पीएम-प्रणाम — धरती माँ की सेहत बहाली, जागरूकता, पोषण एवं सुधार कार्यक्रम
PM-PRANAM (PM Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth)
जो राज्य रासायनिक खाद (यूरिया, DAP, NPK, MOP) का इस्तेमाल तीन साल के औसत से कम करते हैं, उन्हें बचाई गई सब्सिडी का 50% अनुदान मिलता है — जो राज्य को किसान कल्याण, जैविक खाद प्रोत्साहन और मिट्टी-सेहत कार्यक्रमों पर खर्च करना होता है।
- प्रोत्साहन तरीका
- बचाई गई खाद सब्सिडी का 50%
- योजना की स्थिति
- सक्रिय
- कैबिनेट मंज़ूरी
- 28 जून 2023
- मंत्रालय
- रसायन एवं उर्वरक (उर्वरक विभाग)
- दायरा
- सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
- अनुदान बँटवारा
- 65% पूँजीगत, 30% अनबाउंड, 5% प्रशासन
- FY 2023-24 नतीजा
- 14 राज्यों ने 15.14 LMT घटाई
- ट्रैक की जाने वाली खाद
- यूरिया, DAP, NPK, MOP
परिचय
पीएम-प्रणाम उर्वरक विभाग के तहत केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसे 28 जून 2023 को कैबिनेट ने मंज़ूर किया। ज़्यादातर कृषि योजनाओं से अलग, यह सीधे किसान को पैसा नहीं देती। इसकी जगह, जो राज्य सरकार सब्सिडी वाली रासायनिक खाद — यूरिया, DAP, NPK और MOP — की खपत पिछले तीन साल के औसत से कम करती है, उसे बचाई गई खाद सब्सिडी का 50% अनुदान के रूप में मिलता है।
अनुदान खर्च करने का तरीका तय है: 65% पूँजीगत व्यय में लगाना ज़रूरी है — बेहतर हो अगर राज्य में पहले से चल रही केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्य के हिस्से के तौर पर। 30% अनबाउंड है, यानी राज्य किसी भी ऐसी गतिविधि पर खर्च कर सकता है जो वैकल्पिक खाद या मिट्टी की सेहत को बढ़ावा दे। बाकी 5% योजना चलाने के प्रशासनिक खर्च के लिए है। यह सब किसानों और कृषि क्षेत्र के फ़ायदे के लिए ही खर्च होना चाहिए।
किसान को फ़ायदा सीधा नहीं मगर असली है। जब राज्य पीएम-प्रणाम का अनुदान कमाता है तो उसके पास जैविक और बायो-खाद बाँटने, नैनो यूरिया-नैनो DAP अपनाने पर सब्सिडी देने, सॉयल हेल्थ कार्ड पर आधारित समन्वित पोषक प्रबंधन (INM) अभियान चलाने, प्राकृतिक-खेती क्लस्टर बढ़ाने और सूक्ष्म सिंचाई या ज़ीरो टिलेज उपकरण में निवेश करने के लिए अतिरिक्त पैसा आता है। यह योजना किसी सीधी किसान सब्सिडी की जगह नहीं लेती — एक नया फंडिंग रास्ता खोलती है जो तभी बढ़ता है जब रासायनिक खाद का इस्तेमाल सच में घटे।
FY 2023-24 में, योजना के पहले साल, 14 राज्यों ने मिलकर रासायनिक खाद की खपत में 15.14 लाख मीट्रिक टन (LMT) की कमी दिखाई। योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू है — न अलग पंजीकरण है, न अलग पोर्टल — यह उर्वरक विभाग और राज्य कृषि विभाग की मौजूदा व्यवस्था से ही चलती है।
योजना की मुख्य बातें
बचाई सब्सिडी का 50% राज्य को अनुदान
राज्य जितनी ज़्यादा रासायनिक खाद की खपत 3-साल के औसत से नीचे लाए, उतना बड़ा अनुदान कमाए — टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का सीधा आर्थिक इनाम।
जैविक, बायो और नैनो खाद को बढ़ावा
राज्य अनुदान से जैविक खाद, राइज़ोबियम-PSB जैसे बायो-फर्टिलाइज़र और नैनो यूरिया-नैनो DAP की उपलब्धता बढ़ाते हैं — किसान का इनपुट खर्च कम होता है।
प्राकृतिक खेती और INM को ताकत
अनुदान से प्राकृतिक-खेती क्लस्टर (NMNF/PKVY), सॉयल हेल्थ कार्ड आधारित पोषक प्रबंधन और ज़ीरो टिलेज जैसी संसाधन-बचत तकनीकों को फंड मिलता है।
सूक्ष्म सिंचाई और संसाधन बचत
राज्य अनुदान को ड्रिप-स्प्रिंकलर विस्तार और सटीक-खेती उपकरणों में लगा सकते हैं जो खाद और पानी, दोनों का खर्च एक साथ घटाते हैं।
सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल
भारत का हर राज्य और UT पात्र है — बस शर्त इतनी कि रासायनिक खाद की खपत 3-साल की बेसलाइन से मापने योग्य कम हो।
14 राज्यों ने पहले ही खपत घटाई
FY 2023-24 में 14 राज्यों ने मिलकर 15.14 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद की खपत कम की — प्रोत्साहन मॉडल काम करता है।
आपको क्या मिलता है
राज्य को बचाई सब्सिडी का 50% अनुदान
जो राज्य रासायनिक खाद की खपत 3-साल के औसत से कम करता है, उसे बचाई गई सब्सिडी का 50% मिलता है — किसान कल्याण और मिट्टी-सेहत कामों के लिए।
किसानों को सस्ती जैविक और बायो-खाद
राज्य अनुदान से जैविक खाद, बायो-फर्टिलाइज़र और नैनो खाद पर सब्सिडी देता है या बाँटता है — किसान का इनपुट खर्च सीधे घटता है।
सेहतमंद मिट्टी, लंबे समय में कम खर्च
रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने से मिट्टी की जैविक शक्ति, ऑर्गेनिक कार्बन और पानी सोखने की क्षमता सुधरती है — आगे वही ज़मीन कम इनपुट में उतनी ही पैदावार देती है।
टिकाऊ खेती का इंफ्रास्ट्रक्चर
अनुदान का 65% पूँजीगत खर्च में जाता है — मिट्टी-जाँच लैब, बायो-इनपुट उत्पादन इकाइयाँ, सूक्ष्म सिंचाई प्रोजेक्ट और ऐसा बुनियादी ढांचा जो किसानों को सालों तक काम आए।
कौन पात्र है
दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।
आप पात्र हैं अगर
- हर राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश — पीएम-प्रणाम पूरे भारत पर लागू है, न कोई ऑप्ट-इन ज़रूरी है न पंजीकरण
- राज्य को अनुदान तभी मिलता है जब वह किसी वित्तीय वर्ष में कुल रासायनिक खाद (यूरिया + DAP + NPK + MOP) की खपत पिछले 3 वर्षों के औसत से नीचे लाए
- किसानों को फ़ायदा अप्रत्यक्ष रूप से मिलता है — राज्य-स्तरीय कार्यक्रमों से, जैसे जैविक/बायो-इनपुट वितरण, प्राकृतिक-खेती सहायता, सूक्ष्म सिंचाई सब्सिडी और मिट्टी-सेहत अभियान
- जो किसान पहले से जैविक, प्राकृतिक या कम-रासायनिक खेती कर रहे हैं, वे राज्य के कटौती लक्ष्य में योगदान करते हैं — और अनुदान दिलाने में मदद करते हैं
ज़मीन होते हुए भी अपात्र
- किसान सीधे पीएम-प्रणाम में आवेदन नहीं कर सकते — न कोई किसान-स्तर का आवेदन है, न पोर्टल, न पंजीकरण; यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच चलती है
- जो राज्य रासायनिक खाद की खपत 3-साल के औसत से कम नहीं करता, उसे कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता — अनुदान प्रदर्शन-आधारित है, सुनिश्चित नहीं
- अनुदान को 5% प्रशासनिक हिस्से के अलावा आवर्ती राजस्व व्यय में नहीं लगाया जा सकता — 65% पूँजीगत व्यय और 30% किसान-कल्याण गतिविधियों में जाना चाहिए
यह योजना कहाँ लागू है
पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।
किसान-स्तर पर कोई दस्तावेज़ नहीं चाहिए
पीएम-प्रणाम केंद्र और राज्य सरकारों के बीच चलती है — किसान को कोई आवेदन या दस्तावेज़ जमा नहीं करना है। फ़ायदा राज्य के अनुदान-वित्तपोषित कार्यक्रमों से किसानों तक पहुँचता है।
आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम
चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।
- 1
उर्वरक विभाग बेसलाइन तय करता है
हर राज्य के लिए पिछले 3 वर्षों में यूरिया, DAP, NPK और MOP की औसत खपत निकाली जाती है — यही बेसलाइन है जिसे राज्य को हराना है।
- 2
राज्य वैकल्पिक इनपुट और तरीके अपनाने पर ज़ोर देता है
राज्य कृषि विभाग जैविक खाद, बायो-फर्टिलाइज़र, नैनो खाद, प्राकृतिक खेती, INM, ज़ीरो टिलेज और सूक्ष्म सिंचाई को आगे बढ़ाता है ताकि रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो।
- 3
असली खपत नापी जाती है
वित्तीय वर्ष के अंत में राज्य में सब्सिडी वाली रासायनिक खाद की वास्तविक खपत 3-साल की बेसलाइन से तुलना की जाती है।
- 4
खपत घटने पर अनुदान मिलता है
अगर राज्य ने खपत घटाई, तो बचाई गई खाद सब्सिडी का 50% अनुदान मिलता है। बँटवारा: 65% पूँजीगत व्यय, 30% अनबाउंड (किसान-कल्याण), 5% प्रशासन।
- 5
किसानों को राज्य के कार्यक्रमों से फ़ायदा
राज्य अनुदान से बायो-इनपुट वितरण बढ़ाता है, नैनो खाद पर सब्सिडी देता है, प्राकृतिक-खेती क्लस्टर फंड करता है, मिट्टी-जाँच लैब बनाता है और सूक्ष्म सिंचाई में निवेश करता है — इन सबसे किसान को सीधा फ़ायदा होता है।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
कैबिनेट मंज़ूरी
28 जून 2023
उर्वरक विभाग के तहत केंद्रीय क्षेत्र योजना
पहला परिचालन वर्ष
FY 2023-24
14 राज्यों ने 15.14 LMT खपत घटाई
आवेदन की अंतिम तारीख़
लागू नहीं
किसान-स्तर कोई आवेदन नहीं — योजना राज्य-स्तर पर चलती है
तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए
27 सितंबर 2026
pib.gov.in और fert.nic.in के आधार पर
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सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।
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यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।
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केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।
पीएम-प्रणाम योजना अवलोकन (PIB, मार्च 2026)
प्रोत्साहन तंत्र, अनुदान ढांचे और राज्यवार प्रदर्शन पर आधिकारिक PIB विज्ञप्ति।
पीएम-प्रणाम शुभारंभ और टिकाऊ खाद उपयोग (PIB, मई 2026)
टिकाऊ खाद उपयोग को बढ़ावा देने और राज्यों में मिट्टी-सेहत बहाल करने पर PIB विज्ञप्ति।
पीएम-प्रणाम उद्देश्य और डिज़ाइन (PIB)
योजना के लक्ष्यों पर विस्तृत नोट: संतुलित खाद उपयोग, वैकल्पिक इनपुट, जैविक और प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन।
आधिकारिक लिंक और हेल्पलाइन
पोर्टल को ही बुकमार्क करें — कोई भी तीसरी वेबसाइट भुगतान न जारी कर सकती है, न रोक सकती है, न तेज़ कर सकती है।
- उर्वरक विभागfert.nic.in — पीएम-प्रणाम, उर्वरक नीति और सब्सिडी प्रशासन का नोडल विभाग
- रसायन एवं उर्वरक मंत्रालयउर्वरक विभाग और पीएम-प्रणाम क्रियान्वयन की निगरानी करने वाला मूल मंत्रालय
- सॉयल हेल्थ कार्ड पोर्टलअपना सॉयल हेल्थ कार्ड बनवाएँ — मिट्टी की वास्तविक पोषक ज़रूरतों के आधार पर रासायनिक खाद कम करने की बुनियाद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीएम-प्रणाम क्या है?
पीएम-प्रणाम (PM Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth) 28 जून 2023 को मंज़ूर हुई केंद्रीय क्षेत्र योजना है। यह राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को रासायनिक खाद (यूरिया, DAP, NPK, MOP) की खपत कम करने पर प्रोत्साहित करती है — बचाई गई खाद सब्सिडी का 50% अनुदान के रूप में देकर, जो किसान-कल्याण और मिट्टी-सेहत कामों पर खर्च होता है।
क्या पीएम-प्रणाम किसानों को सीधे पैसा देती है?
नहीं। पीएम-प्रणाम राज्य-स्तरीय प्रोत्साहन योजना है। किसानों को इसमें सीधे कोई भुगतान या सब्सिडी नहीं मिलती। फ़ायदा अप्रत्यक्ष रूप से पहुँचता है: जो राज्य अनुदान कमाता है, वह उससे जैविक और बायो-खाद बाँटता है, नैनो खाद पर सब्सिडी देता है, प्राकृतिक-खेती क्लस्टर चलाता है, सूक्ष्म सिंचाई बढ़ाता है और सॉयल हेल्थ कार्ड आधारित पोषक अभियान चलाता है।
राज्य पीएम-प्रणाम का अनुदान कैसे कमाता है?
राज्य को अनुदान मिलता है अगर उसने एक वित्तीय वर्ष में सब्सिडी वाली रासायनिक खाद (यूरिया + DAP + NPK + MOP) की कुल खपत पिछले 3 वर्षों के औसत से कम कर दी हो। अनुदान = उस कमी से बचाई गई खाद सब्सिडी का 50%।
राज्य को अनुदान किस पर खर्च करना होता है?
65% पूँजीगत व्यय में — बेहतर हो तो केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्य योगदान के तौर पर। 30% अनबाउंड — कोई भी किसान-कल्याण गतिविधि जो राज्य उचित समझे। 5% प्रशासनिक खर्च।
कौन-कौन सी रासायनिक खाद ट्रैक होती है?
चार श्रेणियाँ: यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), NPK कॉम्प्लेक्स खाद और म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP)। इनमें से किसी या सबकी खपत घटाना राज्य को अनुदान दिलाने में गिनता है।
अब तक कितने राज्यों ने खाद खपत घटाई है?
FY 2023-24 में 14 राज्यों ने 3-साल के औसत के मुकाबले रासायनिक खाद की खपत में कुल 15.14 लाख मीट्रिक टन (LMT) की कमी दिखाई — जो प्रोत्साहन मॉडल के काम करने का सबूत है।
किसान को इससे असल में क्या फ़ायदा होता है?
जब आपका राज्य पीएम-प्रणाम अनुदान कमाता है, तो उसके पास अतिरिक्त पैसा आता है सब्सिडी वाले बायो-फर्टिलाइज़र और नैनो खाद बाँटने के लिए, बायो-इनपुट बनाने की इकाइयाँ लगाने के लिए, PKVY और NMNF जैसी जैविक और प्राकृतिक खेती योजनाएँ बढ़ाने के लिए, मिट्टी-जाँच लैब बनाने के लिए और सूक्ष्म सिंचाई में निवेश के लिए — ये सब आपकी इनपुट लागत घटाते हैं और मिट्टी को समय के साथ बेहतर करते हैं।
क्या पीएम-प्रणाम, PKVY या NMNF जैसी ही है?
नहीं। PKVY किसान क्लस्टरों से जैविक खेती बढ़ाती है, NMNF गाँव-स्तर के क्लस्टरों से प्राकृतिक खेती — दोनों किसानों को सीधे पैसा देती हैं। पीएम-प्रणाम अलग योजना है जो राज्य सरकारों को कुल रासायनिक खाद खपत घटाने पर इनाम देती है। राज्य अपने पीएम-प्रणाम अनुदान का हिस्सा PKVY या NMNF विस्तार में लगा सकता है, लेकिन तीनों अलग-अलग विभागों की अलग-अलग योजनाएँ हैं।
पीएम-प्रणाम और सॉयल हेल्थ कार्ड का क्या संबंध है?
सॉयल हेल्थ कार्ड किसान को बताता है मिट्टी को कौन से पोषक तत्व चाहिए, जिससे वह सिर्फ़ ज़रूरी खाद डालता है — अक्सर उतनी या बेहतर पैदावार के लिए कम रासायनिक इनपुट से काम चल जाता है। जब ज़्यादा किसान सॉयल हेल्थ कार्ड की सिफ़ारिशें मानते हैं, राज्य की रासायनिक खाद खपत गिरती है — जो पीएम-प्रणाम अनुदान कमाने में मदद करता है।
क्या पीएम-प्रणाम का अलग पोर्टल है?
नहीं। पीएम-प्रणाम का कोई अलग पोर्टल या किसान-पंजीकरण सिस्टम नहीं है। योजना उर्वरक विभाग (fert.nic.in) और राज्य-स्तर की मौजूदा कृषि व्यवस्था से चलती है। किसानों के काम आने वाले पोर्टल के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड पोर्टल (soilhealth.dac.gov.in) और NMNF पोर्टल (naturalfarming.dac.gov.in) देखें।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।
