गया। इसे प्रायद्वीपीय भारत के नम उष्णकटिबंधीय इलाक़ों — केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र व ओडिशा — में व्यापक रूप से लगाया गया, पर यह भारत की देशी प्रजाति नहीं है।
महोगनी शूट बोरर क्या है और क्या इसे रोका जा सकता है?
महोगनी शूट बोरर (Hypsipyla robusta) एक शलभ है जिसकी इल्ली शीर्ष कोंपल में घुसकर उसे मार देती और तने को दोफाड़ कर देती। दुनिया भर में कोई रासायनिक स्प्रे इसे भरोसेमंद ढंग से नहीं रोक पाया। भारत में सबसे कारगर तरीक़ा है एक ऊँचे नर्स पेड़ (ऐलेंथस या यूकेलिप्टस) के साथ मिलाकर लगाना जो ऊपर से महोगनी कैनोपी पर छाया दे — बोरर खुले, बिना-छाया लीडर पर हमला करता — साथ में दोफाड़ बनते ही तुरंत काट-छाँट कर एक सीधा तना बनाए रखना।
क्या मुझे अपनी ज़मीन पर महोगनी काटने को परमिट चाहिए?
यह आपके राज्य पर निर्भर है। महोगनी एक विदेशी (एक्ज़ोटिक) प्रजाति है, और कुछ राज्यों ने विदेशी प्रजातियों को सागौन जैसी देशी उच्च-मूल्य प्रजातियों के सख़्त कटाई-नियमों से छूट दी है। पर सभी राज्यों में एक जैसी छूट नहीं, और नियम बदल सकते। कटाई या ढुलाई से पहले हमेशा अपने स्थानीय वन रेंज कार्यालय या NTMS पोर्टल से वर्तमान आवश्यकता पक्की करें।
महोगनी ब्लॉक कितने समय में कमाई देता है?
महोगनी एक लंबी-अवधि का निवेश है, हालाँकि सागौन से कम। थिनिंग बल्लियों व जलावन से कुछ मध्यवर्ती आय लगभग वर्ष 5–8 से मिलती। पूरे-मूल्य की चीरने वाली लकड़ी की मुख्य फ़सल आमतौर वर्ष 15–25 से आगे काटी जाती, घेराव व लकड़ी गुणवत्ता के हिसाब से। सीधे-तने वाला पेड़ दोफाड़ से काफ़ी ज़्यादा दाम पाता, यही वजह है कि शुरुआती सालों में शूट-बोरर प्रबंधन अंतिम कमाई के लिए इतना ज़रूरी।
क्या उत्तर भारत में महोगनी उगा सकता हूँ?
महोगनी पाला-संवेदनशील है और ज़्यादा बारिश (1,500–3,000 मिमी) चाहती। अधिकांश उत्तर भारत — सिंधु-गंगा मैदान, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी UP, राजस्थान — या तो सर्दी में बहुत ठंडा, बहुत सूखा, या दोनों। महोगनी गरम, नम उष्णकटिबंधीय इलाक़ों के लिए सबसे सूट करती: पश्चिमी घाट बेल्ट, पूर्वी तटीय नम क्षेत्र, व ओडिशा-छत्तीसगढ़ के हिस्से। अगर आपकी जगह पर नियमित रूप से हल्का भी पाला पड़ता, तो महोगनी के बजाय सागौन, पॉपलर या शीशम चुनें।
पेड़ छोटे रहते बीच की पंक्तियों में क्या उगा सकता हूँ?
पहले 2–3 साल छोटी अंतर-फ़सल आम व अनुशंसित है जब तक कैनोपी खुली — केला, अनानास, अदरक, हल्दी व सब्ज़ियाँ सब महोगनी के नम-क्षेत्र जलवायु में अच्छा काम करतीं। लगभग वर्ष 3–4 से बंद होती कैनोपी व नर्स पेड़ मिलकर अधिकांश अंतर-फ़सलों को छाँट देते, और ब्लॉक पेड़ों के लिए छोड़ दिया जाता।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके खेत और मिट्टी से जुड़ी किसी भी ख़ास बात के लिए आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही आधिकारिक जवाब है।
